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राहुल गांधी बनाम विजय की सियासी चर्चा अब तमिलनाडु से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचती नजर आ रही है। TVK प्रमुख विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है और उनके भविष्य को लेकर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। क्या विजय की नजर सिर्फ मुख्यमंत्री पद पर है या 2029 में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी भी सामने आ सकती है? इस वीडियो में जानिए विजय की राजनीतिक रणनीति, TVK का विस्तार, कांग्रेस के सामने चुनौती, राहुल गांधी की भूमिका और दक्षिण भारत की बदलती राजनीति का 2029 पर संभावित असर। आखिर विजय का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा?

Rahul Gandhi vs Vijay is becoming an important political discussion as Tamil Nadu’s political landscape prepares for a major transformation. TVK chief Vijay has emerged as a powerful new political face, raising questions about his long-term ambitions beyond Tamil Nadu. Could Vijay become a potential PM candidate in 2029, and could his growing influence create a challenge for Rahul Gandhi and Congress? In this video, we examine Vijay’s political strategy, TVK’s expansion plans, Congress vs TVK, the role of South Indian politics and the possible 2029 political scenario. Watch the full report to understand why Vijay’s political ambitions are attracting nationwide attention.

#RahulGandhi #Vijay #TVK #TVKVsCongress #TamilNaduPolitics #TamilNaduElection #2029Election #Congress #VijayPolitics #IndianPolitics

~HT.410~PR.540~ED.110~GR.506~VG.HM~

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00:00पिछले हब्ते 24 अगस्त को एक बड़ी घटना घटित होती है केरल में केशो जी बीजेपी में नेता थे अभी
00:08नेता है वो मल्याली फिल्म रिस्टी के डेवन उनका नाम है वो बीजेपी छोड़कर टीवी के जॉइन कर लेते हैं
00:15तमिलाड में टीवी के सत्ता में है लेकिन क
00:18केरल जो पड़ोसी ही राज्य है वहां पर तो भी टीवी के का कोई राजनीती का अधार ज्यादा है नहीं
00:24फिर भी उन्होंने टीवी के जौइन करना चुना और उन्होंने कहा कि मैं विजेद की राजनीती को केरल में भी
00:29आगे बढ़ाना चाहता हूँ यहीं से इस चर्चा
00:33को और हवा मिली कि क्या विजय दक्षिड भारत के अन्य राजियों में भी अपनी पार्टी का प्रचार प्रसार करना
00:41चाहते हैं निश्चित करना चाहेंगे जो दक्षिड भारत की पार्टियां हैं वो परोसी राजियों में सक्रिये रहती हैं चाहे आप
00:50विजय की पार्टी क
00:52बात कर लें या फिर चंडराव उनाइडू की पार्टी जो है तेल गुद देशम पार्टी वो तमिलनाडू के कुछ सीटों
00:59पर चुनाओ लड़ती रही है जे डीएस भी तमिलनाडू में सक्रिये रही है तो यह और बीएस पी करनाटक में
01:07तमिलनाड में देश मेर के तमाम हि
