00:0022,000 crore से ज्यादा के claims लेकिन repayment plan में भुकतान सिर्फ सारे 6 crore
00:05आखिर इतने बड़े अंतर की वजह क्या है?
00:08क्या सुभाष चंद्रा ने खुद 22,000 crore का करज लिया था?
00:11या यह पूरा मामला ISL Group की अलग-अलग कंपनियों और उनके financial संकट से जुड़ा है?
00:16सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन lenders और creditors दे 1000 crore रुपए फसे होने का दावा किया जा
00:23रहा है
00:23उन्हें आखिर repayment plan के तहर सिर्फ सारे 6 crore ही क्यों मिलेंगी?
00:27क्या यह रकम final settlement है या फिर इसके पीछे कोई अलग कानूनी और financial structure काम कर रहा है?
00:34और क्या सुबाश चंदरा पर व्यक्तिकत तोर पर 22 crore का करज है?
00:38चलिए इस पूरे मामले को आसान भाषा में एक एक करके समझने की कोशिश करते हैं
00:42नमस्कार मैं हूँ सुमित कुमार और आप देख रहे हैं Good Returns
00:45सबसे पहला सवाल है कि आखिर सुबाश चंदरा कौन है?
00:48तो सुबाश चंदरा का नाम भारत की मीडिया और बिजनस सेक्टर में काफी बड़ा रहा है
00:52वह जी के founder है और जी का संबंध E-Cell Group से हैं
00:55उन्होंने भारत में सेटलाइट टेलिवीजन के विस्तार के दौर में जी को एक बड़े मीडिया नेटवर्क के रूप में खड़ा
01:01किया
01:01धीरे-धीरे E-Cell Group ने अपनी मीडिया के अलावा अलग infrastructure, entertainment और दूसरे कारोबार में भी विस्तार किया
01:07यानि एक समय सुबाश चंदरा स्तिर्फ एक बिजनस में नहीं बलकि भारत के बड़े corporate names में शामिल थी
01:13लेकिन बड़े विजनस के साथ expansion अक्सर बड़े financial requirement को लेकर भी आता है
01:18और यहीं से इस कहानी का दूसरा हिस्ता शुरू होता है
01:21सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है कि 22,000 करोर का आक्रा यह नहीं बताता कि सुबाश चंदरा ने
01:26अपनी personal capacity में 22,000 करोर का लोन लिया था
01:29यह रकम मुखे रूप से उन SL ग्रूप के entities की liabilities से जुड़ी है जिनके लिए सुबाश चंदरा ने
01:35personal guarantee दे थी
01:49इसल ग्रूप की कुछ कमपनियों पर financial obligation बढ़ते गए जब इन कमपनियों से जुड़े repayment issue सामने आये तो
01:56creditors ने उन guarantees के अधार पर सुबाश चंदरा के खिलाब भी claim की यहीं claim आगे चल कर उनके
02:01personal insolvency proceeding का हिस्सा बना
02:04फिर क्या हुआ तो NCLT के सामने सुबाश चंदरा की personal insolvency resolution process चली इस प्रक्रिया में creditors ने
02:11करीब 22 करोड के claim दर्ज किये जिनमें से इनकी राशी को admitted claim के रूप में माना गया
02:16अब सबसे बड़ा सवाल था कि इन claims के मुकाबले सुबाश चंदरा से कितना पैसा recover किया जा सकता है
02:21resolution process के दोरान उनकी personal assets और state की valuation भी देखी गई
02:26NCLT के सामने यह बात सामने आई कि उनकी वेक्तिगत संपत्ती की value इतनी नहीं है कि 22,000 करोड
02:32के claims के आसपास repayment किया जा सके
02:34ऐसे में एक repayment plan सामने आया इस plan के मताविक सुबाश चंदरा की तरफ से करीब 6.5 करोड
02:39यानि कि सारे 6 करोड रुपे का भुकतान किया जाना है
02:42यानि अगर 22,000 करोड के admitted claims को अधार माना जाए तो creditors को मिलने वाली recovery करीब 0
02:48.03% बैठती है
02:50दूसरे शब्दों में कहें तो लगभग 99.97% का haircut बनता है
