00:00संकर जी सांप लपेटे हैं, सांप मैसिज देता है, काल कहते हैं, संकर जी के गले में क्या है, काल
00:08मतलब सांप, बोस्तरप ये कहता है कि तुम कितना भी चमन परास खालो, मरना तो पढ़ेगा ही, काल देखो बैठा
00:15है खोपड़ी पे, इसलिए जादा तीन पांच ना करो, च�
00:23कुछ आप मंगने, संती से मरो इसलिए पिर मांप जब ताम आई, जादा परेषान होने की जरूर्द तो नहीं, चामन
00:27प्रास खा रहा है, गोलियां खा रहे हैं, केतना भी खालो, तो मारे बाप दादे नहीं मरे क्या,ंब स्वस्त
00:33भी तो रहना जारूरी है, स्वस्त भी त
00:51करती हूं एयोग करती हूं शुनिये शंकर जी के गले में साब ढ़ prinaskande क्या
00:57मैसेज दिरा है कि काल है काल भीकषब आपने पुराना महाभारत देखा उसमें क्या
01:05भुलता है मैं समय हूं कि क्या बोलता है हाँ समय है एक दिन में सहरी उल्त और छोvaluation
01:13समसान चला गया, तो समसान में एक अच्छी बात लिखी थी, बताओं, समसान में लिखा था, कि यहीं वरंदवन के
01:21समसान में, आप लोग भी जा के देख सकते हैं, समसान भी जाते आते रहा करो, क्योंकि आखरी पड़ाओ वहीं
01:28है सब का, मैं तो जाता रहता हूँ,
01:32समसान में लिखा था, समय के पास इतना समय नहीं हैं, कि वो फिर से आपको समय दे सके, समय
01:41के पास, समय जो गया, अब उसे आप ला नहीं सकते, पैसे से समय थोड़ी खरीद सकते हो,
01:49पैसे वाले समय खरीद लेते तो काहे मर गए पैसे वाले खरीद न लेते
01:54इसलिए संकर जी कह रहे हैं कि देख तेरा समय जा रहा हो काल बैठा
01:58साप मतलब काल अब्याल मुखक ग्रास तरास निरना सहे तवे
02:01साप को काल कहा गया, इसलिए शिव को कालों के काल महा काल कहते हैं, क्योंकि वो काल को जीत
02:07चुके हैं, पर हम नहीं जीते, तो तुम नहीं जीते, तो घमंड ना करो, क्योंकि काल बैठा है, फन पसारे,
02:13संकर जी बैल पे सवार हैं, बैल मतलब नंदी, नंदी मतलब धर्म, संक
02:48इसका अर्थ तो बताई है
03:01संकर जी के मंदर में जो नंदी है वो किसका सरूप है धर्म इसलिए मोदी जी ने नई संसद बनाई
03:07न तो सेंगौल रखा सेंगौल में नंदी है बोलो हां किना है नंदी वो नंदी कौन है वही धर्म का
03:17प्रतीक है बोलो हां जैसे आज तक वालों का देखो ये है पहचान है �
03:23क्या है ये हाँ ये पहचान है ये इसकी पहचान है ऐसे ही धर्म की पहचान नंदी संकर जी किस
03:32पर सवार है धर्म पर और धर्म के पाउं होते हैं चार सत्य दया दान और तप इनमें से कल्योग
03:38में तीन पाउं टूट गए हैं कल्योग में क्या तूट गए धर्म के तीन पाउ
03:48तोटे हैं नंदी के, एक पाउ आगे हैं, मतलब एक पाउ जी था,
03:51कल्युग में केवल दान है, दान केवल पर धर्म चल रहा है, टिका हुआ हुआ है,
03:57इसलिए एक पाउ हें, वो तीन पाउ तूट चुके हैं, तो वो तीन पाउ जो अंदर है न,
04:02वो टूटे कल्यूग है, सत्यूग आएगा तो धर्म चारों चरन से होता है, धर्म चारों चरन से होता है, तो
04:11संकर जी बैल पर चड़े हैं, आप लोग कहते हैं, संकर जी बैल पर चड़े, बैल की सवारी, तुम्हें ग्यान
04:16नी हैं, हम क्या करें, संकर जी बैल पर नहीं सवा
04:55अपने धर्म पर जिंदा रहना अच्छा है अपने धर्म में रहके मर जाना अच्छा है पर दूसरे धर्म का
05:01स्वीकार, दूसरे धर्म को स्वीकार करना अच्छा नहीं है, आज हमारे देश में धरमांतरन हो रहा है, क्या हो रहा
05:09है, पांच हजार में, दो हजार में धरमांतरन हो जा रहा है, धरमांतरन गीता में लिखा है, मर जाओ अच्छा
05:16है, पर धरम का परिवर्तन करना पाप है, प
05:31आम भी खटा है, पर नहीं हो सकता.
