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Ghulam Bashah Sundri Episode 34 - 5th May 2026
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00:24देखिए नया ज्रामा सीरियल एक महब्बत और
00:28बहुत चल्द सिर्फ क्रीन एंटर्टेन्मेंट पर
00:58पेटी तुमसे महब्बत नहीं करती हा लेकिन मैं तो महब्बत करता हूना उससे बाशामीर अली यह काफी नहीं है उसके
01:04लिए
01:07खबते रहने का गुलान के साथ में मेरे साथ पूबत
01:35लाज ममा को हटकरियां किसने लगाई हैं?
01:37सर वो मजर्म की माँ है सर तुम्हें जरा भी शरम है?
01:44यह मेरी माँ है
01:48खोलो इने
01:54अगर पाश्चा यहां आए ना तुछ के साथ चली जाना
02:01डरना नहीं अच्छा आपसे बहुत प्यार करता है वो
02:06कुछ भी हो जाए आपको कभी नुकसान नहीं बचाएगा
02:20और क्या खड़े बगजाएगर रए घुलाम और सुन्दरी को ढूंडों
02:23मेतर साथ, मेतर
02:31बाश्या, मेरे घुलाम ने कुछ भी नहीं किया
02:34बस सुन्दरी से महबत किया और कुछ भी बुरा नहीं किया
02:40उसे माफ कर दो, बख्ष दो उसे
02:43उलाम और सुन्दरी यहां नहीं है लाजो अमा
02:45क्या, तुम्हारे पास नहीं है
02:49तो फिर कहा हैं बाश्या, यह क्या हो रहा है बाश्या
02:54बस कर दे लाजो
02:57तेरे बेटे ने हवेली में मुसीबत खड़ी की वी है
03:01दोका दिया उसने हमें दोका
03:05मुझे ता लगता है बुआ को उसी नहें मारा है
03:07और सुन्दरी को लेकर भाग गया है
03:11मेरा घुलाम ऐसा नहीं कर सकता
03:13वो नीच जात कुछ भी कर सकता
03:15बस करे अमा, बस
03:23अपका कोई हक नहीं है लाजो अमा से ऐसे बात करने का
03:27इनका कोई कुसूर नहीं है इनोंने कुछ नहीं किया
03:30क्यूँनी कह सकती मैं ऐसे
03:33ये जो हवेली में तमाशा हो रहा है न सब इसी की वज़ा से हो रहा है
03:39निकालना नहीं चाहिए था बरके जिन्दा गाड देना चाहिए था
03:43आँ वैसी जैसे आपने अपनी मांता को रवायात में गाड दिया
03:48बस
03:59बस बार्शा बस
04:02अब तुमारे मुसर में मज़ीद एक लफ़ भी नहीं सुनूँगा
04:09तुम्हे जो बर्जी करना करो
04:13लेकिन साथ जान के साथ तुम इस लहजे में बात नहीं कर सकते
04:20आप लोग यहां क्यों बैठे है
04:23जाएए जाके अराम करें मैं हूँ ना परेशान
04:25मुझे परेशान होने दीजिए
04:48अच्छो मा
04:53शुपे दम करता होता कि तुम्हारी दवाओं से मेरा रास्ता असान हो जाए
04:58जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए जाएए
05:18जाएए जाएए जाएएए जाएएए जाएएए जाएए जाएए जाएएए जाएएए जाएए�
05:32मेरा क्या कुछ उड़ता, मा? मैंने क्या किया था? सब कुछ खातम हो रहे हैं.
05:46तुम तैयार नहीं हुए अभी तक? बेटी के घर जाने नाश्ता लेकर?
05:51वहां भी जाने के जरूरत नहीं है. सुने के वहां बहुत बड़ा तुफान आगे.
05:57अच्या, क्या हुआ है वहां पर?
05:59सुन्दरी अवेली से भाग गई.
06:03और बुवा को भी किसी में कतल करती है.
06:06बुवा की मौत के मुझे अफसूस है.
