गौ माता को एक रोटी खिलाने का चमत्कार | जीवन बदल देने वाली सच्चाई
🙏 एक रोटी का चमत्कार! 🙏
क्या आपने कभी सोचा है कि गौ माता को प्रेम से खिलाई गई एक साधारण रोटी भी आपके जीवन में कितना बड़ा परिवर्तन ला सकती है?
इस वीडियो में जानिए गौ सेवा की महिमा, गौ माता को रोटी खिलाने के आध्यात्मिक लाभ, और वह भावनात्मक कथा जिसे सुनकर आप भी आज से गौ सेवा शुरू कर देंगे।
सनातन धर्म में गौ माता को सभी देवी-देवताओं का निवास माना गया है। गौ सेवा से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
✨ एक रोटी प्रेम से दीजिए, और बदले में अनगिनत आशीर्वाद पाइए।
📿 यदि वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Subscribe अवश्य करें।
✨ A Divine Presentation by Wassan Bhakti Sagar ✨
🙏 Special Thanks & Spiritual Guidance 🙏
Pandit Sh. Sunil Ji
📞 98150-14395
🙏 जय गौ माता 🙏
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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00:00प्रिय भगतों, आज हम एक ऐसे विसे पे चर्चा करने जा रहे हैं, जो सिर्फ धर्म से ही नहीं, बल्कि
00:07हमारी समस्क्रती, हमारी परंपरा और गव सेवा से जुड़ा हुआ है।
00:30इसलिए गव की सेवा से बड़ा इस संसार में और कोई सेवा नहीं है, इसलिए सभी को गव सेवा को
00:36प्रात्यमक्ता देनी चाहिए।
01:00और यहां तक की गव माता के एक एक अंग में सब देवताओं का निवास माना गया है।
01:06अगर हम पुराणों की बात करें हैं, तो एक बार की बात है, जो महरशी वसिष्ट थे, उनके पास में
01:14नंदिनी नाम की गव थी, जो काम देनी की बचिया थी।
01:19और नंदिनी नाम की जो गव माता थी, उनके अंदर इतनी दिव्य शक्तियां थी, चमतकारिक शक्तियां थी।
01:26कि उनके सामने आप जो भी कामना करेंगे, एक शण में ही वो कामना हमारी पूर होती थी।
01:33तो इसी प्रकार से एक बार महरशी विश्वा मित्र जंगलों में अपनी सेना के साथ गए हुए थे, और मार्ग
01:43भटग गए, सायंकाल हो गई।
01:46तो उन्होंने अपने सेना पतियों से कहा कि जाकर के देखो किसी रिशी मुनिकी अगर पुटिया है तो वहाँ चल
01:52करके विश्वा मित्र जलपान करते हैं।
01:55तो उन्होंने जब देखा कि एक बड़ी दिव्य और सुन्दर पुटिया है और वहाँ पर एक महरशी विराजमान है और
02:02एक गवम आता है।
02:04तो उन्होंने जाकर के बताया कि हमारे राजा हैं महरशी विश्वा मित्र वो आए हुए हैं और सायंकाल हो गई
02:10है मार्क बड़क गए हैं इसलिए आज हम यहीं विस्राम करना चाहते हैं जलपान भी यहीं करेंगे।
02:16तो महरशी विस्ष्ट को अतिंत प्रशनता हुई कि हमारे राज के राजा आज हमारी कुटिया में पधा रहे हैं तो
02:26उन्होंने उनके लिए रहने के लिए बहुत अच्छी व्योस्ता की गवमाता से प्रार्थना किया कि है गवमाता हमारे राजा के
02:34लिए राजा के सेनकों
02:35के लिए उनके सेवकों के लिए सेनापतियों के लिए रहने की बहुत अच्छी विस्ता हो जाए तो रहने के लिए
02:42बहुत बढ़िया विश्ता हो गई थे नंदनी गोँमाता के
03:00अजने रिशी हैं और पती बतनी यहां पे रहते हैं और इनके यहां पे आस्तरम में शिर्व एक गौम आता
