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टीवी की तुलसी से बीजेपी की ताकत तक, देखें कहानी स्मृति ईरानी की
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00:00टीवी स्क्रीन पर तुलसी बनकर घर घर में पहचान बनाने वाली स्मृति इरानी की कहानी सिर्फ एक कलाकार की कहानी
00:07नहीं है बलकि जीत और हार के बीच जूलती सियासत की कहानी है
00:11कभी राहूल गांदी को राकर अमेठी में चायंट किलर बन गई
00:15तो कभी उसी अमेठी में हार कर सत्ता से बाहर हो गई
00:19मंत्री पद गया, विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा
00:22फिर भी स्मृति इरानी ने हार नहीं मानी
00:25और बीजेपी ने उन्हें संग्ठन में राष्ट्र महासर्चिफ की बड़े जिम्मदारी सौपकार साफ कर दिया
00:30कि उनकी सियासी पारी अभी खत नहीं हुई है
00:33आज कहानी में बात स्मृति इरानी के संगर्ष वापसी और नई भूमिका की पूरी दास्तान की
00:46इन लोगों के साथ मैं काम करती हूँ उन लोगों के मद्धि में रहकर उनके संग्मान को प्राप्ट करना में
00:52लिए बहुत जरूरी था
00:53ताकि कोई भी कारे करता कोई भी नेता ये न कहें कि अरे इनको तो पैराशूट किया गया है गाजमेजी
00:59में
01:02इसमती जहां पहुंचती है वहां पर उनकी जबान में बात करती है
01:11यहां पर वाला है यहां पर मा तीन डेटिया नाना नानी दो मासिया एक मामा एक साथ साल बिटा दिया
01:27फर्ष से अर्ष तक और वापिस कई उतार चड़ाव देख चुकी है
01:34भाराश पार्टाटी जाहिर है भारती जिन्ता पार्टी को इसमती इरानी जैसे एक ताकतवर्ट
01:41मजबूत इस पुक्स पर्षन की जरुवत है जो खास्तोर से गांधी परिवार पर सीधा हमला कर से तो मेरी यह
01:48खुश नसीबी थी कि मैं वो उस छेतर में प्रमानित कर पाई कि नेता की नियत में अगर खोट ना
01:54हो तो परिवर्टन के लिए पात साल भी काफी होते हैं
01:58एक लाख परिवार ऐसे हमेती में जिनके सर के उपर छट मात्र इसलिया क्योंकि मैं उनकी सांसत मैंने वो किया
02:07जो शायद मेरी पार्टी में कोई न कर पाया जाकर राष्ट्रिय अध्यक्ष कॉंग्रेस पार्टी को हरा है
02:17चार में मैं चान्दी चौक का चुनाव हारी थी तब लोगों को लगा था खतम मैंने का आज जिनलों को
02:24ये खुश्वैमी हो रही है क्या पता 20 साल बाद वो फिर आएं लोट कर सलाम करने के लिए
02:36स्मृति रानी की सियासत में वापसी तो हो गई है लेकिन बड़ा सवाल ये क्या आखिर बीजेपी ने उन्हें संग्ठन
02:43में इतनी बड़ी और एहम जिम्यदारी क्यों दी है
02:46क्या पाटी एक बाद फिर स्मृति रानी के राजनेते गनुभाव उनकी आकराम अक्षैली और जनता से जुड़ने की उनकी शमता
02:52पर भरोसा जता रहे है या पर संग्ठन में उनकी नई भूमिका पीछे बीजेपी की कोई बड़ी रण नीती है
03:07कि राज्यसभा के माध्यम से एक व्यक्ति को देश का प्रधान मंत्री बनाया जुनके बारे मासम की जनता कहती थी
03:13कि ना वो आते हैं ना उनके माध्यम से असम का कल्यान होता है
03:16कि लडीएफ यूडीएफ दोनों ही फ्लाग बेरर्ज बन चुके हैं इंस्टिटूशनलाइज करप्शन के
03:26कॉंग्रेस पार्टी आदिवासी महिला का ये सम्मान पचा नहीं पा रही ऐसी गरीमा वहीं
03:38आचरन को इस देश के सदन में कभी नहीं देखा गया
03:44हम जिएंगे तो इस भारत के लिए और मरेंगे तो इस भारत के लिए
03:51रश्टाचार में लिप्त के जीवाल का हारना ये तो मुझे लगता है कि एक एक्स्टेक्टेड आउटकम था
04:11करेंगे और जनता के आँखों में धूल जोगते रहेंगे और जनता को समझ नहीं आएगा तो इन लगता है यह
04:16उनकी सबसे बड़ी कमी थी अगर आज जनता अक्रोशित है तो त्रिनमूल का अंग्रेस का डर्ना स्वाभाविक है
04:29सियासत की दुनिया की धाकड खिलाडी, नेता के तौर पर जुझारू, वक्ता के तौर पर बेबाक और तेवर ऐसे की
04:37विरोध्यों को जवाब देने पर मजबूर कर दे
04:42स्मृती रानी
04:48सवाल उठे, विरोध हुआ, आलोच नाए हुई, लेकिन स्मृती रानी ने हर बार अपनी आवाज बुलंद रखी
04:55अमेठी में राहूल गांधी के खिलाब चुनावी मुकाबला हो
05:01या संसद में विपक्ष के सवालों का सामना वो बीजेपी की तरफ से लगातार मुखर नज़र आई हैं
