00:03avic
00:03सूचिए जिस इन्सान के एक छक्यपपर पूरा देश जुम उठा था जिसके हाथ में कुछ साल बाद गौप की ट्रॉफी
00:10होने वाले थी
00:11उसी इंसान की जिन्दगी में एक समय ऐसा था जब क्रिकेट की पीच से ज्यादा ज़रूरी था एक स्टेबल नौकरी
00:17जी हाँ, महंदर सिंग धोनी कब इंडियन रिलवेज में TTE यानि की ट्राविलिंग टिकेट एक्जामीनर थे
00:24लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, एक टिकेट कलेक्टर वर्ल्ल कप चेंपियन बन गया, असल कहानी उस फैसले की है,
00:32जिसमें धोनी को चुनना था एक सुरक्षित नौकरी या फिर एक ऐसा सपना जिसकी कोई गिरेंटी नहीं थी
00:39रांची से आने वाले धोनी को बच्पन से ही क्रिकेट का शौक था, लेकिन सिर्फ टेलिंट के दम पर किसी
00:45मिडल क्लास परिवार का लड़का अपने भविश्य का फैसला नहीं कर सकता, उन्हें भी पता था कि क्रिकेट में केरियर
00:51बनाना आसान नहीं है, उन्होंने जुनि
01:09financially stability मिलती थी, और दूसरी तरफ क्रिकेट था, जिसमें passion तो था, लेकिन future की कोई guarantee नहीं, यानि
01:17जिन्दगी में उनके सामने एक बहुत बड़ा सवाल रख दिया था, security चुनोगे या सपना, अब यहां धोनी की कहानी
01:26interesting हो जाती है, क्योंकि उन्होंने क्रिकेट को सिर्फ हो�
01:30वो लगादार domestic cricket में मेहनत करते रहें, और धीरे धीरे performances ने उन्हें national selection के radar पर ला
01:38दिया, फिर आया वो दोर जब उन्हें मैसूस हुआ कि अगर क्रिकेट में आगे बढ़ना है, तो पुरी तरह से
01:45cricket को priority देनी होगी, और यहीं उन्होंने अपना जिन्दगी का सबसे बड़ा
01:50risk लिया, railway की secure नोकरी छोड़ दी और अपना पूरा focus cricket पर लगा दिया, ध्यान रखिये, उस वक्त
01:57उन्हें ये नहीं पता था कि इंडिया के लिए खेलेंगे या नहीं, उन्हें ये भी नहीं पता था कि वर्ल्ड
02:03कप जीतेंगे या नहीं, उनके पास कोई guarantee नहीं थी, बस ए
02:25ुपारी खेली जिसने पूरी क्रिकेट वर्ल को बता दिया यहाँ खिलाडी अलग है 148 ट्रंस फिर 183 और दीरे-दीरे
02:35वह सिर्फ एक विकेट कीपर नहीं रहे वह इंडिया के सबसे भरोशेमन
02:39फिनिशर में से एक बन गए फिर 2007 में उन्हें इंडियन टीम की कैप्टन से मिली और उसी साल इंडिया
02:46ने इनोगरल T20 वर्ल कप भी जीता जिस लड़के के केरियर का कोई गिरंटी नहीं था अब वहीं भारत को
02:52वर्ल कप जीता रहा था लेकिन कहानिया भी पूरी नहीं हुई
02:55थी 2011 क्रिकेट वर्ल कप फाइनल वान खेड स्टेडियम इंडिया को चाहिए थे 275 रन और प्रेशर इतना था कि
03:04करोडों लोगों की नजरेट टेलेविजन पर थी लेकिन धोनी ने एक बार फिर रिस्पोंसिबिलिटी अपने हाथ में ली उन्होंने खुद
03:12वेटिंग ओड
03:25का सबसे बड़ा लेसन है हर सपना तुरंत पूरा नहीं होता और हर रिस्क का रिजर्ट भी गैरंटीड नहीं होता
03:32लेकिन अगर आप उस सपने को लेकर सिरियस है और एक पॉइंट पर आपको डिसाइड करना पड़ता है क्या मैं
03:40सिर्फ सुरक्षित रास्ते पर चलूँग
03:41या एक बार अपने सपने के लिए risk लूँगा धोनी ने risk लिया और शायद इसी के लिए उनकी कहानी
03:49सिर्फ cricket की कहानी नहीं है ये एक decision की कहानी है जिसने एक railway employee को इंडिया का World
03:56Cup winning captain बना दिया क्योंकि कभी कभी जिन्दगी बदलने के लिए पूरी जिन्दगी नहीं सिर्फ
04:03xifes la shayye