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  • 8 months ago
प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच क्या है पूरा विवाद? जानें

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00:00मौनियम आवस्या पर माग मेले में स्नान को लेकर स्वामी अबमुक्तेश्वरानन्द जित परणे हैं कि प्रशासन ने उनको अपमानित किया है और अपमानित कर उनके शिश्यों को मारपीट किया है
00:13लेकिन जवाब में मेला प्राधिकरण एक नया बखेडा खड़ा कर दिया है नया सवाल खड़ा कर दिया मेला प्राधिकरण के तरफ से कि स्वामी अबमुक्तेश्वरानन्द शंक्राचारे हैं ही नहीं
00:26और उसको लेकर एक Notice दिया गया है कि उनके द्वारा जो शिविर लगाया गया है वो गलत लगाया है उन्होंने गलत तरीके से खुद को संक्राचारे बताया है
00:36ये शिवर को लेकर के चर्चा है वो मैं आपको दिखाता हूँ, ये शिवर है स्वामी अमुक्टेश्वरानांद का।
01:06और उसके साथी अमुक्तिश्वरानन्द जी की तस्वीर, बदरीका आश्रम की तस्वीर, तो ये पूरी तस्वीर और ये शिविर पूरा लगाया गया है,
01:15और अब मेला प्राधिकरन के द्वारा जो नोटिस चस्पा किया गया है वो इस शिविर के द्वार पर किनारे नोटिस पर चस्पा किया गया है
01:2424 घंटे का वक्त दिया गया है कि 24 घंटे में स्वामी अमुक्तेश्वरा अनंद को जवाब देना है
01:31अब वो नोटिस जहां पर चस्पा है वो इस पूरे शिविर के बगल का है दिखे पूरे पर लिखा हुआ है इसी पर मेला प्राधिकरण ने सवाल खड़े किये हैं कि शंकराचारे शिविर यानि कि उन्होंने एक साल 2022 में सुप्रीम कोट में दैर की गई एक सिविल पिटीश
02:01पर चस्पा वो भी दिखाते हैं शिविर से जब हम आगे बढ़ते हैं तो यह गेट है और शिविर के गेट पर ही यह जो पूरा परसर है यहां पर यह जोतिरमत बद्रिका अश्रम हिमाले शंकराचारे शिविर माग मेला प्रियागराज और यह नोटिस दिया गया पहले आ
02:31उत्तरपटरी सेक्टर नंबर चार यह यह इलाका माग मिला प्रियागराज हवाला दिया गया है कि सर्वोच नियाले में विचारादीन सिविल अपील तीन हजार दस बटे दो हजार बीस जगत गुरू शंकराचारे जोतिश पीट पी एसेसन सरस्वती वर्सेस स्वामीव �
03:01स्वामी श्री मुक्टेश्वारान सरस्वती और एनिवन एल्स पर बिंग अपॉइंटेड एज एच शंकराचार्य ऑफ जोतिश पीट आइदर ऑन 17 अक्टूबर 2022 और देराफटर तिल दा
03:17कैप्शनड अपील्स आर फाइनली हीड एन डिसाइड़ सुप्रीम कोर्ट ने इस पेटीशन पर यह कहा गया था कि 17 अक्टूबर 2022 को जो पट्टावीशे कारिक्रम है उसको रोका जाई यह अपील की गई थी और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसमें इस पुरे का जो
03:47मामला विचारा धीन अभी वी चला है इसी को आधार बनाते हुए उपाध्यक्ष प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने 24 घंटे के अंदर यह बताया है कि द्वारा यह दिखें यह लाइन बहुत महतुपून है कि अपने नाम के समुख शंकराचारी शब्द का प्रयोग अ
04:17पूछा है हलाकि पूरे मामले को देकर स्वामी अमुक्तिश्वर अनंत पहले ही कह चुके है कि शंकराचारे कौन होगा यह कोई व्यवस्ता यह संतों के अपनी व्यवस्ता वो डिसाइड करती है लेकिन प्राधिकरण नोटिस दिया नोटिस के साथ कुछ तस्वीरें भी �
04:47अब मुक्तिश्वर अनंत की तो ये इंडिया टोड़े की आज तक की ये ओवी वैन की भी तस्वीर इसमें है और ये कल की घटना है जब यहाँ पर प्रेस कांफरेंस के दौरान हमारी गारी खड़ी थी यानि कि जिस तस्वीर को मेला प्राधिकरण ने दिखाया है ये कल क
05:17ये नूटिस क्यों नहीं याद आया जब उन्होंने शिविर के लिए जमीन अवंटिक की तब ये नूटिस क्यों नहीं याद आया क्योंकि मामला तो तीन साल पुराना है और तीन साल पुराने मामले में दो हजार पचीस के कुम्भ में भी स्वामी अमुक्तिश्वरानन को
05:47क्यों नहीं आई मौने मावस्यक के मौके पर संगामिस्नान के लिए जा रहे स्वामी अव्मुक्तेश्वरानन को रोका गया प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि वो बिना अनुमती के संगामिस्नान करने जा रहे थे और अपने शिश्यों के लाव लश्कर के साथ और सबस
06:17गारी पर स्वामी अव्मुक्तेश्वरानन सवार थे वो हम आपको दिखाते हैं पहले तो यह दिखाते हैं मेलिए निकले है यह पूरा यह पालकी है अगर देखा जाए यह पालकी है यह महराज जींख की
06:43गद्धी है और यह उसके बाद नीचे अगर हम जब जाते हैं को यह आगे
06:47और यह पहिए लगें यह दो पहिए लगें बस यह चार पहिए सिंप्ल से
06:53चार पहिए कोई मोटर नहीं है और इशी को घसीतने के लिए आटो डिवेन नही
06:58नहीं है कि मलब अपने आप गाड़ी में एकसिलेटर भरा और चलती चली गई यह सिंपल से पहिये हैं और इन पहियों को ही यह रूप दे करके और आगे यह पाल की हार आगे गद्दी रखी गई उस पर स्वामी अमुक्तिश्वरणन बैठते हैं और यह आगे का यह हैंडेल
07:28इसी को जब मौनिम आवस्या के मौके पर अमुक्तिश्वरणन जी को रोका गया और वापस ले जाए गया तो इसी गाड़ी को खीशते हुए साधी वर्दी में कुछ लोग दिखाई पड़े जिनके बारे में कहा जा रहा कि उत्तर प्रदेश पुलीस के वह जमान थे और �
07:58जा रहे हैं तो जो प्रशासन के द्वारा कहा गया कि यह गाड़ी है और अमुक्तिश्वरणन जी अपनी गाड़ी से जाना चाहते थे तो यह वो गाड़ी है जिसको प्रशासन गाड़ी बता रहा है और अमुक्तिश्वरणन की तरफ से यह पालकी नाम दिया गया है कि य
08:28शिविर के बाहर बैठे हैं, बाहर बैठकर उनकी जिद है या संत टेक है कि जब तक प्रशासर ने जो उनका अपमान किया है, उस अपमान पर छमा नहीं मांगेंगे, वो दुबारा मागंगा का इसनान नहीं करेंगे, तब तक वो ऐसे ही अपने शिविर के बाहर बैठे रहे
08:58झाल

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