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  • 4 weeks ago
 दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी की वजह से बिजली की तेजी से आगे बढ़ रही है, और हमारा देश भी उसके साथ चल रहा है. फिर भी, एआई के इस जमाने में भी, अलीपुरद्वार के बक्सा हिल्स में बसे तेरह छोटे गांवों में रहने वाले करीब एक हजार लोग सिर्फ खाने के सामान के लिए जद्दोजहद करने के लिए मजबूर हैं. यह प्रकृति की कठोरता के खिलाफ लड़ाई है, साथ ही समय और उचित रसद की कमी के खिलाफ संघर्ष है. क्योंकि उन्हें चावल, दाल, तेल और नमक जैसी दैनिक आवश्यक चीजें खरीदने के लिए पूरा एक सप्ताह इंतजार करना पड़ता है. भारत के विभिन्न शहरों व कस्बों में लगने वाले साप्ताहिक बाजार से इतर एक महत्वपूर्ण संतालाबाड़ी साप्ताहिक बाजार (हाट) उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में बक्सा पहाड़ियों की तलहटी में लगता है. यह हफ्ते में सिर्फ एक दिन मंगलवार को सिर्फ चार से पांच घंटे के लिए लगता है. यह स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों की आजीविका, दैनिक जरूरतों के सामान की आपूर्ति का मुख्य केंद्र होने के कारण उनकी 'लाइफलाइन' कहलाता है. बाजार में चावल, दाल, खाना पकाने का तेल और नमक जैसी जरूरी घरेलू चीजें मिलती हैं.

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00:28।
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00:38it's 7 am
00:39you can see the heart
00:41is finished
00:43this is the morning
00:47it's too far
00:49it's far away
00:495 or 2 km
00:51the road is gone
00:53so it's been
00:557 am
00:5611 am
00:58it's been
00:58for the people who
01:02are leaving
01:03from the south
01:05This is why the road is far away from the road.
01:35देकर रोज मर्रा के सामान लेते थे
01:39एक समय था जब यहां अदरक संत्रे स्क्वैस बहुत जादा उगाए जाते थे
01:45और लोग इन्हें जरूरी चीजों के बदले इस्तेमाल करते थे
02:181993-93.
02:19अलिपुर्द्वार जिले के इस इलाके के लोगों के लिए जिंदगी पहाड सी है
02:23जब इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई
02:27तो कालचीनी के बीडियों ने इनकी समस्या को जल्द से जल्द हल करने का भरोसा दिया
02:32ETV भारत के लिए अलिपुर्द्वार से शुभुदीप बलमन की रिपोर्ट

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