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इस वक्त Middle East में एक नए Islamic security alliance की चर्चा तेज हो गई है।Saudi Arabia, Turkey और Pakistan ने Mecca Joint Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते को NATO के Article 5 जैसी collective defence व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।अब Iran के संभावित शामिल होने की खबर ने पूरे geopolitical समीकरण को और गर्म कर दिया है।हालांकि Iran को औपचारिक निमंत्रण मिलने की बात की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।इसी बीच Pakistan Army Chief Asim Munir का Tehran दौरा भी बेहद अहम माना जा रहा है।क्या Pakistan Iran को इस नए Muslim security bloc के करीब लाने की कोशिश कर रहा है?अगर Iran इस alliance का हिस्सा बनता है तो Saudi Arabia, Turkey और Pakistan के साथ उसकी नई साझेदारी कितनी बड़ी होगी?और क्या इस पूरे घटनाक्रम से Middle East में America का प्रभाव और रणनीति चुनौती में आ सकती है?

A major new security equation appears to be taking shape across the Middle East.Saudi Arabia, Turkey and Pakistan have signed the Mecca Joint Defence Agreement.The pact is being compared to NATO’s collective defence principle, where an attack on one member is treated as an attack on all.Now, reports about a possible Iranian entry have added a dramatic new dimension to the alliance.However, the reported invitation to Iran has not been officially confirmed by the three signatories.Pakistan Army Chief Asim Munir’s upcoming visit to Tehran has also raised important questions.Could Pakistan be trying to bring Iran closer to the emerging Muslim security bloc?If Iran joins, how could it transform the balance between Saudi Arabia, Turkey, Pakistan and Tehran?And could this emerging regional alignment create a serious strategic challenge for American influence in the Middle East?

#IslamicNATO #Iran #Pakistan #SaudiArabia #Turkey #MiddleEast #MuslimWorld #USAIran #Geopolitics

