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दिल्ली के Mata Sundari College for Women में Reservation को लेकर छात्राओं के बीच एक खुली और बेबाक बहस हुई। इस खास discussion में छात्राओं ने आरक्षण के समर्थन, विरोध और Reservation Reform—तीनों पहलुओं पर अपने विचार खुलकर रखे।

बहस के दौरान छात्राओं ने Merit, Equal Opportunity, Social Justice, Caste-based Reservation, आर्थिक स्थिति और आरक्षण के वास्तविक लाभार्थियों जैसे मुद्दों पर अपने-अपने तर्क और उदाहरण सामने रखे।

कुछ छात्राओं का सवाल था कि अगर किसी candidate को अधिक marks मिलने के बावजूद अवसर नहीं मिलता और कम marks वाले candidate को reservation के कारण मौका मिलता है, तो क्या यह merit के साथ न्याय है? वहीं दूसरी ओर reservation के समर्थन में छात्राओं ने सामाजिक असमानता और ऐतिहासिक वंचना को ध्यान में रखते हुए reservation की जरूरत पर अपनी बात रखी।

क्या Reservation पूरी तरह खत्म होना चाहिए?
क्या मौजूदा Reservation System में Reform की जरूरत है?
या सामाजिक न्याय के लिए Reservation आज भी जरूरी है?

इन्हीं सवालों पर Mata Sundari College की युवा छात्राओं के बीच हुई इस बहस को हमने बिना किसी पक्ष को थोपे सामने रखने की कोशिश की है।

इस discussion को Shivendra Gaur और Keshav Karn ने anchor/moderator के रूप में संभाला। कार्यक्रम को संभव बनाने में Mata Sundari College administration की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

देखिए पूरी बहस और बताइए—
आपके अनुसार Reservation: जारी रहना चाहिए, खत्म होना चाहिए या Reform किया जाना चाहिए?

अपनी राय Comment में जरूर लिखें।



#ReservationDebate #Reservation #आरक्षण #ReservationReform #MataSundariCollege #Delhi #StudentDebate #Merit #SocialJustice

