00:00एक जबरदस्ट बिजनिस टील और एक मजबूरी की शादी.
00:04कबीर शाह, इसलामाबाद का रूथलिस बिजनिसमेन,
00:08सिर्फ अपने फाइदे के लिए मुस्कान से निकाह कर लेता है.
00:12मुस्कान, एक सिंपल, इनोसिंट और खूबसूरत लड़की,
00:17अपने अब्बू की इज़द बचाने के लिए मजबूरन शादी के लिए मान जाती है.
00:21निकाह हो जाता है.
00:23कबीर का चेहरा पत्थर जैसा कोल्ड होता है.
00:26वो मुस्कान से कोई बात नहीं करता.
00:28सिर्फ एक डील समझता है.
00:30लेकिन मुस्कान चुप चाप सब सह लेती है.
00:34पार्ट वन यहीं खत्म होता है.
00:36जब निकाह के बाद कबीर बाहर अपनी ब्लैक मसेडीस कार के पास खड़े होकर मुस्कान का इंतजार कर रहा होता
00:42है.
00:42और मुस्कान अपने अब्बु अम्मी से रुखसती के लिए तयार होती है.
00:53रात का वक्त था और मुस्कान अपने कमरे में खड़ी थी.
00:57आँखों में आसू और दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी.
01:01उसने अपने अम्मी और अब्बु को जोर से गले लगाया और रो पड़ी.
01:05अम्मी, बाबा, उसकी आवाज रूब में डूब गई थी.
01:10अम्मी ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरता हुआ कहा,
01:13बेटा, खुश रहना, अल्ला तम दोनों को हमेशा साथ रखे.
01:18अब्बु ने भी उसे सीने से लगाया,
01:20खुद भी आंसू रोकने की कोशिश करते रहे,
01:22फिर धीरे धीरे उसे गेट की तरफ ले गए.
01:25तीनों बहुत आहिस्ता कदम बढ़ाते हुए गेट तक पहुँचे,
01:28बाहर रोड पर एक शाइनी ब्लाक मरसरीज कार खड़ी थी,
01:32और उसके पास कबीर शाह सीधा खड़ा था.
01:35सूट पहने हुए, चहरा बिलकुल सख्त,
01:38जैसे कोई इमोशन ही ना हो.
01:40उसने एक बार भी अंदर की तरफ देखना जरूरी नहीं समझा.
01:44मुस्कान के अब्बू ने उसका सूट केस उठाया,
01:46और चुप चाप कार के ट्रंक में रख दिया.
01:49फिर उन्होंने मुस्कान की तरफ देखा,
01:51और हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा,
01:54जा बेटा, अपना खयाल रखना.
01:56मुस्कान ने एक बार फिर अपने अम्मी अब्बू को देखा,
01:59आसू पोछे और धीरे धीरे कार की तरफ बढ़ गई.
02:03कबीर ने सिर्फ ड्राइवर की तरफ इशारा किया,
02:05मुस्कान जाकर कार में बैठ गई,
02:07और कबीर भी दूसरी साइट से अंदर आ गया.
02:10दर्वाजा बंध होते ही सिर्फ इंजन की हलकी सी आवाज रह गई.
02:14दोनों के दर्मियान पूरी खामोशी थी.
02:16मुस्कान विंडो से बाहर देखती रही,
02:18और कबीर सीधा रोट पर नजर जमाय ड्राइव करता रहा.
02:21उनके बीच एक लफस तक का तबादला नहीं हुआ.
02:24कार धीरे-धीरे मुस्कान के पुराने महले से दूर होती गई
02:28और इसलामाबाद के उंचे बिल्डिंग्स की तरफ बढ़ने लगी.
02:31कार बेस्मेंट के बजाए एक बड़े और खुपसूरत टू-फ्लोर मारला हाउस के मेन गेट पर जाकर रुखती है.
02:38कबीर ने कार का दर्वाजा खोला और बिना कुछ कहे बाहर निकल गया.
02:42मुसकान कुछ पल के लिए वहीं बैठी रही, फिर धीरे से उतर कर बाहर आई.
02:46रात का वक्त था और घर के बड़ी-बड़ी लाइट्स चल रही थी.
02:50पूरा घर बहुत शांदार लग रहा था.
02:52Modern design, सामने बड़ा सा garden और उपर तक जाने वाली चमकती हुई marble stairs.
02:59कबीर सीधा अंदर चला गया, जैसे उसे किसी का इंतजार ही न हो.
03:03मुसकान अपना सूट केस पकड़ कर धीरे-धीरे उसके पीछे चलती हुई अंदर आ गई.
03:07हॉल के अंदर एक मेट खड़ी थी.
03:09कबीर ने उसकी तरफ देखा और सख्त आवाज में कहा,
03:12इसे उपर वाले रूम में ले जाओ.
03:14मेट ने मुसकान की तरफ देखा और नर्मी से मुस्कुराते हुए कहा,
03:18आईए बेटी.
03:19मुसकान चुपचाप उसके पीछे चलती हुई marble stairs चड़ने लगी.
03:23उपर जाकर जो रूम था वो बहुत बड़ा और लग्जूरियस था.
03:27किंग साइज बैड, एक बड़ी dressing mirror, walk-in closet,
03:30मेट ने मुसकान को आराम से बैट पर बिठा दिया और प्यार से पूछा,
03:34बेटी, कुछ खाना खाएंगी, मैं बना के लाओ.
03:37मुसकान ने हलकी सी आवाज में मना कर दिया.
03:40नहीं आउंटी, अभी नहीं.
03:42मेट मुसकुराई और धीरे से रूम से बाहर चली गई.
03:45दर्वाजा हलकी सी आवाज के साथ बंद हो गया.
03:47अब मुसकान बिलकुल अकेली थी.
03:49वो बैट पर बैठी थी.
03:51अभी भी उसी ब्राइडल लहंगा में.
03:53इतना बड़ा कमरा देखकर उसे हलका सा डर भी लग रहा था.
03:56उसने धीरे-धीरे चारो तरफ नज़र डाली.
03:58हर चीज नई, महंगी और परफेक्ट थी.
04:02लेकिन उस सब के बीच उसके दिल में एक अजीब सी खुशी भी थी.
04:05वो हलकी सी मुस्कुराई और धीरे से खुद से बोली.
04:08जिस इंसान को मैं चुप कर देखती थी,
04:10आज वो मेरा हस्बन बन चुका है.
04:13फिर वो वहीं बैट पर बैठी रही,
04:14कबीर का इंतिजार करती हुई,
04:16दिल में थोड़ी सी बेचैनी,
04:18थोड़ी सी उमीद और बहुत सा प्यार लिये हुए.
04:20एक गंटा गुजर गया था.
04:23मुस्कान अभी भी उसी हेवी ब्राइडल लहंगा में बैठी थी.
04:26उसके पैर दर्द कर रहे थे,
04:28आँखें थक चुकी थी,
04:30नींद भी आ रही थी,
04:32लेकिन वो उठकर कपड़े भी नहीं बदल पाई थी.
04:35वो बैठ के किनारे बैठी,
04:37दर्वाजे की तरफ देखती रही.
04:39हर थोड़ी देर में उसके दिल की धड़कन तीज हो जाती थी.
04:42शायद कबीर आ रहा हो,
04:44लेकिन कबीर नहीं आया.
04:46मुसकान ने धीरे से सांस ली और अपने आप से बोला,
04:50शायद बहुत काम है उनके पास.
04:52तभी दर्वाजा खुला,
04:54कबीर अंदर आया,
04:56अभी भी सूट में,
04:57चेहरा ठका हुआ और सख्त.