00:00आरक्षण होना चाहिए इसके बहुत लोग पक्ष में हैं लेकिन आरक्षण में कई लोग का सवाल आजकल जो उठ रहा
00:08है क्या जाती के अधार पर होना चाहिए क्या आर्थिक अधार पर होना चाहिए क्या उनकी समाजिक परिस्तिती के अधार
00:16पर होना चाहिए आखिर कौन सा
00:18पैमाना या कोई और पैमाना होना चाहिए?
00:20मुझे लगता है कि जो आप तीन पैमानों की बात कर रहे हैं,
00:23वो सारे ही जरूरी है, क्योंकि कोई वेक्ति सामाजिक चीजें होती है,
00:28जिन से जूज़रा होता है, कोई आर्थिक मामले उनके होते हैं,
00:30जिनसे वो जूच रहता है, जिनकी वज़ासे वो अपनी फीस नहीं पे कर पाता है, बहुत सारे ऐसे विद्यारती हैं
00:35जो अपनी फीस नहीं पे कर पाते हैं, घर की हालत आर्थिक स्थिती बहुत जादा कमजोर होती है, तो मुझे
00:40लगता है ये पैमाना भी हमें रखना चाहि
00:57लेकिन अभी एक बहस नई चड़ गई है मैं थोड़ा सा गर्म पाइंट भी लेकर के आता हूं केसफ जी
01:02आप भी और स्टुडेंट से पूछेगा वह से लोग कहते हैं कि
01:08जाती के आधार पर जब आरक्षन होता है आप स्टुडेंट इतने सारे हो और लोग भी आप भी इसका दिमाग
01:15में रखना आपके नंबर मान लीजिए 90 परसेंट आते हैं
01:20और मैं एक स्टुडेंट हूँ जो मेरे साट परसेंट आते हैं आगे आपको एड़ीशन नहीं मिलता प्रोफेशनल एजूकेशन में क्योंकि
01:28आप खास जाती से नहीं हो तो आपको क्या लगता है कि यह सवाल करना जाइज है या गलत है
01:35या इसमें कुछ सुधार की जरूरत
01:37मैं इसे गलत कहूंगे क्योंकि ऐसे अगर आप एक डॉक्टर का लेके चलो आप एक डॉक्टर बनने जा रहा है
01:45बंदा नाइंटी वाला अपनी कर रहा है मेरिट भी हम हैं डिजर्व करते हैं आप एक साट वाले को दे
01:51रहे हो और नाइंटी वाला डॉक्टर नहीं बन पा �
01:53पर मेंने बहुत मेरे बहुत लोगो ड्हाएं बहुत है इस चकर में तो मैं इस चीज को है हिए बुट
02:00यह पे निहीं होना चाहिए जाती पे कि लियुश्प एको दयाु द्चमिक
02:26दरने कि मैं दरन प्रकेशन चलए तब कभी डॉक्तर भन ही नहीं पाएगा
02:52Because for years and for generations, उसको वो सारी फैसिलिटीज नहीं मिली है
03:01He cannot compete with those जो बड़े-बड़े कोचिंग इंस्टिटूट से आते हैं
03:07बड़े शहरों में रहते हैं
03:09They are privileged, right?
03:12तो मतलब फिर तो हमारा देश में जो एक खाई है
03:15There is a gap, वो तो रही जाएगा
03:18उनको अपलिफ्ट करने का क्या तरीका होगा आपके पास?
03:22As a student, what do you think? How you can pull them together?
