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Fun
Transcript
00:00We are going to a very good trip on a very good trip.
00:05A trip on a trip which is a good trip which is a good trip that is a good trip.
00:10If you think about it, there is a sea on the sea, a sea, a sea, a sea, a sea,
00:15a sea, a sea, a sea and a sea.
00:19This is Baghdad, the city of the world, and the city of the world.
00:23And this city of the world is a famous fan of the Khelifah Harun al-Rashid.
00:28तो चलिए, आज की इस प्यारी सी कहानी का आगास करते हैं, जहां संगीत सिर्फ कानों तक नहीं, बलके सिधा
00:35रूख तक पहुचता है
00:37लेकिन कहानी में आके बढ़ने से पहले न, एक बहुत ही गहरा राज है, जो हमें थोड़ा सा सोचने पर
00:43मजबूर करता है
00:44क्या संगीत सिर्फ सुनने के लिए होता है? सोचिए जरा, ये लगता तो एक छोटा सा सवाल है, मगर इसकी
00:50गहराई बहुत ज्यादा है
00:52क्या धुन सिर्फ हवा में तेरती हुई आवाज है? या इसका कोई और जादूई रास्ता है, जो सीधा वहां जाता
00:59है जहाँ अलफाज खतम हो जाते हैं? आईए, आज इस सवाल का खामोश जवाब ढूनते हैं
01:04रात के वक्त ना, बगदाद का अपना एक अलग ही जादू होता था
01:09जरा तसवर कीजे एक अजीम शाही महल का, जो पूरी दुनिया में अपनी शान और शौकत के लिए मशूर था
01:16यहां की फिजाओं में आपको सिर्फ और सिर्फ हुक्मरानी नहीं मिलेगी
01:20बलके यहां खुबसूरत शायरी थी, मीठा संगीत था
01:23रोशन दालान और जगमगाते चराग इस बात के गवाद है कि यहां हर रात एक नई दिलकश महफिल सच्दी थी
01:31यह महल वैसे रातों को सोता नहीं था, बलके सुरों और कहानियों की एक नरम सी चादर ओड़ कर जागता
01:38रहता था
01:39महल की दो कनीजें, आवाजों का जादू
01:42तो हुआ कुछ यूँ कि एक रात इस अजीम महल के अंदर दो इंतहाई खुबसूरत और होश्यार लड़के आई
01:51अब देखिए जहां दो अजीम फनकार हों, वहाँ तोड़ा सा खामोश तनाव तो जरूर होता है
01:58उन दोनों की दर्मान भी एक अजीब सम्मकाबला शुरू हो गया
02:02मगर गौर करने की बात ये है कि ये मकाबला किसी तलवार या ताकत का बिलकुल नहीं था
02:09ये तो एक नहायत ही नर्म मगर गहरा सुरों का मकाबला था
02:14एक खामोश जादूई जंग जो सिर्फ और सिर्फ असली हुनर के मैदान में लड़ी जा रही थी
02:20जहां असलहा सिर्फ उनकी मीठी आवाज थी
02:24जैसे ही पहली लड़की ने गाना शुरू किया ना
02:27तो उसकी आवाज बिलकुल रात की ठंडी हवा की तरह नरम और हलकी थी
02:31उसने एक ऐसा मीठा गीत गाया कि पूरा महल महाँ बैटा हर एक शक्स बिलकुल खामोशी से उस जादू में
02:39गुम हो गया
02:39मगर फिर दूसरी लड़की ने अपने आवाज उठाई
02:43उसके धुन में मीठा बंदो था
02:45मगर उसके साथ एक बहुत गहरी उदासी जुड़ी हुई थी
02:48उसकी आवाज में दिल तूटने का वो दर्थ था
02:51जिसने महल के उन चमकते चरागों को भी जिसे थोड़ी देर के लिए मध्धम कर दिया
02:56इस संगीत के सफर में सिर्फ कानों का काम नहीं था
03:00बादशाह हरून अलरशीद पहले तो खुबसूरत आवास को आराम से सुन रहे थे
03:04उनके कानों में मिठास घुल रही थी
03:07मगर वो बहां रुके नहीं
03:10आइस्ता आइस्ता उन्होंने उन अलफाज के पीछे चुपे
03:13उस शदीद दर्द को पूरी तरह महसूस करना शुरू किया
03:17बादशाह अब सिर्फ गीत नहीं सुन रहे थे
03:19वो एक गहरी सोच में ढूब गए थे
03:22वो उस धुन में छुपेवे गम को अपनी रूह तक उतरता हुआ महसूस कर रहे थे
03:26और वैसे यही वो मकाम है जहां संगीत एक नया रूप ले लेता है
03:31और फिर महल की उस धुनली सी रोशनी में
03:35दूसरी लड़की ने धीमी कपकपाती हुई आवाज में कुछ ऐसे अलफाज कहे
03:40जो किसी गहरे राज की तरहां थे
03:43उसने कहा
03:44इनसान का दिल भी अजीब होता है
03:47कभी महबत में जीता है और कभी उसी महबत में तूट जाता है
03:52इन अलफाज की गहराई को जरा महसूस कीजिए
03:55ये सिर्फ चंद लवज नहीं है
03:57ये इनसानी जजबात का एक मुकमल निचोड है
04:01सच कहूं तो उस आवाज में इतनी कशिश
04:03और इतना सच था
04:05कि महल की बड़ी बड़ी दिवारें भी जैसे सुनकर ठहर सी गई
04:09गीत खतम होते ही दरबार में अचानक एक गहरी सुनसान खामोशी चा गई
04:15सब कुछ रुक गया
04:16कोई हरकत नहीं कोई आवाज नहीं
04:19सिर्फ और सिर्फ एक रुबाब की हलकी धीमी सी धुन
04:23मेफिल की उस तारीख और सुनहरी फिजा में गुँज रही थी
04:27ये न वो खामोशी है जो किसी बहुत अजीम गीत के खतम होने के बाद दिल में ठहर जाती है
04:34एक ऐसी खामोशी जो वाकी हजार लवजों से ज्यादा वजन रखती है
04:38उस वक्त उस मुकमल खामोशी के बीच हारून अलराशिद धीरे से मुसकराए
04:44बादशा समझ गए थे कि असली हुनर आखिर होता क्या है
04:49उनकी समझ में आ गया था कि संगीत का असली जादू सिर्फ किसी आवाज के मीठा या खुबसूरत होने में
04:57थोड़ी ना है
04:58बलके संगीत की असली काम्याबी तो उस मकाम पर है
05:02जब वो कानों से गुजर कर सीधा इनसान के दिल को चूले
05:06और अंदर के सोईवे जजबात को जगा दे
05:09उनकी ये मुसकराहट एक सदियों बुराने रास के खुलने की मुसकराहट थी
05:15बादशा ने किसी एक की हार या जीद का फैसला किसी आम तरीके से नहीं किया
05:21उन्हों ने दोनों लड़्कियों के चादू को दिल से माना
05:24और दोनों को सुनेहरे और कीमती तोफ़े इनाम में दिये
05:28मगर तोफों के साथ-साथ उन्होंने एक नहायत ही
05:34خلیفہ نے کہا کہ
05:48جب رات احسطہ احسطہ ڈھلنے لگی
05:52تو چاند کی
05:53احساس اور بھی حسین ہو گیا
05:56اس رات ہواوں میں
05:59سنگیت اور درد کا ایک میٹھا
06:27اسجدوی قصہ کے آخر میں
06:291, 2, 3, 4
07:02Shabbat khair.
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