00:00बेटी का किसी नाम आम तो नहीं रर्खा ना रसना वगेरा
00:04रसना का मतलब ही होता है बंधन
00:07त्रिशना को कौन कौन जानते हैं
00:09और इस तरह के ज्यादातर जुल्म बेटियों पर ही होते हैं
00:14माया, मम्ता, कामना, त्रिशना, एशना, रसना, मोहिनी अरेरेर
00:26भावना, कोमल, पलक, पुलक, पंखुडी, कल्पना, श्वेता, शुब्रा, आशा, अरे बावन, बक्ष दो ना, बच्चियों को बक्ष दो
00:54पैदा करते हो तो कम से कम नाम रखने की तमीज रखो
01:01और चूंकि पारंपरिक द्रिश्टी इस्त्री के प्रती ऐसी ही रही है
01:05कि ये माया है, ये मोहिनी है, ये कामिनी है
01:09इसलिए फिर हम महिलाओं के प्रते वो सब कर्म और कांड भी होते देखते हैं
01:20कि तू समहल के रहे, तू कपरे ठीक से पहन के रहे, तू ही मोहिनी है, तू ही चंचला है
01:25तू ही बाहर जब निकलती है तो लड़के बहग जाते हैं
01:30तू क्यों नहीं ठीक से चलती
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