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  • 2 months ago

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Fun
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00:00So do we know the you're gonna breaks now on the regular你
00:03being a bit here you're
00:10going to see what you
00:20totally about is there
00:29now
00:29We'll see you again.
00:38इस फैसले में ऐसी क्या खामी है इस उल्जन को सुलजाने के लिए हम कुछ एहम पहलों पर बात करेंगे
00:43पहले कप्तानी के तनाज़े और क्यादत के बोज को देखेंगे फिर कुछ आदातो शमार का जायजा लेंगे
00:49बाबर की बैटिंग पर पढ़ने वाले इस रात की बात करेंगे
00:52और आखिर में नए टेस्ट स्कॉर्ड की जल्कियों और कुछ काबले इतराज फैसलों पर नज़र डालेंगे
00:57तो शुरुआत करते हैं पहले हिस्से से यानि कप्तानी का ये पूरा तनाज़ो
01:01अगर हम टाइम लाइन पर नज़र डालें तो बोर्ट के फैसले एक ही दाएरे में घूमते नज़र आते हैं
01:06पहले बाबर को बेमिसाल एक्तियारात के साथ कप्तानी दी गई
01:09फिर जब टीम की कारकरदगी गिरी और तनकीद शुरू हुई तो उन्हें उहदे से हटा दिया गया
01:14और अब अब उन्हें दुबारा वापस लाया गया है
01:17जराय के मताबिक वर्ल्टेस चैंपियंशिप में नवे नंबर पर मौजूर टीम के लिए
01:21इस तरह पुराने सेटप के तरफ वापस जाना आगे बढ़ने के बजाए कई कदम पीछे जाने के मतरादिफ है
01:27अब आते हैं दूसरे हिस्से की तरफ
01:29क्यादत का बोज
01:31जराय ने एक बहुत जबर्दस बात कहिए कि मुझे टीम में बाबर एक खिलाडी के तौर पर चाहिए कप्तान के
01:36तौर पर नहीं
01:36दरसल ये जुमला इस पूरी बहस का निचोड है
01:39दलील ये दी जा रही है कि कप्तानी का दबाओ और हर नाकामी पर कुर्बानी का बकरा बनाया जाने का
01:43जो सिल्सला है न
01:44एक शांदार खिलाडी की इन्फरादी सलाहियतों को खा रहा है
01:47एक अजीम बल्लेबास को बचाना है तो उसे इस बोच से आजाद रखना ही होगा
01:51और अगर हम दुनिया के बाकी नामवर खिलाडीयों की मिसाले देखें तो बात बिलकुल वाज़े हो जाती है
01:56इंग्लेंड के जो रूट हों आस्ट्रिलिया के स्टीव स्मित या भारत के विराट कोली
02:01जब इंजैसे लेजंड्स ने एक बार कप्तानी छोड़ी तो फिर वो मुड़कर वापस नहीं आए
02:06उन्होंने अपनी सारी तवज्जों सिर्फ और सिर्फ अपनी बैटिंग पर लगा दी
02:11तज्ये के मताबिक बाबर का दुबारा कप्तानी कबूल करना उन्हें एक बार फिर शिद्दत तनकीत के निशाने पर लाखड़ा करेगा
02:18जिससे उनकी बैटिंग का खुद्रती फ्लो बुरी तरह मतासर हो सकता है
02:22चले अब बढ़ते हैं तीसरे इस्से की जानिब और कुछ आदादो शुमार का जाइज़ा लेते हैं
02:27अगर हम टेस्क रिकेट में कप्तानी के रिकॉर्ड्स का मुवाजना करें
02:30तो बाबर की क्यादत में खेले गए 20 मैचों में से 10 में फता मिली
02:34जबके दूसरी तरफ शान मसूद की क्यादत में 16 मैचों में सिर्फ 4 जीते गए और 12 में शिकस का
02:40सामना करना पड़ा
02:40ये आदादो शमार बिलकुल गैर जानत दारणा तोर पर ये कहानी सुनाते हैं कि आखिर बोर्ड ने क्यों महसूस किया
02:46कि उन्हें अपनी पुरानी क्यादत की तरफ ही वापिस जाना चाहिए
02:49आगे बढ़ते हैं चौत हिस्से पर बाबर की बैटिंग का जवाल
02:53ये आदादो शमार वाकई चश्म कुशा हैं
02:56पिछले तीन से चार सालों के दोरान रेड बॉल फॉर्माट में एक शदीद जवाल नज़र आता है
03:0232 मैचेज और ओसत सिर्फ साड़े अठाइस की
03:05और सबसे हरान कुन बात सिफर सेंचरियां
