Skip to playerSkip to main content
  • 10 months ago
DGASD.S01E15 Hindi

Category

🎈
Fun
Transcript
00:00पर जिस इंसान ने मुझे तुम्हारी असली पहचान बताई
00:22वो डर के कारण सामने नहीं आ सकता
00:24तुम मुझे एक बार में ही मार डालो
00:26तुम मेरे असली पहचान के बारे में क्या कहना चाहते हो
00:32मुझे अब किसी पे भरोसा नहीं है
00:35इसलिए बहतर होगा मुझे मार डालो
00:38तुम्हें कैसे इंसान हो जो मौत से नहीं डरता
00:41फिर भी तुम पूरी बात बताने में इतना क्यों जीजग रहे हो
00:45हाँ
00:46मैं मौत से नहीं डरता और डरने वाली बात भी क्या है
00:50चाहो आओ और मुझे एक बार में मार डालो
00:55ताकि मुझे भिक्शुक संप्रदाय को हूँ लोगों के हाथ में जाता हुआ है
00:58और महान स्वांग वन्स को बरबर लोगों के हाथों से नश्ट होते हुए न देखना पड़ेगा
01:02अरे ये क्या बात कर रहे है
01:06भिक्शुक संप्रदाय हूँ लोगों के हाथ में क्यों जाएगा
01:15खुल कर बताओ
01:18मैंने कहा ना
01:18अब मुझ पर कोई भी भरोसा नहीं करता
01:21सब यही कहेंगे कि मैं मरने के डर से जूट बोल रहा हूँ
01:25मैं बुरे नाम के साथ मरना नहीं चाहता
01:29अध्यक्ष कियाओ
01:30कौन गौन किंग बहुत ही चालबास है
01:33वो बक्वास कर रहा है
01:35ताकि आप उसकी जान बक्ष दें
01:37सिपाहियो
01:38जी
01:38निश्बादित करो
01:39जी
01:40रुको
01:41तुमने कहा कि
01:45मेरे असली जन पहचान के बारे में जानते हो
01:47और वो हमारे संप्रदाए के
01:49अस्तित्व से जुड़ा हुआ है
01:50मेरे पूचने पर तुमने सच नहीं बताया
01:54मजाय तुमने विद्रोश वरू कर दिया
01:57तुम्हारी मौत निश्चत है
01:59अब जाओ
02:06तुम्हारा भिखशुक संप्रदाए से कोई संप्रद नहीं है
02:09जाओ फैंक
02:14तुम बहुत स्थिर हो
02:16अध्यक्ष
02:25हमें शिश्या में यीडा ब्यों से एक जानकारी मिली है
02:28बढ़िया
02:36वरिश्च्चु को सलाम
02:37फृद्ध्यश्चु सबसे वरिश्च है
02:40लेकिन अध्यक्षा विखशकों के संप्रदाए के प्रमुक है
02:44ऐसे कैसे?
02:45राजकुमारी वांग इतनी जल्दी कुछ कहना सही नहीं है
02:48वरिश्च रजू
02:49आपके यहां आने की क्या वजा है?
02:55माफ करना
02:56इस वाग इस पे चर्चा करना ज़रूरी नहीं है
02:59माडा यून के विद्वा
03:00गैंग मीनिया जल्दी ही आने वाली है
03:02उन्हें हम सभी से कुछ बाते करनी है
03:05तो क्यों न हम सभी थोड़ी देर उनका इंतिजार करें?
03:08जरूरूरू
03:38रजकुमारी वाम
03:43विकारी संप्रदाय की स्तिती गंभीर है
03:45मैं युद्ध कला में अच्छा नहीं हूँ
03:48पर मुझे किंग गॉंग अच्छे साता है
03:50मैं आपको यहां से दूर ले चलू
03:52शुक्रिया
03:55पर यह मुद्दा मेरे भाई से जुड़ा है
03:57मैं यहां पर रुक कर इसे और जानना चाहती हूँ
04:01अध्यक्ष आपके शरेर में ये खंजर क्यों है
04:04ताय हंग परवत के चौंग जियाओ गुफा के तान गॉंग अर्तान पो आपका स्वागत है
04:30कहीं आप कैसे है
04:32अध्यक्षियाओ भला किसमें इतनी हिमत आगई जिसने चाकु से आप पेवार किया
04:37मैंने ये खुद ही किया है
04:39खुद किया है? क्या आप जीना नहीं चाहते?
