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पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन चर्चा का विषय बन गया। भारत की वैश्विक छवि, बदलते शक्ति संतुलन और मानव संसाधनों की ताकत पर उन्होंने खुलकर बात की। एक सवाल के जवाब में उनका “मैं तो हनुमान” वाला बयान सुनते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। जयशंकर ने बताया कि आज दुनिया भारत को पहले से ज्यादा सकारात्मक और गंभीरता से देखती है। भारतीय टैलेंट, कौशल और आत्मविश्वास ने देश के नेशनल ब्रांड को मजबूत किया है। वीडियो में सुनिए पूरा संदर्भ और संदेश।

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Transcript
00:00विदेश मंत्री S. जैशंकर ने शनिवार को पुणे में सिंबाइसिस इंटरनाशनल विश्व विद्याले के 22 में दीक्षांथ समारोह में ऐसा संबोधन दिया जिसने न सिर्फ छात्रों बलकि पूरे सभागार का ध्यान खीच लिया
00:20उन्होंने दुनिया में भारत की बदलती छवी, वैश्विक शक्ती संतुलन और देश की बढ़ती प्रतिष्ठा पर खुल कर बात की
00:27उनके भाशन का एक वाख्य ऐसा भी रहा जिस पर पूरा हॉल तालियों से गूझ उठा
00:32जब उनसे पूछा गया कि क्या देश के लिए एक जैशंकर काफी हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा सवाल गलत है
00:39पूछना चाहिए कि एक मोदी हैं क्योंकि आखिरकार हनुमान ही सेवा करते हैं
00:44आईए आपको सुनाते हैं कि जैशंकर ने क्या कहा
01:02गिए ऑलत मेरी थामान मैं बुलत कोती हैं को सटारी कि ए मन्होंन हे में लिए धिए
01:09म μέरा आपको सुनाते ही का कि विहां एक बित्व बखिए हैं कि ए क्यू कि ए Gemmaimes के सा विए
01:22जैसा कि आपने सुना, जैशंकर ने कहा कि आज दुनिया भारत को पहले से कहीं अधिक सकारात्मक नजर से देखती है
01:39और ये बदलाव किसी एक घटना का नतीजा नहीं, बलकि लगातार किये गए प्रयासों का परिणाम है
01:44उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक, आर्थिक और राजनेतिक व्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रही
01:49सत्ता और प्रभाव के कई नए केंद्र उभरे हैं, और अब कोई भी देश, चाहे वो कितना भी ताकतवर क्यों नहों हो, हर मुद्दे पर अपनी मर्जी नहीं चला सकता
01:58उन्होंने कहा कि भारत ने मानव संसाधन के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है
02:02जहां कई विक्सित देश ठहराव और जन सांखे की ये संकट से जूज रहे हैं, वहीं भारत की युवाबादी, कौशल और कारे संस्कृती उसे अलग पहचान दिला रही है
02:12यही वज़ा है कि आज भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं, बलकि एक भरोसे मंद साजेदार के रूप में देखा जा रहा है
02:18जैशंकर ने कहा कि दुनिया आज भारत और भारतियों को ज्यादा गंभीरता से लेती है
02:23इसके पीछे देश का नैशनल ब्रैंड और लोगों की व्यक्तिगत प्रतिश्था है, जिसमें बीते वर्षों में बड़ा सुधार हुआ है
02:29उन्होंने बताया कि विदेश यात्राओं के दौरान उन्हें अक्सर भारतिये समुदाई के लिए प्रशन सा सुनने को मिलती है
02:35भारतियों को महनती, टक्नीक में सक्षम और परिवार केंद्रित संस्कृती को मानने वाले लोगों के रूप में देखा जा रहा है
02:41उन्होंने ये भी कहा कि जैसे जैसे भारत में व्यापार करने और रहने की सुविधा बहतर हो रही है
02:47वैसे वैसे देश के बारे में पुरानी धारनाय कमजोर पड़ रही है
02:50भारत को लेकर जो रूढिवादी सोच पहले हावी थी वो धीरे धीरे पीछे चूट रही है
02:55हाला कि उन्होंने ये भी माना कि विकास और आधुनिकी करन की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है
02:59और आगे भी काफी काम किया जाना बाकी है
03:02विदेश मंत्री ने अपने तरकों को आकणों से जोडते हुए कहा
03:05कि भारत में Global Capability Centers की बढ़ती संख्या
03:08विदेशों में भारतिये टैलेंट की बढ़ती मांग और व्यक्तिगत स्तर पर हो रही सफलता है
03:12इस बदलाव की गवाही देती है
03:14उन्होंने कहा कि ये बदलाव सिर्फ सरकार या नीती निर्माताओं तक सीमित नहीं है
03:18बलकि हर भारतिये इसका हिस्सा है
03:20जैशंकर ने कहा कि आज भारतिये की पहचान उसके टैलेंट और स्किल से बन रही है
03:24यही तत्व मिलकर भारत के नैशनल ब्रैंड को मजबूत कर रहे हैं
03:28उन्होंने ये भी समझाया कि ज्यादतर देशों ने व्यापार, निवेश और सेवाओं के जरिये दुनिया में अपनी मौजूद की दर्ज कराई है
03:35भारत का रास्ता भी यही रहा है
03:37लेकिन जो बात भारत को अलग बनाती है वो है मानव संसाधनों की भूमिका
03:41अपने बयान के आखिर में जैशनकर ने कहा कि आज भारतिये दुनिया के सामने पहले से ज्यादा आत्मविश्वास और क्षमता के साथ खड़े हैं
03:48यही आत्मविश्वास और स्पष्ट विजन भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला रहा है
03:53उनके हनमान वाले बयान ने इसी भावना को दर्शाया जहां उन्होंने खुद को सेवा करने वाला बताया
03:58और नेत्रित्व, द्रिष्टी और आत्मविश्वास को असली ताकत बताया
04:02यही वज़ा रही कि उनका ये संबोधन सिर्फ एक भाशन नहीं बलकि एक संदेश बन गया
04:07जिसे सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा
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