05:12साइबर परनोग्रफी से हमने बच्चों को बचाने का प्रयास किया, मोधी सरकार ने इस बिल को दोनों सदनों में पारित
05:17किया
05:34अमेठी की जीत ने ये दिखाया कि सियासत में बड़े नाम के सामने जमीन पर की गई मेहनत भी असर
05:41छोड़ती
05:45ये तो कब से कह रहे हैं ये तो कहते थे कि चायवाला कभी प्रधान मंत्री नहीं बनेगा
05:49ये तो डेज की कलपना नहीं कर रहे थे और मोधी से बेजर ओगर ये बात तो कॉंग्रिस पार्टी पिछले
05:5412-13 साल से बोल रहे है
05:55और नरेंद्र मोधी ने अर्जना जी बार बार का है
05:58मोधी से बेर है लेकिन दुश्मनी देश से मत मिकल
06:03मोधी से बेर है तो अपमान वंदे मातरम का मत करो
06:07मोधी से बेर है तो पैरा मिलिटरी सर्विसस का अपमान मत करो
06:21स्तरकार के फैसले का बचाव करना हो, विपक्ष पर पलटवार करना हो, या किसी मुद्दे पर बीजेपी का पक्ष जनता
06:29के सामने रखना हो
06:30स्मृती रानी हर बार आगे ख़री दिखाई देती हूं
06:50नकसलवाद पर सवाल हो, जंतर मंतर पर पुलिस के साथ प्रकराव का मुद्दा हो, या विपक्ष का कोई बड़ा हमला,
06:57पार्टी की लाइन को सामने रखने में उनका अंदाज हमेशा बेवाक रहा है
07:08राजनीती में कम से कम जगा तलाशने की कोशिच नहीं की, मैं अपना काम किया और मेरे काम के चलते
07:14मुझे सरहना मिली और मेरी जिम्मेदारियों को बढ़ाया गया
07:17मैंने कभी जाकर अपने बड़ों से नहीं कहा कि अरे मेरी लिए कोई नया स्थान ढूंदो या मेरी लिए कुछ
07:22और जगा बनाओ
07:23यह मुझे लगता है कि राजनीती में अगर आज आप परसनल अंबिशन से ना आएं
07:27और केवल इस भाव से आए कि मुझे जो काम दिया गया है वो मैं करना चाहती हूँ
07:31अगर वो काम मैंने जो मेरा जो दिश्टी कौन है राजनीती के और उससे मेल खाता है तो मुझे वो
07:37करना है
07:37आज कम से कम मेरी पार्टी में हमें अपने काम के बलबूते पर आखका हमें अपनी जगा दी जाती है
07:44प्रधान मंत्री नरेंदर मोधी के भरो से मंद चेहरों में शुमार इसमृती रानी ने संगठन से लेकर सरकार तक कई
07:51एहम जिम्मेदारियां संभाली
07:53कभी संसद में कभी चुनावी मैदान में तो कभी स्टड़कों पर बीजेपी के लिए उनकी मौझूदगी लगातार दिखाईगी
08:23मंत्री के लिए उत छो देश कीक खिलाफ है जो दीश के खिलाक शडियंत्र करते हैं जो देश के प्रगति
08:29के को रुकना
08:30कहते हैं जो सम्गधान का हनन करते हैं और इस परिभाशा में
08:38कि भाशा में चिदाम्रम साहब अपने आपको संविलिप कबो करना चाहते। अगर यहीं तमगह अर्वन Olad Am あり crushed
08:49यह पेहन से पैनना चाहते हैं, तो मैं क्या मूर्फान गिंज़र का नाम ने लिया, उन्होने का देश-विरोधी
09:04संगर्ष से पहचान बनी पेबाकी से आवाज मिली और पार्टी के प्रती प्रतिबधता ने सियासत में अलग मुकाम दिया
09:13स्मृती रानी की कहानी उस नेता की कहानी है जो सवालों से बचने के बजाए उनका सामना करना पसंद करती
09:20है
09:26आज कहानी में ये जानने की कोशिश करेंगे कि स्मृती रानी की वापसी संगठन में क्यों हुई है
09:33क्या पंगाल चुनाव में मेहनत का इनाम मिला है
09:39या फिर यूपी चुनाव में स्मृती रानी की भूमी का बड़ी होने वाली है
09:45या फिर पंजाब चुनाव के लिए स्मृती रानी को चुना गया है
09:59स्मृती रानी को बीजेपी के राष्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में राष्टी महासचिब की जिम्मेदारी दी गई है
10:05आठ राष्टी महासचिब की इस टीम में स्मृती रानी इकलौती महिला है यानि स्तंदेश साफ है
10:11अमेठी की हार के बाद भी बीजेपी के लिए स्मृती रानी की राजनिती कुपियोगिता खत्म नहीं हुई थी
10:25स्विर्ती रानी की कहानी स्तिर्फिक नेता की कहानी नहीं है
10:28ये उस सफर की कहानी है जिसमें एक टीली कलाकार घर घर पहचानी जाने वाली तुलसी विरानी बनी
10:34और फिर वही चेहरा बीजेपी की फायर ब्रांड नेताओं में शामिल हो गया
10:54कभी राहूल गांधी को अमेठी में हारा कर जायंट किलर बनी
10:58तो कभी खुद अमेठी में हार कर सत्ता से बाहर हो गए
11:05कभी मोधी कैबिनेट की सबसे युवा मंत्रियों में शुमार हुई
11:10तो कभी मंत्री पजाने के बाद फिर टीवी के परदे पर लोट आई
