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Patna में BPSC छात्रों का आंदोलन बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। छात्रों की मांगों और प्रदर्शन के बीच सरकार पर बढ़ते दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह आंदोलन अभी सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इसका असर और बड़ा हो सकता है? क्या छात्र आंदोलन बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकता है? इस वीडियो में जानिए Patna Student BPSC Protest की पूरी कहानी, छात्रों की प्रमुख मांगें, प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया, आंदोलन के संभावित अगले चरण और बिहार की राजनीति पर इसके असर का विश्लेषण। साथ ही समझिए कि आने वाले दिनों में सरकार के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

The BPSC student protest in Patna is becoming a major political issue in Bihar. Students are raising their demands and putting increasing pressure on the administration and government. But is this protest only the beginning of a much larger student movement? Could the demonstrations grow in the coming days and create a bigger political challenge for the Bihar government? In this video, we examine the latest Patna Student BPSC Protest, key demands of the students, the government’s response, administrative action and the possible political impact of the movement. Watch the full analysis for the latest BPSC news, Patna updates and Bihar political developments.

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00:02अच्छा संकेत है कि चात्र अमुद्दों को लेकर लगातार मुखर होते जा रहे हैं आंदोलन कर रहे हैं
00:07लेकिन सरकार के सामने मोटे तौर पर मुझे तीन बड़ी परिशानियां दिख रही हैं
00:12पहली बड़ी परिशानी कि जो भी आंदुरन होता है सीधे तोर पर पहले हपते या दूसरे हपते में एलान कर
00:18देखते हैं कि या तो हम संसर का घहराओ करने जा रहे हैं या मुख्यमंतरी आवास का घहराओ करने जा
00:25रहे हैं जैसे आज वाले आंदुरन में मुख्यमंतरी आ�
00:38हाइल होते हैं अच्छा उसकी फोटो जो है वीडियो आज का सोचल मीडिया का दौर है तुरंट फैल जाते हैं
00:44वीडियो के देखो चात्रों पर पुलिस लाठिया बढ़सा रही है तो सरकार करे तो करे क्या आपके हिसाब से कैसे
00:50निप्टे इन आंदोलनों से
00:52सरकार करे ये कि आंदोलन से पहले प्रवस्ता सुधारे जब सरकारें दूसरी फ्रीवीच पर बनने लगेंगी जब सरकारें जात पात
01:03और धर्म पर बनने लगी थी अभी तक यही हो रहा था और उसी पर सब कुछ होता था तो
01:09सरकार को जो सरकार बनाता था उसे पता था कि जा
01:13पात धर्म की बात करो और उसके बाद सरकार बना लो फिर जब सरकार बनाने का नमबर आए तब कोई
01:20लॉलियपाप दे लो अब भीहार में चुनाओ पात में है ना तो अब क्या करें सवाल यह है कि यह
01:28आंज़ूलन भेतर है
01:29सरकार को अब मुई मुद्दों की तरफ बढ़ना पड़ेगा छात्रों या युवा हो जाक्रों को गए उन्हें चाहिए अच्छी सिच्छा