04:42मैं ठीक हूँ
04:43मेरी चमडी मोटी है
04:45नसों और हड्यों को कोई नुकसा नहीं हुआ
04:47ये किस तरह का जूट है समझ गई मैं आप बहुत होश्यार है
04:53आपको पता था कि तांग जौंग के पास जक्न ठीक करने की असरदार दबा है
04:57जो उत्ते की ठंडी ने फाइड और ठंडे काले मेंधक से बनी है
05:01वाका है अच्छी है
05:27ये क्या है सुनो जौन
05:33जौन जौन कैसी है वरिष्ट ये सब क्या है मैं आपको थप पर लगाऊंगी
05:42तब ही मैं सोचू कि कौन है उमीद थी कि तुम ही होगी
05:47जौन तुम खुश्ट हो ना
05:52ताई परवत के बांच ना क्या हाँ तुम पांचो आखिर यहां क्या कर रहे हो
06:03वरिष्ट वो और सारे वरिष्ट को मेरा प्रणाम मेरे पिता भी आये है
06:08अध्यक्ष किया हो मैं शान जेंग बिना बुलाया गया
06:19माफी चाहता हूँ
06:22वरिष्ट शान ये लोग ताई हांग परवत के चौंग जिया उगुफा के तान जुड़े हैं
06:27आप इन्हें जानते हैं
06:29मैंने काफी समय से आपकी प्रसिद्धी की बारे में सुना है
06:31आपसे मिल के अच्छा लगा और ये कौन है
06:35मैं मेरा नाम है दुगना टेड़ा और मेरा उपनाम स्टेंबंड जैच
06:45महाशेशान इसकी बखवास पे ध्यान मत दीचे
06:48इसकी बातों को दिल से मत लगाईएगा
06:50आज इतने सारे वरिष्ट से मिलना बड़े सम्मान की बात है
06:53क्या मैं जान सकता हूँ कि आप सब यहां किस लिए आये हैं
06:57अध्यक्ष क्याओ आपका संप्रदाय युद कला में सबसे महान है
07:01सैकडो सालों से आपके संप्रदाय की तारीफी होती आ रही है
07:04मुझे आपके संप्रदाय के लिए अच्छा लगता है
07:07धन्यवाद, अध्यक्ष को आओ, आपका संप्रदाय युद्ध कला की दुनिया का सबसे बड़ा संप्रदाय है, सेखड़ों सालों से आपके संप्रदाय की प्रसिधी दुनिया भर में फैली हुई है, और मैं आपके लिए बहुत खुश हूँ
07:19बोशान, पिताजी, अध्यक्ष को इसके बारे में बताओ, और अगर कोई तुमसे सीखना चाहता है, तो वो आगे आ सकता है, जाकि अपनी कलाकारी देखाओ
07:34बोशान, अध्यक्ष क्याओ को इसके बारे में और बताओ
07:39अगर मेरे बेटे से कोई सीखना चाता है, तो आ सकता है
07:43तुम क्या मरना चाते हो?
07:46मैं मरना नहीं चाता, बिल्कुल नहीं चाता
07:48अपने चार-चार मुष्ठंडे पाल रखे
07:51मुझे एक बात बताओ, एक और की क्या ज़रूरत है?
08:03पिता जी, ये
08:04महदैतान, कृपया वरिष्ट का सबसे परीचे करवाईए
08:16ताकि ये सब जान सके
08:18मैं हूँ जाओ सियान सुन, अध्यक्ष को प्रणाम
08:23ये मेरे वरिष्ट है
08:24महदै, आज से पहले आप से मेरे मुलाकात कभी नहीं हुई
08:32मैं आपका अपमान कैसे कर सकता हूँ, बताएए
08:35आपने मेरे अपमान नहीं किया, लेकिन आपने जुआन का अपमान किया
08:40और ये मेरे अपमान करने से बहुत ज्यादा बुरा है
08:43शौजवान, उसका अपमान मैंने कब किया?
08:47मैं याद दिलाता हूँ, ये है जौण
08:50और ये इसका शादी से पहले का नाम है
08:53और मेरे अलावा इसे कोई इस नाम से नहीं बुला सकता
08:57हाँ, अब आपकी कही बात मुझे समझ आ गई है
09:02करपिया मुझे माफ किजिए, अगर मैंने आपको तकलीफ पहुचाई हो
09:05और मैं कभी भी किसी की पीट पीछे कोई भी बुराई नहीं करता हूँ
09:09लेकिन मैंने तानपो का कैसा आपमान किया
09:12तुम नहीं जानते, रुको मैं बताता हूँ
09:14जब मैं जुआन से पूछ रहा था कि ये खुश है या नहीं तो
09:18तुमारे पांच बेटे अचानक से तपक गए
09:21पता नहीं कहां से बीच में आ गए
09:22और हम दोनों की बात पूरी नहीं होने दी
09:24ये बताओ, तुमने किसी से पूछा क्यों नहीं
09:27कि जुआन कौन है और मैं कौन हूँ
09:30तुम तो मुझे जानते तक नहीं हो
09:32फिर हमारी बात में रुकावट कैसे डाल सकते हो तुम
09:35सुनिये, ये क्या कर रहे हैं
09:39इतने सारे लोगों के सामने इस तरह का बड़ता अफंद कीजिए
09:42पहले तुमने मुझे छोड़ दिया और उस दांगौंग से शादी कर ली
09:48इस बात का दुख मुझे कैसे नहीं होगा, मेरा दिल तूट गया था
09:53अब भला ये बताओ, दिल तूटने के बाद मैं अपनी गरिमा की परवा कैसे करूँ
09:58फरिष्ट, अतित की बातों को रहने दीजे, आज भिखारी संप्रदाई किसी खास मुद्दे पर बात करने वाली है
10:05सही तरीके से पेशाओ, फिर जो वो लोगी पो करूँगा
10:08यूराज को सलाओ, भाईयों, खड़े हो जाओ
10:15मिलकर अच्छा लगे यूराज, फैंको और मुझे आपकी कोई ख़वर ही नहीं थी
10:18इसलिए हमने शाओली नाकर आपको बचाने की योजना बराई, पर आब आप खुद ही मिल गया है
10:22मैंने पहले ही कहा था, मैंने शुवान बाय को नहीं मारा है, इसलिए शाओली ने कोई मुसीबत खड़ी नहीं की
10:27मुझे ये बताओ, तुम इतने घबराए हुए क्यो हो?