03:07है तो इतना वैभो इतना प्रभाव इनके पास कैसे कि हमारी पूरी सेना को इन्होंने तरप्त कर दिया और भोजन
03:15भी इतना स्वाधिष्ट जो स्वाधिष्ट भो�
03:27आप तो ब्रमग ज्यानी हैं आप ये बताएए कि आपके घर में कोई धन के भंडार नहीं कोई आपके हाँ
03:35इतनी बड़ी विवस्ता नहीं फिर आपने इतनी सारी विवस्ताएं कैसे हम लोगे ले की इतना स्वादिष्ट भोजन कोई हलवाई हमने
03:42नहीं देखे कहीं भंडार
03:45बनते हुए नहीं देखा तो यह सब कहां से हुआ यह चमतकार कैसे हुआ
03:49तो महर सीव सिष्ध ने कहा कि हे विश्वामित्र काम देनूं
03:53की जो बछ्याहे नंधिनी यह जो हमारी गोष आला में बनी हुए है
03:58यह सब इनी का प्रभाव है इनी का चमकार है यह इच्छा पूर्ती की शक्ति इनके अंदर है तो विश्वामित्र
04:06के मन में लोब जागरत हो गया उन्होंने सोचा कि इस गव को तो हमारे राज में होना चाहिए ताकि
04:14इसे हम बहुत सारा धन कमा सकें और अपने राज का संचा
04:27में नहीं है तो उन्होंने काग महराज इस गाउ के दूद से गाया के घी से ही हम देवताओं का
04:35यग्य करते हैं हं और गोव में बस्ते लक्ष्मिन उसमें मातालग्श्मिका निवास में अपने असर्म का लेपन करते हैं और
04:45गवमूत्रे तु मिढमार में गंगा दीनका नि
04:57विराश्चत है यह हम आपको नहीं देशकते हैं विश्वामित्र ने कहा कि नहीं मैं तो इसे लेकर जाओंगा तो उन्होंने
05:05जवर्दस्ती जब उस गव को लेकर के जाने लगे तो गव माता की आखों से आसु निकलने लगे और पीछे
05:13मुण के देखा वसिष्ट की तरफ कि
05:14है वेटा क्या मेरे से कोई गलती होगी जो आप तुम मुझे राजाओं के हाथ में सौंप रहे हो तो
05:20मैरे सी वसिष्ट ने बड़े दुखी भाव से कहा कि नहीं माता आप से कोई गलती नहीं यह जवर्दस्ति आपको
05:27ले जा रहे हैं और आज समय है आप अपनी दिव शक्
05:30को प्रगड की जिए तब माता ने पूंच इलाया सिंग इलाया तो वहां से बड़े बड़े वीर योद्धा प्रगड हुए
05:38और वो योद्धा इतने श्ट्साली बलवान थे उन्होंने पूरी विश्वामित्र की शेना को तहस नहस कर दिया परास्त कर दिया
05:45फिर विश्व
06:00ब्रह्म तेजों वलो वलम यानि जो हमारा क्षट्रियों का वल है वो तो ब्रह्मतेज के आगे कुछ भी नहीं है
06:07ऐसा उन्होंने मन में विचार करके फिर उन्होंने जाकर के 20,000 वर्सों तक गायत्री की तबश्या की क्यों क्योंकि
06:14ब्रह्मतेज की प्राप्ति के लिए और
06:29तो इस तरह से गौ माता के अंदर पूरे 3300 करोड देवता भी दिमान रहते हैं एक-एक अंग में
06:35देवता विराजमान है एक-एक रोम कूप में देवता विराजमान है और बहुत सारी इसी बीमारियां है जो गो का
06:41अश्पर्स करने से दूर हो जाती है जय सीरा
06:52माता लक्षमी का निवास था जाए तो बिलू कुल निश्चित रूप से पुराणों ऐसा अब रणन आता है
07:00जब सारे देवता काम देनूं गो माता के अंदर अपना अपना स्थान ले लिये
07:04लक्ष्मी माता थोड़ा विलम से आई
07:06उन्होंने कहा कि है माँ
07:08मैं भी आपके अंदर निवास करना चाहती हूँ
07:10तो गोव माता ने कहा
07:12कि सारे देवता, सारी देवियां
07:13हमारे सेरे में विद्धिमान हो चुके हैं
07:16अब सिर्फ हमारा जो गोबर है
