00:00नेपाल में बाढ़ हाई
00:05आपने सोचा पड़ोसी की तरासदी है दुख हुआ आगे बढ़ गए अब एक नक्षा देखिए और फिर तै कीजे कि
00:13वो तरासदी किसकी थी जिस नदी नेपाल का रसुआ जिला उजाड़ा उसका नाम है त्रिशूली
00:19कहां से निकलती है तिबबत से कैलाश की भूमी से नेपाल में उतरती है आगे बढ़कर नारायनी बनती है और
00:28फिर बिहार में घुसते ही उसका नाम हो जाता है गंडक वही गंडक जिसकी नहरें बिहार और उत्तर प्रदेश के
00:37लाखों एकड़ खेत सीचती है वही गंडक जो
00:40आगे जाकर गंगा में मिल जाती है पटना से ठीक पहले यानि जो पानी उस सुभह नेपाल में गाउं बाहा
00:46रहा था वही पानी अगले दिन हमारे खेतों से गुजर रहा था जो नदी वहां मौत थी वही यहां रोटी
00:52है तो ये भूगोल की सबसे सीधी सीख है कि हिमालय मे
00:56सरहदें हैं पानी में नहीं और मामला सिर्फ पानी का नहीं है जब उपर पहाड टूपता है तो उसका मलबा
01:03गाद नदी के साथ नीचे उतरता है वो गाद बिहार की नदियों की तलहटी में जमा होती है नदी उतली
01:08होती जाती है और उतली नदी हर मौनसून में पहले से भ
01:25पडोसी, गंडक, बागमती, यानि हिमालय में लगा हर घाव मैदान में रिषता है, गलेशियर वहां तूटता है, फसल यहां डूपती
01:33है, बांध वहां बहता है, बिजली यहां महंगी होती है, और जिस जल तंत्र में चितवन के घडियाल और गंगा
01:42की डॉल्फिन सांस लेत
01:54मेरी खपत मेरा निजी मामला है, मेरी गाड़ी, मेरा एसी, मेरी चीजें, मेरा जीवन, पर उस खपत की गर्मी सीमा
02:01नहीं मानती, वह हिमालय पर जमती है, गलेशियर पिघलाती है, और लौटकर मेरे ही खेट डुब होती है, अलगाव भ्रहम
02:10है, भूगोल में भी, जीवन म
02:12में भी, नदी ये बात जानती है, बस हम नहीं जानते, त्रिशूली विदेशी नदी नहीं है, वह गंगा की भुजा
02:20है, और भुजा पर लगी चोट धड़ तक पहुँचती ही है
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