~HT.318~ED.276~PR.512~GR.510~VG.HM~

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00:00क्या Middle East की जियो पॉलिटिक्स में एक सबसे बड़ा और अनेक्सपेक्टड भूचाल आने वाला है।
00:05क्या साओधी अरेबिया, पाकिस्तान और टर्की के नए सेक्योरिटी एलाइंस में अब तहरान की भी एंट्री होने वाली है।
00:12सवाल बहुत बड़े हैं और खबरे भी उतनी ही चौकाने वाली है।
00:16Middle East की बदलती हुई तश्वीर और इस नए सेक्योरिटी पैक्ट पर चलिए नजर डालते हैं।
00:22कैरान को मिली है इस नए डिफेंसिव अलाइंस का इनिविटेशन क्योंकि अगर ये खबर सच थाबत होती है तो ये
00:29पूरे रीजन के पावर बालन्स को और दुनिया के इतिहास को पलट कर रखतेगा।
00:35हाल ही में साओधी अरेबिया के शहर मक्का में एक बहुत बड़ा डिफेंस अग्रीमेंट साइन किया गया था।
00:41साओधी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सल्मान, तूर्की के प्रेजिडेंट रिसीब तयीब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर शहबाज शरीफ ने
00:51मिल कर मेका जॉइन डिफेंस अग्रीमेंट पर अपने हस्ताक्ष्र किये थे।
00:55इस पैक का सबसे बड़ा और कोर प्रिंसिपल नेटो के कलेक्टिव डिफेंस मॉडल जैसा है।
01:01मतलब अगर तीनों देशों में से किसी एक पर भी कोई आम्ड अटाक होता है तो उसे तीनों पर हमला
01:08माना जाएगा।
01:09इसके अलावा military coordination, intelligence sharing और joint exercises की भी बात की गई है।
01:15लेकिन अब जो सबसे बड़ी update सामने आ रही है वो ये है कि इरान को इस मेका डिफेंस पाक्ट
01:21में शामिल होने के लिए invitation मिल चुका है।
01:24ये दावा किसी और ने नहीं बलकि इरान की Parliament Link News Agency खने मिलात के हेड महदी रहमी ने
01:32अलमयादीन को दीगए interview में किया है।
01:35उनका साफ कहना है कि तहरान को invitation मिल चुका है और फिलाल इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार
01:42किया जा रहा है।
01:44अगर हम इरान के नजरिये से देखे तो तहरान के लिए ये एक बड़ी diplomatic victory जैसा है।
01:49इरान हमेशा से ये मानता आया है कि रीजन की security बाहरी ताकतों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए बलकि यहां
01:56के देशों को मिलकर आपस में एक मजबूट सुरक्षा चक्र बनाना चाहिए।
02:01इरानियन officials का ये भी मानना है कि उन्हें इस pact से डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अगर
02:07regional countries आपस में जुड़ती हैं तो ये एक positive कदम है negative नहीं है।
02:12तहरान के लिए केवल एक alliance नहीं है बलकि सालों से चलिया रही दूरियों को मिटाने और एक नया regional
02:20security framework खड़ा करने का सुनहरा मौका भी बन सकता है।
02:24आपको पता ही होगा कि इरान और साओधी अरेबिया के बीच में जो मक मुटाव हैं वो कई सालों से
02:31चल रहे हैं।
02:32लेकिन दर्शकों इस खबर का एक दूसरा पहलू भी है जिसे नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता।
02:36सबसे बड़ा क्याची है कि अभी तक एरान की foreign ministry या किसी भी official सरकारी बयान में इस invitation
02:43की पुष्टी नहीं की गई है।
02:44नहीं साओधी अरेबिया, पाकिस्तान और टर्की की तरफ से publicly कुष statement आया है जो ये confirm करे कि तहरान
02:52शायद Islamic NATO जोइन करेगा।
02:54इसलिए फिलाल ये सिर्फ एक single source report है लेकिन फिर भी सोचने पर मर्शपूर जरूर करती है।
03:01रास्ते में अभी भी कई बड़ी रोक हैं। इरान और साओधी अरेबिया का इतिहास किस तरह करा है ये किसी
03:07से छिपा नहीं है।
03:08वहीं टर्की और पाकिस्तान के रिष्टे भी तहरान के साथ strategic complexity से भरे हुए हैं।
03:13कुछ unverified reports में तो यहां तक कहा गया है कि अगर इरान इस पैक्ट में आता है तो वो
03:19साओधी जमीन या airspace के American military use पर कड़ी शर्ते या पबंदियां लगाने की मांग कर सकता है।
03:27जना की इस बात का official सबूत तो नहीं है लेकिन अगर Islamic NATO में इरान जुड़ जाता है तो
03:34ये western allies के लिए बहुत बड़ा जटका होगा।
03:39अगर आने वाले समय में ये खबर सच साबित होती है और इरान इस पैक्ट का हिस्सा बन जाता है
03:45तो इसका परिणाम बेहत खतरनाक होगा।
03:48जो पाक्ट शुरू में सिर्फ तीन देशों तक सीमित था वो एक बहुत बड़े regional security block में बदल जाएगा।
03:54जहां आम तोर पर एक दूसरे के खिलाफ खड़े रहने वाले देश एक ही platform पर Muslim unity लेकर आएंगे
04:01और दुनिया को अपने सामने जुकने पर मजबूर करेंगे।
04:04फिलाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हैरान को सच में invite किया गया है और अगर invite किया गया
04:10है तो क्या हैरान को साथ देना चाहिए और Islamic NATO में जुड़ जाना चाहिए और क्या तहरान इस invitation
04:18को स्वीकार करके West Asia का इतिहास बदल देगा।
04:23जवाब के लिए हमें धोड़ा और इंतजार करना होगा जब तक इन देशों की तरफ से official मोहर नहीं लगती
04:29लेकिन एक बात बिलकुल साफ है कि बातचीत हो रही है और बहुत जल्द हो सकता है ये बात सामने
04:35आ जाए कि एरान Islamic NATO से जुड़ गया है और इस एक खबर से पूर
04:51पूर च्छाशक
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