00:00नौएडा मज़़ूर प्रदरेशन मामले में इलाबाद हाई कोट ने स्टुडेंट एक्टिविस्ट आकरती चौधरी की एनसे यानी राष्टे सुरक्षा कानून के
00:09तहत विरासत को अवायद बताते हुए रद कर दिया है।
00:13राइकोट ने राजय की और से पेश की गई कहानी को गड़ी हुई कहानी बताया जी हां गड़ी हुई कहानी।
00:19साथी आकरती को 5万ग रुपे का मुआफ़जा देने का भी आदेश दिया।
00:24और ये मुआफजार राज्य सरकार नहीं बलगी सम्मंदित डियम और अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा।
00:31यहां आदेश यूपी की योगी सरकार और उसके पुलिस प्रिशाशन के मुँपर एक बड़ा तमाचा है।
00:37और साथ ही इसकी भी पूल खोलता है कि यूपी में किस तरह कानून का दुर्पियोग हो रहा है।
00:41खास और से NSA का दुर्पियोग किया जा रहा है।
00:4425 साल की आकरती अप्रेल 2026 से नौईडा में हुए मजदूर आंदूलन के मामले में जेल में थी।
00:50जस्टिस अतुल शिर्धरन और जस्टिस अचल सस्देव की पीट ने उनकी बंदी पृतिक शिकरन या चिका स्विकार करते हुए कहा
00:58कि उनकी हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई गड़ी हुई कहानी पर आधारित थी।
01:04अदालत ने कहा कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गर्फतारी की जुरुवत नहीं है तो उन्हें ततकाल रिहा किया
01:11जाए।
01:11इस मामले में पुलिस का आरोप था कि आकरती ने मजदूरों को पत्रा और आधजनी के लिए उकसाया लेकिन अदालत
01:18ने सबूत मागे।
01:41प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। राज्य सरकार की ओर से कोट को बताया गया थे कि आकरती को 12
01:47अपरेल को गर्फतार किया गया था और उन्हें बी एनस की धारा 133 के तहट नोटिस भी दिया गया था
01:55लेकिन अदालत ने पूछा कि जब धारा 133 की प्रक्रिया से �
01:58धारा 126 की प्रक्रिया होती है तो फिर पहले 126 के तहट नोटिस क्यों नहीं दिया गया अदालत में रिकार
02:07देकर ये भी टिपने की कि ऐसा लगता है कि पहले गरिफतारी की गई और बाद में नोटिस तैयार किया
02:13गया तो आप समझ रहे हैं कि देश में और यूपी में आं
02:27अबतार जारी हैं