00:08दिरेक्टर प्रशांत वर्मा के फिल्म महाकाली एक बार फिर से चर्चाव में आ गई है।
00:34पुरानों की माने तो गुरु शुक्राचारी ने देवताओं को प्रसन्न करने और उनसे शक्तियां प्राप्त करने के लिए लंबे वक्त
00:40तक तपस्य और साधना की।
01:02गुरु शुक्राचारी महरसी, ब्रिगू और माता ख्याती के पुत्र थे।
01:07पुछ कीवदंतियों में ऐसा जिक्र मिलता है कि शुक्राचारी ने शुक्राचारी ने शुक्राप्त करने के लिए महान रिशी अंगिरा के
01:13आश्रम में प्रवेश लिया था।
01:14वहाँ उन्होंने रिशी अंगिरा के पुत्र ब्रिहस पती के साथ रहकर शिक्षा ग्रहन की।
01:18लेकिन शुक्राचारी को महसूस हुआ कि रिशी अंगिरा अपने पुत्र ब्रिहस पती को उनसे अधिक महत्व देते हैं।
01:25इस बाद से दुखी होकर शुक्राचारी ने रिशी अंगिरा का आश्रम छोड़ दिया था।
01:29इसके बाद उन्होंने महान रिशी गौतम से सिक्षा प्राप्त की।
01:32गुरु शुक्राचारी के चार पुत्र थे जिनका नाम चंड, अमरक, त्वास्ट्र और धरात्र बताया जाता है।
01:38वह उनकी दूसरी पतनी से उनकी एक पुत्री हुई थी जिनका नाम देव्यानी था।
01:42कुछ कताओं में देवियानी कोईंद्र की पुत्री भी कहते हैं।
01:45देवी भागवत पुरान के मताबिक एक बार इक युद्ध के दोरान देविता असुरों पर भारी पड़ रहे थे।
02:20अपनी रक्षा के लिए असुर महर्शी भ्रिगू के आश्रम में पहुंचे थे।
02:21इसके बाद जैसे ही माता ने देवताओं की ओर देखा तो सभी देवता तुरंद बेहुश हो गए।
02:26तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णों से मदद मागी।
02:28ग्रम्भांड का संतुलन बनाये रखने के लिए भगवान विष्णों ने अपने सुदर्शन चक्र को माता का सुरक्षा कवश तोन्य और
02:34उनका वद करने का आदेश दिया।
02:36जब महर्शी भ्रिगू को इस घटना के बारे में पता चला तो हो क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान विष्णों को
02:41श्रांप दिया कि उन्हें मृत्वी पर मनुष्य के रूप में जन्म लेना होगा और अपनी पतनी से वियोग का दुख
02:46झेलना पड़ेगा।
02:47उसके बार जब शुक्राचारे को अपनी माता की मृत्यों के बारे में पता चला तो भगवान विष्णों से बेहत नाराज
02:53हो। मानेता है कि इसी कारण उन्होंने असुरों को भगवान विष्णों की पूजा करने से रोप दिया और फिर देवताओं
02:59के बजाए असुरों क
03:00साथ दिने लगे