11:18और करीब 26 महने बाद स्मृति इरानी की एक और वापसी हुई है
11:23इस बाद वापसी संसद या स्तरकार में नहीं बीजेपी के संगठन में हुई है
11:40अब जब 2029 के चुनाव और उससे पहले 2027 के विधान सभा चुनाव उत्रपदेश के आने वाले हैं
11:46जाहिर है भारत्य जान्ता पार्टी को इसमृति इरानी जैसी एक टाकतवर मजबूत सपूक्स परसन की जरुरत है जो खास तोर
11:54से गांधी परिवार पर सीदा हमला कर सके
11:57तो ये भारती जनता पार्टी की राजनीतिक जरूरत के तोर पर देखता हूँ, मैं इस मुर्ती विरानी की वापसी
12:02स्पष्ट थी पहले दिन से कि मुझे स्पष्ट रूप से जमीन से लेकर अपनी राजनीतिक शुरुआत करनी है
12:10मैं बहुत ही क्लियर थी अपनी मन्शा में कि मैं तुलसी विरानी का पात्र करती हूँ इसलिए मुझे आसान सी
12:17कोई डगर मिल जाएगी
12:18मैं चाहती थी जिन लोगों के साथ मैं काम करती हूँ उन लोगों के मध्ध में रहकर उनके सम्मान को
12:24प्राप्त करना में लिए बहुत जरूरी था
12:27राश्टी अध्यक्ष निती नवीन की नई टीम में स्मिर्ती रानी को राश्टी महस्ची बनाय गया है
12:33यानि जिस नेता को अमीठी की हार के बाद राजनितिक हाश्ये पर जाने की अटकलों से जोड़ा जा रहा था
12:39वही अब बीजेपी के राश्टी संगठन में एहम भूमिका निभाएंगी
13:11बीजेटर के लिए काश्येट है तो दोनों तरह की जिम्मेदारियां या दोनों तरह की जरूरतों को ध्यानुन ने किया होगा
13:20अमेठी वाला जब रिजल्ट आया उस दिन?
13:22कुछ आसू कुछ इमोशनल मैंने उस दिन मेरे घर में प्रभु की कृपा से एक छोटा मंदिर है माँ भगवती
13:30की वहाँ पर मूर्ती है मैं अकेली व्यक्ति थी जो उस प्रांगण में मुस्कुरा के मां को देखकर कह रही
13:36थी जो हुआ तुने अच्छा किया
13:48स्मृती रानी की कहानी में हार और वापसी दोनों साथ साथ चलती रही अमिथी की हार के बाद ये ज़रूर
13:55लगा था कि उनकी सक्रिय राजनिति का दायरा सिमित हो गया है
13:58लेकिन पीजेपी ने उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देकर साथ कर दिया है कि पार्टी अब भी उनकी राजनितिक शम्ता और
14:06जनसंपर्प के ताकत पर भरोसा करती है
14:23यानी स्मृती रानी की सियासी पारी खत्म नहीं हुई बलकि एक नए रोल के साथ फिर शुरू हुई है
14:28अब नजर इस बात पर होगी कि संगठन की इस नई जिम्मेदारी में स्मृती रानी कितना असर छोड़ती हैं और
14:35क्या बीजेपी का ये दाव आने वाले चुनावों में गेम चिंजर सावित होता है
14:50टीवी के जरीए घर घर में लोगप्रिय तुलसी से लेकर बीजेपी की चाइन टिलर नेता तक स्मृती इरानी का सफर
14:57उतार चड़ाव से भरा रहा है
14:592014 में राहूल गांदी के खिलाफ अमेटी से शिनाफ हारने के बावजूद मोधी कैबनेट में जगह मिली
15:052019 में उसी अमेटी में राहूल गांदी को हरा कर एतिहास रचा लेकिन 2024 में फिर हार का सामना करना
15:11पड़ा
15:12तो अब सवाल ये है कि क्या स्मृती इरानी की नई जिम्हदारी सिर्फ संगठन तक सीमित है या बीजेपियों ने
15:182029 के लिए बड़ी भूमिका में तयार कर रही है
15:30मेरी लिए जादा नुकसान दाय किया है कि जिस चीज में मैं बिलीफ रखती हूं उसके लिए आवाज ना होगा
15:36देजी ना सिर्फ अमेटी की जनता को बलकि देश की जनता को ब्रहमित करने का प्रयास कर रहे हैं
15:42इंडस्ट्री में, एंप्लॉइमेंट के सेक्टर में, एजुकेशन के सेक्टर में उत्तीन होना है तो आप गुजराता है
15:50लेकिन अमेधी के हिस्से में पूरा खाद नहीं आता
15:53मुझे जिर्फ इतना ही कहना कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
16:1826 मई 2014, राइसीना हील्स में जैसे जैसे शाम उतर रही थी
16:23स्मृती जुविन इरानी की जिंदगी में एक नया सूर जुग रहा था
16:36राजनिती की गलियों में करिब 11 साल का सफर और अब मन्जिल थी देश की सबसे ताकतवा राजनितिक टीम
16:43प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी की कैबिनेट जिस चेहरे को देश ने कवी टीवी स्क्रीन पर तुलसी के किरदार में देखा
16:50था
16:50वही स्मृती रानी अब देश के लिए नीतियां बनाने वाली टीम का हिस्सा थी