01:38अच्छा रोजगार और ये बात हम जो भी केशब जी आप लोग कह रहे थे कि देखिए पिछले 12-13
01:45सालों में हुआ ये था अन्ना �
01:47अंदोलन के बाद में लोगों को लगने लगा था कि अब अंदोलन जो होंगे उसे में कुछ फाइदा नहीं होगा
01:53लेकिन जो सीजेपी का अंदोलन विल्गी में हुआ जिस तरह उसमें युवा एकत हुए और जिस तरह हैं से वो
01:59एकजुट रहे महीने बर तक चले हार नही
02:14सभी हो जनमानस से जुड़ा मुद्दह हो ऐसा मुद्दह हो जिसमें जाकी धर्म की सारी दीवारे हट जाए वा कि
02:23सारी धार की धर्म को होंगे ना है तो उनको पता ही नहीं को हुँ है चाहत बहुत है हम
02:40यह थोड़ी
02:41जाके अपना और अपने बच्चों का भविश है तो वो सही विवस्ता में है और सरकारों को जो जहेलना पड़
02:47रहा है यह कोई जहेलना नहीं पड़ रहा है यह उनके किये का ही फल है क्योंकि जब इतने सालों
02:55से देखिए कोई यह को नई
02:59अब यहां पर उन्होंने जो बात की है यह जो विवस्ता की लीट की या फिर परीच्छा में विवस्ता परवरतन
03:06की उसका सभाल देते कि दो चर्णों में क्यों करा रहे हो उसका कोई सही बात तो समझाएगी क्या वजश्चता
03:12है क्या सिक्षा कि इस तरह में कुछ आप बदल
03:25होती है चात्रों की आवाज को सुनना पड़ता है कोई रास्ता निकालना पड़ता है आखिए व्यां का मुद्दा अभी थे
03:33सी को ले करके है उसमें पिछले दो धानली की तरब्वी साला कर रहे हैं आप दो पेपर जो हो
03:39रहे है प्रील्म और जो है नेश उसकी विवस्ता �
03:43यह सारी चीज़ें लेकिन यह क्या सही है क्या ने लेकिन बहस का मुद्दा तो इसमें सरकार को परसानी हो
03:51रही है इसलिए वह बात्चीट करके सही कडम अगर कर नहीं उठाएगी जो इन मामगों पर बात्चीट की जा सकती
04:00थी वहां से लेकिन संबाद भीहिम नड़ने आप �
04:02देते चले जाएंगे अपनी तरफ से तो फिर आपको इन चीजों का सामना करना पड़ेगा बिल्कुल हर्श वर्धन जी के
04:09पाथ चलते हैं जेडियू के नेता है बिहार में जेडियू लंबे समय से सक्ता में है 2005 से लगातार फिर
04:16चाहे वो आरजेडी के साथ गरवंधन करके �
04:18बीजेपी के साथ हर्श वर्धन जी शिक्षा विवस्ता में सुधार आप लोग कर लेते तो ऐसी नौबत ही नहीं आती
04:24कि शात्रों को आंदोलन करना पड़ता बार बार सड़क पर उतरना पड़ता अभी तो उनके पहने का वक्त है उन्हें
04:30लाठियां खाने का शौक तो है
04:31नहीं चलिए हर्श वर्धन जी के पास चलेंगे अभी केशो जी से सवाल का जवाब लेते हैं केशो जी आपको
04:38नहीं लगता कि अब जो है मीडियम बदल चुका है पहले मैं यूपी से आता हूँ पहले आंदोलन होते थे
04:45शात्रों के लाठियां खूब बरसती थी दूसरे �
04:59को इसे दबा पाना भी मुश्किल है आप जैसे कि अभी शिवेन जी बता रहे थे कि पहले जो आंदोलन
05:04हुए थे चाहे हो शाहिन बाग का हो दिल्ली कहीं बात करें हम किशानों का अंदोलन हुआ तो उसे एक
05:09समुदाय विशेश से जोड़ के स्थान विशेश से जोड़ के
05:11खारिज किया जाता था लेकिन छात्रों में आप क्या ढूणेंगे कौन से जा ढूणेंगे इनका क्या धर्म ढूणेंगे बिल्कुल और
05:17ये सरकार की बहुत दुख्ति रख बन चुकी है दुनिया भर के सरकारों के लिए मैं सिर्फ देश मर नहीं
05:22कह रहा हूँ और मैंने ग
05:41की भून का मानी जाती है और अब जिस दौर में हम रह रहे हैं कि एक कहावत थी कि