10:29बिक्षुक संपर्दाय में जरूर कुछ हुआ है कहा?
10:31शौफिंग के होते संपर्दाय को क्या हो सकता है?
10:36रब लोग, ताई परवत के शान पुर्वार के पिता और बेटे, ताई हैंक परवत के तैन जोडे
10:42और ये महाशाय, आज यहां इकठा हुए है
10:48हम सभी आपकी उपस्थिती से सम्मानित महसूस कर रहे हैं
10:52मैं कई सालों पहले ही सेवा निर्वित हो गया हूँ
10:56और अब संसारिक मामलों से दूर रहता हूँ
11:00पर आज बात थोड़ी खास है
11:03मुझे आज अपनी वशिष्टता का परियोग करना होगा
11:07और चर्चा से पहले सबको आमंत्रित करना होगा
11:10किर्पया स्वागत करिये वेगम मा का
11:13यह कोण आया
11:40मा के विध्वाहू नाम कांग है अध्यक्ष को प्रणाम
12:08सलाम बेगम मा
12:10कांग में हमें सबको शुरुआत से बताओ
12:15मेरे पती की मौत अचानक हुई
12:21मैं इसके लिए सिर्फ अपनी जिंदगी को दोशी ठहराती हूँ
12:25मुझे उमीद है कि अध्यक्ष मेरे पती के कातिल को जरूर ढूंडेंगे
12:29अपने पती को दफनाने के बाद जब मैंने उनका सामान देखा तो
12:36मुझे उसमें से उनकी एक वसियात मिली उस पर मौन की मुहर लगी थी
12:42उसमें मेरे पती की लिखावट थी मैं उसे पढ़कर तो रंत उसे लेकर अध्यक्ष के पास गई
12:50अध्यक्ष और वरिष्ट मेरे पती का बदला लेने के लिए जियांगनान गए थे
12:55अभी तक आप में वो चिठी नहीं देखी आप कहना क्या चाहती हैं कि क्या वो वसियत मुझसे संबंदित हैं उसमें संप्रदाय के बारे में लिखा है और वो कुछ जरूरी बाते हैं इसलिए मैं वृद शिंग्जोशू से मिलने गई और उनकी सलाली आगे की बात आपको
13:25परतिशोद का विशय है ये बताना मेरे लिए भी मुश्किल है ये है माडा युवान की वसी है अध्यक्ष वांग के मरने से पहले उनकी वसीयत के तौर पर मैंने इस चिठी को अभी तक सम्हाल के रखा हुआ है उमीद है ये चिठी मेरे मरने के बाद जला दी जाएगी
13:53वरना मुझे शांती नहीं मिलेगी अगर मेरी आकास्मिक मौत होती है तो ये चिठी संपरदाय के वरिष्टों को सौँप दी जाए ये महत्वपून बात है निर्देश के नुसारी होना चाहिए लिफाभे के उपर की लिखावर दा युवान की है जब कांग मिन ने मुझ
14:23वो गवाही दे सकते हैं वरिष्ट ने जो भी कहा वो सच है उस वक्त मैं जिन्जाओं में वरिष्ट जू की आवास परी था मैंने अपनी आखों से इन्हें ये चिठी खोलते वह देखा था
14:33इस लिफाभे में दो चिठीया है एक चिठी अध्यक्ष बॉंग ने लिखा है उन्होंने लिखा कि अगर चीजें नियंतरन से बाहर हो जाएं तो शावलिंग संपरदाय बाकी सातियों से मदद मांग सकता है दूसरी चिठी की बात करें तो ये चिठी भाई सौट बीर्ड
15:03की जाचकी तो मैं हैरान रह गया भाई शान भी काफी उत्सुट थे और उन्होंने भी डजर डाला उन्हें भी बहुत अजीब लगा ये बताव भाई शान तुम ऐसा कैसे कर सकते हो ये बिखशुक संपरदाय का कुप्त पत्र है तुम उनमें से एक नहीं हो फिर भला तु
15:33वाला नीच इंसान होता है तुम्हें वरिष्ट सभी व्रुग्शू की बात सुनना चाहते हैं इसलिए आप और श्रीमान शान बहस करना बंद कर दीजिए
15:42आप ये कैसे मेरे वरिष्ट के कुछ भी कहने से तुम्हें फर्क नहीं पढ़ना चाहिए