03:26जैसे अब सरकार है, तो सरकारों को थोड़ी उसमें रिफॉर्म्स लेके आने चाहिए
03:30अगर जो जिनको नहीं मिल रही
03:32अब यह जाती के नाम पे, जिन लोगों के काफी पीडियों से उन्होंने फाइदा लिया हुआ है
03:37वो बार-बार ले रहे हैं
03:38उनका जो पहले भी एक बंदा बन चुके है फैमिली में
03:41जो अपलिफ्ट हो चुके है
03:42अब उनका बच्चा फिर आ रहे है
03:43फिर उनका आ रहे है
03:44बट जो अभी तक जात की वजह से अभी तक आगे नहीं आ रहे है
03:47उनको तो फिर भी नहीं मौका मिल रहा है
03:49जो पीछे वले हैं, वो पीछे रह रहे है
03:51इस रेजर्वेशन के साथ भी
03:58जो आल्रेडी जैसे अफसर बन गए नेता बन गए जैसे हम आप बात कर रहे थे राम बिलास पासबान के
04:04बेटे चिराक पासबान के आज भी वो रिजरवेशन से उस सीट पर चुना लड़ सकते हैं तो उनकी जेगे दूसरा
04:11आ जाए यही है ना एक आईयस का बेटा यही बात
04:17बात कर रहे हो देख वह अगए टो अँभी तो उनको तो फिर भी ने मिल रहा जिन लोगों की
04:21आप बात कर रहे हो भी वो उनको मौका ने मिल रहा उनके लिए वपर चुनिटींटीव नी चाहिए ऑफकॉस बननी
04:27चाहिए खर विस्वेशन हई अबीगो ओस्ट ब्लुई को स
04:44आती तो आपके कान में एक बार डालता हूं वो यह होती है जाती के आधार पर
04:49रिजर्वेशन की कई बजए थी क्योंकि एक कल्चर होता है हमारे देश में खास तौर से
04:56बस्तिय कम्यूटी के हिसाब से थी उस कम्यूटी में सिक्षा का कॉंसेप्टी नहीं था उन्हें
05:02हमने पीचे खास काम के लिए कि तुम ये काम करो तुम ये काम करो तो कई बार क्या होता
05:07है कि जब उस कम्यूटी का एक आदमी हम आगे लाते हैं तो उस कम्यूटी में लगता है कि हम
05:15पीछे नहीं हैं हम भी इनके जैसे हैं हम आगे हमारे बीच का आदमी अपसर बन सकता है �
05:19वो पूरी community का uplift होता है, आगे बढ़ते हैं, ये ज़रासी बात थी, और अगर इससे कुछ हंतर हो
05:26तो बताईएगा.
05:26जी नहीं, मैं आपकी बात से सहमत हूँ, और मैं कुछ कहना चाहूंगी इनकी बात की contradiction में, जैसे इन्होंने
05:33बोला कि अगर एक बच्चा 65 मार्क्स ला रहा है, लेकिन वो reservation category से आता है, तो उसे seat
05:40मिल जाती है, और जो 95 मेहनत करके लेकर आया है, उसे नहीं मिलती है.
05:44लेकिन, क्या ये सामाजिक सच्चाई को दर्शाता है, ये हमें उस व्यक्ति के बारे में बता रहा है, और एक
05:51व्यक्ति के जीवन में, जितना उसकी economic background matter करता है, उतना उसका social background भी matter करता है, हम
05:59एक व्यक्ति के बारे में ये कह सकते हैं, कि अच्छा वो अच्छे economic backgrounds आ रहा है
06:03इसलिए उसके पास यह opportunity है लेकिन उन बच्चों को क्या जो अभी भी गाओं के उन कस्बों में उन
06:10जगाओं पे रहते हैं जहाँ पर छुवा छूट है
06:16तो सवाल यह है कि हम जो आरक्षण देके अपसर बनाते हैं ऐसे लगा लो या डॉक्टर बनाते हैं या
06:23कुछ तो क्या उससे जो आपने कही केबल आर्थिक उत्थान होता है या उनका समाजिक उत्थान भी छुवा छूट में
06:32क्या इस आरक्षण से वो लाव मिलता है
06:35जैसा मैंने कहा कि एक व्यक्ति के जीवन में जितनी महत्वपून भूमिका उसके एकनॉमिक बैग्राउंड की है उतनी उसकी सोशल
06:42स्टैंडिंग की भी है तो समाजिक उत्थान जरूर होता है मैं इस बात से सहमत हूँ और इसमें स्टेट की
06:48बहुत महत्वपून भूमिका
06:49होती है एक पॉलिटिकल साइंस में कॉंसेप्ट आता है अफर्मेटिव एक्शन का और क्योंकि भारत एक वेलफेर स्टेट है तो
06:57यह वेलफेर स्टेट की ड्यूटी बनती है कि वह एक्वल रेप्रेजेंटेशन प्रवाइट करें बिकाज अभी भी जो सी एस्टी और
07:04ओब
07:18किस किस जाती से कोई होंगे कौन से मुझे नहीं पता क्या यह उसके बाबजूत कायम है या खतम हुआ
07:25है अगर यही फार्मूला मैं यह पूछ रहा हूं अगर आरक्षन से हमने आर्थिक उत्सान कर दिया रिप्रेजेंटेशन भी दे
07:31दिया क्या उसके बाद भी हम उस समा�
07:47अज में अभी भी उतनी ही असमानता है जितनी पहले थी शायद कम हुई है लेकिन है लेकिन जब एक
07:53व्यक्ती का economic upliftment होता है तो उसकी capability पे उसका असर दिखता है अगर उसके पास economic power है
08:01तो वो उसके पास एक choice आती है जो शायद उसके पास पहले नहीं थी अपनी life को improve करने
08:06की
08:07अपनी state को अपनी condition को improve करने की अब धीरे धीरे बदल रहा है जी
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