06:10लेकिन सुन्दरी के जाने के मुझे कोई गम ने.
06:14हमारे हक में तो अच्छा ही हुगा ना?
06:17बाश्या सुन्दरी से शादी करके ही हमारी बेटी की जिन्दगी को अजीरन बनाना चाहता था.
06:22लेकिन बाश्या ने हमारी बेटी को तलाग की धंकी भी दी है.
06:25हमारी बेटी को तलाग ने दी सकता.
06:28और मैं उसे ऐसा करने ने दूँगा.
06:31और अगर उसने ऐसा कर दिया तो?
06:34जैसे मैंने जहांदाद की खड़ी फसले बरबाद की थी,
06:37हम उसकी नसले बरबाद करते हूँगा मैं.
06:42खुर्बान हली, मैं तो बस अब यह चाहती हूँ कि हमारी बेटी की जिंदगी में कभी कोई गम ना है.
06:46और नहीं परिशाने हैं.
06:50ऐसा ही होगा. तुम परिशान ना हूँ.
06:55बस तुम चलने की तैयारी करो.
06:59आज वाजाना कुछ मुनासिब नहीं लग रहा.
07:01ऐसा करते हैं कि कल चले जाएंगे.
07:07ठीक है. जैसे तुम्हारे मरसी.
07:19बादशा संद्री तब नहीं पहुंच पाएगा. कभी नहीं.
07:31बिटाम, जरा दिल को सुकून दो.
07:36तुम बिसमिला कवर्थ किया करो.
07:39ताके तुम्हारे दिल की खुटन जरा कम हो जाए.
07:42सुकून?
07:48मुझे तु ऐसा लगता है कि मेरी जिंदगी से सुकून रूट किया है लाजाओंबा.
07:57सुन्द्री को मुझे ऐसे छोड़ के नहीं जाना चाहिए तुम्हारे तुम्हारे.
08:02बिटा दिल के फैसले समझना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है.
08:09सुन्द्री से बेहाद महुपत करता हूँ मैं.
08:14वो मेरी जिंदगी है, मेरा सुकून है, उसके बगएर सब फिरान है.
08:22पिटा, महुपत दो तरफा हो तो वो सुकून देती है.
08:28और अगर एक तरफा हो तो सिर्फ तकलीफ होती है.
08:33तुम जानते तो हो के सुन्द्री खुलाम से महपत करती है.
08:44जानता हो.
08:50लेकिन ये दिल को कैसे समझाओ?
08:52बेटा, दिल के फैसले वक्त के साथ समझा चाते हैं.
08:58लेकिन महपत को इस तरह से सबरदस्ती कैद नहीं किया जा सकता.
09:06बाशा, सुन्द्री और खुलाम का कहीं बता नहीं चल रहा?
09:11और फिर बुआ कि इस तरह से मौत, ये सब कुछ क्या हो रहा है?
09:16बेटा, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.
09:20तुम किसी तरह से घुलाम का पता लगाओ, सुन्द्री का पता लगाओ.
09:24मुझे डर है कि कहीं उत्पे कोई मुसीबत ना आ गरी हो.
09:28आप बेफिकर रहे हैं, गुलाम और सुन्द्री तक पहुंच जाओंगा.
09:36तकि मैं गुलाम को शादी नहीं करने दूँगा, सुन्द्री से लाश होंगा.
09:46सुन्द्री सिर्फ मेरी होगी, मैं उसे नकाह करूँगा, जैसे ही वो मुझे मिल जाए.
09:55हारावने.
10:06हारावने.
