00:01जील जैसे द्वारका वासियों के सामाजिक और आध्यात्पिक जीवन का केंद्र है ये भव्य द्वारका धीश मंदिर
00:12ये जगत मंदिर और त्रलोक सुन्दर के नाम से भी जाना जाता है ये द्वारका की बाकी सभी इमारतों से
00:18उचा उठता है
00:20यू तो इस मंदिर की स्थापना की कोई एतिहासिक तिथी नहीं मिली है पर प्रमाणों के अनुसार हजारों सालों में
00:28मंदिर ने कई आक्रमन और पुनर निर्माण देखी
00:34आठवी सदी के महान विद्वान आदिगुरु शंकराचारे ने इसका पुनर निर्माण करवाया
00:39उसके बाद इसकी देख रेक राजपूतों ने की पंद्रहवी शताब्दी में महमूद बेगड़ा ने इसे तोड़ दिया
00:481877 में अंग्रेजी हुकूमत के तहर इसे बड़ी हानी पहुची पर 1861 में अंग्रेजों ने गायकवाणों के साथ इसकी मरम्मत
00:56भी करवाई
00:581960 में इस मंदिर को द्वारकाधीश टेंपल अड्मिनिस्ट्रेटिव कमीटी को सौप दिया गया
01:05पर कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कृष्ण के परपोते वज्जरना अपने करवाया था
01:13ग्रनाइट और सैंड स्टोन से बना ये प्राचीन मंदिर नागरा वास्थु कला शैली का बेजोड उधारण है
01:19इसमें पांच मंजिलें और साठ स्टम्बें इसका शिखर करीब 38 मीटर उचा है
01:29और मंदिर की दिवारों पर बनी हैं देवी देवता और पशुपक्षियों की कलाकृतिया
01:40इस भव्य राजसी मंदिर के अंदर विराचित द्वारकाधीश की प्रतिमा को द्वारकावासी किसी राजा की तरह ही पूछते हैं
01:55द्वारकाधीश मंदिर की अपनी दिन चर्या है सब कुछ समय अनुसार होता है
02:00जो मंदिर के देवता होते हैं उन्हें स्वरूप मना जाता है तो उन्हें मूर्ती नहीं मना जाता है
02:04मनुष्य जैसे हावभाव करते हैं जो मंदिर के देवता हैं उनको ऐसे ही ट्रीट किया जाएगा
02:10कुछ लोगों का मानना है कि मंदिरों के जो रिचुल्स है इससे लोगों को सीख मिलती थी
02:15कि देखो ऐसे उठना चाहिए, ऐसे खाना चाहिए
02:17हर रोज द्वारकाधीश को ग्यार बार भोग लगाया जाता है और चार बार उनकी आरती होती है
02:23सुबह मंगला आरती से द्वारकाधीश को जगाया जाता है, शरंगार आरती में सजाया जाता है
02:30दोपहर के विश्राम के बाद शाम को संध्या आरती होती है और रात में शैन आरती के बाद उन्हें सुलाया
02:38जाता है
02:43सुबह की मंगला आरती के बाद भगवान कृष्ण जाग गये हैं
02:47उन्हें दो भोग लग चुके हैं और उनके दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने लगी है
02:53द्वारका की गलियों में तुलसी माला बेचने वालों की भीड लगी है
02:57कृष्ण की पूजा में तुलसी का बड़ा महत्त है
03:00माना जाता है कि तुलसी कृष्ण की पत्नी होने के साथ साथ प्रेम का प्रतीक है
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