00:07लखनाओ के गोमती नगर में महिला बैंक अधिकारी दिव्या मिश्रा की हुई हत्या के मामले में कई सवाल अभी भी
00:13बाकी हैं।
00:30इन ही अंसुलचे सवालों का जिक्र दिव्या मिश्रा की बहन प्रग्या मिश्रा के द्वारा किया गया है।
01:03दो, कौन उसे इस हत्याकान के लिए मोटिवेट कर रहा था।
01:08वो बाजार से पकाने के लिए एक बार में सारी जरूरी सबजिया नहीं ला सकता था। उसे रेर पिस्टिल कैसे
01:14मिले। कौन से हत्यार किसकी हत्या में इस्तमाल हुए।
01:29व्यक्ति इतना ट्रिगर तभी होता है जब उसे कोई रोज भड़काए।
01:33डिवॉस केस तो लंबे समय से चल रहा था। अंतिम स्टेटिस में हत्यारे ने चीट शब्द लिखा। अगर मानस को
01:38मालूम था कि दिव्या उसे चीट कर रही है तो तलाक की केस में उसे अपनी पत्नी को चरित रहीन
01:43साबित करके अपर हैंड मिल जाता।
01:45क्या चीट शब्द पुलिस को भटकाने के लिए लिखा गया? क्या हत्यारे मानस की मानसिक स्थिती का किसी ने इस्तमाल
01:52किया है? क्या किसी की नजर मानस के घर में मौझूद कथे डेड़ करोड के इस्त्रीधन पर थी?
02:00मानस साइको था, घरेलो हिंसा का आदी था, लेकिन समाज में सभ्यता दर्शाता था, वो चीटी नहीं मार सकता था।
02:28या फिर दिव्या को मानस ने मारा? मानस और शीबा को किसी और ने मार दिया?
02:34ये ओपन शट केस नहीं है, बहुत ज्यादा मिस्टीरियस केस है?
02:39बैंक और घर की दूरी 10-15 मिनट की थी, दिव्या की हत्या के बाद 35-45 मिनट मानस कहां
02:44था?
02:45क्या मानस की फोन में स्टेटस किसी और ने अपडेट किया क्योंकि मानस इंगलिश में लिखता था
02:49स्टेटस अपडेट इंगलिश में था
02:53क्या हत्याकांड और घर की रास्टे के बीच हत्यारा मानस कहीं और भी रुका था
02:59अगर रुका था तो किस के पास? क्या आपनी कोच की पास?
03:05क्या मानस की घर के भीतर कोई तीसरा भी मौजूद था जिसने मानस और उसकी बहन को मारा?
03:11क्या मानस की घर के भीतर खुसने और निकलने का कोई और रास्ता भी था?
03:16पुलिस को इन पहलूओं पर जाच करनी चाहिए
03:18अगर इन सब सवालों के जवाब नहीं मिलते है
03:22पिस्टिल कहां से आई नहीं मालूम चलता है
03:23तो केस किसी और एजिंसी को दिया जाना चाहिए
03:27सच्चाई का बहाराना बहुत ज़रूरी है
03:29ये ओपनेंट शट केस नहीं है
03:30मेरी बहन और उस्मान सिग बीमार लड़की शीवा को न्याए मिलना चाहिए
03:35लखनाव में तीन हथ्यारों के साथ बैंक करमचारी मर्डर प्लान कर रहा है
03:38असलहे ला रहे है
03:41ऐसी पुलिसिंग से बहतर माफी काल था
03:43कम से कम लोगों को मालूम तो होता था किस से साथान रहना है
03:49कर दो होता है
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