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भारत की Crude Oil जरूरत में Russia की भूमिका लगातार मजबूत बनी हुई है। Russia एक बार फिर India का सबसे बड़ा Crude Oil Supplier बना हुआ है। सस्ते Russian Crude, बेहतर Refining Economics और लगातार Supply ने भारतीय Refiners के लिए इसे अहम बना दिया है। हालांकि Global Oil Market में बढ़ती Competition, China की बढ़ती खरीद और Geopolitical Risks के बीच आने वाले समय में तस्वीर बदल भी सकती है। इस वीडियो में जानिए Russia क्यों बना हुआ है India का Top Oil Supplier, भारत कितना Russian Crude खरीद रहा है और इसका Petrol-Diesel Prices, Inflation और Energy Security पर क्या असर पड़ सकता है।

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00:02अगर किसी देश की अर्थव्योस्था की रफ़तार बढ़ानी हो तो सबसे जरूरी चीजों में से ये क्या होगी?
00:09सस्ती और लगतार मिलने वाली इनर्जी सप्लाई?
00:11भारत दुनिया के उन देशों में सामिल हैं जो अपनी कच्चे तेल यानी की क्रूड ओयल की जरूरत का 90
00:17% से ज़्यादा हिस्ता आयात करता है
00:20ऐसे में जिस देश ये भारत को सबसे ज़्यादा क्रूड ओयल मिलता है उसका महतों सिर्फ इनर्जी सेक्टर तक सीमित
00:26नहीं रहता
00:26बलकि इसका असर महंगाई, पेटॉल, डीजल की कीम्तों, रिफाइंडिव मार्जिन्स और देश की पूरी एकोनॉमी पर पड़ता है
00:52इसी दोरान रूस ने इशियाई खरीदारों खास कर भारत और चीन को आकर्शक कीम्तों पर क्रूड की पिशक शुरू की,
00:59भारत के लिए यह मौका इसलिए महत्पून था क्योंकि देश को लगतार बढ़ती इनर्जी डिमांड को पूरा करने के लिए
01:05बड़े पैमाने पर क
01:06चरूरत थी, डिसकाउंट रेसिया नोयल ने भारतिये रिफाइंडीज को बेहतर खरीद बिकल्प दिया और धीरे धीरे रूस भारत का सबसे
01:14बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया, अब दोजार शब्विस में भी यह स्थिती काफी हद तक कायम है, रोइटर्स की रिपोर्�
01:31को उस्तन टू मिलियन बैरल पर डे से जादा क्रून मिला, वही मिडिलिस्ट की हिस्तेदारी घटकर करीब 30% रहेंगे,
01:37यानि कि इनरजी बास्किट में रसिया की भूमिका और मजबूत हुई, लेकिन यहाँ एक और दिल्चस्प बात है, कि रूस
01:43से भारत की खरीद हमेशा
01:45एक जैसी नहीं रहे, 2026 की शुरुआत के कुछ महीनों के दवरान रसियान ओयल इंपोर्ट में गिरावट आई, फरवरी में
01:51इराक ने कुछ समय के लिए रूस को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा कुरूड सप्लायर बनने में काम्याबी हासिल
01:57की, उस समय भारत में
01:59रसियन कुरूड इंपोर्ट करीब एक बिलियन बैरल पर डे तक गिर गये थे, जो पिछले साल के उचे इस तरों
02:04की तूलना में काफी कम था, इसके बाद तस्वीर पूरी तेजी से बदली, मेडे लिस्ट में जियो पोलिटिकल टेंसन और
02:10स्टेट ओफ हॉर्मुच से जु
02:27इस हाल देखने को मिला, केपलर के आकरो के अनुसार, रूस से भारत का इंपोर्ट जून में करीब 2.73
02:33मिलियन बैरल पर डे तक पहुंच गया था, जुलाई के मध्य तक या करीब 2.59 मिलियन बैरल पर डे