05:34यदि इमली बनाना होता, तो परमात्मों से आम क्यों बनाता?
05:37इमली बनाना होता?
05:39यदि हमें हुआ है इश्वर ने, inviting हिश्वर की मर्जी है कि महीं हिंदू हूँ.
05:43हिंदु ही रहूंगा, मैं काहे धरम परिवर्तन कर लूँ, क्यों करना चीज़?
05:47स्वेच्छा से भी उसके फिर…
05:49काहे हमारी यह स्वेच्छा होगी, क्यों कि हम धरम छोड़तें?
05:52धरम कायर छोड़ते हैं, समझदार नहीं धरम छोड़ते.
06:01कई लोग इस बात को लेकर व्यत्यत हो जाते हैं, कि जातियों में जब बंटवारा हो जाता है, वो पक्षपात
06:06होता है, तो वो चाहते हैं कि छोड़ में…
06:08अच्छपात जातियां कहां कर रही हैं, हम तो कह रहे हैं, संबिधान से जातियां हटा दो, क्यों नहीं हटा रहे
06:15हैं, जातियां कौन बना रहा है, लोग कहते हैं, पंडित ने जाती बनाई, अरे, पंडित जाती जाती बनाते, तो जाती
06:24प्रमान पत्र पंडित जी बांट रह
06:36बोलो, तो बताओ, जातियां कौन बांट रहा है, हाँ, तो बदनाम बेचारे, पंडिच जी है, और खेल, यहाँ कानून खेल
06:45रहा है, मतलब वो व्यवस्था तो थी नहीं, काई की, जब से जातियों में बटवा रहा हूँ, भले वो कर्म
06:54की वज़े से शुरुवात हुई, य
07:06उच नीच के लिए नहीं बनी, भेदभाव के लिए नहीं बनी, जातियां इसलिए बनी, उस जमाने में आधार कार्ड नहीं
07:12था, पैन कार्ड नहीं था, कैमरा नहीं था, सिस्टम नहीं था, पर हमें कैसे पता लगता के यह भारती है,
07:20के आकरानता है, विदेशी है, तो उस
07:22समय पहचानने के लिए हमारे यहां वर्ण बनाए गए पहचान थी जैसे आज की पहचान आधार कार्ड है आज की
07:29पहचान बोटर आईडी है पासपोर्ड है ऐसे उस जमाने में आधार कार्ड बोटर आईडी त्यादी कुछ नहीं था तो पहचान
07:35थी के भाई आपकी पहचान
07:37ब्राम्हन है, आपकी पहचान छत्री है, आपकी पहचान वैस शेह और आपकी पहचान सूद्र है, वो सब के गोत्र दे
07:44दिये, पासवर्ड, गोत्र क्या है, पासवर्ड है, कि कोई घुसने ना पाए बीच में, हमारा तुमारा रूप बना के घुस
07:49जाएगा, तो हमारी बहन �
07:51को आपस में लडा पहां कें गलत काम कर देगा आज भी कोई बीच में आप खुश्पाया इसलिए पास्वर्ड के
07:58साब से क्या डाल दिया गया गोत्र आपका गोत्र क्या है अरे गलत बात यह नहीं पता हो तो कशब
08:05गोत्र का अपड़ीजिद तो आपको काहीं नहीं पता हु�
08:21यह सब व्यवस्था नहीं सब पासवर्ड तो बता होना चीए अपना अगा
08:38कोई भी यग अनुष्ठान करेंगे तो गोत्र ही लगेगा वहाँ धारकाड नहीं लगेगा अधारकाड यहां की विवस्था है गोत्र वहां
08:46की विवस्था है समझ रहे हैं हां तो हमारे यहां चार वर्ण बने ब्रामन च्छत्री वैश शूद्र अब जैसे आप
08:54चैनल से हैं
08:55तो आप कैमरा में डुगाइपस्था हें जैसे आप एंकर हैं आफ बोलती हैं
09:00ये कैमरा में अनुगारी ये बिवस्था हो गई आप हो गई उड़े दो भी होगें Mm
09:18चलो जाओ चत्री वैश आपको पैसे कमा कमा के लाना देश को मजबूद करना शूद्र वरामाण चत्री वैश सूद्र के
09:25साथ कंदे आपको भी एक असस्टेंड चाहिए कि नहीं अपने काम के लिए ऐसे सूद्र भाई सब के साथ खड़ा
09:30रहेगा भेदभाव थोड़ी था �
09:32भेदभाव होता तो राम शबरी के जूठे बेर क्यों खाते भेदभाव होता तो राम निशाद राज को गले क्यों लगाते