17:01यकिनन उस पर लिस्मृती रानी को अपने संघर्ष का हर वो लम्हा याद आया होगा जब शायद उन्होंने खुद भी
17:07नहीं सोचा होगा कि एक दिन वो देश की कैबिनेट मंतरी बनेंगी
17:13कि एक परिवार संभाला घर-घर का हाउस होल्ड नेम बनी वहां से पॉलिटेक्स पॉलिटेक्स से वापस टीवी को फिर
17:20से टीवी पर जाना तीन ऐसी बड़ी वातें जो आपकी जिन्दगी को डिफाइन करती हूं
17:25मुझे लगता है कि तीन शब्द अगर मेरे जीवन को डिफाइन करते हूं तो एक है संघर्ष, दूसरा है समर्पन
17:34और तीसरा है संभाद
17:37संघर्ष जिसका एक शायद आपने छोटा सा अंश देखा
17:45संभाद जो मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धी है कि चाहे कितना भी करकश हो सकते है संभाद कभी छूटना
17:54नहीं चाहिए
17:55और जहां तक समर्पन की बात है तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं फर्ष से अर्ष तक और वापिस
18:04कई उतार चड़ाव देख चुके हूं
18:06जब तक भगवान के प्रती समर्पन की भावना ना हो तब तक तपिश सहने की क्षमता इंसान में होती नहीं
18:13है
18:13तो संभष समर्पन और संभाद ये तीन साथ
18:18कैबिनेट मंत्री बनने की कहनी आसान नहीं थी
18:21कभी कैमरे के सामने एक्टिंग, कभी चुनावी मैदान, कभी हार और कभी पार्टी संगठन में लगातार खुद को साविक करने
18:29की चुनौती
18:33स्मृती राणी ने ग्लैमर और चकाचाउन की दुनिया से आगे बढ़कर राजनीती की रप्टीली राह पर चलने का फैसला किया
18:40उन्होंने भारती जन्ता पार्टी का दामन थामा, इसके बाद संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई
19:13स्मृती राणी को महराष्ट बीजेपी यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाई
19:17लेकिन उसी साल पार्टी ने उन्हें सीधे चुनावी मैदान में थे उतार दिया
19:22दिल्ली की चांदनी चौक लोगसभा सीट और सामने थे कॉंग्रिस के दिगज नेता कपिल सेबल
19:28मुकाबला आसान नहीं था स्मृती राणी ने पूरी ताकत लगाई लेकिन चुनाव हार गए
19:43लेकिन ये हार स्मृती रानी के राजनेतिक सफर की मनजिल नहीं बनी बल्कि एक नई शुरुवायत बन गई
19:49क्योंकि पार्टी ने चुनाव हारने के बावजूद उनकी मेहनत और राजनेतिक सक्रियता को नजर अंदाज नहीं किया
19:56उन्हें बीजेपी की केंद्रिय समीति में जगह मिली और संगठन में उनकी भूमी का आगे बढ़ती गई
20:09मैं जानती हूं कि मैंने बहुत कठिन परिश्रम से मैं गुजरी एक कठिन दौर से गुजरी उस वाक्त
20:15लेकिन फिर भी कुछ ऐसे समझोते जो जिनकी अपेक्षा की जाती है एक पॉलिटिशन से वो मैंने समझोते नहीं किये
20:22हार गई लेकिन हार जीट तो जीवन का हिस्सा है जब बॉम्बे पहली बार आय थी तब भी मेरे हाथ
20:27में क्या था
20:29ये वो दौर था जब बीजेपी खुद एक बदलाव के दौर से गुजर रही थी अटल बिहारी वाजपई सक्री राजनीती
20:36से धीरे धीरे दूर हो रहे थे
20:38लाल कृष्ण आडवानी के दौर के बाद पार्टी में नई पीढ़ी के नेताओं का उभार शुरू हो चुका था और
20:43इसमृती रानी इसी नई पीढ़ी के तेज तरार चेहरों में अपनी जगह बनाती जा रही थी
20:51कहीना कहीं मेरे संसकार मिलते थे क्या कहीना कहीन मुझे अडल बिहार हbor ये वाजपईजी का काम उनकी हिस्ट्री ने
20:58प्रभावित किया
20:59मेरे साथ आज तक बीजयपी के जितने भी कारेकर्टा काम कर चdar चूके हैं वो भी खास कर मेरे गाउं
21:05में
21:05मैंने उनमें एक कही न कही निश्था देखिया है लालच नहीं देखा कुछ पाने का
21:12युआ चेहरा, तेस्त रार अंदाज, वेबाग भाशन और टीवी के जरिये लोगों के बीच पहले से बनी पहचान
21:20स्मृती इरानी की राजनितिक पून जी लगातार बढ़ रही थी
21:32साल 2010, बीजेपी ने उन्हें राष्टिय सचीव की जिम्मेदारी दी और उसी साल उन्हें बीजेपी महिला मोर्चा का राष्टिय अध्यक्ष
21:40भी बनाए गया
21:422010 में बीजेपी राष्टिय सचीव, 2010 में बीजेपी महिला मोर्चा की राष्टिय अध्यक्ष, 2011 में गुजरात से राज्य सभा सांसद
21:52साल 2011 में स्मृती रानी राज्य सभा पहुची
22:18अब वो सिर्फ बीजेपी की तेज तर्रार प्रवक्ता नहीं थी, बलकि संसत के भीतर भी अपनी आवाज बुलंद कर रही
22:25थी
