00:00शोर के सबर ने सब बदल दिया
00:01शहर की मसरूफ सडकों से थोड़ा दूर एक प्राणा सा महला था
00:06जहां लोग साधा जिंदगी गुजारते थे
00:08इसी महले के एक छोटे से कराय के घर में एहमद अपनी बीवी आईशा के साथ रहता था
00:14एहमद एक शरीफ, एमानदार और महनती इंसान था
00:17वो एक कमपनी में डराइवर था और दिन रात महनत करता था ताकि अपनी बीवी को खुश रख सके
00:23एहमद के खाब बहुत बड़े नहीं थे
00:26वो सिर्फ सुकून और महबद भरी जिंदगी चाहता था
00:30आईशा बहुत खूबसूरत थी
00:32उसकी बड़ी बड़ी आँखों में खाब थे
00:34लेकिन उसी के खाब सादगी के नहीं
00:36बलकि दौलत और आसायश के थे
00:39शुरू में सब ठीक था
00:40आईशा एहमद के साथ खुश थी
00:42लेकिन आहस्ता आहस्ता उसके दिल में
00:45एक बेचैनी पैदा होने लगी
00:46वो अकसर अपनी सहीलियों को देखती थी
00:49जो महंगे कपड़े पहनती थी
00:51नए मोबाइल इस्तिमाल करती थी
00:53बड़ी गाड़ियों में घूमती थी
00:55एक रात आईशा ने एहमद से कहा
00:57एहमद क्या हम हमेशा उसी तरह रहेंगे
01:00एहमद ने मुस्किरा कर जवाब दिया
01:03हथोड़ा कम है लेकिन खुश है न
01:05आईशा खामोश हो गई
01:07लेकिन उसके दिल में तोफान था
01:09वो खुश नहीं थी
01:11आसाइश चाहिए थी
01:13वक्त गुजरता गया
01:14घर के खर्चे बढ़ते गए
01:16और आईशा की शिकायते भी
01:18देखो एहमद मेरी सहेली के पास
01:20सोने के जियूर है
01:21हमारे पास कुछ भी नहीं
01:23एहमद ने नर्मी से कहा
01:25मैं हलाल कमा रहा हूँ
01:26एक दिन अल्ला बहतर करेगा
01:29लेकिन आईशा अब सब्रक हो रही थी
01:31इसी दोरान एहमद का एक पुराना दोस्त कामरान
01:34दोबारा उसकी जिन्दगी में आया
01:36कामरान एक अमीर बिजनिसमीन था
01:38भांगी गाड़ी
01:39कीमती घड़ी
01:41ब्रांडिट कपड़े
01:42जब भी वो घर आता
01:43आईशा की नजरें उसकी दौलत पर रख जाते
01:46कामरान बहुत चालाग था
01:48इसने आईशा की कमजोरी पहचान ली थी
01:51एक दिन कामरान ने जान बोज कर कहा
01:53जिन्दगी में पैसा हो तो इनसान की इज़द भी होती है
01:57ये जमला आईशा के दिल में तेर की तरह लगा
02:00इस रात आईशा देर तक जाकती रही
02:03वो सोचती रही
02:04क्या मैं गलत इंसान के साथ हूँ
02:06शीतान आहस्ता आहस्ता उसके दिल में जगे बना रहा था
02:10चंद हफतों बाद आईशा का रव्या बदलने लगा
02:13वो अकसर मोबाईल पर मसरूफ रहती
02:15एहमद से बात कम करती
02:17छोटी छोटी बातों पर नाराज हो जाती
02:20एहमद परेशान था
02:22लेकिन वो जगडा नहीं करना चाहता था
02:25एक दिन एहमद जल्दी घर वापस आया
02:27दर्वाजा आधा खुला था
02:29घर के अंदर से हलकी आवाजें आ रही थी
02:32एहमद आहस्ता आहस्ता अंदर दाखिल हुआ
02:34उसने देखा आयशा किसी से फोन पर बात कर रही थी
02:38मुझे बस थोड़ा वक्त दो
02:40फिर मैं आजाद हो जाऊंगी
02:42एहमद के हाथ कामपने लगे
02:44उसका दिल तेजी से धड़कने लगा
02:46लेकिन वो कामोश रहा