05:47नेकी कर दर्या में डाल अब है कुछ भी कर सोसल मीडिया पर डाल बेलकुल तो जब सब
05:52कुछ social media पर आ रहा है social media की भी बहुत जिम्मेदारी बन जाती है
05:57social media ने इसको लेकर कि काफी सशक्त नियम भी बनाये हैं और नियमों की कई बार आलोजना भी होती
06:04है
06:04लेकिन यह प्रसार में महत्वपूर्ण भूमी का निवा रहा है और जब आप information revolution के दौर में जी रहे
06:11हैं, जब आप सूचना करांती के दौर में जी रहे हैं, तो ऐसे प्रभावों से बच नहीं सकते हैं, एक
06:16तरफ यह productive भी है, दूसरी तरफ counter productive भी है, productive है कि अगर सही सूचन
06:33बहुत तेजी से हो जाता है, और उसका नुकसान आखिरकार समाज को ही उठाना पड़ता है, सरकारे भी है, social
06:40media नियामक बनाने के लिए, देश भर में अलग-अलग राजियों में इसको ले करके अलग-अलग कानून है, वह
06:47एक अलग बात है, लेकिन अब आप इस बात से नि
07:02कर सकते हैं, अब यह नहीं होगा, हर व्यक्ति के पास अपनी आवाज है, अपनी आवाज लोगों तक पहुचाने का
07:09जरिया मौजूद है, और यह उन्हें एक अलग तरह की शक्ति देता है, हलांकि शक्ति पर अंकुष भी बहुत जरूरी
07:17है, तो इस पर रेगुलेशन का अ
07:32कि एक नया तरीका दिख रहा है, एक नया फैशन दिख रहा है, जहां भी आंदोलन होते हैं, तो मुख्यमंत्री
07:39आवास घेरो, अप्रधानमंत्री आवास घेरो, आखिरी क्या करेंगे, अठारह अगस्त से यह आंदोलन कर रहे हैं, और जब सुना नहीं
07:49जाएंगा, तो वर
08:02प्रभु ने अप भी शन हुंकार किया, आपना स्वरूप विस्तार किया, तब यह आप यह देख रहे हैं, प्रचंड रूप
08:09उनका, सरकारों को जल्दी इन समस्याओं को सुनना चाहिए, और एक प्रकोष्ट होना चाहिए, इनके लिए कुछ रिड्रेसल फोरम होना
08:19चाहि
08:24या शिवंद्र जी जो कह रहे थे, वह बहुत ही रिमार्केबल पॉइंट है, कि अन्य आंदोलनों को खत्म करने के
08:33लिए, सरकारें उसमें कुछ न कुछ ऐसे मार्क एड़ कर देती थी, कि यह इनका भाई आंदोलन है, यह जी
08:41उनका आंदोलन है, देश विरोधी, खालिस्त
08:54आवाज के लिए कोई और विशेशन नहीं हो सकता था, उन्हें मानसिक नकसली कहना, दिमादी नकसली कहना कहां तक सही
09:03है, विरोध की आवाज के लिए और भी विशेशन हो सकते थे, तो सवाल है कि आप किसी मांग के
09:11सामने जुकते हैं, तो आपकी यह कमजोरी नहीं होती है
09:15यह प्रजात अंत्र की शक्ति है यह खुबसूरती है लेकिन फिर आप उसी की आलोचना करते हैं तो आपके intent
09:24पर question उख जाता है तब यह लगता है कि यह pressure group बना रहना चाहिए ताकि इनकी निरंकुष्टा पर
09:32भी नियंत्रन रह सके
09:34सरकारें आखिर अपना काम सही से करती रहेंगी लोगों को मौका नहीं देंगी तो फिर क्यों ऐसे विवाद शुड़ू होंगे
09:43एक बात और यहाँ पर समझे यहाँ पर हर्षवर्धन जी फिर हमसे जुड़े हैं उससे समझने की कोशिश करेंगे अगर
09:49internet ने स्थाथ दिया त
09:50तो इस वक्त बिहार के सरकार की सबसे बड़ी डेलिमा क्या होगी बिहार में सक्ता का हस्तांतरन हुए मुझिल से
09:59छे महीने हुए हैं बिलकुल छे महीने का सक्ता हस्तांतरन है ने मुख्यमंतरी है भारतिये जनता पार्टी को पहली वार
10:06अपना मुख्यमंतरी बनाने का मौ