22:25महिला सुरक्षा, महिला सरक्षक्तिकरण और राजनितिक मुद्व पर उनका आक्रामक अंदाज लगातार सुर्खियां बटो रहा था
22:32कि सिक्षा के जितने भी आयाम, जितनी भी संस्थाने, जितने भी कदम भारत सरकार उठाएगी
22:41ये मेरा दायत्व है कि वो सारे कदम संविधान की मर्यादा में ही उठाए जाएं।
22:48आज पहली बार इस एमेंडमेंट के माध्यम से महिला और पुरुष दोनों 21 साल की उम्र में समानता के अधिकार
23:00को देखते हुए
23:01शादी विवाह का अपना निर्णय ले सकते हैं।
23:06अपना से लेकर 2020 तक हमारे देश में बाल विवाह रोकने की संख्या 20 लाख विवाह रोके गए हैं।
23:19ऐसे रिसर्च हमको बतलाती है।
23:25फिर आया साल 2014 बीजेपी की राजनीती में बड़ा बदलाव हो चुका था।
23:31नरेंद्र मोधी प्रधान मंत्री पत के उम्मिदवार थे और बीजेपी ने लोगसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत जोग दी थी।
23:37उत्तर प्रदेश में पार्टी के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाईयों में से एक थी अमेठी।
23:45कॉंग्रिस का मजबूत किला और सामने थे राहूल गांधी और बीजेपी ने इस मुकाबले के लिए स्मृती राणी को चुनाथा।
23:53स्मृती राणी ने अमेठी को सिर्फ चुनावी सीट नहीं माना। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक चुनाथी बना गया।
24:01दिन रात परचार, काउंगाउं संपर्क, लोगों के बीज पहुँच और राहूल गांधी के खिलाप लगातार आक्राम कभियान।
24:10लोगों को ये कही न कही शक्ता संब्देय था कि ये गांधी परिवार का गड़ है।
24:34अमेठी का मुकाबला पूरे देश की नजरों में था।
24:38नरेंद्र बोधी खुद अमेठी पहुँचे और इस मिर्ती रानी के लिए परचार किया।
24:42हम बदला जहीं चाहते हैं, हम बदलाव चाहते हैं।
24:48और मेरा भरोचा, मेरा भरोचा मेरी ये छोटी बहन पर है।
24:58भाईयों बहनों, हर एक अपनी बहन पर भरोचा होगा।
25:04मुझे इस मेरी बहन पर ज्यादा भरोचा है।
25:09स्मिर्थी रानी चुनाव हार गई लेकिन इस हार में भी एक जीत छिपी थी उन्होंने राहूल गांधी की जीत का
25:16अंतर काफी कम कर दिया था
25:202009 में करीब 3,70,000 वोटों का अंतर था जो 2014 में खटकर करीब 1,08,000 रह गया
25:29और शायद बीजेपी ने इसी प्रतर्शन में आगे की कहानी पढ़ ली थी
25:33क्योंकि लोगसभा चुनाव में हार के बावजूद 26 मई 2014 नरेंद्र मोधी की स्तरकार में स्मृती इरानी को कैबिनेट मंत्री
25:41बनाये गया उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्राले की जिम्मेदारी मिली
25:46मैं स्मृती जूबिन इरानी इश्वर की शपत लेती हूँ कि मैं विधी द्वारा स्थापित भारत के संविधान की प्रती सच्ची
25:56श्रद्धा और निष्ठा रखूंगी
26:00जिस महिला ने 2004 में कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव हार कर शुरुवात की थी जिसने 2014 में राहूल गांदी
26:08के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा और हार का सामना किया वही स्मृती रानी अब भारत सरकार की कैबिनेट में
26:15बैठ रही थी
26:16कि सुभा फोन आया कि आपको शपत लेनी है 2014-26 जून आपको सुभा में कॉल आया हाँ मेरे कुछ
26:24से पहले चनकारी भी नहीं और तब मुझे कहा गया तो मैं परिवार के आथ थी हमने का चलो गाड़ी
26:31निकालो ड्राइब ड्राइब दाउन करो फटाफट मैं सूची थी एक
26:45कामल का फूल है वो किसी कारे कड़ता है कि धरमपत्य ने दी थी प्रचार के लिए और जब ड्राइब
26:51डाउन करे थी शिम्ला से तो प्यूश को मैंने फोन किया था प्यूश गोल को है प्यूश भाई देखो ना
26:56एक बेटी को साथ आना है और हमारे पास पास नहीं है तो आ
27:12प्यूश भाई ने नहीं बोला होता तो वहां राश्रपती भावन पहुंच के सीट देख के बता चाहिता तीवी की दुनिया
27:20की तुलसी अब सत्ता के गलियारों की स्मृतिरानी बन चुकी थी लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होने वाली थी क्योंकि
27:28अगले पात साल में स्म
27:31पंत्राले नहीं संभालना था उन्हें अपनी राजनितिक पहचान भी लगातार मजबूत करनी थी
27:40वाक्ति शुद से ब्रेक का उचला है ब्रेक के बाद देखे आखिर स्मृतिरानी ने दिल्ली से मुंबई कैसे सफरते किया