15:49आप सभी को ये नहीं बता सकता कि ये पत्र किस्ते लिखा है मैं बेख्चुक संपरदाय में सत्तर वर्षों से जाधा रह चुका हूं और तीस वर्षों तक अलग रहके गुजारा है
16:08मैं किसी लड़ाई जगड़े में शामिल नहीं हुआ अब मेरे पास जाधा वक्त नहीं है मेरा कोई वन्षजिया अनुयाई भी नहीं है और मेरा कोई व्यक्तिगत हित भी नहीं है अगर मैं कुछ बताओं तो आप लोग क्या भरोसा कर पाएंगे
16:24जब मैंने ये चिठी बड़ी तब मुझे शक हुआ क्योंकि ये बहुत बड़ा मुद्दा है मुझे लगा शायद मुझसे कोई गल्ती तो नहीं हुई इसलिए इस चिठी को भाईशान को देखने के लिए दिया
16:48जिसने ये चिठी लिखी है उसके साथ भाईशान का रिष्टा बहुत अच्छा था और वो उसकी लिखावट पहचानता है और उससे इसकी सचाई पुष्टी करने को कहा
16:56वरिष्ट ने जो कहा वो बिल्कुल सच है मैं उस इनसान को सालों से जानता हूँ मेरे घर पर उसके लिखे कई सारे पत्र मौजूद है इसलिए मैंने वरिष्ट और मा को मेरे घर पर बुलाया था ताकि हम पुरानी चिठीों से इसे मिला सके हमने पाया कि शिर्शक और लि
17:26इसलिए मैं उसका सुझावले ने चौंग जियो गुफा गया वहां महोदय टैन और महोदया टैन ने मुझे वहां की एक एक बात बताई कि वहां क्या हुआ था महोदया टैन ने बताया कि उनके वरिष्ट है जो इस मामले के साठ्षी है और वो है श्रीमान जावचिंशु
17:56यह सच है यह गहरे अर्थ वाला छोटा सा पत्र है चालिस साल पहले हमने साथ में अध्यायन और अभ्यास किया था ऐसा लगरे जैसे कल की बात है पर पीछे मोड़कर देखने पर ऐसास होता है कि अब मैं पूड़ा हो गया हूँ लेकिन मेरा रूप और मेरी मुस्कान बिल
18:26अपनी चोटियां बनाया करती थी गुरुचु यूद की कला सिखाते थे असली को नकली में बदलना वरिष्ट पहले की चिठी और मुद्दे पर बात नहीं करने यह येनमी पाश की लूशी घाटी की हुई लड़ाई के बारे में पोच रहे हैं आप भी उसमें शामिल थे
18:56में चलता हूँ जाओ चिया सुन इतने सालों के बाद भी तुम भाग क्यो रह रहा हूँ
19:01अमीताब अधर्णियजीग वांग हमें मिले हुए तीस साल से जादा हो गया पर तुम अभी जवान और स्वस्थ दिख रहे हो आज तुमारा यहां उपस्तित होना बिख्षुक संपरदाय के लिए आशिरवाद है मैं इसकी सराना करता हूँ
19:21अधर्णियजीग वांग भी इस युद्ध में शामिल थे वह आपको इसके बारे में बताएंगे इनसे पूछ लिजिए बहुत हत्याय हुई थी बहुत हत्याय हुई थी मां बहुत शर्म हाती है मुझे लुएंशी घाटी के युद्ध को हुए तीस साल से जाधा का वक्त
19:51संप्रदाएं में एक बड़ा बद्लाव आने वाला है
19:56दुश्मनों से सदा करना पहतर है अब और नहीं इसका उल्लेक करना उचित नहीं मेरे खयाल से इस चिठी को फाड़ देना चाहिए
20:15सारे निशान मिटा दो और ये सब कुछ भूर जाओ
20:18हमारे उप्रमुक की दुखत मौथ हुई है अगर हम इसकी तह तक नहीं गए तो उप्रमुक को बहुत दुख होगा
20:27और हमारे संपर्दाय के बिखरने का डर बना रहेगा इसलिए अदर्णी जी गुवांग आप जो भी जानते हैं हमें बताइए ताकि हम फैसला कर सकें
20:36तो भी ठीक है उस वक मुझसे गलती हो गई थी मुझे वो बात चुपानी नहीं चाहिए थी जो था वो बताना चाहिए था अधर्णी अजी गुवांग हमने ये राश्ट्रों लोगों के लिए किया था फिर आप इसे गलत कैसे कह सकते हैं जो गलत है सो गलत है हमें खुद
