00:00बाल भी आ है, बन कर भाय गया
00:01दहेज प्रथा को लेकि अभी भी सम्माज वहीं खड़ा है
00:05बहुत पारी कुरुतियां खतम होई
00:06ये कब खतम होगे है मारे जीवन से
00:08जब प्रेम आ जाता है
00:10चेतना आ जाती है, जम्मेदारी आ जाती है
00:13तो तुमसे ये करा ही नहीं जाएगा
00:15कि तुम किसी के साथ रहने के लिए
00:19या जीवन बिताने के लिए उससे पैसे मागो
00:21रहेज सीदे सीदे यही तो है
00:23आप एक व्यक्ति से कहा रहे हो
00:24मैं तुम्हारे साथ तब रहूँगा जब तुम मुझे पहले पैसे दोगे
00:27मैं तुम्हें अपने घर में तभी आने दूँगा
00:30या मैं तुम्हारे घर में तभी जाऊँगा
00:31या तुम्हें अपनी पत्नी तभी खोशित करूँगा
00:34या तुम्हारे साथ शारेरिक संबंध तभी बनाऊँगा
00:37जब मुझे पैसे मिलेंगा
00:38ये एक तरह की विश्या विरित्ति है की नहीं है
00:40पुरुष इस्त्री से पैसे मांग रहा है
00:42और पैसे लेकर के फिर उससे वो संबंध बना रहा है
00:47भैरत होती है वो लड़कियां कौन सी होती है
00:49जो किसी ऐसे के साथ पंधने को तयार हो जाती है
00:52जिसने उनसे पैसे लिये है
00:53प्रश्ट, दूशिक, खोखला, जरजर
00:58ऐसा हमारा परिवार और समाज है
01:00और दया आती है उस लड़के पर
01:03जिसको पैदा होते ही एक करोड की आसामी की तरह देखा जा रहा है
01:07क्या उसकी चेतना जागरत करी जाएगी
01:10क्या उसकी परवरिष करी जाएगी
01:11उसको तो वैसे ही बड़ा करा जाता है
01:13जैसे कसाई अपने बकरे को बड़ा करता है
01:16कि एक दिन इसको वसूलूँगा
01:20इन्वेस्टमेंट है एक निवेश है
01:21एक दिन इसमें से बयाज समेद वसूली होगी
01:25यह मुद्दा हमें कब का पीछे छोड़ देना चाहिए था
01:29बहुत ताज्जुप की बात है यह मुद्दा आज भी जोलन्त है