28:04प्रेक के राणी काहानी सिर्फ चुनावी नतीजों की काहानी नहीं है बलकि लगातार खुद को साबिट करने की भी काहानी
28:10है
28:11कभी सत्ता के केंदर में रही फिर चुनावी जटके ने उनकी राख जरूर बदली लेकिन सकरेता बनी रही
28:17अलग-अलग राज्यों में पार्टी के लिए मैदान सभालने से लेकर नए सियासी समीकर्णों में अपनी जगा बनाने तक उन्हेंने
28:24लगातार काम किया
28:41स्मृती रानी की सियासत की एक बड़ी ताकत है समवाद की कला
28:45वो सिर्भ भाशन नहीं देती जनता की भाशा में जनता से जोड़ना जानती
28:53हिंदी पर मजबूत पकड़ अंग्रेजी में बहतरीन संबाद
29:09संस्कृत का भी सधावा ज्यान
29:21और जर्वत के मुताबिक बांगला और पंजावी में भी लोगों से सीधे करें
29:39यानि स्मृती रानी सिर्फ मुद्दों से नहीं भाशा और संबाद के जरिये भी सियासत साधने का हुनर रखती हैं
29:46स्मृती रानी का सियासी सफर एक ऐसा राजनितिक सफर है जिसमें सत्ता का शिखर भी आया, विवादों का दौर भी
29:53आया, चुनावी जीत का जश्ट भी आया और हार की कसक भी
29:58मेरी नाना बंगाली है, मेरी नानी जब भारत का विभाजन हुआ तब वो असाम में आके धूबडी में बसी
30:05मेरे दादा जी जो जब भारत का विभाजन हुआ तो वो आकर दिली में बसे फिर गए उत्तर भारत में
30:13उत्तर प्रोदेश में रहे
30:15मेरी दादी महराष्ट से हैं, मेरे पती गुजराती हैं, पार्सी हैं
30:19कोई कोना छोड़ा नहीं है इनोने भारत का
30:22कोई कोना छोटा नहीं है क्योंकि एक बहु हमारे खांदान में दक्षिन भारत की भी है
30:272014 में नरेंद्र मोधी सरकार बनी और इस्मृती रानी को मानव संसाधन विकास मंतराले की जिम्मेदारी मिली थी
30:34कीवी की दुनिया से राजनीती में आई स्मृती रानी देश की शिक्षा विरस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही थी
30:41लेकिन मंतरी पत के साथ ही विवादों ने भी उनका पीछा नहीं छोड़ा
30:47सबसे पहला बड़ा विवाद उनकी शेक्षणिक योगिता को लेकर हुआ
30:51उनके 2004 और 2014 के चुनावी हलप नामों में शेक्षणिक योगिता को लेकर अलग-अलग जानकारी का मुद्दा विपक्ष ने
30:59जोरशोर से उठाया
31:01स्मिर्ती रानी ने इन आरोपों का चवाब दिया लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ
31:05इसके बाद आया जर्मन बनाम संस्कृत का विवाद
31:09केंद्रिय विद्यालेओं में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की जगह संस्कृत को बढ़ावा देने के फैसले को लेकर जमिर्ती
31:16रानी विपक्ष के निशाने पर आगे
31:18मैं बताना चाहूंगी कि केंद्रिय विद्याले संगठन ने कक्षा 6 से लेकर 8 तक के सभी स्टूडन्स की कांसिलिंग को
31:26उपलब्द कराया है
31:27साथ ही जो भी इंडियन लैंग्विज स्टूडन्स पढ़ना चाहें
31:31जो भी मैं इसमें संस्कृत का मात्रोल लेक रही कर रही हूँ
31:34जो भी इंडियन लैंग्विज स्टूडन्स पढ़ना चाहें
31:37वो पढ़ सकते हैं उनके लिए अगर मान लीजी एक चात्र को तमिल पढ़ना है
31:55क्योंकि मैंने प्रेस ब्रीफिंग में लगभग चार दिन पहले लिखित रूप में सारे बिंदों को सपष्ट कर दिया था
32:06इसके बाद रोहीत वेमुला का मामला सामने आया
32:09वेमुला के आत्महत्या ने देश के राजनीती को हिला दिया
32:13विपक्ष ने स्मिर्ती रानी के मंत्राले पर सवाल उठाए
32:16और फिर सामने आया जेन्यू का विवाद
32:19जेन्यू में लगे कथि देश विरोधी नारों के मुद्दे पर स्मिर्ती रानी विपक्ष के सीधे निशाने पर थी
32:25लेकिन स्मृति रानी का अंदाज भी बदला नहीं
32:28वो लगातार जवाब देती रही
32:30पलटवार करती रही
32:31और अपनी राजनितिक पहचान को और मजबूत करती रही
32:34अपने जब तै कर लिया जिंदिगे में
32:36तो हर चीज की कीमत होती है
32:38इसकी कीमत ये कि आप पर हर दिन तोहमत लगाई जाएगी
32:42इसकी कीमत ये कि आपको हर दिन लांशित किया जाएगा
32:46लेकिन अगर आप अडिग हैं कि मुझे अपने देश में इतिहास बदलना है
32:51अपने देश में कुछ लोगों का स्वभाव बदलना है
32:54अपने देश में कुछ ऐसे मोड हैं जहां पर आकर constitutionally कुछ contribute करना है
33:02तो आपको इन चीजों के लिए तयार रहना पड़ेगा