21:06करण सालों से रखे हुए निमा वली को चीनेगा खितान के योद्धा महत्व कांक्शी थे अगर शावलिन मंदिर के योद्ध कला के रहस्यों को वो ले जाते और उनके योद्धा उसमें महारत हासिल कर लेते तो सौंग बंश उनके खिलाफ कभी योद्ध नहीं चीत पाता
21:36में अंदर रेकी और भागे ताकि अगर हम उनका सफाय ना कर पाए तो कम से कम उनकी साजिश को तो बेनकाब कर दें अध्यक्ष जियाओ आपकी इस बारे में क्या राय है कुछ कहना चाहेंगे
21:48मैं अपने संप्रदाय का नेत्रत्व करूँगा उन्हें रोकने के लिए
21:53मतलब तुम्हारे नजरिये से उस वक्त खितानों पर खात लगा कर हमला करना ये सही फैसला था
22:00मैंने वरिष्ठों के वीरता पूर्ण कारियों की प्रशंसा ही की है
22:04काश मेरा जन तीस साल पहले हुआ होता
22:06मैं साथ मिलकर लड़ता बेजी जखो कर
22:08अध्यक्ष चिहाओ ने जो कहा वो सच है
22:11उस वक्त हमने भी बिलकुल यही सूचा था
22:15हम समूहों में बढ़ गाये और वो
22:18वो सजन और मैं पहले जद्धे में ही थे
22:22हम एक कीस लोग थे
22:24उस वक्त हमारे समूहों में सरुस्रिष्ठी युद्ध कला की युद्धा थे
22:28उस वक्त मैं भिक्षू नहीं था
22:30मैं नायकों के बीच किसी पत का हगदार भी नहीं
22:33मैं तो बस थोड़ा सा योगतान दे कर
22:35अपने देश से तुश्मनों को
22:37खत्म करने की सिर्फ कोशिश कर रहा था
22:40तो आगे क्या हुआ
22:41क्या आप वह समय पर पहुँच भाए
22:43हाँ हाँ भिलकुल
22:47बिनहरों के याद्रा करते हुए
22:49हम यानमें दर्रे तक महुचने में काम्याब रहे
22:51और ये मामला
22:52सौम वंच के अस्तित्व और हमारे लाकों
22:55लोगों की सिंदगी से चुड़ा हुआ था
22:57पर हमने युद्ध चीतने का
22:59पूरा विश्वास नहीं था
23:00हमें सिर्फ एक फाइदा था
23:01हमारे दुश्मन खुले में थे जबकि हम अंधेरे में थे
23:05ऐसे हालातों में क्या करना चाहिए था
23:08अध्यक्षियाओ बताईए
23:11दुश्मन खुले में थे जबकि हम अंधेरे में
23:14ऐसे में हमें युद्ध कला के शिष्टा चार नियमों की अमहेलना करनी चाहिए।
23:19सही कहा, बहुत खुब, उस वक्त हम भी यही सोच रहे थे कि यही करना चाहिए।
23:25हमने अपने नेता के मार तर्शन में पहाड़ी मार के दोनों और से चिपकर हथ्यारों के साथ खात लगा कर हमला किया।
23:32एक रात के बाद, खितान योद्धाओं का समूँ वाकई में वहाँ से चला गया।
23:36जैसे हमें उनके जाने की खबर मिली और हमने सब्सक्राइब का सफाया किया।
23:41हम बहुत खुश थे पर थोड़ी उलजन की थी।
23:43कितान उतने कमजोर कैसे रहे।
23:45क्या वो जूची खबर थी।
23:46हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
23:48शाहिद वो हमें पसानी के लिए एक जाल पहलाया हुआ था।
23:51हम यह सोची रहे थे कि हमें कहात लगा कर हमलत जारे करकना चाहिए।
23:57पर हमें उमीद नहीं थी।
24:18हमें पर्स भूचे
24:21हमें पर्स प्रवेद वो जोग्तिंग
24:24है
24:30हाए
24:32हाए
24:33हाए
24:34हाह
24:36हाए
24:41यह
24:42हाए
24:44हाए
24:45जाए
24:46नार बार नार-प्लिड, कि का जोड़िए कम बड़िए kalau महार preach अम
24:46कर दो सिस्प나�liśmy.