10:31पास्षाना तशीका भी माफ निकरूगा
10:34तूने सिर्फ चीनना सेखा है
10:37तू एक बात भूड रहा है
10:41अगर वो तेरी बीवी भी होती न
10:43तो तेरी नाक के नीची से उसको नकाल के ले जाया था
10:46और तू कुछ ना कर पाता
10:47यूँकि मुझे दे के अपनी चीज़े बापस लेनी आती है
10:56मेरा हक मेरी जगा मैं में तो सबर कर लिया था या
11:03अपना हिसा अवेशा छोड़ता है हूं लेकिन महबबत नहीं
11:15अपनी महबबत नहीं दे सकता नहीं दोगा
11:21यार भी ये तू मेरा घद्धार है तू खुलाब
11:30बाश्चा अगर तू ये समझ रहा है कि तू मुझे कैद करके मुझे मेरी महबबत चीन लेगा
11:33तो मैं ऐसा नहीं होने दूगा हर्गिस नहीं होने दूगा
11:51ये कैसी किसमत पाई है मैंने बाद खो दिया तू मा मिली मा मिली भी तो बेबस और बेकस
12:17महबबत मिली तो इसानों तले ये कैसे रिश्टों की ये दिलदल में मुझे डाल दिया खुदाया
12:26मेरी मदद कर अल्ला अम्मा
12:38खुलाम
12:46आहाँ हो तुम दोनों तुम अचे दूड़ते क्यों नहीं हो
12:52मचे दूड़ते क्यों नहीं
13:04अपनी बेटी को पाकर मैंने सोचा था
13:08कि मेरी जिन्दगी का सबसे हसीन खुआ पूरा हो गया है
13:24लेकिन यह खुआव इतनी जल्दी ढूच जाएगा मैंने सोचा भी नहीं था
13:31मैं कहां डूड़नों तुझे मेरी बेटी कहां हो तुम
13:39किधर तलाश करूं तुम्हें कहां जाओं मैं
13:45एक बात करने के लिए बुआ थी और वो भी नहीं रही
13:54बुआ मुझे माफ कर देना मुझे बुआ
13:58माफ कर देना
14:05मुर्ग तु दिल छोटा ना कर
14:07मेरी बात पर यकीन रख पाशा तुझे कभी नहीं छोड़ेगा
14:10ये तेरे और बाशा के नसीब का बंदन है
14:13नहीं अमा
14:16मुझे लगता है मेरा बाशा का ये बंदन तूट जाएगा
14:19वो मुझे छोड़ देगा
14:22सब कतम हो जाएगा
14:24अल्ला ना करे कभी भी कुछ ऐसा हो
14:29हुरक से सुन्दरी तेरे रास्ते का कांटा थी
14:33पर जो होना था वो तो हो गया
14:37ये अल्ला पाक का फैसला है
14:39तू तो बस दूआ कर
14:42कि बाशा सुन्दरी को न ढून सका है
14:48क्योंकि सुन्दरी की दूरी ही बाशा के दिल में तेरी मुपत का दर्वाजा खोलेगी
14:55नहीं है माँ
14:59मैं बाशा के दिल की कैफिया जानती थी
15:04वो सुन्दरी से बहुत महभबत करता है
15:07वो उसे ढूनने का
15:10ऐसा कुछ नहीं होगा
15:12तो मेरा यकीन रख
15:15और ये बात याद रख के तू बाशा की बीवी है
15:19उसकी इस्जत
15:25मुर्क
15:27अल्ला पाक दिल से निकलीवी दूआ कभी रख नहीं करता
15:31और मेरी दूआ है बेटा
15:34के बाशा तुझे वो ही इस्जत वो ही प्यार और मुहबते
15:38जिसकी तो हगदार है
15:40जो तेरा नसीब है
15:43अमा
15:45आपके अलफास मेरे लिए हिम्मत है
15:48अगर आप मेरे साथ इस तरह हैं
15:51तो वाकी शायर सब ठीक है
15:53तू सिर्फ मेरी बहू नहीं