01:19स्थार करना वो जरूर चाहेंगे इसमें कोई मतलब अंसुनी या अभुत्फूर्व वातिय नहीं है ऐसा होता रहता है बहरहाल विजय
01:28की शक्ति कहां है तमिलनाड में वो मुख मंत्री हैं अभी इस वक्त तमिलनाड चुनाओ पहली वार लड़ी है टीवी
01:35के और पहली वा
01:48सहयोगी पार्टी जो अभी मौजूद है वो नहीं थे लेकिन सरकाल चला रहे हैं यह यह फैक्ट है और हम
01:58लोगों को इसी फैक्ट के साथ रहना चाहिए दूसरी बात रही कि तमिलनाड से इतर विजय की क्या स्विकारता होगी
02:06इस पर देखना होगा आपने कहा कि उनके स्�
02:12मेडिया में जो दिखाया जाता है वो काफी लोग प्री हो रहे हैं वह एक अलग बात है भाशन सुनने
02:18के लिए लोग आ जाते हैं और भाशन वोट में कंवर्ट हो या कोई जरूरी नहीं है इसके बहुत सारे
02:23उधारन है राहूल गांधी की जो भारत जोड़ो यात्रा है व
02:49लेकिन दो हजार चोविस की बात करें वो कुछ नतीजों में कनवर्ट नहीं हुआ तो भीड एक अलग बात है
02:59वीड का वोट में बदलना एक अलग बात है और फिर वोट का भीड में भी बदल जाना एक अलग
03:06बात है यह चमतकार बीजेपी करती रही है उनके जो वोटर है �
03:09भीड भी बन जाते हैं यह अलग बात है तो यह दो हजार उन्तिस तक प्रतिछा करने का विशय होगा
03:15बहराल एक बात और है तमिलनाड में ही क्या विजय की सर्वस्वी कारता है क्या जब ऐसी स्थिति आएगी कि
03:24तमिलनाड की पार्टी के सामने दो विकल्प हो एक राहूल
03:39इसे तो होना चाहिए और यह अगला प्रधान मंतृ यह चाहिए तो तमिलनाड की पारियों मेंस विशय पर एक रूपता
03:51है एक मत्ता है या फिर उनमएं मत्वेंद हैं यह बहुत बड़ा सवाल था उन जाएंक का विजय को प्रधान
03:59मंत्री बनाने के लिए उनके साथ आए
04:03देगा ना हम अभी से कैसे यह सोच लें कि जब 2029 का चुनाव होगा तो तमिलनाड के जो भी
04:09सांसद होंगे सारे विजय के पार्टी के होंगे या फिर विजय के गठबंधन के ही होंगे ऐसा तो हो नहीं
04:13सकते हैं ना हम उहां पर DMK को ADMK को completely right off नहीं कर सकते हैं DMK अभी सबसे
04:19
04:19ज्यादा सांसद हैं वहां पर तो अचानक से 2029 में सभी सीटे तो नहीं लूज कर सकती हैं तो क्या
04:26वो लोग विजय के साथ आएंगे या फिर
04:29tamilnaar से ही होना है तो मान लिजे कि ऐसिस्थिती बनती है कि 49 सांसद फीर से हो जाते है
04:34चाहिए पिर 46 संसद
04:36स्टा आएं के हो जाते हैं तो क्या विजय के तीन संसद या जो भी संसद हो विजय के क्या
04:40नहीं भी हो तो नैतिक
04:42करेंगे और राज्य की सत्ता में उनका स्टांस क्या होगा उनका का स्टेंड ही क्या होगा
04:51यह बहुत सारे प्षण है राजनीत में स्यासत में ऐसे संकल्प और विकल्प आते रहते हैं और मज़ vraag
05:00बाती है कि जो पॉलिटिकल कॉंटेंट कंज्यूंग करते हैं जो इंज्वाइ करते हैं उनके लिए इसमें एक थ्रिल भी मिलता
05:07रहते हैं अब तो यह हो गया अब तो भारतिय जन्ता पार्टी के सामने इंडिया का कुन्वा बिखरने लगा है
05:13एक तरफ राहूल गांधी दा�
05:30समय किया जाएगा अभी बस यह मुझे लगता है कि मजे के लिए बाते कहीं जा रही है कोई विजय