24:49यंहें हम आप पती द Le Viival cliche कि बड़ हमें फिर सी आह से आह सिपλε्ग से ज़िotted offer कर एह एक शिOb
24:51हुँ
25:01नाइ
25:21हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हु
25:51जा बरबर खितानों ने सरदार को मार डाला, उसके बाद जो हुआ, उसकी तो हमने कलपना तक नहीं की थी, हमें यकीन नहीं हुआ, उसने हमारे सरदार और अधिच भॉन को बकड लिया, और बाकी सब को माह दिया, तर्क के किसाफ से उसे आगे बढ़ना चाहिए था पर, किस
26:21उसने चट्टान से कूट खरात महत्या कर ली
26:25और ताज्जू की बाब
26:26कि वो अपने पीछे एक बच्चा छोड़ गया
26:28लेकिन वो बच्चा तो मर गया था ना
26:30मुझे भी ऐसा ही लगा था उस्वा
26:32पर बाद मैं एसास हूँ
26:34यह खितान की पत्णी की मौत के बाद
26:51क्या और जूर जूर से रूने लगा
26:53फितान अपने बेटे को गाटी में
26:55अपने साथ मरते हुए नहीं देखना चाहता था
26:56इसलिए उसने बच्चे को फेग दिया
26:58संयोंक से वो बच्चा वरिष्ट की बाहों में
27:01आके किरा और उसे चोट नहीं लगी थी
27:03उस तरह की बुद्धी और युद्ध कला
27:05खोशल
27:06काफी कमाल का था
27:09मैंने अपने भाईयों की दुखत मौत होते हुए देखी
27:13पहले मैं चाहता था
27:15कि मैं उस बच्चे को उसी जंगल में किला छोड़ दू
27:17पर वो बच्चा रोने लगा
27:18और रोने की वज़े से उसका चैरा पुरी तरह से लाल हो गया
27:22और वो अपनी चम के लिए आँखों से मुझे घूरता चा रहा था
27:26मेरा दिल ही की पल में पिखल गया
27:28और मैं उसकी प्रति कूरूर नहीं हो पाया
27:31खितानों ने अंगिनत हाल लोगों को मार डाला
27:33क्यों उन्होंने हमारे लोगों के प्रति दया दिखाई
27:35वो कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते
27:37हाँ हम क्यों नहीं कर सकते हम उने क्यों नहीं मार सकते
27:41आगे क्या हुआ
27:46मुझे भी डर था कि खितानों की और भी सेना बहुत ही चल्दा जाएगी
27:50इसलिए मैं बच्चे को लेकर यहान में अंदर्रे पर वापस आया
27:53सरदार और अद्धिक्ष वांग को इस बात के फिक्र थी कि
27:56खितान योद्ता शावलिन मंदर पर हमला करेंगे
27:58वो जल्ली से यहान में अंदर्रे पर गए
28:00और वहाँ जाकर जांच की
28:02उन्होंने वहाँ पाया की
28:04वहाँ पर हमारे भाईयों के
28:06सत्रा अवशेश होने चाहिए थे
28:08पर उनमें से एक कम था
28:09हमें लगा की वो युद्ध के दोरान
28:12लुआंची घाटी में गिर गया होगा
28:14तब मैंने महसूस किया
28:16कि पत्थर के दिवार पर खितान लीपिया गड़ी गई है
28:19जिसका अर्थ काफी कहरा था
28:23इसलिए मैंना उन लीपियों की लकल कर ली
28:25और उसे एक लुपान से चीन में अनुवात करवाया
28:28उससे जो पता चला उससे मैं हैरान था
28:31अगर वो सब सच था तो हमने चो किया
28:34वो एक गंभीर कलती थी
28:35ये देखने के लिए कि
28:38वो नकाशी के शब्द सही थे या नहीं
28:42हम सिर्फ इंतजार करके
28:43ये देख सकते थे कि
28:45कोई योता शावलीन में गुप्तन नियमा वली चीनने तो नहीं आया
28:49हम तीनों
28:51बिना रुके वापस
28:53शावलीन मंदिर चले गए
28:54हमने देखा कि कई नायक वहाँ पहुँचे हुए थे
28:57चुकि इस से लागों लोगों की जिन्दगिया जुड़ी हुई थी
29:00इसलिए सभी इसके लिए कुछ करना चाहते थे
29:02हाला कि भारे चान महीने के
29:03नौ महीने के नुवे दिन तक
29:05कितानों को वहाँ नामो निशान तक नहीं था
29:07क्या वो खबर जूटी थी
29:08यह जानने के लिए हम दूद को ढूंडे लगे
29:10पर वो हमें नहीं मिला
29:11तब हमें हैसास हुआ
29:12कि वो खबर तो जूटी थी
29:14हमें समझाया
29:15कि हमें तो यहाँ पर
29:18इन लोगों ने बेवकूफ बनाया है
29:20आपने जो पताया उसके हिसाब से
29:22यान में दर्रे में हुई मौत
29:23उन लोगों के साथ हुई नाइंसाफ भी थी
29:25हाँ बिल्कुल
29:26और फिर कुछ समय के बाद
29:29खितान घुर सवार सैना ने
29:31हम पर हमला कर दिया
29:32और बाद में एक मुश्किल हमारे सामने खड़ी हो गई
29:36कि उस बच्चे का क्या करे
29:37आखिर का हमारी वज़े से उसके माता पिता मरे थे
29:41और हम उस बच्चे को नुकसान नहीं पहुचा सकते थे
29:45लेकिन अगर हम उसे पालते पोस्ते
29:48तो हमें इस बात का डर था कि वो हमसे पतला लेगा
