00:00जंतर मंतर के आंदोलन से लेकर कौकरुजुन्ता पार्टी यानि कि CGP के मंच तक छातर राजनीती और राजनतिक महत्वकांग्शा को
00:07लेकर एक नई बहस छिड़ गई है
00:09इस बहस केंतर में है क्लाइमिट एक्टिविस्ट सोनम वांग्चुक और CGP मुमेंट के आयोजग अभिजीत दीपके
00:16सोनम वांग्चुक ने अभिजीत दीपके और उनके साथियों को लेकर ऐसे टपनी की है
00:20जिसने आंदोलन के राजनितिक भविश्य पर सवाल खड़े कर दिये हैं
00:24सोनम वांग्चुक ने आकर ऐसा क्या कह दिया है कि CGP के आंदोलन और उसके नेताओं को लेकर पूरे देश्व
00:30चर्चा तेज हो गई है
00:31जंतर मंतर पर जिस आंदोलन को युवाओं की आवाज और वेवस्था के खिलाफ एक गैर राजनितिक मुहिम के तोर पर
00:38देखा जा रहा था
00:39अब उसे के पीछे चेपी राजनितिक महत्व कांग्शाओं पर सवाल उठने लगे हैं
00:44वांग्चुक ने सीजेपी के आयोजक अबजीर दीप के और उनके साथियों को लेकर बड़ा दावा किया है
00:48उन्होंने कहा कि आंदोलन के दोरान उन्हें इन नेताओं में राजनिति में आने की महत्व कांग्शाओं दिखाई दी
01:13उनका कहना है कि दिल्ली के जोंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदेशन की दोरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ
01:18हाला कि वांग्चुक ने साफ किया कि राज़्टिक महत्व कांग्शा रखना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है
01:24उनके मुताबिक अगर कोई युवा राज़्टि में आना चाहता है चुनाव लड़ना चाहता है या भविश्य में अपनी राज़्टिक पार्टी
01:31बनाना चाहता है तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है
01:34लेकिन सोना वांग्चु की असली चिंता सीजेपी के मंच को लेकर है उन्होंने सलाह दी है कि अगर ये प्लैटफॉर्म
01:41एक छात्र आंदोलन या फिर गैर राज़्टिक दबाब समू के रूप में सामने आया है तो इसे फिलहाल उसी पहचान
01:46को बनाए रखना चाहिए
01:47उनका मानना है कि अगर आंदोलन नसीधे किसी राज़्टिक दल या फिर चुनावी रणीती से जुड़ जाता है तो उसके
01:54समर्थकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है
01:57बांग्चुक ने कहा कि सीजेपी के आयो जग बाद में किसी मौझूदा राज़्टिक पार्टी में शामिल हो सकते हैं या
02:03चाहें तो अपनी नई पार्टी भी बना सकते हैं
02:06लेकिन इसके लिए CJP के मौजूदा मंच का इस्तिमाल राज़ूतिक सीड़ी के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।
02:36अंदोलन के आयोजकों के अपने व्यक्तिकत, लक्ष और भविश की राज़ूतिक अकांग्षाएं हो सकती हैं।
03:06लेकिन उन्होंने अनुभव की कमी को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से सावधान भी किया।
03:11उनका कहना था कि अगर किसी व्यक्ति के इरादे अच्छे हों लेकिन वो अकुशल हो तो इससे मुश्किले पैदा हो
03:22सकती।
03:47लाव आता है और उन्हें उम्मीद है कि ये लोग नहीं बदलेंगे।
03:50लेकिन उन्होंने इसे अवास्तिक उमीद बताया।
03:53उनका कहना है कि आयोजक भी आम इंसान है और उन्हें राजणितिक करियर बनाने का पुरा अधिकार है।
03:58वांग्चु के मताबिक अगर कोई युवा, शिक्षा, छात्रों या समाज से जुड़े मुद्धों पर काम करते हुए राजणिति में आता
04:04है तो ये लोग तंत्र के लिए सकरात्मक भी हो सकता है।
04:07उन्होंने उमीद जताई कि आंदोलन का अनुभव इन युवाओं को भविश्य में ज्यादा परिपक्व और जमीन से जुड़े नेता बनाने
04:13में मदद करेगा।
04:37में राजनिति में जाना चाहते हैं तो उनके लिए अलग राजनितिक मंच का रास्ता खुला हुआ है।
04:42अब जिसके बाद बड़ा सवाल यही है कि क्या सीजेपी आगे भी एक छात्र और जन आंदोलन बना रहेगा या
04:48इसके प्रमुक चहरे भविश्य में सक्रिय राजनिति की और कदम बढ़ाएंगे।
04:52वांग्चुक की टिपणी ने इस सवाल को और ज्यादा महतोफुन बना दिया है और इसी सवाल के बाद इनके जवाब
05:00से बवाल मचा हुआ है।
05:02आप क्या सोचते हैं मैं जरूर बताइए।
05:05क्या स्टूडेंट मूव्मेंट्स के पीछे कोई बहुत बड़ा पॉलिटिकल गेम प्लान चल रहा था।
05:10क्या अंदोलन की आड में सियासत में एंट्री लेने की जमीनी तैयारी हो रही थी।
05:15ये सवाल तब और गहरा गया है जब जाने माने आक्टिविस्स सोनम वांग्चुक ने एक बड़ा बयान देकर देश की