~HT.178~PR.548~ED.104~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00आरक्षण होना चाहिए इसके बहुत लोग पक्ष में हैं लेकिन आरक्षण में कई लोग का सवाल आजकल जो उठ रहा
00:08है क्या जाती के अधार पर होना चाहिए क्या आर्थिक अधार पर होना चाहिए क्या उनकी समाजिक परिस्तिती के अधार
00:16पर होना चाहिए आखिर कौन सा
00:18पैमाना या कोई और पैमाना होना चाहिए?
00:20मुझे लगता है कि जो आप तीन पैमानों की बात कर रहे हैं,
00:23वो सारे ही जरूरी है, क्योंकि कोई वेक्ति सामाजिक चीजें होती है,
00:28जिन से जूज़रा होता है, कोई आर्थिक मामले उनके होते हैं,
00:30जिनसे वो जूच रहता है, जिनकी वज़ासे वो अपनी फीस नहीं पे कर पाता है, बहुत सारे ऐसे विद्यारती हैं
00:35जो अपनी फीस नहीं पे कर पाते हैं, घर की हालत आर्थिक स्थिती बहुत जादा कमजोर होती है, तो मुझे
00:40लगता है ये पैमाना भी हमें रखना चाहि
00:57लेकिन अभी एक बहस नई चड़ गई है मैं थोड़ा सा गर्म पाइंट भी लेकर के आता हूं केसफ जी
01:02आप भी और स्टुडेंट से पूछेगा वह से लोग कहते हैं कि
01:08जाती के आधार पर जब आरक्षन होता है आप स्टुडेंट इतने सारे हो और लोग भी आप भी इसका दिमाग
01:15में रखना आपके नंबर मान लीजिए 90 परसेंट आते हैं
01:20और मैं एक स्टुडेंट हूँ जो मेरे साट परसेंट आते हैं आगे आपको एड़ीशन नहीं मिलता प्रोफेशनल एजूकेशन में क्योंकि
01:28आप खास जाती से नहीं हो तो आपको क्या लगता है कि यह सवाल करना जाइज है या गलत है
01:35या इसमें कुछ सुधार की जरूरत
01:37मैं इसे गलत कहूंगे क्योंकि ऐसे अगर आप एक डॉक्टर का लेके चलो आप एक डॉक्टर बनने जा रहा है
01:45बंदा नाइंटी वाला अपनी कर रहा है मेरिट भी हम हैं डिजर्व करते हैं आप एक साट वाले को दे
01:51रहे हो और नाइंटी वाला डॉक्टर नहीं बन पा �
01:53पर मेंने बहुत मेरे बहुत लोगो ड्हाएं बहुत है इस चकर में तो मैं इस चीज को है हिए बुट
02:00यह पे निहीं होना चाहिए जाती पे कि लियुश्प एको दयाु द्चमिक
02:26दरने कि मैं दरन प्रकेशन चलए तब कभी डॉक्तर भन ही नहीं पाएगा
02:52Because for years and for generations, उसको वो सारी फैसिलिटीज नहीं मिली है
03:01He cannot compete with those जो बड़े-बड़े कोचिंग इंस्टिटूट से आते हैं
03:07बड़े शहरों में रहते हैं
03:09They are privileged, right?
03:12तो मतलब फिर तो हमारा देश में जो एक खाई है
03:15There is a gap, वो तो रही जाएगा
03:18उनको अपलिफ्ट करने का क्या तरीका होगा आपके पास?
03:22As a student, what do you think? How you can pull them together?
03:26जैसे अब सरकार है, तो सरकारों को थोड़ी उसमें रिफॉर्म्स लेके आने चाहिए
03:30अगर जो जिनको नहीं मिल रही
03:32अब यह जाती के नाम पे, जिन लोगों के काफी पीडियों से उन्होंने फाइदा लिया हुआ है
03:37वो बार-बार ले रहे हैं
03:38उनका जो पहले भी एक बंदा बन चुके है फैमिली में
03:41जो अपलिफ्ट हो चुके है
03:42अब उनका बच्चा फिर आ रहे है
03:43फिर उनका आ रहे है
03:44बट जो अभी तक जात की वजह से अभी तक आगे नहीं आ रहे है
03:47उनको तो फिर भी नहीं मौका मिल रहा है
03:49जो पीछे वले हैं, वो पीछे रह रहे है
03:51इस रेजर्वेशन के साथ भी
03:58जो आल्रेडी जैसे अफसर बन गए नेता बन गए जैसे हम आप बात कर रहे थे राम बिलास पासबान के
04:04बेटे चिराक पासबान के आज भी वो रिजरवेशन से उस सीट पर चुना लड़ सकते हैं तो उनकी जेगे दूसरा
04:11आ जाए यही है ना एक आईयस का बेटा यही बात
04:17बात कर रहे हो देख वह अगए टो अँभी तो उनको तो फिर भी ने मिल रहा जिन लोगों की
04:21आप बात कर रहे हो भी वो उनको मौका ने मिल रहा उनके लिए वपर चुनिटींटीव नी चाहिए ऑफकॉस बननी
04:27चाहिए खर विस्वेशन हई अबीगो ओस्ट ब्लुई को स
04:44आती तो आपके कान में एक बार डालता हूं वो यह होती है जाती के आधार पर
04:49रिजर्वेशन की कई बजए थी क्योंकि एक कल्चर होता है हमारे देश में खास तौर से
04:56बस्तिय कम्यूटी के हिसाब से थी उस कम्यूटी में सिक्षा का कॉंसेप्टी नहीं था उन्हें
05:02हमने पीचे खास काम के लिए कि तुम ये काम करो तुम ये काम करो तो कई बार क्या होता
05:07है कि जब उस कम्यूटी का एक आदमी हम आगे लाते हैं तो उस कम्यूटी में लगता है कि हम
05:15पीछे नहीं हैं हम भी इनके जैसे हैं हम आगे हमारे बीच का आदमी अपसर बन सकता है �
05:19वो पूरी community का uplift होता है, आगे बढ़ते हैं, ये ज़रासी बात थी, और अगर इससे कुछ हंतर हो
05:26तो बताईएगा.
05:26जी नहीं, मैं आपकी बात से सहमत हूँ, और मैं कुछ कहना चाहूंगी इनकी बात की contradiction में, जैसे इन्होंने
05:33बोला कि अगर एक बच्चा 65 मार्क्स ला रहा है, लेकिन वो reservation category से आता है, तो उसे seat
05:40मिल जाती है, और जो 95 मेहनत करके लेकर आया है, उसे नहीं मिलती है.
05:44लेकिन, क्या ये सामाजिक सच्चाई को दर्शाता है, ये हमें उस व्यक्ति के बारे में बता रहा है, और एक
05:51व्यक्ति के जीवन में, जितना उसकी economic background matter करता है, उतना उसका social background भी matter करता है, हम
05:59एक व्यक्ति के बारे में ये कह सकते हैं, कि अच्छा वो अच्छे economic backgrounds आ रहा है
06:03इसलिए उसके पास यह opportunity है लेकिन उन बच्चों को क्या जो अभी भी गाओं के उन कस्बों में उन
06:10जगाओं पे रहते हैं जहाँ पर छुवा छूट है
06:16तो सवाल यह है कि हम जो आरक्षण देके अपसर बनाते हैं ऐसे लगा लो या डॉक्टर बनाते हैं या
06:23कुछ तो क्या उससे जो आपने कही केबल आर्थिक उत्थान होता है या उनका समाजिक उत्थान भी छुवा छूट में
06:32क्या इस आरक्षण से वो लाव मिलता है
06:35जैसा मैंने कहा कि एक व्यक्ति के जीवन में जितनी महत्वपून भूमिका उसके एकनॉमिक बैग्राउंड की है उतनी उसकी सोशल
06:42स्टैंडिंग की भी है तो समाजिक उत्थान जरूर होता है मैं इस बात से सहमत हूँ और इसमें स्टेट की
06:48बहुत महत्वपून भूमिका
06:49होती है एक पॉलिटिकल साइंस में कॉंसेप्ट आता है अफर्मेटिव एक्शन का और क्योंकि भारत एक वेलफेर स्टेट है तो
06:57यह वेलफेर स्टेट की ड्यूटी बनती है कि वह एक्वल रेप्रेजेंटेशन प्रवाइट करें बिकाज अभी भी जो सी एस्टी और
07:04ओब
07:18किस किस जाती से कोई होंगे कौन से मुझे नहीं पता क्या यह उसके बाबजूत कायम है या खतम हुआ
07:25है अगर यही फार्मूला मैं यह पूछ रहा हूं अगर आरक्षन से हमने आर्थिक उत्सान कर दिया रिप्रेजेंटेशन भी दे
07:31दिया क्या उसके बाद भी हम उस समा�
07:47अज में अभी भी उतनी ही असमानता है जितनी पहले थी शायद कम हुई है लेकिन है लेकिन जब एक
07:53व्यक्ती का economic upliftment होता है तो उसकी capability पे उसका असर दिखता है अगर उसके पास economic power है
08:01तो वो उसके पास एक choice आती है जो शायद उसके पास पहले नहीं थी अपनी life को improve करने
08:06की
08:07अपनी state को अपनी condition को improve करने की अब धीरे धीरे बदल रहा है जी
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