29:52हमने काफी समय तक इस पर चर्चा की
29:54और आखिर में अध्यक्ष शुशी परवत के तल पर रहने वाले
29:56एक किसान के साथ बात की
29:58और उससे विंती की
29:59कि वो उस बच्चे को गोद ले ले
30:01और उस बच्चे को ढंग से पाले
30:03और उसे पताना चले कि वो गोद लिया हूँ बच्चा है
30:05उस किसान की कोई अउलाद नहीं थी
30:08तो वो खुशी खुशी मान गए
30:09उन्हें कैसे पता चलता
30:11कि वो बच्चा एक खितान का है
30:13आदरने जी गौम
30:19उसकिसान का उपनाम क्या है ये बताईए उसकिसान का नाम जिया उसान हुआ ही हागा
30:36स�ंभ क्वास
30:48अम्च्ब क्वास
30:50मजर व्uffs
30:53मजर सुल जये
30:55अच्प्द का
31:00यह
31:02मैं खान हूँ
31:07अमीता भाद
31:09शाउशी परवत के तल में रहने वाला शाउपिंग
31:17जासान हुआ है
31:26मेरे पिता है
31:28हम्तेक शुरुग जा
31:30अध्यक्ष आप ऐसा नहीं कर सकते है
31:35हम दोनों के बीच कोई भी मद्भेद नहीं है
31:38मेरे बेटे को जाने दो
31:40अध्यक्ष चाओ
31:41अधर्नी अजी कुवां का यूद गला के दुनिया में बहुत सम्मान है
31:45उन्हें चोट नहीं पहुचा सकते है
31:46आप सिर्फ मुझे अध्यक्ष के पद से हटाना चाहते है
31:50यह एसा करने के लिए इतनी काहनिया बनाने की क्या जबरूरत थी
31:53मैंने इसा क्या गलत किया है
31:57आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं
32:00अध्यक्ष क्या ओ
32:02हान और खितान दोनों ही आम लोग हैं दोनों में कोई अंतर नहीं आप एक खितान है आप खुद को हान क्यों कह रहे हैं आपके तो अपने माता पिता तक नहीं है आप खुद को नायक कैसे मान सकते हैं तुम किसे खितान कह रहे हो
32:17मैं नहीं जानता तुम वाके में खितान हो या नहीं
32:22पर मैंने यान में अंदर रेके युद में उस इनसान को देखा है
32:25जिसे मैं जिन्दगी में नहीं भूल सकता
32:27और तुम जानते हो, वो इनसान किसके जैसा दिखता है
32:32मिल्कुल तुम्हारी तरह
32:47कि लुटाइ logा लुटाइ
33:04कि लुटाइ
33:11उस वक्त मैं एक लापता लाश था
33:20मुझे खितानों से डर लगता था
33:26इसलिए होश में आने के बाद मैं छुप गया
33:28मैं ही वो लापता लाश था
33:32इस दुनिया में मुझे सिर्फ और सिर्फ जुआन की फिक्र है
33:36तुम भिक्षुक संप्रदाय के अध्यक्ष हो या नहीं
33:40इससे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता
33:41मैं मानता हूँ कि मैंने तुम्हारे माता पिदा को मारा है
33:45पर इससे मेरा क्या फाइदा
34:06अमीता अमीता अमीता अमीता अमीता अमीता तुम्हारे माता हूँ
34:27तुम ये अच्छे से जानते हो
34:30कि उसके बाद क्या हुआ
34:32जब तुम साथ साल के थे
34:35पास आओगे तो बहुत बुरा होगा याद रखना
34:43मजे बड़े भाईया काहो
34:44अपसे हमारी बात मनना
34:46उसके बाद हम साथ में मज़े करेंगे
34:47चुपो जाओ
34:48मैं मर जाओंगा लेकिन
34:50तुम जैसे गलत काम नहीं करूँगा
34:51कूदने के बाद विश्वास करूँगा तुम पर
34:53ठीक है मैं कूद जाता हूँ
34:55मरे कहां जा रहे हो
34:56मैं दुबारा जनम लेकर 20 साल बाद मिलता हूँ
34:59जाओलीन के बिख्षु ने तुम्हें बचा लिया और उसके बाद
35:13उन्होंने तुम्हें हर तिन युत्कला सिखाई सही कहाना
35:18गुरुजी मुझे अपना शिश्य बना लीजिए
35:23बप्रा करपा चुम्हें लीजिए सही कहानी टाँ बार शुम्हें लीजिए
35:47युम्हें इंट हो बगारा लीजिए
35:53आप ये कैसे जानते हैं असल में उन शावलीन गुरू को
36:17हमारे गुरू ने ही तुम्हे सब से खाने की जिम्मेदारी सौपी थी
36:23ताकि तुम अपने मार्क से भटक न जाओ
36:27इसी वज़े से हम तीनों में मदभेद हो गया
36:31मैं चाहता था कि तुम्हें एक किसान की तरहे आम जिंदगी जीओ
36:35और कुरू ने कहा कि हमने तुम्हारे माता-पिता को मारा है
36:40इसलिए हमें तुम्हें एक नायक की तरह बालना चाहिए
36:43यानमें दर्रे के पत्थर की दिवार पर अभी भी वो वसियत है
36:48जाकर कभी भी देख लेना
36:50जब तुम 16 साल के थे तब अध्यक्रवांग ने तुम्हें अपना अनुयाही बना लिया
36:56क्या तुम चाफेंगो?
36:58जी
36:59युद्धकला का अभ्यास क्यों करते हो?
37:00धर्म का पालन करने के लिए
37:01और वो कैसे?
37:02एक सच्चे नायक को देश की सेवा करनी चाहिए
37:05अधर्णी जुआन को वाकई में दूर दर्शे इंसान है
37:08ठीक है?