15:55तरके मेरे दिल का सकून भी है
15:58तेरी खुशी में ही मेरी खुशी है
16:01मैं तेरा साथ कभी नहीं छोड़ूँगी
16:05मा
16:22सर उस दिन में आपको यही बताना चाह रहा था
16:24कि उस लड़की का नाम संदल नहीं
16:28लेकिन बात दर्मयान में रह गए साथ
16:32कोई फाइदा नहीं इन बातों का
16:35मुझे उसकी दोस थी शीमी
16:37इसे घर हम लोग गए थे यह लोग वहीं गए हमें चलो
16:39सर जब कॉलिज के रिकॉर्ड वाली बात हुई तो दुबारा गया था मैं वहाँ
16:42लेकिन शीमी अपनी फैमली के साथ कहीं चली गई
16:47शायद उन्हें अपने जूट का अंताजा हो गया था कि हम दुबारा वापस आएंगे
16:51हाँ तो पर जाके पूरे अलाके को छान मारो ना कहीं ना कहीं तो होंगे ना वो
16:55मुझे वो हर हाल में चाहिए
16:56सर्म कोशिश कर सूर्ट सर पे है गरूब होने से पहले मुझे वो दोनों चाहिए
17:03जो
17:05जी सर्म
17:38सुन्दरी सुन्दरी
17:42तुम मुझे और मही महमपत को जरूर समझोगी
17:46मेरी जिंदेगी में वापस आओगी तुम
17:51जरूरा होगी
17:53क्या समझतर गो
17:56मैं अतनी असानी से उस से निकाह कर लूँगे
18:00इस ओलाम को तुम्हे माफ नहीं करूँगा
18:04उसने तुम्हें वरगलाया है
18:08मेरा यार गद्दार था
18:21मैंने बाशा की नहीं मानी
18:25ताहिस जैसे जालिम
18:26तो के बाश से शादी करने से पहले ना
18:29खुद को मान लोगे
18:36सुनो
18:37ये लो खाना खालो
18:39मुझे नहीं खाना ले जो यांसे
18:40तुम्हें क्या लगता है तुम्हारे भूका रहने से कुर्बान अली सरकार डर जाएंगे
18:45मैं कह चुक्यों कि मैं शादी नहीं करूंगे
18:47वो जो चाय कर ले
18:50अपनी इज़त पर समझवता नहीं करूंगे
18:52इज़त?
18:54कुर्बान अली सरकार के सामने
18:56इज़त बचाने के लिए बहुत हिम्मत चाही होती है
18:58अच्छे अच्छे अपनी हिम्मत खतम कर देते हैं
19:01कोई कुछ नहीं कर पाता
19:03बखवास बंद करो अपनी
19:05तुम्हारा कोई हक नहीं बनता
19:06मेरे मामले में बोलने का
19:07निकल जो यहां से फॉरण
19:09बहुत अकाड़े लड़की
19:12ये कुर्बान अली सरकार की हवेली है
19:15और यहां उन्हीं की हुकमत चलती है
19:17और तुम्हें भी उन्हीं की बात माननी बड़ेगी
19:19मैं किसी की बात महीं मानूगी
19:21मैं के तु दखा हुजए यहां से
19:40तुम्हां कहां हो तो
19:43प्लीज मुझे लेने आजा
19:45जिपार तेकल प्लीज मुझे लेहां
19:52जिए लाम का तुम्हां
20:33क्या मैंने कभी भी किसी के साथ कुछ बुरा किया
20:40तो क्यों कि आपने मेरे साथ ऐसा
20:46उसको ढून ढून के जब मैं ठक किया था तो वो मुझे आपके कदमों में मिल गई
21:00अब कहा तलाश करो उसे
21:04पता नहीं कहा लेकर चला गया होगा वो उसे
21:12वो आके मैयत कब आएगी
21:19भूस मार्टम के लिए गई है
21:23कल दो भैर तक आजाएगी