07:17कोई एक स्थान खाली है
07:20और गोबर हमारा परम पवित्र होता है
07:22इसलिए आप गोबर में आकर के निवास करो
07:24ताकि कोई भी यह की होता है
07:26हवन होता है घर में जब गोबर से
07:28लीपा जाता है जो स्थान
07:29वहाँ पे सदेव तुमारा निवास होगा
07:31यानि माता लक्ष्मी का
07:33और गाय के गोबर के जो उपले बनाए जाते हैं
07:36अगर किसी के घर में बुरी नजर लगी हो
07:39किसी ने किसी को टोंक लगा दी हो
07:41किसी घर में किसी ने काम को बांग दिया हो
07:43कोई उपरी चक्कर हो
07:45जादो टोना तंद्रमंद्र किया हो
07:47तो गाए के गोबर के उपले को जला करके उसके उपर कपूर, काली लॉंग और इलाइची और गुगल और लोमान
07:56इनकी धूनी दे करके सारे घर में आप घुमा दीजिए
07:58सारी जो नजर है वो सारी दृष्टी दोस्त सब दूर हो जाएंगे और उस विक्ति का घर बिलकुल परंपवित्र हो
08:05जाएगा
08:05दूसरी बात ये है गव माता की जो पूँश है वहाँ पे हनुमान जी महराज का निवास होता है
08:11अगर किसी विक्ति को बुरी नजर बार बार लगती है तो गव माता की पूँश को पगड़ के उसके पूरे
08:17सरीर को अगर जाड़ा लगा दिया जाए
08:19तो उसे कभी भी बुरी दिष्टी का प्रभाव नहीं रहेगा जो भी उसके उपर किया कराया है जादू टोना है
08:25बुरी दिष्टी है नजर है वो सब छण मातर में ही दूर हो जाती है
08:28इसलिए गव माता को हमेशा सेवा करने से सभी प्रकार के जो संगट हैं वो दूर होते हैं और माता
08:39लक्ष्मी की पूर्ण क्रभा की प्राप्ति होती गव की सेवा करने से
08:56वैतरणी नदी जो महान कष्ट देने वाली है जिसका नाम ही अनेकों दुखों को प्रगड करने वाला है
09:02ऐसी वैतरणी नदी का जो वर्ण है वो गरुन महाप्राण में आता है
09:08मरने के बाद में जीव को ऐसी यातनाएं वहाँ पे दी जाती है जिनका वर्णन वाणी से नहीं किया जा
09:14सकता
09:16जो 86 प्रकार के नरक हैं उन नरकों में सबसे ज़्यादा कष्ट देने वाला जो नरक है वो वैतरणी नाम
09:23की नदी है
09:24जो सो योजन लंबी और चोड़ी है जिसके अंदर बड़े भयानक जीव जन्तू रहते हैं जो उस प्राणी को जब
09:32वो वैतरणी नदी में डूबने लगता है तो उसके सरीर को अत्यंत कष्ट देते हैं उसके सरीर के मांस को
09:39नोचते हैं और बहुत सारी बाधाएं उसको मि
09:43रूपते हैं और उस वैतरणी नदी में ही वो प्राणी डूबता रहता है अगर इन सब कष्टों से प्राणी बचना
09:51चाहता है तो जीवी तवस्था में जीते जी गव की सेवा करें और यदि सामर्थ है तो जीवन में एक
09:58बार गव का दान अवश्य करें गव का दान करने �
10:02वाला गवमाता की सिवा करने वाला जो प्राणी है वो इससार में जब
10:07तक रहता है तब स्भी और स्मृत्रियों से संपण्ट sık के अरुड महा
10:12प्राण में विड़न आता है मरने के बाद में जिब वह प्राणी यम-लोक को
10:17जाता है और पृत्वी से यम लोग की जो दूरी है वो लगभग 86 लाख योजन दूर है उस दूरी
10:28को पार करने के समय सोलह नगर पड़ते हैं जिनमें अनेको प्रकार के कश्ट और दुख उस जीव को भोगना
10:36पड़ता है उसके बाद में वैतरणी नदी जुवाती है तो वह
10:44गव का दान किया है तो वह मॉता जो है उस वैतरणी नदी में अपनी पूछ कुछ उसकी गवव water