05:36को प्रधान मंत्री बना रहा है को राहूल गांधी को प्रधान मंत्री बना रहा है प्रधान मंत्री संयोग से बंदे
05:42जरूर है लेकिन उस संयोग के लिए भी बहुत मेहनत
05:45करनी परती है उस वो संयोग भी हमेशा नहीं आता है और राहूल गांधी के हिस्से में मुझे लगता है
05:55कि अभी और थोड़ा संगर्श है दो होजाग उन्तिस में भी रास्ता क्लियर नहीं दिख रहा है बिल्कुल विजे राणा
06:02जी के पास सलते हैं विजे जी मैं दूसरे स�
06:08उसे यह कहा जाता है सिकासी गल्यारों में कि अगर आपको दिल्ली में आना है परदान मंतरी पत पर विराजमान
06:14होना है तो आपको ठीक ठाक हिंदी तो आनी चाहिए ताकि आप हिंदी भाशी लोगों से जुड़ सकें उनसे समवाद
06:21स्थापित कर सकें अभी तक दो परदा
06:34आधार पर भी वहाँ विवात काफी हो चुका है हिंदी को लेकर विरोध तमिलाड की राजनीती का एक बड़ा मुद्दा
06:41रहता है ऐसे में आपको लगता है कि तमिलाड हो या तमाम और दक्षिट भारत के राज जो वहां के
06:47निताओं के लिए दिल्ली का रास्ता भाशा की
07:04मुखर जी जैसे नेता बीवी सी को हिंदी में इंट्रिव्यू देने से मना कर दिया करते थे में खुद मेरे
07:10साथ यह हुआ लेकिन धीरे धीरे जैसे अखिल भारतिये सोच बड़ा जैसे जैसे जैसे मीडिया की प्रेजन्स हुई तो आखिर
07:18के वर्षों में वही प्राण म�
07:32की है कि यदि इस देश में अपनी राजनीतियों को आगे बढ़ाना है चमकाना है तो हमें सर्व सारे देश
07:39को साथ ले करके चलना पड़ेगा हिंदी के जो समवेधानी के सब्सक्राइब के जगड़ा चलता रहेगा है लेकिन हिंदी की
07:46स्विकारिता को अब करीपर सभी रा
08:02अपनी राजनीति को चलाने के लिए वह यह मान किसा है कि हिंदी विरोध राज्य में सत्या के लिए बहुत
08:09आवश्चक है लेकि यदि तमिलाडु की जनता की बात भी देखें जब मैं सतर के दर्शक में तमिलाडु गया था
08:15तब से लिए आज की इस दिए में जमीन आस्मा
08:31और है बहुत बदला आएं और रचंदि थे कि इसогодको चलाना चाहते तो एक ऐसी संपरक भाशा तो आपको सिकने
08:55पड़ेकि जिस ने देश �is
08:57सके और हम सब जानते हैं कि अंग्रेजी वोस्तर कभी भी नहीं प्राप्ट कर सकती मैं तो यह मान के
09:02चलता हूँ जिस दिन भारत की सम्विधान सबाह ने यह फैसला लिया कि देश की काम-काजी-भाशा अंग्रेजी होगी
09:08उस दिन उन्होंने देश की 98 अप्रतिशन जनता को �
09:13दिया था सरकार से और प्रशासन से अलग कर दिया था और यही कारणा कि बहुत वर्षों तक आम जनता
09:20का केंद्री सरकार में कोई दखर नहीं था और एक दूरी नेताओं के बीच जनता के बीच रही तो यह
09:26समझ जो है ग्राउंड लवल पे लोगों को आ रही है लेकि रा�
09:43दिन चलेगी यह कहना मुश्किल है केशो जी यही सवाल आपसे 2012 मुझे आदा रहा है नरिन मोदी फिर से
09:51गुजराज जीतते हैं उम्मीद की जा रही थी कि जब वो जीत के बाद का संबोधन देंगे तो उनका संबोधन
09:57गुजराती में ही होगा लेकिन वो हिंदी में भाश
10:09लोगों से जुड़ने की कोशिश की और एक तरह से यह संकेत भी दिया कि अब मैं दिल्ली के लिए