37:10आज से तुम हमारे संप्रदाय के अनुजाई होगे
37:13और साथ ही मेरे शिश्य भी
37:15उसके बाद कहीं साहरे इत्यफाक होए
37:18तुम मैं कमाल की प्रतिभा है
37:20वाकई में तुमारा कोई मुकाबला नहीं है
37:24पर अगर सरदार और अध्यक्ष वांग ने लगातार तुम्हरा साथ नहीं दिया होता तो
37:29ये सब इतना आसान नहीं होता
37:31अगर हाप जो कह रहे हैं वो सच है
37:33तो अध्यक्ष वांग वो नहीं है जिन्होंने मेरी जान बजाए थी
37:37बल्कि उन्होंने मेरे माता पिता की हध्या की थी
37:40उस वक्ष जिसने मेरी मदद की थी
37:43उसका इरादा मदद का नहीं था
37:46बल्कि अफसोस के वज़े से किया था
37:48पाप का प्राश्चित करने के लिए
37:50शुरुवात में अध्यक्ष वांग
37:52तुम्हें लेकर काफी सा तर्क थे
37:54पर जब उन्होंने तुम्हारी युद्ध कला में प्रगती
37:57तुम्हारे वीरता फूंड कारिय
38:00और तुम्हारी तयालुता देखी
38:04तो वो तुम्हें और पसंद करने लगे
38:08बाद में तुम्हारी महान उपलब्दियों
38:11और प्रसुद्ध की वज़े से
38:13एक शुक संपरदाय का कौरव काफी पढ़ गया
38:17अध्यक्ष पत तुम्हारी पकड़ में था
38:19पर अध्यक्ष वांग
38:21फैसला नहीं कर पा रहे थे
38:25उन्होंने तुम्हें तीन मुश्किले दी
38:28तुम्हें उन्हें हल भी कर दिया
38:29और साथ महान उपलब्दिया हासिल की
38:31अपनी मौत के वक्त
38:33उन्होंने तुम्हें अपनी पसंदिता छड़ी सौंप दी
38:37और अधिकारिक तोर पर तुम्हें भिख्षुक संप्रदाई का अध्यक्ष ने उत्किया और सो सालों में तुम्हारे अलावा कोई भी इतनी मुश्किलों के साथ अध्यक्ष के रूप में इतना सफल नहीं रहा
38:47अध्यक्षपत संभालने के बाद तुम धर्म पर आयन और निश्पक्ष रहे पिखारिस अंप्रदाई तुम्हारे हाथों में सुरक्षित रहा और तुमने कई बार कितानों की साज़िश को नाकाम भी किया और हमें ऐसास हुआ कि हम बेवजह ही इतनी फिक्र कर रहे थे
39:10मुझे लगा था कि ये मुट्टा अब फिर कभी भी सबके सामने नहीं उठाय जाएगा पर पता नहीं
39:18पता नहीं ये मुट्टा फिर से कैसे उठकया
39:24शुक्रिया आदर्निये जी कुआंग अतीत की बात बताने के लिए सबने उस पल को मैसूस किया
39:31ये पत्र सर्दार ने अध्यक्ष पांग को लिखा था
39:37इस पत्र में उन्होंने अध्यक्ष पांग को अपना पद अध्यक्चाओ को देने से मना किया था
39:44अध्यक्चाओ क्यों न तुम एक बार इस पत्र को पढ़के देख लो
39:49मुझे देखना है
39:50मैं देखता हूँ कि ये सच है ये मैं
39:55ये आप क्या कर रहे है
40:06अब तुम्हें अपनी असलियत के बारे में पता चल गया है
40:21तो मुझे यकीन है कि तुम अपने माता-पिता का बदला लोगे
40:25अब क्योंकि अधिक्ष वांग की मौत हो चुकी है
40:29और मैं तुम्हें उस सर्दार का नाम कभी नहीं बताऊंगा
40:34मैं अभी उस घटना में शामिल था
40:36और मैं अकेले उन सभी बापों को अपने सिर पर लेने के लिए तैयार हूँ
40:42फिर तुम चाहे मुझे मार भी सकते हो
40:46हाँ बिलकुल मैं भी इसमें शामिल था तुम्हारा जो मन करें वो तुम मेरे साथ कर सकते हो मैं अपनी जान तक देने को तैयार हूँ
41:10अगर तुमने हूँ और हान के बीच कोई भी हल चल की तो पूरी दुनिया तुम्हारे दुश्मन हो जाएगी
41:30हूँ और हान के बीच हल चल
41:40कू यिशव neurolog को पकते हैं
41:46पुम्हारे वोग तुम्हार तुम्हारेCuारे
41:59यी स्निंईळ इशव्हार फ्सदें वार हूँ
42:04बभूम्हारे विंूव
42:05अ कू बभूत उरूत
42:06कि लन कैसे चुरा जख को साज म मेज
42:28वपकर संच में है उन्जम हो गुष खडसी05
42:34हुआ हुआ हुआ है
43:04हुआ हुआ हुआ है
43:34हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हु
44:04झाल झाल