21:26खुशिश करना कि उनकी तत्वीन हवेली के आहते में हो
21:34वो हमारे बहुत खास
21:54को मुश्पर बरोसा करना चीए उसाद
22:00पुवा के साथ मिलकर आपने उसको हवेली से क्यों नकाला
22:04एक बच्ची
22:06जो अपनी पैदाइश पर ये अपनी मा के आहोश से चीन ले जाए
22:15अच्ची अगर सालों बाद उसे मिले
22:18और वो उसे अपनी खुशिया मांगे तो क्या एक माँ उसकी जोली को खाली चोड़ देगी
22:26यही तो मैं कह रहा हूँ आपको क्यों लगा कि मैं सुंदरी को खुशिया नहीं दे सकता
22:33मैं उसे बहुत खुश रखता अरानियों की जिंदगी देता
22:38तुम्हे पता भी नहीं चलो
22:42तुम फरश्टे से इंसान
22:46और इंसान से जान भर गर गर
22:55सिर्फ एक आशिक हो
23:10नहीं
23:13सुंदरी तुम्हारी महबत नहीं तुम्हारी जिद है
23:19और महबत और इश्क में जिदबाजी नहीं की जाती
23:30तुमने भी उसके साथ वो ही करने की कोशिश की
23:32जो तुम्हारे मामू ने मेरे साथ करने की कोशिश की
23:37महबत में जबरदस्ती
23:42तुम्हारे सब कॉंशिस में उसके थपड़ की गुश तुम्हें तंग कर रही है
23:45क्योंके तुम उससे बदला नहीं ले सके
23:50मेरी बात अभी खत्म नहीं हुई
23:54तुम जानते थे कि तुम उसे डरा नहीं सकते
23:58लेकिन उसे हासल करके उसे मुखबत की सुनेरी जन्जी जरूर पहना सकते हो
24:12आपको मेरी मुखबत पर शक हो रहे हैं
24:15तुम्हारे इस रूप में मुझे शक से निकाल कर यगीन में मुक्तला कर दी
24:24तुम भी अपने बाप की तरह बराबर के मुझर रहे हैं
24:33उसने मुझे जवानी में बरबाद किया था और तुम ने बढ़ा पिन
24:43रस्म और रिवाश तोड़ने के बड़े दावे करते थे ना तुम
24:49तुम्हारी वज़ा से एक मा ने परसो बाद मिली हुई बच्ची ब्याही नहीं
24:55बगाई है तुम्हारा वो दोस्त जो तुम्हारा भाई है जिसने पूरी जिन्दगी तुम्हारी उलामे के परापरी नहीं हलाकि उसका उसका
25:16हक बनता था कभी तुमसे कुछ नहीं मांगा
25:26बिलकुल बिलकुल सही शखस जुना है मेरी बेटी ने
25:34वो मःत जो कुर्बानी देना चानता हो सिर्फ वो ही इस काबिल होता है कि उस पर कुर्बान हो जाए
25:42तो मैं भी सुन्दरी के लिए कुर्बानी दे सकता हूं
25:45पाशा, सुन्दरी को तुमसे नहीं खुलाम से महबत है वो उसके साथ जिन्दगी गुतार माशाथी उसे गुजार में दो
25:52नहीं हमाबाको
25:57आपको शायद अंधासा नहीं है में सुन्दरी से कितनी महबत करता हूं
26:05और में उसके लिए कुछ भी कर सबता हूँ.
26:16यह यह बबाई नहीं छोड़ दी?
26:33पाशा, खुलाम ने आखरी दफ़ा मुझे इस फोन पे फोन किया था।
26:38इससे तुम खुलाम और सुंदरी का पता लगा सकते हैं।
27:01यह एक नमबर भेज रहा हूँ.
27:04इसके गेंच मुझे सारी डीडियल्स रही हैं और लोकेशन भी.
27:10आस भी को इंवाल कर सकते हो तो.
27:19मुझे माफ कर देना.
