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₹22,000 करोड़ से ज्यादा के claims और repayment plan में सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान! आखिर Subhash Chandra के मामले में ऐसा कैसे हुआ? क्या ₹22,000 करोड़ का कर्ज Subhash Chandra ने व्यक्तिगत तौर पर लिया था, या फिर यह Essel Group की कंपनियों की liabilities और personal guarantees से जुड़ा मामला है? इस वीडियो में आसान भाषा में समझिए कि creditors ने ₹22,006.57 करोड़ के claims क्यों दर्ज किए, Subhash Chandra की personal assets और estate की valuation कैसे हुई, ₹6.5 करोड़ का repayment plan कैसे सामने आया और NCLT ने इसे मंजूरी क्यों दी। साथ ही जानिए creditors की voting, recovery और इस पूरे insolvency मामले का पूरा गणित।

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00:0022,000 crore से ज्यादा के claims लेकिन repayment plan में भुकतान सिर्फ सारे 6 crore
00:05आखिर इतने बड़े अंतर की वजह क्या है?
00:08क्या सुभाष चंद्रा ने खुद 22,000 crore का करज लिया था?
00:11या यह पूरा मामला ISL Group की अलग-अलग कंपनियों और उनके financial संकट से जुड़ा है?
00:16सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन lenders और creditors दे 1000 crore रुपए फसे होने का दावा किया जा
00:23रहा है
00:23उन्हें आखिर repayment plan के तहर सिर्फ सारे 6 crore ही क्यों मिलेंगी?
00:27क्या यह रकम final settlement है या फिर इसके पीछे कोई अलग कानूनी और financial structure काम कर रहा है?
00:34और क्या सुबाश चंदरा पर व्यक्तिकत तोर पर 22 crore का करज है?
00:38चलिए इस पूरे मामले को आसान भाषा में एक एक करके समझने की कोशिश करते हैं
00:42नमस्कार मैं हूँ सुमित कुमार और आप देख रहे हैं Good Returns
00:45सबसे पहला सवाल है कि आखिर सुबाश चंदरा कौन है?
00:48तो सुबाश चंदरा का नाम भारत की मीडिया और बिजनस सेक्टर में काफी बड़ा रहा है
00:52वह जी के founder है और जी का संबंध E-Cell Group से हैं
00:55उन्होंने भारत में सेटलाइट टेलिवीजन के विस्तार के दौर में जी को एक बड़े मीडिया नेटवर्क के रूप में खड़ा
01:01किया
01:01धीरे-धीरे E-Cell Group ने अपनी मीडिया के अलावा अलग infrastructure, entertainment और दूसरे कारोबार में भी विस्तार किया
01:07यानि एक समय सुबाश चंदरा स्तिर्फ एक बिजनस में नहीं बलकि भारत के बड़े corporate names में शामिल थी
01:13लेकिन बड़े विजनस के साथ expansion अक्सर बड़े financial requirement को लेकर भी आता है
01:18और यहीं से इस कहानी का दूसरा हिस्ता शुरू होता है
01:21सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है कि 22,000 करोर का आक्रा यह नहीं बताता कि सुबाश चंदरा ने
01:26अपनी personal capacity में 22,000 करोर का लोन लिया था
01:29यह रकम मुखे रूप से उन SL ग्रूप के entities की liabilities से जुड़ी है जिनके लिए सुबाश चंदरा ने
01:35personal guarantee दे थी
01:49इसल ग्रूप की कुछ कमपनियों पर financial obligation बढ़ते गए जब इन कमपनियों से जुड़े repayment issue सामने आये तो
01:56creditors ने उन guarantees के अधार पर सुबाश चंदरा के खिलाब भी claim की यहीं claim आगे चल कर उनके
02:01personal insolvency proceeding का हिस्सा बना
02:04फिर क्या हुआ तो NCLT के सामने सुबाश चंदरा की personal insolvency resolution process चली इस प्रक्रिया में creditors ने
02:11करीब 22 करोड के claim दर्ज किये जिनमें से इनकी राशी को admitted claim के रूप में माना गया
02:16अब सबसे बड़ा सवाल था कि इन claims के मुकाबले सुबाश चंदरा से कितना पैसा recover किया जा सकता है
02:21resolution process के दोरान उनकी personal assets और state की valuation भी देखी गई
02:26NCLT के सामने यह बात सामने आई कि उनकी वेक्तिगत संपत्ती की value इतनी नहीं है कि 22,000 करोड
02:32के claims के आसपास repayment किया जा सके