10:20हलकी ही सही मैं अलोक प्रियता के अंश दिखने लगे बिल्कुल में बिलुक। सरकार अब नितिशकुमार की छट्र छाया में
10:28नहीं है।
10:29नितिश कुमार का आप ये बात माल लीजिए बिहारी होने के नाते भी पत्रकारिता का छात्र होने के नाते भी
10:37और नितिश कुमार के शासनकाल को करीब से देखने की वजह से भी मैं यह कह सकता हूं कि नितिश
10:42कुमार के आलोचक हो सकते हैं नितिश कुमार के प्रसंसक हो सकते
10:49है आप उनकी प्रसंसा करें अलोचना करें वो अलग बात है वर्षो तक उनका जो विधाई अनुभव था राज के
10:56लोगों को जो समझने की कैपसिटी थी उनकी बिहार सरकार के पास अभी वो चीज नहीं है और बिहार की
11:04जनता चाहे कुछ भी कहले के नितीश में उनका एक भ
11:19भर्ती की परिक्षा है उसको फिर पुराने धर्रे पे ले जाते हैं तो उनके नीती गत अस्थायतों पर प्रस्वर चिन
11:28लगेगा धुल्मूल रवया वाला सरकार समझा जाएगा पहले ही बहुत सारी विबादों में घिरी हुई है और अगर नहीं मांगते
11:34हैं तो फिर यह
11:35अंदोलन का क्या होगा यह अंदोलन भी चलता रहेगा तो अजीब पशो पेस में सरकारे फशी हुई है सरका और
11:41देखी इसलिए कहा जाता है कि कंसल्टेशन का बहुत बड़ा रोल है डेमोक्रेसी में एक्सपर्ट की आंसे और बीपीएसी में
12:00एक्सपर्स ज़रूर बैठत
12:05energy थी तो इस तरह का जो उद्दाम परदर्शन हो रहा है शायद वो नहीं हो रहा होता लोग फिर
12:11अपनी राय पहले रहे ही दे चुके होते और फिर अपनी राय को ही फिर भी परदर्शन किसी भी हो
12:16जासे हो सकता है लेकिन फिर वहाँ पर काउंटर करने के लिए उनके पास �
12:19दूसरे पॉइंट्स चाहिए होते तो एक चीज ले आए हैं फिर इनको वापस कैसे लें यह भी दुविधा सरकार के
12:26पास होगी और अगर यह ऐसा करते हैं तो जो विपक्षी पार्टियां बैठी हुई हैं वो तो इसी मौके की
12:32तलास में हैं और तेजश्वी आदब तो कह र
12:47हैं इससे नौकरी मिलने में और देर होगी दूसरा इससे आर्थिक बोज भी परेगा अब हम पिछले दिनों देखे थे
12:53एक भरती परिक्षा थी पटना पूरे बिहार भर में और किस तरह की और विवस्था से दो-चार होना परा
13:00था परिक्षार्तियों को बसे नहीं मिल रह
13:16पर सुचना है चाहिए पटना के परिक्षार्तियों का सेंटर किशन गंज में क्यों दे दिया जाता है तो पटना के
13:23आसपास रहे दर्वंगा के हैं तो दर्वंगा में रहे परिक्षा तो कहीं भी करवाई जा सकती है ना इन सभी
13:28सहरों में परिक्षा होती है लेकिन परिक्
13:46समस्तियाओं को कौन सुनेगा सरकार को आगे आके विचार करना चाहिए मैं उनकी इस पहल का स्वागत भी करता हूँ
13:51हर्षवर्धन जी जुरे हुए हमसे बात नहीं हो पा रही है लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री ने अगर उहां पर विद्यार्थी
13:58सहयोग शिवीर लगाने क
14:00के बात कही है तो यह स्वागत योग्य कदम है बिलकुल हर्षवर्धन जी के पास सलते हैं उनसे बाचित करने
14:05कोशिर करते हैं हर्षवर्धन जी पिछले 21 सालों से आपके हाथ में बिहार की सकता है आप नहीं हटे हैं
14:13चाहे आपको आरजएडी के साथ सरकार बनानी पड़ी
14:15हो या बीजेपी के साथ शिक्षा वेवस्था अगर सुधाली होती तो छात्रों को बार बार पटना के सड़कों पर लाठिया
14:22नहीं खानी पड़ती धरने नहीं देने पड़ते हर्षवर्धन जी आप मुझे सुन पा रहे हैं चलिए आखरी सवाल के और
