या ऐसा हो सकता है कि जिससे तीनों लोकों के देवता, दानव और इंसान थर-थर कांपते हैं, वही यमराज किसी नगर की दहलीज से उल्टे पांव भागने पर मजबूर हो जाएं? 😱
यह द्वापर युग का वह रहस्य है जब भगवान श्री कृष्ण गोकुल में बाल रूप में लीला कर रहे थे। जब यमदूत और स्वयं यमराज गोकुल की सीमा पर पहुंचे, तो बाल कृष्ण के उस अलौकिक तेज और ब्रह्मांडीय रूप को देखकर यमराज का सारा अहंकार चूर-चूर हो गया! यमराज ने हाथ जोड़कर प्रतिज्ञा की कि जहां जीवनदाता साक्षात् मौजूद हों, वहां मृत्यु कभी प्रवेश नहीं करेगी।
✨ अगर आप भी बाल कृष्ण की इस अलौकिक शक्ति और कृपा पर विश्वास करते हैं, तो कमेंट बॉक्स में पूरे भक्ति भाव से 'जय श्री कृष्णा' या 'राधे-राधे' जरूर लिखें! 🙏🌸
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