05:23राजनीती में हलचल पैदा करती है।
05:25सोनम वांग्चुक ने खुलकर कह दिया है कि कौकरो जनता पार्टी यानी सीजेपी के फाउंडर्स अभी जीत दीप के सौरवदास
05:41और आशुतोष रांग का कोई संत नहीं है।
05:44उन्होंने साफ असेश्मेंट किया है कि इन यूवाओं की गहरी राजनीतिक महत्वकान शाएं हैं और वे बिना किसी लालच या
05:52मकसद के इस अंदोलन से नहीं जुड़े हैं।
05:56तो क्या वाकई अभी जीत दीप के और सीजेपी की टीम का पूरा प्लान राजनीती में एंट्री लेने का था।
06:2626 दिनों तक एक लंबा अंचन किया था। इस अंदोलन ने ततकालीन शिक्षा मंतरी धरमेंदर प्रधान के इस्तीफे और सिस्टम
06:36की चूलें हिलाने का काम किया था।
06:38इस पूरे अभियान की फ्रंट लाइन पर थे सीजेपी के संस्थापक अभी जीत दीप के और उनके साथी।
06:44लेकिन जब सोनम वांग्चुक ने एक पॉड्कास के दौरान इस पूरी गठ जोड और इन चेहरों की असलियत पर बात
06:50की तो कई चौकाने वाले खुला से हुई।
07:14पाप नहीं होता लेकिन असली ट्विस्ट तब आया जब वांग्चुक ने सीजेपी के फाउंडर्स के फ्यूचर गोल्स पर बात की।
07:22वांग्चुक के मुताबित भले ही इन लड़कों ने कभी खुल कर उन्हें अपनी राजनीतिक महत्वकानशाओं के बारे में ना बताया
07:29लेकिन उनका अंधुरूनी असेश्मेंट बिलकुल साफ है।
07:34वांग्चुक ने सीधे शब्दों में कहा कि वो कोई संत नहीं है जो इस मुवमेंट से कुछ हासिल करे बिना
07:40उठके चले जाएंगे।
07:42उनकी राजनीतिक महत्वकानशाओं हैं और मैं इसे पूरी तरहां भाब चुका हूँ।
07:48ये कहा है सोनम वांग्चुक में। यहां ये समझाना बहुत जरूरी है कि मीडियो और राजनीतिक गलियारों में इस बयान
07:56को किस रूप में देखा जा रहा है।
07:57एक तरफ जहां अलोचक इसे दीपके और सीजेपी पर एक बड़ा कटाक्ष और उनके लालच या राजनीतिक असरवाद के रूप
08:06में देख रहे हैं।
08:07वही कुछ सोनम वांग्चुक का नजरिया थोड़ा अलग और वहवारिक है।
08:11वांग्चुक का ये मानना है कि राजनीती में जाने की चाह रखना या महत्वकांशा होना कोई गुना नहीं है।
08:19देश को यूवा और उभरते हुए निताओं की जरूरत है। और यदि को यूवा जमीन से संघर्ष करके सियासत में
08:26आता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
08:28पर बड़ा सवाल ये है कि क्या अंदोलन की पवित्रता दांप पर लगी हुई थी।
08:33सोनम वांग्चुक ने खुलासा किया कि जब वो उस मंच पर थे तो उन्होंने अभी जीत दीप के और उनकी
08:38टीम को बहुत स्पश रूप से हिदायत दी थी।
08:41उन्होंने साफ कहा था कि तुम्हारी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वकान शाय जो भी हो उसे अपने तक रखो।
08:47लेकिन इस चात्रों अंदोलन के मंच को किसी भी राजनीतिक दल का खाड़ा मत बनने देना।
08:53जनता इस मंच को बीजेपी कॉंग्रेस या आपका चश्मा पहन कर नहीं देख रही थी।
08:58वैसे एक शुद छात्रों अंदोलन मान रहे थी।
09:02वांग्चुक ने संतोष जताया कि कम से कम अंदोलन के दौरान उस मंच की निट्रालिटी और गर्मा को बनाया रखा
09:09जाए।
09:09लेकिन इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई है।
09:13क्या CJP यानि कौकर जनता पाटी का घठन सिरफ व्यवस्था सुधारने के लिए एक प्रेशर ग्रूप के रूप में हुआ
09:20था या फिर ये भविश्य के चुनावी मैदान में उतरने की एक सोची समझी लॉंचिंग पाट थी।
09:27अभी जीतीप के और उनके साथियों के पीछे राजनीतिक संपर को और अब सोनम वांग्चुक द्वारा किये गए इस असेश्मेंट
09:34ने ये साफ कर दिया है कि परदे की पीछे की तैयारी लंबी और बड़ी है।
09:57क्या ये आंदोलन जनता की भलाई के लिए था या भविश्य के राजनीताओं को तैयार करने की एक सुनियो जित
10:04पिछ थी।
10:05इस सवालों के जवाब आने वाले वक्त में खुद बखुद सामने आ जाएंगे।
10:09क्योंकि राजनीती के इस खेल में संत कोई नहीं होता, हर कोई अपनी चाल चलने के लिए तैयार बैठा है।
10:16ऐसे में जो भी आपकी राए है जो भी आपको लगता है हमें कॉमेंन सेक्शन में जुरूर बताइएगा।
10:21अब देख रहे हैं One India, मैं हुआ कुर्श वाश्य।
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