27:23यह मौपत भी बहुत जालम चीज होती है।
27:30साहे महबू क्यों यह वलाद के।
27:37मुझे बस मेरी मौपत चाहिए।
27:43इस मौपत ने मुझे एक सालिम बना दी।
27:52तकर गुलाम सुंदरी से निकाह कर भी लेगा तो मैं उसकी जान ले रूँगा।
28:03लेकिन सुंदरी को हासिल करके रहूंगा।
28:06पून रिसता है।
28:11मैंनू दिसता है।
28:18मेरी अखियाच फून रिसता।
28:22सोड़ा यार नयो मैनू दिसता।
28:25ता जटतां जहावी रूसे आ।
28:28दिल जाने अक जाने लुफदा।
28:31करिश के दा रंग वथरा।
28:37कहां रहागी तो तुम।
28:38कबसे तुम्हारा इंतजार कर रही है।
28:40बेकम साहबा में कैथ खाने की तरफ गई थी।
28:42वहाँ एक नई कैदी आई है।
28:44उसे खाना देने गई थी।
28:46कैदी।
28:47कौन है और किस चुर्मे आई है।
28:49वह तो बेकम साहबा मुझे नहीं पता
28:51लेकिन कोई इश्क का मामला लग रहा है।
28:54बहुत जिदी रड़की है।
28:55खाने को हाथ भी नहीं लगा रही थी।
28:57बस एक ही नाम बार बार ले रही थी।
28:59घुलाम घुलाम।
29:01क्या?
29:04यह तुम किस खुलाम की बात कर रही है।
29:06वह तो बेकम साहबा मुझे नहीं पता
29:08लेकिन हाँ खादिम बता रहा था
29:10कि हवेली के दूसरे कैद खाने में एक रड़का कैद है।
29:14उसका नाम गुलाम है। यह शायद उसी कोई पकार ली है।
29:20अच्छा तुम जाओ।
29:28सुंद्री और गुलाम यहां।
29:34नहीं नहीं।
29:37यह कैसे हो सकता है।
29:52मैंने सुना है कि आपने सुंद्री और गुलाम को हवेली में तैद कर रख है।
30:01ओ, तो तुम्हें ख़बर मिल गई।
30:03जी मिल गई।
30:04लेकिन आपने क्यों खैद किया, क्या मकसद है इस सब के पीछे आपका।
30:11बदला।
30:12बदला।
30:13बदला।
30:14कैसा बदला।
30:16मैं सुंद्री से शादी करके खुशी से बदला लूगा।
30:23अपने बाइस कंदर की मौत का बदला।
30:27क्या।
30:29आप सुंद्री से शादी करना चाहते है।
30:33खुश खुदा का खौफ करे कुर्बान हली।
30:35आपकी और उसकी अमर में जमीन आसमान का फर्क है वो तो हमारी बच्ची के बदला।
30:41बबस।
30:42बेटी नहीं है अमरे।
30:47और रहा अमर का फर्क है।
30:49तो यह शादी मेरी चाहत के लिए नहीं है।
30:52यह शादी खुशीद के गरूर को खाक में मिलाने के लिए होगी।
30:56वही खुशीद जिसमें मेरे भाई को दुखकार दिया था।
31:01उसे अपनाने से इंकार कर दिया था।
31:05शही खुशीद चब सुन्दरी को मेरे निकार में देखेगी।
31:11तो उसकी बेबसी का तमाशा में अपनी आँखों से देखुगा।
31:16बदले की आँख में इतने अंदेमत बन।
31:20कि किसी मासून के जिंदगी बरबाद हो जाना।
31:25इसमें इस बच्ची का क्या कसूर।
31:28उस गुणा के सजा उसे क्यूं दे रहे हो जो उसने किया ही नहीं।
31:33रिशादी सजा के लिए नहीं।
31:36बदला लेने के लिए होगी।
31:41और इससे एक और चीज़ ठीक हो जागी।
31:45मेरी मुर्ख के जिंदगी में सिकून आ जाएगा।
31:51बद्शाद सुन्दृ से शादी करके मेरी मुर्ख को तकलीद देना चाता था न।
31:59सुन्दृ जिससाब भाश्चा अपनी बीवी बनाना चाता था आप वह ऐसा नहीं करें।