10:51की फूछ पड़े
10:52आप तो गव माता आपको वैतरणी नदी से पार लगा देती है और गव माता की एक विसेथता यह भी
10:58ठीकि कि किसी नदी में तालाब
11:01आप में आप गव माता को अगर प्रवेश करा दोगे उनकी पूशंपगण लोगे तो पार करके ही रुकेंगी बीच में
11:08नहीं रुकेंगी भैश जो होती है कि उसकी पूश्पगण के आप नदी में नदी पार करना चाहें तो वो नदी
11:14पार नहीं करा किए तो उसका गास którą द
11:31पूश पकड़ी तो वैतरनी नदी हो या कोई दूसरी नदी हो उसको पार करके ही बाहर रुकेंगी बीच में नहीं
11:38रुकती इसलिए गव माता की सेवा करना गव का दान करना इस संसार में भी आपको सुख और शमर्धी प्रदान
11:45करेगा और मरने के बाद में जब आव यम लो
12:01उस गव दान के प्रवाव से वो गव माता वैतरनी नदी के पास में आपका इंतजार करेंगी और आपको वैतरनी
12:07नदी से पार लगा देंगी इसलिए जीव को अपने कल्यान के लिए इस जीवी तवस्ता में भी और मरने के
12:15बाद में भी गव सेवा का फल जो है वो कभी भी
12:19नश्ट नहीं होता हमेशा ये गव की सेवा करना चाहिए ताकि जीवी तवस्ता में भी सुख मिले और मरने के
12:25बाद भी वेतरणी जैसे महान जो कष्ट देने वाली नदियां हैं उनसे उस जीव की गव माता रक्षा कर सके
12:31हैं
12:38जै गो माता जै गो पाल आज हम आपको ये बताएंगे कि गव शाला या गव माता के पास में
12:45जब करने का क्या महत्तु है
12:48तो हमारे पुराणों में ऐसा वर्णन आता है अगर अपने घर में आप जो जबतब कर रहे हैं उसका जो
12:56फल है उससे सवगुना अधिक पल गव साला में या गव माता के पास में बैठके जब करने से मिलता
13:02है लेकिन गव साला में जभी भी आप जाएं पहले गव साला और �
13:07करें उनके नीचे की जो धुलिया उसे अपने मस्तक बे धारण करें कि यह रिविक्ति है म suppliers को प्रापन
13:18माटा की जो धूली है जिसको गवरच कहते हैं अगर उसको मस्तक Rodrigo करता तो अनंद पुन्ही की प्राप्ति होती
13:28और उसके जितने भी पाप है वह दीरे सब शांत होने
13:32लगते हैं इसे तरित अगर गौ माता के सरीर पर आप हाथ फेरते हैं तो शकंद पुराण और ब्रह्म वगर्द
13:39पुराण में वर्ड़न आता है उसके सरीर के जो रोग हैं जो परिशानी हैं जो अशान्ती है वो सब धीरे
13:46-धीरे दूर होने लगती हैं यहां तक भी वर्ड़
14:01है कि सरीर में जितने भी रोम छिद्र हैं अगर उनके मस्तक पर यहां पर खुजली की जाए गले की
14:06नीचे खुजली की जाए या सरीर में कहीं पर भी खुजली की जाए तो उनके सरीर में जितने भी रोम
14:12कूप हैं उतने रोमों की संख्या के उनसार उस विक्ति को स्वर्ग
14:16में निवास करने का आउसर मिलता है और यदि गव माता की कोई सेवा करता है किसी की फैट्री में
14:24काम नहीं चल रहा किसी के काम रुग-रुग के चल रहा है किसी का पैसा फस रहा है कोई
14:30विक्ति बहुत परेशान है मानिसित तोर परेशान है शत्रमों की बाधाएं है तो ऐसे �
14:36बिएटि को प्रती दिन गुर्ण सेवा करने लिए जाना चाहिए,
14:40सब्सक् parade कहले गुषाला में जा करके गौ माता की सेवा करें,
14:45साब सफाई करें और उनको जा कर के चारा रोटी या गुड ये जरूर कहलें,
