00:00सर अर्जून होता तो अस्तर कमान मोड़ देता, राम होता तो शिव बान तोड़ देता, ये सत्य असत्य का परक
00:07मुरख नहीं जानता है, मैं रफ्तारू मैं जुबान दीती में काम छोड़ देता, गायजा मैं इननुसेंट
00:12रोसे से रौछ एधर, वाले बूठ वी बूले अबली इननुसेंट, वाले रेता, अल्वा एधर वी इननुसेंट का आना रहेव मैं