32:06मैं उससे ऐसा नहीं करने दूगा।
32:10मैं उससे निकाह करूंगा।
32:13लेकिन मैं सोतनबरताज नहीं कर सकते।
32:20आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे।
32:24यह सब गलत है कुरवान अली, यह मेरे साथ जयाती होगी।
32:30मेरा और सुन्दृ का निकाह, इस हवेली और मेरी जिन्दगी में तुम्हारी अहमियत कम नहीं करेगा।
32:43बस मुझे अपनी बेटी की जिन्दगी में सिकून लाने का इससे अच्छा और मौका नहीं मिलेगा।
32:50और दर्सों से खुर्शीच से बदला लेने की आग जो मेरे सीने में जल रही थी, वो सुन्दृ से निकाह
32:57करके बुच जाएगी।
33:01तुम्हे मेरा साथ देना होगा।
33:14वरना।
33:14विम्हेटार समयसेक्ति है।
33:22लाक पुच भी कर सकता।
33:49झाल झाल
33:56कई उसने उनाहम से निकाह न कर लिया
34:00अगर उसने निकाह कर लिया तो मैं उसे छोड़ू मा नहीं
34:22कब तो खुद को इस परशानी में डाले रखो गया
34:27एक पल तो अपने जिन्दगी को चैन दो
34:39मेरी मुहबबत इस पर ना जाने कहा होगी
34:43किस हाल में होगी और आप कह रहे हैं कि मैं जिन्दगी में चैन हो
34:49मेरा जैन मेरा सकून मेरा सब कुछ परबाद हो चुका है
34:55दुनिया जजबात से नहीं मसलियात से चलती है
35:01हर जंग एक ही दिन में नहीं जीती जाती
35:07कभी कभी वक्त को अपने हख में मौनने के लिए सबर करना पड़ता है
35:14सबर? कौन सा सबर? वोई जो मैंने उस रात किया था
35:21अगर आपने मेरी सीधी सीधी सुद्री से शादी करा दी होती न तो मुझे मुझे मुल्क से शादी ना करनी
35:26पड़ती
35:28ना सुद्री हवेली चोड़ के भागती
35:33आपकी इस मसलियात ने मुझे बरबाद कर दी है
35:55मैं जानता हूँ तुम इस वकट बहुत तकलीफ से गज़र रहे
36:03खुलाम और सुन्द्री का जल पता लग जाएगा
36:11एक बात तुम्हें बतानी थी
36:15बुआ की मौत की वज़ा से कल तुम्हारे सुस्राज़ वाले नहीं आ पाई थे
36:22मजबूरी है
36:24आज रात दावत पे आना है
36:26और वहां तुम्हारा होना जरूरी है
36:30यह हमारे खांदान की एज़द का सवाल है
36:34आपको अब भी उन्हीं की पड़ी है
36:39मेरा कोई लेना देना नहीं है ना उन से ना उनकी दावत से
36:48खुन किया अपने मेरी महपत का
36:52यह किसी भी रस्म यह रिवाज का हिस्सा नहीं बनूँगा
36:58देखो घुलाम और सुंद्री की बाजियाबी के लिए मैं खुद मेहनत कर रहा हूं
37:05अपने हर अख्तियार का इस्तिमाल कर रहा हूं
37:09हर जगा फोन गुमा चुका हूं
37:14और मुझे पूरा यकीन है कि वो जल्ब मिल जाएंगे
37:16और जब वो मिल जाएंगे
37:21मैं तुम से अपना किया वादा पूरा करूँगा
37:24मुझे अपना वादा याद है
37:26कुछ नहीं होगा ना आप से ना आपके अख्तियारात से
37:32अब जो भी करना होगा ना मुझे खुद करना होगा
38:13यह सुंदर अवेली नहीं है
38:15मैं उस हवेली में पला बढ़ाओ
38:17हर जगा का पता है मुझे
38:20क्या पास्षा मुझे गई दूर
38:23किसी और जगा
38:26किसी और जगा रखाया उसने
38:29मकर कहां हूं मैं
38:54किसी और जगा पता है