14:51एक बात का विशेश ज्यान दगना चाहिए है कि गौसाला में जाकर के किसी के प्रती इरश्या, द्वेश, निंदा, चुगली
14:59ये काम नहीं करने चाहिए
15:00नहीं तो जो भी हम कारी करते हैं पुन्य वो हमारा नश्ट होता है
15:06और वहाँ पे जाके अपने गुरू के द्वारा जो दिया हुआ मंत्र है या जो मंत्र आप नित्रूप से जाप
15:12करते हैं उस मंत्र का जाप भी करते रहें और गाय की सेवा भी करते रहें
15:17इससे क्या होगा कि आपके जीवन में पुन्य की व्रधी होगी पापों का नास होगा हमारे जीवन में जो कष्ट
15:23आते हैं जो परेशानी आती हैं वो पापों की वज़े से आती हैं और गव साला में जाकर के सेवा
15:29करने से गव की सेवा करने से गव की सेवा में योगदान देन
15:33हुमारे पाप नष्ट होते हैं और पापों के नष्ट होने के बाद में हमारे जिवन में रुके होए जो हमारे
15:42कारे हैं वो अगण
15:49कोई भी धार्मिक अनुष्थान करते हैं पूजन हो हवन हो यग्य हो उसमें पंचामृत के बिना कोई
15:57भी कारे हमारा कुण नहीं माना जाता पंचामर्द में दूद, दही, घी, शहद और शकर ये पांच चीजे पड़ती हैं
16:05पंचामर्द यानि ये पांचों चीजे अमर्द के समान है उसमें सबसे पहले दूद है, दही है, घी है, शहद है
16:13और शकर है और ये जो पांचों चीज
16:16इनके द्वारा ही हमारा कोई भी धार्मिक अनुष्ठान है कारहे पूर्ण माना जाता है इसलिए गव माता की शेवा का
16:23सबसे बड़ा महत्तु यह है कि देवताओं के द्वारा गव माता को इस भूमंडल में भेजा गया तो गव माता
16:30की सेवा अगर हम नहीं करेंगे गव का ह
16:33काम समरक्षण नहीं करेंगे तो दूद दही घी गाय का गोबर गव मूत्र यह सब कहां से प्राप्त होंगे और
16:40इनके विना मारा कोई
16:42भी धार्मिक अनुष्ठान कारे संबन और सफल नहीं हो सकता इसलिए गव माता की शेवा परम आवश्यक है
16:59पंज गव के विसे में अगर हम बात करें तो बड़े बड़े जब यगी होते हैं
17:03तो पंज गव के द्वारा यजमान को उसका प्राशन कराया जाता है यानि पिलाया जाता है
17:10उसके क्या होता है हमारे अंदर की शुद्धी होती है पापों का नाश होता है
17:14इसी तरह से जब किसी के घर में बालक का जन्म हो तो उसकी शुद्धी के लिए ग्यारवे या तेरवे
17:21दिन पंच गव्य से जो ब्रामण लोग हैं आचारी लोग हैं उनके घर का प्रोक्षन करते हैं घर में छीटे
17:28लगाते हैं उससे क्या होता है हमारे घर की शुद्धी होती
17:32है सूतक हमारा दूर होता है और घर में फिर देवी शक्तियों का निवास होता है पुजा पाठ कारे सब
17:38प्रारम हो जाते हैं पंजगवी कैसे बनता है दूद दही घी गौमूत्र और ये गोबर ये जो गोबर का उपला
17:45देख रहे हैं ये गोबर ये सब पांच चीजे मिस करक
17:59है कि इसमें सामर्थ है इस गोबर के उपले को बना के धूप में शुखा लें और इसके उपर देशी
18:06घी और कपूर डाल करके इसको प्रजुलिद करें और इसके उपर थोड़ा सा गुगल और लोबान और पीली सरसों ये
18:13सब चीजे डाल करके घर में धूनी लगाएं रो�
18:27पुर्जा का प्रभाव हमारे घर में बढ़ता है घर में सुक्षांती रहती है जिनके घरों में कले कलेस रहता है
18:34लड़ाई जगड़े होते हैं व्यर्थ की परेशानियां रहती हैं बीमारियां पीचा नहीं छोड़ती वो लोग इस प्रयोग को करें इसकी