02:55यही वज़ा है कि इन फैसले ने विजनेस और financial circle में काफी चर्चा पैदा कि
02:59इस मामले में सबसे प्रमुख objection में से एक LIC housing finance की तरफ से आया
03:04उसका admitted claims करीब 1322.39 करोर था लेकिन प्रस्तावित recovery लगबग 38.09 लाग थी
03:11creditors की दलिल थी कि इतना छोटा repayment अवाउंट उनके लिए स्विगार करना मुस्किल है
03:16और plan की validity पर भी सवाल उठते हैं यानि की विवाद सिर्फ 22,000 करोर की आकड़े का नहीं
03:21था
03:21बलकि असली सवाल यह था कि इतने बड़े admitted claims के मुकाबले creditors को इतनी कम recovery क्यों मिल रही
03:27है
03:28तो अब सवाल यह है कि NCLT ने plan को मंचूरी क्यों दी यहाँ NCLT ने कई factors पर विचार
03:33किया
03:33सबसे महत्पून बात थी creditors की voting
03:35करिब 80.81% voting share रखने वाले creditors ने repayment plan के पक्ष में मच्तान किया
03:41जबकि विरोध करने वाले creditors की voting share 20% से कम थी
03:45इसके अलावा ट्रिबोनल ने सुबाश चंद्रा की personal संपत्ती के valuation को भी देखा
03:49NCLT के सामने यह भी विचार था कि repayment plan को स्विकार नहीं किया गया
03:53तो insolvency process के जरिये creditors को इससे बहतर recovery मिलने की guarantee नहीं थी
03:58लेकिन यहाँ एक और सवाल उठता है कि क्या creditors को सिर्फ सारे 6 करोर देकर मामला खत्म हो जाएगा
04:03दरसल repayment plan को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि insolvency process में recovery हमेशा total claims के
04:10बराबर नहीं होती
04:11अगर किसी वेक्ती या company की उपलब्ध assets और संपत्ती की value claim से काफी कम है
04:16तो creditors को उपलब्ध assets और repayment capacity के अधार पर ही recovery मिल सकती है
04:22ऐसे मामलों में creditors के सामने सवाल यह भी होता है कि अगर repayment plan को मंचूरी नहीं दी जाती
04:27तो liquidation या दूसरे insolvency विकल्प अपनाए जाते हैं
04:31तो क्या उन्हें इससे ज़्यादा रकम मिल जाएगी
04:33यही compression इस मामले में भी बेहद एहम बन गया है
04:36इसके साथ ही insolvency process में समय और कानूनी खर्च का भी एक महत्पून पहलू होता है
04:42अगर मामला लंबे समय तक चलता है तो recovery में देरी हो सकती है
04:45और उपलब्द asset की value पर भी असर पर सकता है
04:48ऐसे में creditors के लिए सिर्फ claim की बड़ी रकम नहीं
04:51बलकि वास्त्रीक और संभावित recovery को देखना भी जरूरी हो जाता है
04:55लेकिन कहानी में एक और जरूरी clarification है
04:58सुभाज चंद्रा के office ने भी इस मामले पर clarification जारी किया है
05:01उनके office के मुताविक media reports में 22,000 करोर की आकरे को जिस तरह से paste किया गया
05:06उसे यह impression बन सकता है कि यह पूरी रकम अभी सुभाज चंद्रा पर payable personal debt यानि कि personal
05:12करजे
05:12उनका कहना है कि 22,000 करोर का आकरा total claims से जुड़ा है
05:16और इसे बरतमान में चंद्रा द्वारा personally on amount के रूप में नहीं समझना चाहिए
05:20यानि इस पूरे मामले को समझने के लिए loan लिया था और personal guarantee दी थी
05:24इसके बीच का फर्क बहत महत्पूर्ण है
05:26हाला कि इस पूरे मामले पर आपका क्या कहना है अपनी राइक comment section में जरूर बताएं
05:30और ऐसे ही तमाम updates और share market से जूरी तमाम जानकारी के लिए आप बने रहें good returns दिजिटल
05:35के साथ