00:00मैंसेर्फ दॉक्टर कुमार मनोज, I am European trained doctor of modern medicine
00:05मैं जब भारत वापस आया, तो अपने आसपास देखें हम किस तरह का जीवन जी रहे हैं
00:09ना हवा बयार शुद्ध, ना खाना पीना में शुद्ध था, मकारी जाल साजी, मैं क्या करूँगा
00:15आपकी तरह समाज में धेरे धेरे घुर्ते पिष्टे एक बदलाव लाऊं, ये यौरोप चराजो
00:21आपको जो भाव उठ रहा है, वो यदा कदा मुझे भी उठता है
00:24सब कुछ जो आप बोल रहे हैं वो अनुभाव करता हूँ
00:26कई बार लगता है दिवारों पे सर मार रहा हूँ, जिन्दगी खराब कर रहा हूँ
00:30मैं शायद बहतर काम कर सकता हूँ अगर मैं भारत के जगे कहीं और हूँ
00:33लेकिन पाउं जमा के रखना है, कहीं भागना नहीं है, संभावना नहीं है, विकल्प ही नहीं है
00:39जरूरत मेरी यहाँ है, मैं वहाँ जाके क्या करूँ?
00:41जब जान गए कि कहां आपकी जरूरत है तो आप किसी दूसरी जह कैसे जा सकते हो।
00:49और मेरा खुद से भी यह वादा है कि भागोंगाने।
00:51बलहिय भाव यह उठता है कि कहे के लिए जान दिये दे रहे हो।
00:59आप चूंकि संवेदन शील नो तो सोचता हूँ कि कार्बन एमिशन कम करूँ तो मेटरों से आया था तो मैं
01:04देखता हूँ कि लोग एक मेटरों की ट्रेन की सीट के लिए ऐसे दूर से बैक फेकेंगे और जब उस
01:09सीट पहुंचेंगे बैठेंगे तो आप उनकी चेहरे को दे
01:24सकता हूँ कि किस्म का नर्क आम भारतिये को जहलना पड़ता है और उससे दूना नर्क उसे जहलना पड़ता है
01:32जो आम आदमी को उसके नर्क से बाहर निकालने की चेश्टा करें तो यह यह मैं जानता हूँ बहुत अच्छे
01:41तरीके से और इस अब जानने के बाद मेरा फैस