02:39तक रहा, जून का आकड़ा खास तोर पर महत्पून था, उस महीने
02:43भारत का कूल कुरूड इंपोर्ट करीब 4.93 मिलियन बैरल पर डे के रिकॉर्ड इस तर पर पहुंच गया था,
02:49और इसमें रसियन ओयल की बड़ी भूमी का रही, इसका मतलब साफ है कि जब ग्लोबल ओयल मार्केट में सप्लाई
02:55को लेकर अनिश्चिता बढ़ी, तब भारत
02:57ने अपने रिफाइनर्स के लिए रूसी कुरूड ओयल का इस्तमाल एक महत्पून सप्लाई के तौर पर किया, हाला कि इसका
03:03मतलब यह नहीं कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर हो गया है, भारत लगतार अपने ओयल बास्केट को डाइवर्सिफाई कर
03:08रहा है, रसिया के अ
03:24नेती भारत के लिए इसलिए महत्पून हैं क्योंकि ग्लोबल इनर्जी मार्केट में किसी इक दीश या शेतर पर जरूरत से
03:31ज़्यादा निर्भरता जोखीम बढ़ा सकती है, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रूस का कुरूड भारत के लिए इतना
03:36आकर्शक क्यों है, त
03:52तरह के कुरूड को प्रोसेस करने में सक्षम है, ऐसे में सस्ता कुरूड खरीद कर उससे पेट्रॉल डीचल और दूसरे
03:58पेट्रॉलियम प्रोडक्ट्स तयार करना रिफाइनर्स के लिए बेहतर मार्जिन का उसर देता है, हलां कि दो हजार चबश में यह
04:04फायदा पहले ज
04:17परसेंट कम है, रूस की हिस्सेदारी जुलाई के 55.9% से घटकर 45% रह गई है, इसके पीछे
04:24रसियन सप्लाई में कमी है, चाइनिज वायर से बढ़ती कंप्रीशन और भारतिये रिफाइनिज में में जैसी बजहें इसके पीछे बताई
04:31जा रही है, यानि कहानी अब सिर्फ
04:32डिसकाउंटेड रसियन ओयल की नहीं, बलकि ग्लोबल ओयल मार्केट में कमप्रीशन भी बढ़ रही है, और चाइना भी रसियन कुरूड
04:39की खरीद बढ़ा रहा है, रोइटर्स के मुताविक चीन की रिफाइनिज की रसियन ओयल खरीद में तेजी से सप्लाई के
04:45लिए कम�
04:49सप्लायर बना रहा, इसका मतलब है कि कुछ उतार चड़ाव के बावजूद भारत रूस इनर्जी पार्टनर्सिप की बुनियाद मजबूत है,
04:56इसके साथ ही दोनों दीशों के बीच पेमेंट्स इंफ्राइस्ट्रक्चर भी बहतर हुआ है, सितंबर दोहजार चबवीस मे
05:13डॉलर पर कम निर्भरता के तौर पर भी देखा जा सकता है, भारत के लिए आगे की रननीती काफी अस्पष्ट
05:19दिखाई देती है, चाहां बहतर कीमत और भरोसेमन सप्लाई मिले, वहां से कुरूड खरीदना और साथ साथ सप्लायर को डाइवर्सिफाइक
05:26करते रहना, रस
05:38असिया भारत का टॉप कुरूड सप्लायर बने रहना सिफ्टो दीशों के बीच व्यापार की खबर नहीं है, बलकि इसका सीधा
05:44संबन पेट्रोल डीजल की कीमतों, इन्फलेशन, रिफाइंडी मार्जिन्स, करंट अकाउंट और भारत की इनर्जी स्रिकुरेटी से भी ज�
06:05तूसरे सप्लायर्स की और तेजी से रुख कर सकते हैं, इसलिए आने वाले समय में असली नजर इस बात पर
06:11रहेगी कि रसिया कितने समय तक भारत को पर्याप्त कुरूड और प्रतियस्प्रधी कीमत पर सप्लाई करता है, हाला कि इस
06:18पूरे मामले पर आपको क्या लगता है
06:19अपनी राय कमेंट सक्षन में चरूर बताएं और ऐसे ही तमाम अपडेट्स और शियर मार्केट से जुड़ी तमाम चानकारी के
06:24लिए आप बने रहें गुट रिटर्न्स दिश्टल के साथ
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