33:08स्मृति रानी के राजनितिक सफर में विवाद आते रहे
33:11हर विवाद के बाद उनकी राजनितिक मौजूर्गी और ज्यादा दिखाई देने लगी
33:16देश का कोई कोना है जहां चुनाव वहाँ स्मृति रानी
33:19क्योंकि स्मृति रानी कई भाषाओं में जन्ता को जोडने की कला जानती है
33:24ये संकेत है वाईगुरू का कि इस बार
33:41मंत्राले से हटा कर कपड़ा मंत्राले की जिम्मेदारी दी गई फिर सूचनावं प्रसारण मंत्राले सौपा गया लेकिन विवाद साथ साथ
33:48चलते रहे
33:55यानि 2014 से 2019 तक मंत्राले बदले विवाद बदले लेकिन स्मृति रानी का राजनितिक कद लगातार बढ़ता गया
34:03और फिर आया साल 2019 अमेठी वही अमेठी जहां 2014 में वो राहुल गांदी से हार गई थी लेकिन हार
34:13के बाद इसमृति रानी ने अमेठी को छोड़ा नहीं
34:27पांथ साल तक लगातार अमेठी में सक्रिय रही गाउ गाउ गाउ गई प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क किया
34:43महिलाओं के बीच पहुँची और एक एक वोट को अपने पक्ष में जोड़ने की कोश्च की
35:16चुनाव के वक्त एक दिन में छोटी बड़ी 15-15 जनसमाय तक की
35:18प्रमानित कर पाई कि नेता की नियत में अगर खोट ना हो तो परिवर्तन के लिए पात साल भी काफी
35:23होते हैं
35:24तो इसलिए जब मैं 19 में वहां से सांसत बनी एक लाग से जाधा गरीब परिवारों के घर बनवाए
35:46जिस अमेठी को गांधी परिवार का भेद किला माना जाता था उसी अमेठी में जमिर्ती रानी ने दिहास रच दिया
35:53और इसी जीत ने उन्हें बीएपी का जॉइंट किलर बना दिया है
36:012019 के बाद उनका राजनिती कद और बढ़ा
36:04मोधी सरकार के दूसरे कारेकाल में उन्हें महिलावें बाल विगास मंत्राले के जिम्मेदारी मिली
36:13अगर आप बज़िट की डीटेल्स पढ़ें
36:15अक्रोस मिनिस्ट्री महिलाओं पे और बच्चों पे जो वेलफेर स्पेंड है सरकार का वो आपको बढ़ता दिखेगा
36:26लेकिन पांच साल बाद जब चुनाव का वक्त आया तो इस बार अमेठी का मुकाबला आसान लग रहा था
36:31क्योंकि राहूल गांधी ने अमेठी की जमीन छोड़ दी थी इस बार मुकाबला राहूल गांधी से नहीं था
36:37कॉंग्रिस में केल शर्मा को मैदान में उतारा और नतीजा ये हुआ कि स्मिर्तीरानी हार गई
36:45वो लोक तंत्र का सबसे बड़ा स्वभाव का प्रतीक है
37:01जादा दुख होता तो आज मैं उन दुख के दाइरे में नहीं हूँ आज मुझे सुक्य अनुभूती है कि आज
37:07एक लाग परिवार ऐसे अमेठी में
37:09जिनके सरक्यों पर छट मात्र इसलिए क्योंकि मैं उनकी सांसुत थी
37:17अमेठी में करीब 1,666,000 वोटों से हार के साथ इसमृती रानी की सत्ता से विदाई भी हो गई
37:23मंत्री पद भी गया और सरकार से दूरी बन गई और राजनितिक गल्यारों में सवाल उठने लगे
37:29क्या इसमृती रानी का राजनितिक सितारा अब ढलने लगा है लेकिन इसमृती रानी ने राजनिति नहीं छोड़ी
37:37पहले बिहार चुनाओं में नजर आई और फिर बंगाल चुनाओं में
37:50बंगाल में रेलियां महिलाओं से समबाद और सबसे खास बांगला भाषा में लोगों से सीधा करें
38:19महिला स्रक्षा से लेकर आरजी करकान और ममता बेनरजी स्तरकार पर हमले तक
38:25जमिर्ती रानी ने बंगाल में बीजेपी के लिए आक्रामक परचार किया
38:32मैं कभी नहीं बूलूँगी कि एक जुडिशिल आफिसर एक महिला पोन करकर हाई कोट से अपील कर रही है
38:39कि मेरे बच्चों का ध्यान रखना अगर मुझे कुछ हो गया
38:41यह हालात है पश्चे मंगाल में और अगर आज जनता अक्रोशित है तो त्रिनमूल कांग्रेस का डरना स्वाभाविक है
38:51यानि 2024 की हार के बाद जो नेता राजनेतिक नेपत्थ में जाती भी दिखाई दे रही थी
38:56वो 2026 में फिर चुनावी मैदान में नजर आई और अब एक और वापसी
39:07बीजेपी के राश्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में स्मिर्ती रानी को राश्टी महसची बनाए गया है
39:14आठ राश्टी महसचीवों में वो इकलौती महिला है
39:17बीजेपी ने संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे कर साफ कर दिया
39:21कि स्मृतिरानी की राजनिती कहानी अभी खत नहीं हुई है
39:32स्मृतिरानी कहानी में कई ट्विस्ट हैं
39:34उनके बयान और फैसले चर्चाओं में रहते हैं