18:41जो शक्ती है व
18:57सर उत्तम बाने जाती है उनिहीं का गोवर उनिहीं का दूद उनिहीं का दही और उनिहीं का घी यग्धी यागादी
19:05के लिए सरक fertॉष्ट माना जाता है
19:12कि गोवज़ी वियापार बंड़ता है तो हमारे अन्य पर्णों में और यह अनेकों
19:27बनती है उसके उपर गव माता का अधिकार होता है और जिन व्यक्तियों के घरों से पहले जो बनने वाली
19:34रोटी है उसके उपर घी लगाके गुड रख करके अगर आपने गव माता को खिला दिया तो गव माता की
19:41कृपा और उनके आशिरवाद से आपके घर में धन की बरकत भ
19:47होगी और कई प्रकार की जो परेशानियां हैं जो संगट हैं वो दूर हो जाएंगे इसलिए हमेशा ही गव की
19:55सेवा से बहुत अच्छी बरकत होती है और शमृद्धी की प्राप्ती होती है दूसा प्रश्ण यह उड़ता है कि गव
20:03को रोटी खिलाने से क्या लाव मिलता है ग
20:16सबस्क्राइन है तो जिनके घर से प्रति दिन एक रोटी गव माथा के लिए निकलती है अधिक निकले तो और
20:23भी अच्छा है छीं इती गव माता के निकलती है तो उस रोटी को खाने के बाद में गव माता
20:30की आत्मा से आशिरवाद दनान है
20:35वो भी संतुष्ट और प्रसन हो जाते हैं
20:38जो लोग गौमाता को नित्य जल़् पिलाते हैं
20:42ऐसे विक्तियों के जीवन में कभी भी धनधान की कमी तो होती ही नहीं है
20:47मांशिक तोर पे कई लोग जो प्रेशान रहते हैं
20:50उनकी मांशिक प्रेशानिया दूर होती है
20:52उनकी सारी रिख जो प्रेशानिया है वो दूर होती है उनके जीवन में उन्नती के नेने मार्ग खुलने लगते हैं
20:59उनके जीवन में अगर कोई रुकावटे आ रही है वो सारी रुकावटे दूर होती है और गव माता के आसिरवासे
21:05सुख और शमर्दी की प्राप्ति होती है
21:07संदर की प्राप्ति होती है
21:09और सभी कामनाएं पूर्ण होती है
21:12इसलिए गव माता को प्रती दिन
21:14रोटी पे घी लगाके
21:16गुड रखकर के देना चाहिए
21:17और जल पिलाना चाहिए
21:19क्योंकि जब हम लोग
21:22जोतिस में किसी को उपाई बताते हैं
21:24तो यदि सूर्य खराब है
21:26तो भी आप गाय को घी लगाकर के
21:29रोटी पे गुड रखकर खिलाएं
21:30तो उसका सूर्य प्रवल होता है
21:32सूर्य प्रवल होता है
21:33तो जीवन में मान, समान, प्रिदिष्ठा, पिता का सुक
21:36और अईस्वर की प्राप्ति होती है
21:38अगर चंद्रमा आपका खराब है
21:41तो चंद्रमा भी प्रशन होता है
21:43गाय को रोटी खिलाने से
21:44मान सिख सांती, उच्च, पद और प्रिदिष्ठा मिलता है
21:48मंगल अगर खराब है
21:49तो मंगल की वरे से
21:51जीवन में आने वाली जो सुत्रों की बाधाएं है
21:53जो कर्ज में डूबा हुआ विक्ति है
21:56वो भी यदि गुड रखकर के गव माता को खिलाए
21:58तो उसके भी संगड दूर होते है
22:00बुद ब्रहस्पति और शुक्र
22:02ये तीनों ग्रहे बहुत शीग रही
22:05गव माता की सेवा से
22:07गव को रोटी खिलाने से
22:08गव को हराचारा खिलाने से
22:10निश्चित रूप से प्रशन होते हैं
22:13और सारी बाधाएं सारे कष्ट
22:15ऐसे विक्तियों के दूर हो जाते हैं
22:17जो प्रती दिन गव माता को
22:19हराचारा खिलाते हैं
22:20रोटी पे घी लगा करके गुड रखके खिलाते हैं
