00:00खुशामदीद, आज की इस दिल्चस्प और तफसीली वजाहत में हम गाउं की जिंदगी और काम्याबी के मौजू पर लिखे गए
00:07एक शानदार डे थ्री विलॉग स्क्रिप्ट का जाइजा ले रहे हैं.
00:11ये कोई आम सा खाका नहीं है, बलकि सुभा के सुकून से लेकर काम्याबी के एक बहुत ही ताकतवर पैगाम
00:17तक का बेहतरीन सफर है. तो चलिए बगएर किसी देर के इस तजजिये का आगास करते हैं और देखते हैं
00:24कि ये कहानी हमें क्या सिखाती है. ठीक है, तो सीधा इस का
00:39आमूलाद, चालीस पर दिन की दिलचस्पियां, पचास पर काम्याबी का पैगाम और आखर में साट सेकंड पर अगले दिन की
00:47तरफ इशारा. ये वाकई कहानी की एक बहतरीन रवानी है, जिसे हम आगे तफसील से देखेंगे. इस क्रिप्ट के पहले
00:53दस से बीस सेकंड हमे
00:55एक बेहत पुरसकून सुबह में ले जाते हैं. जरा तसवर कीजिए, ठंडी हवा, गाउं का खामुश, माहौल और हर तरफ
01:01चाया हुआ एक दिलकश ठहराओं. ये सुस्त और पुरसकून आगास दरसिल एक हिकमत अमली है, जो हमारे जहन को आगे
01:08आने वाले एहम पैगाम के
01:09पूरी तरह से तयार कर देता है. अब आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ये मनजर कैसे बदलता है.
01:1520 से 30 सेकंड के दर्मियान ये स्क्रिप्ट गाउं की पतली और बेल खाती गलियों की सेर करवाता है. इन
01:22खामोश गलियों में चलने का अपना ही एक मजा है. यहां कहानी
01:37जिन्दगी और लोगों के रोजमर्रा की छोटे छोटे काम. दरसल यही चीजें इनसान को जमीन से जोड़े रखती हैं. बजाहिर
01:45ये बिलकुल आम से काम लगते हैं लेकिन यही वो मामूलात हैं जो जिन्दगी में एक मजबूत इस्तहकाम पैदा करते
01:51हैं. है ना दिल्च
01:53पिर आता है 40 से 50 सेकंड का वक्त जहां दिन पूरी तरह बेदार हो चुका है. सुभा की तैयारी
02:00हो गई, दिन भर की दिल्चस्पियों का इंतजार है और कामों को गले लगाया जा रहा है. ये एक बिलकुल
02:07फित्री सा बहाव है जहां सुभा का वो सुकून अब अमली जिन्
02:23रास्ता खुलती है. जब महौल सादा हो तो जहन खुद बखुद गेर जरूरी उलजनों से अजाद हो जाता है और
02:29यही साफ जहन जिन्दगी के बड़े मकासित पर तवज्जों मर्कूज करने के लिए इंतहाई जरूरी है. अब इस स्क्रिप्ट की
02:37जो सबसे दिल्चस्प
02:38बात है वो इसका उरूज है. पचास से साथ सेकंड के बीच एक बहुत ही ताकतवर सबक सामने आता है.
02:44जैसा कि असल इल्फाज है, काम्याबी सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो खुद पर यकीन रखते हैं तो कभी हार
02:51ना माने, आगे बढ़ते रहें. सच में, गाउं की इस सा
03:08और खुद गी और खुद आतिमादी की ताकत आने वाले कल के सफर को किस तरह मतासर कर सकती है,
03:14इस पर जरा गोर कीजिए. ये महज एक दिन का खतम होना नहीं है, बलके एक नए और ज्यादा पुर
03:20एतिमाद सफर की बहतरीन शुरुआत की तरफ एक खुबसूरत इशारा है.
03:25झाल झाल झाल झाल झाल