14:35बढ़ते हैं शिव
14:38जी क्या वक्त आ गया है कि देश की जतनी भी सरकार है राजस की चेनर की उन्हें हो जाब
14:43सजग्धक हो जाना चाहिए शिक्षा मंत्रा एखर ब्यवस्था को अब अब दंभीटता दया
14:48चाहिए हमने देखा है सरकार जब बनती है जब सरकार गठन का काम होता है तो विभागों में बटवारा होता
14:54है तो मलाईदार मंत्राले सब चाह रहे होते हैं सारे नेता कि मुझे लोग निर्मार मिल जाए मुझे शहरी विकास
14:59मिल जाए
15:20जिए अच्छी शुरुआत है ना शुवेंज हम देखें तो अच्छी आप जिम्मेदारी लेने के
15:29जिम्मेदारी लेना बहुत बड़ी होती है और यह जो सिख्छा विवस्ता है मैं आपको बताओं बैबब अगर आप ग्राउंड पे
15:36और जाकर देखोगे हम सब जाकर देखते भी हैं यह एक दिन की ना तो खराबी है और ना जो
15:44एक दिन्रस सही होने वाली है क्योंकि यह बीस
16:05सब कुछ हो रहा है कि अब जो विवस्ता है शुदरने वाली नहीं है आप इसके बाद ना सिख्छा आपको
16:26दूसरी बड़ी में बता रहा हूं
16:28बहुत जल्दी आपको दूसरे अंदुलन दिखेंगे वो स्वास्त विवाग के दिखेंगे स्वास्त सेवाओं के बुरुद दिखेंगे लोगों का सिख्छा और
16:37रोजगार यह चुकी यवाओं की एकदम ऐसी समस्या है आपने देखा ना भी नीतिया उपका एक वह आया ह
16:48लोग है जो ना तो कोई कोई ले रहे हैं ना अपनी सिख्छा आगे बढ़ा रहे हैं ना किसी रोजगार
16:55में हैं सोचो यानि की साड़े ग्यारा परसेंट हमारा युवा साड़े आपको लुपा मतलब ऐसी स्थिति में वह बहुत ही
17:02दैनी है स्थिति उसके हाथ में रोजग
17:14पारे यह अर प्रदेश में होगा और यह पाटी लाइन से अलग हट्के होगा चात्र मांगेंगे नेताग्री काले वाले लोग
17:23हैं कोई कि कहगा आपके लोग हैं लेकिन यह युगा अब इतनी पेज मांग कर रहा हैं कि सरकारों के
17:31पास इनका जल्दी हल नहीं है तो जो इन
17:44सबी केशब जी कहा रहे हैं न सोशल मीडिया के दौर में और यह चीज़ जो आंजोलन की एक रास्ता
17:50मिल जाता तो यह भी तंत्र भी ना बज जाए कई बार मांग विकास को ना रोग ले आपने ऐसा
17:55देखाऊगा पिछले कड़ी कान में होगी बांग बन रहा है तो दस लोग
18:00तो सवाज यह कोई ऐसा भी इसलिए पहले से पहले जो हम नियम लावू करना चाहें तो बिल लावू करना
18:08चाहें उसमें पिर्मुक लोगों से संबाद कराके आम जन से संबाद की रवस्ता करके एक उस पर पहुंचा गाए ताकि
18:16संद्धा सरकार को समझ में आ जाए कि अग
18:23जैसे गलब ना चला जाए क्योंकि अगर मां लीजिए दो चौन की परिक्षा और उस परिक्षा में क्या पहली चलिना
18:30में जर्नल स्टडीज पर सवाल है दूसरे में क्या है कुछ जो उसमें से छड़ जाएंगे उसमें असी कोश्चन जो
18:37है वो विसर इसे इसके हैं जैसे म
18:57चात्रों का शर्वांगिण दिकास की तरब उनको नहीं कर पाएगा तो इसलिए वो बहतर है लेकिन उसको समझाई नहीं पा
19:04रहे होगा आपने उठाया कि हम ऐसा कर रहे है अब चात्रों को लग रहा है पिछले तीन चंड की
19:09जो परिक्षा हुई है उनमें तो आपने लाग
19:22सब्सक्राइब किस से बात करोगे तो वो इसके लिए होगा कि नेताओं की विश्वस्मियता उनकी कर्मता कोई शुकारता अगर जनता
19:32में होगी तो उसकी वो हर बात मालेंगे

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