00:00मैं तुम्हारी आँखों से वो जमाने देखूँगा जो अभी नहीं आए
00:04मैं तुम्हारे पाउं से तेज तेज भागूँगा ऐसी शाहराओं पर जो अभी निकाहूं से मिस्के खाब ओचल है
00:15मैं तुम्हारे हाथों से वो पहाड छूलूंगा जिसको सोच कर भी अब सांस भूल जाती है
00:22वो पहाड वो रस्ते जिन पे तुमको जाना है वो नया जमाना है और वो तुम्हारा है
00:30मैं कि उस जमाने को देख भी न पाऊंगा
00:34लेकिन उस जमाने की हर घड़ी को हर पल को मेरी आँखेंगी
00:40उन चमकती आँखों से जो तुम्हारी आँखेंगे
00:43मैं तुम्हारी आँखों में प्यार बन के रहता हूं
00:47नूर बन के बसता हूं
00:50खाब बनके जिन्दा मेरे सारे खाबों को इन जमील आँखों के एक गोशे में तुम छुपा के रख लेना
00:58और अगर कभी ये खाब फूल बनके महके तो इनकी खुश्बूओं में तुम मेरे नाम के सब हर्फ इफ्टियात से रखना