02:48उसने फैसला किया
02:50वो सच जाने बगएर कोई फैसला नहीं करेगा
02:53कुछ दिन बाद एहमद ने एक सच देख लिया
02:56जो उसकी जिन्दगी बदलने वाला था
02:58आईशा खफिया तोर पर कामरान से मिल रही थी
03:01एहमद की दुनिया अंधीरे में डूब गई
03:03वो बीवी जिसके लिए वो दिन रात मेहनत करता था
03:07आज वही उससे दोर जा रही थी
03:09इस रात एहमद सो नहीं सका
03:11उसने अपने रब से दुआ की
03:13या अल्ला अगर मैं गलत हूँ तो मुझे दरस्त कर
03:17अगर मैं मजलूम हूँ तो मुझे सबर दे
03:19अगले दिन एहमद ने आईशा से बात की
03:22अगर तुम खुश नहीं हो तो सच बता दो
03:25आईशा की आँखों में आंसो आ गए
03:28लेकिन वो खामोश रही
03:29खामोशी सबसे बड़ा जवाब होती है
03:32चंद दिन बाद आईशा घर छोड़ कर चली गई
03:36वो समझ रही थी अब उसकी जिन्दगी एक खाब बन जाएगी
03:39लेकिन हकीकत हमेशा खाब जैसी नहीं होती
03:42शुरू में कामरान ने आईशा को महंगे तोफे दिये
03:46अच्छे जगहों पर ले गया
03:48आईशा को लगा उसने सही फैसला किया
03:51लेकिन कुछ महीनों बाद कामरान बदलने लगा
03:54उसके फोन कमाने लगे
03:55उसका रव्या सख्त होने लगा
03:58एक दिन कामरान ने साफ कह दिया
04:00मैंने तुम से शादी का वादा कब किया था
04:03ये सुनकर आईशा के कदमों तले जमीन निकल गई
04:06उसे एहसास हुआ
04:08वो सब कुछ हार चुकी थी
04:10इज़त, घर, शोहर, सुकून
04:13सब खतम हो गया था
04:15वो कई राते रोती रही
04:16लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी
04:18उधर एहमद ने हिम्मत नहीं हारी
04:20उसने खुद को सन्भाला
04:22मजीद महनत की
04:23कुछ साल बाद एहमद को एक बड़ी कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई
04:26उसने अपना घर खरीदा
04:28उसके वालिदीन उस पर फक्र करने लगे
04:31लोग उसकी इज़त करने लगे
04:32एक दिन दर्वाजे पर दस तक हुई
04:35एहमद ने दर्वाजा खोला
04:36सामने आईशा खड़ी थी
04:38बहुत कमजूर
04:40बहुत परेशान
04:41उसकी आँखों में पुछतावा साफ नजर आ रहा था
04:45आईशा ने रूते हुए कहा
04:47मुझे माफ कर दो
04:49मैंने सब कुछ खो दिया
04:51एहमद खामूशी से सुनता रहा
04:53फिर उसने कहा
04:54मैंने तुम्हे कभी तकलीफ नहीं दी
04:56लेकिन तुमने मुझे वो दर्द दिया
04:58जो मैं कभी नहीं भूल सकता
05:00आईशा रौती रही
05:01लेकिन वक्त वापस नहीं आया
05:04एहमद ने सिर्फ इतना कहा
05:06जो इनसान सब्र करता है
05:08अल्ला उसे कभी अकीला नहीं छोड़ता
05:11आईशा चली गई
05:12हमेशा के लिए
05:14और एहमद ने अपनी जिन्दगी में
05:16एक बात सीख ली
05:17धोका वक्ती खुशी दे सकता है
05:19लेकिन हमेशा का सुकून छीन लेता है
05:22ये एक सब्क आमोस कहानी थी
05:25बरा कर्म उस कहानी को अपने दोस्तों के साथ
05:28शेयर करे, मजीद वेडियो और अपडेट के लिए फालू करे
05:32हमारी वेडियो देखने के लिए आपका शक्रिया
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