02:34ऐसे में एक repayment plan सामने आया इस plan के मताविक सुबाश चंदरा की तरफ से करीब 6.5 करोड
02:39यानि कि सारे 6 करोड रुपे का भुकतान किया जाना है
02:42यानि अगर 22,000 करोड के admitted claims को अधार माना जाए तो creditors को मिलने वाली recovery करीब 0
02:48.03% बैठती है
02:50दूसरे शब्दों में कहें तो लगभग 99.97% का haircut बनता है
02:55यही वज़ा है कि इन फैसले ने विजनेस और financial circle में काफी चर्चा पैदा कि
02:59इस मामले में सबसे प्रमुख objection में से एक LIC housing finance की तरफ से आया
03:04उसका admitted claims करीब 1322.39 करोर था लेकिन प्रस्तावित recovery लगबग 38.09 लाग थी
03:11creditors की दलिल थी कि इतना छोटा repayment अवाउंट उनके लिए स्विगार करना मुस्किल है
03:16और plan की validity पर भी सवाल उठते हैं यानि की विवाद सिर्फ 22,000 करोर की आकड़े का नहीं
03:21था
03:21बलकि असली सवाल यह था कि इतने बड़े admitted claims के मुकाबले creditors को इतनी कम recovery क्यों मिल रही
03:27है
03:28तो अब सवाल यह है कि NCLT ने plan को मंचूरी क्यों दी यहाँ NCLT ने कई factors पर विचार
03:33किया
03:33सबसे महत्पून बात थी creditors की voting
03:35करिब 80.81% voting share रखने वाले creditors ने repayment plan के पक्ष में मच्तान किया
03:41जबकि विरोध करने वाले creditors की voting share 20% से कम थी
03:45इसके अलावा ट्रिबोनल ने सुबाश चंद्रा की personal संपत्ती के valuation को भी देखा
03:49NCLT के सामने यह भी विचार था कि repayment plan को स्विकार नहीं किया गया
03:53तो insolvency process के जरिये creditors को इससे बहतर recovery मिलने की guarantee नहीं थी
03:58लेकिन यहाँ एक और सवाल उठता है कि क्या creditors को सिर्फ सारे 6 करोर देकर मामला खत्म हो जाएगा
04:03दरसल repayment plan को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि insolvency process में recovery हमेशा total claims के
04:10बराबर नहीं होती
04:11अगर किसी वेक्ती या company की उपलब्ध assets और संपत्ती की value claim से काफी कम है
04:16तो creditors को उपलब्ध assets और repayment capacity के अधार पर ही recovery मिल सकती है
04:22ऐसे मामलों में creditors के सामने सवाल यह भी होता है कि अगर repayment plan को मंचूरी नहीं दी जाती
04:27तो liquidation या दूसरे insolvency विकल्प अपनाए जाते हैं
04:31तो क्या उन्हें इससे ज़्यादा रकम मिल जाएगी
04:33यही compression इस मामले में भी बेहद एहम बन गया है
04:36इसके साथ ही insolvency process में समय और कानूनी खर्च का भी एक महत्पून पहलू होता है
04:42अगर मामला लंबे समय तक चलता है तो recovery में देरी हो सकती है
04:45और उपलब्द asset की value पर भी असर पर सकता है
04:48ऐसे में creditors के लिए सिर्फ claim की बड़ी रकम नहीं
04:51बलकि वास्त्रीक और संभावित recovery को देखना भी जरूरी हो जाता है
04:55लेकिन कहानी में एक और जरूरी clarification है
04:58सुभाज चंद्रा के office ने भी इस मामले पर clarification जारी किया है
05:01उनके office के मुताविक media reports में 22,000 करोर की आकरे को जिस तरह से paste किया गया
05:06उसे यह impression बन सकता है कि यह पूरी रकम अभी सुभाज चंद्रा पर payable personal debt यानि कि personal
05:12करजे
05:12उनका कहना है कि 22,000 करोर का आकरा total claims से जुड़ा है
05:16और इसे बरतमान में चंद्रा द्वारा personally on amount के रूप में नहीं समझना चाहिए
05:20यानि इस पूरे मामले को समझने के लिए loan लिया था और personal guarantee दी थी
05:24इसके बीच का फर्क बहत महत्पूर्ण है
05:26हाला कि इस पूरे मामले पर आपका क्या कहना है अपनी राइक comment section में जरूर बताएं
05:30और ऐसे ही तमाम updates और share market से जूरी तमाम जानकारी के लिए आप बने रहें good returns दिजिटल
05:35के साथ

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