03:08जराय इस बात पर जोर देते हैं
03:11कि ये उस खिलाडी के आदादो शमार हैं
03:13जिसे दुनिया का बहतरीन बल्लेबास माना जाता है
03:16ये इस बात का जीता जाकता सबूत है
03:18कि कप्तानी के दबाओं ने उनके खुदरती खेल को किस हद तक जकड़ कर रखावा था
03:23और यही वो सबसे बड़ा खौफ है जिसकी निशान देही जराय ने की है
03:27बरसों की जिद्वजहत के बाद जब खिलाडी बिलाखिर अपनी खोई हुई फॉर्म
03:32और वो पुराना बैटिंग फ्लो वापस हासिल कर रहा था
03:34तो एन उसी वक्त उसे दुबारा कप्तान बना देना
03:37क्या ये खुद साखता तबाही का कदम नहीं है
03:40ये सवाल वागई परिशान कुन है
03:42खैर अब जरा बात कर लेते हैं पांचवे हिस्से की नए स्कौर्ड की जहलकियों पर
03:47इस नए स्कौर्ड में कुछ फैसले वाकी शांदार है
03:50जिनकी जराय ने भरपूर तारीफ की है
03:53मिसाल के तोर पर आमिर जमाल की वापसी एक जबरदस्त फैसला है
03:57इसके लावा उबैच्छा जैसे उभरते हुए नौजवान टैलेंट को शामिल किया गया है
04:01जो के एक बहुत मुझबत कदम है
04:02डिमेस्टिक क्रिकेट के टॉप परफॉर्मर अली उस्मान को भी मेरिक पर जगा मिली है
04:06और सबसे एहम बात
04:08मुहमद अब्बास, खुर्रम शैजाद और मुहमद अली जैसे
04:11रेड बॉल के माहिर बॉलस की मौझूदगी से
04:13टीम को वो तवील और दुरुस्त स्पेल्स मिल सकेंगे
04:16जिनकी टेस्ट क्रिकेट में अशद जरूरत होती है
04:18लेकिन जहां कुछ अच्छे फैसले हुए है
04:20वहीं छटे हिस्से में हम उन फैसलों की बात करेंगे
04:23जो काफी काबले इतिराज है
04:25जराय के मताबक स्कॉर्ड के कुछ हिस्से
04:27वाकई उल्जहन में डाल देते हैं
04:29देखिए टेस्ट क्रिकेट में मुसलसल जद्दुजहत के
04:31बावजूद इमाम उलहक को बरकरार रखा गया है
04:33और शान मसूद जिनकी ओसत सिर्फ 27-28 की है
04:37उन्हें कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद स्कॉर्ड का हिस्सा रखा गया है
04:40इसी तरह साउच शकील की शमूलियत फिटनेस से मशरूत कर दी गई है
04:44जिसकी वज़ा से दूसरों का रस्ता रोग गया
04:45जैसे के मीर हमज़ा जो मुकमल तोर पर हगदार थे
04:49लेकिन सबसे जादा मायूसी इस बात पर है
04:51के कामरान गुलाम जैसे मुस्तकिल मिज़ाज डुमेस्टिक रन स्कॉरर को एक बार फिर नजर अंदाज कर दिया गया
04:56ये फैसले बाकी समझ से बालातर है
04:59और अगर बोर्ड की मुतजाद और दबाओ में लिए गए फैसलों की कोई क्लासिक मिसाल देखनी हो
05:03तो वो मुहम्मद रिजवान की अचानत वापसी है
05:05जराय बताते हैं कि पिछली सीरीज में ये कहकर उन्हें बाहर कर दिया गया
05:09कि वो मैनेजमेंट के प्लैन का हिस्सा नहीं है
05:11लेकिन जैसे ही तनकीद बढ़ी और नौक्रियां खत्रे में पढ़ी
05:14तो हैरत अंगेस तोर पर वही खिलाडी अचानक फिट भी करार पाए
05:17और स्कॉर्ड में वापस भी आ गए
05:19ये वाज़े करता है कि फैसले किसी ठोस पॉलिसी के बजाए सिर्फ वक्ती दबाओ के तहत हो रहे हैं
05:24तो इन तमाम हकाइक और तज्जियों को सामने रखने के बाद बुनियादी सवाल वही का वही मौजूद है
05:30क्या कियादत की ये ताजातरीन तबदीली कोई मस्बद नतीजा या शांदार कमबैक लाएगी
05:35या फिर हम सब इसी अदम इस्तहकाम, तनकीद और मायूसी के पुराने दाएरे को दोहराते वे देखेंगे
05:40ये एक ऐसा सवाल है जिसका हत्मी जवाब तो आने वाला वक्त और मैदान में होने वाली कारकरदगी ही देगी
05:46लेकिन इस जायजे ने यकीनी तोर पर हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है
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