22:23और पानी पिलाते हैं इससे बड़ा पुन्य इससे बड़ा धर्म और कोई नहीं है
22:39जै गोमाता जै गोपान अगर विक्ति जीवन में सुखी और आनंद में रहना चाहता है
22:45तो उसे अपने जीवन में कुछ लक्षों का ध्यान देना चाहिए
22:50लक्षों की दरफ ध्यान देना चाहिए सबसे पहला लक्ष यह है कि गोव की सेवा करना चाहिए
22:57और प्रग्रती की सेवा करना चाहिए प्रग्रती का मतलब यह होता है कि जो हमारे पेड़ पोधे हैं
23:16को चाटने से उंक्र डाओन होता है जिसके जीवन में कई प्रकार की बाधाएं नीमघ्जा
23:23होती है और यदि विक्ति कोई अपनी मा को जो जन्म देने वाली मा है या मा के समान जो
23:30इस्तिया है उनको उगर कश्ट देता है तो जीवन में कितने भी बड़े-बड़े
23:34यग कर ले बंडारे लगा ले पुन्य के काम कर ले उसे जीवन में कभी भी पुन्य फन नहीं प्राप्त
23:39होता इसलिए जीवन में अगर सुखी रहना चाहते हो तो गव माता की सेवा करो प्रकृती की सेवा करो और
23:46अपनी जो जन्म देने वाली माह है या अन्य जो इस्त्रिया
23:50है उनकी सेवा करें कभी भी उनका दिल नहीं दुखाना चाहिए अगर उनकी आखों से आशू गिरे आपकी वज़े से
23:56तो भगवान भी आपको माफ नहीं कर सकते हैं क्योंकि मात्र देवो भवा पित्र देवो भवा माता एक देवता के
24:04समान है पिता एक देवता के समान है �
24:07और ऐसे ही गव माता के अंदर पूरे प्रमान के देवी देवताओं का निवास है, भगवान विश्णू ने इनको चलता
24:13फिरता एक मंदिर बना दिया है,
24:15कि अलग अलग देवताओं के मंदिरों में जाकर के दर्शन करना सभी के लिए सुलब नहीं है, इसलिए भगवान ने
24:21एक ही गव माता के अंदर सारे देवताओं को विराजमान किया, और ये ऐसा चलता फिरता मंदिर है, जिसके कोई
24:28भी विक्ति दर्शन कर सकता है, जिसकी को�
24:34इसलिए गव की सेवा करें, प्रिक्ति की सेवा करें, और अपनी जर्म देने वाली मा की सेवा करें, तो जीवन
24:41में आपके सभी कारे पूर्ण होंगे, सफल होंगे, और सभी बाधाएं आपकी दूर होंगे.
24:50जय गौमाता, जय गौपाल
24:53आज जो हमने गौमाता के विशे में छुड़े छुटे बातों को लेकर के चर्चा की है, वेद, पुराण और शास्त्रों
25:00के अनुसार,
25:01तो इसमें जो छुड़े छुटे उपाएं बताये गए हैं, गव की सेवा का क्या प्रभाव है, गव की सेवा करने
25:06से क्या फल मिलता है, जीवी तवस्ता में गव सेवा करने से क्या फल मिलता है, और मरने के बाद
25:12भी गव सेवा का जो फल है, गव का दान का जो फल है, वो अ
25:30और सुक और शम्रद्धी की प्राप्ति होगी और व्यर्थ के जो चक्कर हैं व्यर्थ के जो भ्रमित करने वाले जो
25:38उपाये हैं जो टोड़के हैं उनके चकर्म न पढ़के सिर्फ गव की शेवा करें गव का सम्रक्षन करें तो उससे
25:45आपकी सारी बाधाय दूर हो जाएंगी
25:47और जीवन में सुक और शम्रद्धी बढ़ेगी और भगवान कृषन की कृपा से आपके जीवन को उन्रती और प्रगती के
25:54मार्ग पे ले जाने का आप बहुत सरल तरीके से आपको ये उसर प्राप्त होगा इसलिए गव की सेवा करके
26:00अपने जीवन को सुकी और शम्रद्�
26:02साली बनाएं जय गोमाता जय गोपाल धन्यवाद
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