39:37पर उनकी कहानी के ऐसे आम हिंदुस्तानी लड़की कहानी है
39:40जिसने सपनों से समझोता नहीं किया
39:43उनके लिए संग खर्श किया
39:50तुलसी ये वो नाम है जिसने स्मृती रानी को रातो रात
39:54शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचा दिया
39:56ये वो किरदार था जो लोगों की जुबान पर था
39:59जिसका चादू स्तिर चड़ कर बोलता था
40:18लेकिन ये शोहरत आसान ना थी
40:20ऐसी काम्याबी हासिल करने से पहले
40:22जिन्रती रानी को काफी जत्तो जहत करनी पड़ी थी
40:25अपने माबाद की खुआश के खिलाफ वो मुंबई तो आ गई थी
40:29लेकिन उनके पास ना काम था और ना ही पैसे
40:32जिन्दगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है
40:42थोड़े आसू है थोड़ी हसी आज गम है तो कल है हसी
40:54जिन्दगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है
41:02दिल्ली की गलियों में 50 साल पहले एक नन्नी सी लड़की पंख लगा कर दोड़ी थी
41:10द्वारका का इलाका तब दिल्ली में होते हुए भी दिल्ली से दूर ही था
41:14पंजाबी पिता और बंगाली मा की बिटिया स्मृती मलोत्रा
41:20स्मृती दिल्ली के इस होली चाइल्ड ऑक्सिलियम में पढ़ा करती थी
41:23खेल में अच्छी थी और वो स्कूल की स्पोर्ट्स कैप्टेन भी थी
41:27इसी स्कूल में उन्होंने बारवी तक्षिक्षा हासिल की
41:48जो दिल्ली में है वहां हाउसकीपर का काम करती थी तो ताज में एक टाटा ग्रूप ने सुविधा दी थी
41:55कि जो बच्चे हैं जिन लोगों की
41:57नौकरियां हैं टाटा ग्रूप में और विशिष्टा ताज में उनके बच्चों की स्कूली फीज अगर बच्चे 60% से
42:05तो दी जाती थी तो मैंने अमा से कहा कि अगर मैं फर्स्ट दिविजिजन लाओं तो फिर आपको नहीं मिलेगी
42:11मेरी फीज तो उनने था लिकिन वहां जाके आपको एदमिशन कैसे मिलेगा तो मैं हर दिन जाके स्कूल के बार
42:18खड़ी रहती थी तो नंस परेशान हो गए थ
42:40स्मृति ने परिवार का हाथ पटाने के लिए पढ़ाई छोड़ी खबरें तो यहां तक हैं कि दसवीं के बाद एक
42:46ब्यूटी प्रोड़क्ट के प्रमोशन के जरिए वो रोजाना 200 रुपे कमाया करती थी लेकिन स्मृति कुछ बढ़ा करना चाहती थी
42:53कुछ ज्यादा हास
43:04मेरे पास पैसों की कमी थी तो नौकरी नहीं मिल रही थी कहीं भी और पिताजी से लिया हुआ पैसा
43:10वो कर्स चुकाना था उन्हें और अपने लिए एक फ्यूचर बनाना था और स्ट्रगल के उस दौरान मैंने सुचा कि
43:16अब घर बैठे माता पिता से पैसे लेने के बजा�
43:20बाहर कोई नौकरी ढूंडे एक ही जगा मुझे नौकरी मिली वो थी मिक्टानल्स जहां पर मुझे हैद भी याद है
43:26कि जब मैं गई तो मुझे लगा कि शायद को एसिस्टन मैनेजर की पोस्ट होगी तो उन्होंने मुझे देखकर सिर्व
43:32हाथ में एक जाडू थमाया एक म
44:13मज़ा आने लगा
44:43लीड रोल दिया
44:44रंग का वो चाहिए था एक्टर भीड भाड में खड़ा होने वाला मैं वो थी तो वो कॉंट्रेक्ट लेने आए
44:50थी जब एक ता बहार आए उन्होंने कॉंट्रेक्ट फार दे मैंने का है राम अभी तो नौकरी मिली थी ने
44:55फिर नया कॉंट्रेक्ट दिया और कहा कि आप �
44:57ये किरदार करेंगे आपको बता है मैं इतिहास त्रशने वाली हूँ थी ने तुलसी के किरदार के साथ पूरा इंसाफ
45:07करते हुए घर घर में अपनी पहचान बना ली थी तुलसी के रोल के लिए स्मृती रानी को लगातार पांथ
45:14साल तक बेस्ट एक्टरिस पॉपिलर का �
45:16इंडियन टेलिविजन आवार्ड मिला, चार बार इंडियन टेली आवार्ड और आठ भार स्टार परिवार आवार्ड से नवाज आ गया
45:46आपकी शकल वैसी दिखती नहीं है, तो थोड़ा बहुत मिनते हाथ पैर जोड़ते जोड़ते जोड़ते एक्टिंग की एक ओडिशन दिया
45:55जिसमें फेल हो गई, फिर भी एक ता अडिग रहें कि नई तूलसी तो यही है
46:01संघर्ष की ये वो कहानी है जिसमें स्मृती ने अपनी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई और टीवी इंडस्ट्री
46:08में एक नया ट्रेन, एक नई मिसाल पेश की लेकिन ये उनके करियर का अंजाम नहीं था, जिन्दगी ने उनके
46:15लिए कुछ और ही सोच रखा था, टी
46:29ज़िए अज़िए की तामाँ कपरो, गले, देख्ते रहे गे आज़ी तक.
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