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  • 1 week ago
रांची के बरियातू गर्ल्स स्कूल के हॉकी प्रशिक्षण केंद्र से एक से बढ़कर एक बेहतर महिला हॉकी खिलाड़ी निकली हैं. रिपोर्ट-चंदन भट्टाचार्य.

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Transcript
00:00राची का बर्यातु गल्स स्कूल
00:02कभी इसी नाम से इस शहर में अपनी पहचान रखने वाला या संक्स्थान
00:06आज CM स्कूल आप एक्सिलेंस गल्स स्कूल बर्यातु के नाम से जाना जाता है
00:11करीब 9 दसक की इस यात्रा में स्कूल ने कई बदलाव देखे
00:16लेकिन एक चीज आज भी इसकी पहचान का एहम हिस्सा है
00:19वो है होकी
00:21जिस मैदान में कभी जहरखन की बेटियां होकी की शुरुवाती बारिकियां सिखते थी
00:27वहीं से कई खिलारी राश्टिया और अंतराश्टिया मंच तक पहुँची
00:32बर्स 1936 में स्थापीत इस स्कूल को 1948 में हाई स्कूल का दर्जा मिला
00:38समय के साथ इस स्कूल की सेक्षनिक वेवस्था और सुविदाओं का दिस्तार हुआ
00:42और बाद में इसे CM स्कूल आप एक्सिलेंस के रूप में नई पहचान मिली
00:47लेकिन इस बदलाव से पहले ही बर्यातू खेल प्रतिवाओं की जमीन तयार कर चुका था
00:53बर्स 1972 में इहां होकी सेंटर की शुरुआत हुई
00:57और 1976 में स्कूल का चयन एनेस्टिसी योजना के तहत हुआ
01:01इसके बाद जहारखंड के अलग-अलग इलाकों से प्रतिवासाली वेटियों को
01:06बर्यातू लाकर प्रसिक्षन देने का सिलसला सुरू हुआ
01:09सुभा की फिटनेस से लेकर मैदान पर घंटो अभ्यास और फिर स्कूल की पढ़ाई खिलाडियों की दिंचरिया
01:16इसी अनुसासन के बीच आगे बढ़ती रही
01:46से पढ़ी हूँ नेशनल खिलाडी रही हूँ और इसी स्कूल यानि की इसी सेंटर में मुझे भी दिया गया तो
01:54बहुत अच्छा फिल होता है
01:56सुमराय टेटे निकी परधान इसी स्कूल से निकली है इसी सेंटर से मतलब खेल के निकली है और ये ततकाल
02:07में रेलो में जोब करती है
02:09बहुत सारे ऐसे खिलाडी है इंटरनेशल शावतिरुपूर्ती और पुरानी खिलाडी लोग भी है जैसे विश्वासी पूर्ती अलमा गुडिया जस्मनी संगा
02:20और मरिस्तेला गुडिया
02:22स्कोलोस्टीका और कंतीबा असुंता लकड़ा एडिलिन बागे नई स्वारी एडिलिन केरकेटा और राजकुमारी बनरा मैं इस समय नाम नहीं ले
02:40पार ही हो अंगिनत है तो इस स्कूल से इस सेंटर से निकल के वो जोब कर रही है
02:46यही वो मैदान है जिसने निकी प्रधान असुंता लकड़ा समुराई केटे समेत के राष्ट्रिय और अंतराष्ट्रे खिलाडियों को तैयार किया
02:54आज पुरानी पिढ़ी की यही बिरासत नई पिढ़ी आगे बढ़ा रही है
02:59सबसे पहले तो यह ग्राउंड सबसे पूराना ग्राउंड है और यहां से बहुत सारे अंतराष्ट्रे खिलाडी निकले हैं
03:06असुंता मायम निकी प्रधान असुमुराय मायम जैसे बहुत सारे खिलाडी निकले हैं
03:12So, we also have to practice with those people and also want to play with them.
03:18This school is very good because this school is very famous.
03:25Which one player has played here?
03:28Do you remember?
03:29Yes.
03:32We also have to train with them.
03:39We also have to train with them.
03:42In this year, we also have to go to Japan.
03:45After that, there was a 5-A side.
03:47It was a 5-A side.
03:48It was a 5-A side.
03:49It was a 5-A side.
03:50How did a game happen?
03:51We never played before.
03:53The first time we played 5-A side.
03:55It was good.
03:57It was good.
03:58Where are you?
04:00Where are you?
04:03Where are you?
04:04Where are you?
04:04What age group is up?
04:05Under?
04:06In 2017, we are.
04:08But the international game was also under 18.
04:12School's name is no place.
04:14Theocation has changed.
04:16But in the middle of the place.
04:17The identity of the field in Lebanese.
04:20This campus is from 1978.
04:22This place is from 1978.
04:24How do you know how do you know?
04:25foreign
04:32foreign
04:34I don't remember so many days ago, I was playing international, and I was born in 1972.
04:46In 1972, the school and the police have been given to the hockey players.
04:55One of them has been given to this police.
05:00परिसर ने दिया है आज भी भारतिय टिम में खिलने वाले कई खिलारी इसी स्कूल और इसी होस्टल से हैं
05:09बाकई में यह परिसर होकी के लिए एक बर्दान साबित हो रहा है चंदन भटाचारिया इटीवी भारत राची
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