10:14तैयारी कर रहा हूं आपको लगता है कि उत्तर भारतियों के अंदर भी अभी बदलाव आना चाहिए क्यों कोई तमिल
10:22बोलने वाला परदानमंत्री नहीं बन सकता अगर ए
10:38मुद्दा है ही नहीं जब नरसिंग राओ इस देश के प्रधानमंत्री बने तो हिंदी भाशी नहीं थे हलांकि यह बात
10:44सच है कि नरसिंग राओ कई भाशाओं के जानकार थे बहा जाते हैं उनको 14 भाशाएं आती थी यह अलग
10:52बात है बहु भाशाविद थे वो लेकिन कि
10:55किसी ने आपोज तो नहीं किया इस आधार पर के कि उनको प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए क्योंकि वह हिंदी भाशी
11:00नहीं है जब देवगौरा जी इस देश के प्रधानमंत्री बने तब भी किसी ने भाशाई आधार पर तो उनका विरोध
11:06नहीं किया था और मैं आप
11:25जिसे अपना नेता चुनेंगे वो प्रधान मंत्री बनेगा लोगों के पास तो को एसा विकल्प नहीं है, राइट टूडी कॉल
11:31भी नहीं है, लोग अपने सांसदों को फिर से वापस नहीं बुला सकते हैं, यह सांसदों का विशेशाधिकार हो जाता
11:36है, और सांसद अलग-�
11:41लोगों का समर्थन भी कर सकते हैं, बहुत सारी वाजहें होती है, लोग सभा में किसी को समर्थन देने के,
11:48यहां तक कि किसी प्रस्ताव के समर्थन में भी वोट देने के लिए हमने बहुत सारे किस से सुने हैं,
11:55किस तरह से सांसदों ने एक विल के पक्ष में अपना मत जाह
12:09तो विजयाए बन सकते हैं भाषाई समस्या उसमे कुछ नहीं है बिलकुल भी है नहीं तमिल्नाद के लोग दूसरे राजियों
12:21में हैं दूसरे राजी के लोग अब माली जो आए साधिकारी हैं उनकी
12:31फोस्टिंग होती है वो भी तो काम करते हैं तो काम काई की भाशा कोई जरूरी नहीं है कि हिंदी
12:41ही हो और समय सामनत है और ज्यादा अपनली पहले तो अंग्रे जी है
12:45सब जगह एक सेत भाषा का भी काम कर रही है और जो दफ्तावेजी भाषा है भारत की इस समय
12:52उसमें से एक अंग्रेजी भी है तो काम तो इसे ही चलेगा भी और मुख्य मंतरी परढ़ान मंतरियों का काम
12:58कितना होता है भाषाओं से हो कितना डील करते है
13:00हाँ लेकिन एक जननेता बनने के लिए आपको उस देश की या उस प्रांथ की जो बड़ी आवादी है उनकी
13:10भासा में आपको उनसे संवाद करना होगा जो आपने मोधी जी का उदाहरंदिया आप देखिये मोधी जी ऐसा नहीं है
13:16कि केबल गुजराती बोलते थे मोधी जी प
13:30जी का उदाहरं है लोगों से संपर्क करने की उनकी एक अपनी विशेश्वैली है उस लोगों से कनेक्ट करते हैं
13:37और समवाद के धनी हैं मतलब पबलिक अच्छे औरेटर हैं अच्छे अच्छी तरह से अपनी बात को अपने टार्गेट ओडियंस
13:49के सामने रखने में माहिर
13:50हैं अगर विजय यह सब चीज कर पाते हैं तो उनकी भी स्विकारता तो हो ही सकती है एक अक्टर
13:56के तौर पे वो दक्षण हो या उत्तर हो लोकप्रिय रहे हैं उनकी जो डवड फिल्में हैं उत्तर भारत में
14:03भी देखी और सराही जाती रही है लेकिन फिर बात वही है कि ल
14:07लोग भारत में प्रधानमंत्री नहीं चुनते हैं लोग भारत में सांसद चुनते हैं हां सांसदों को चुनने का एक फैक्टर
14:16विछले कुछ सालों में देखा गया है कि प्रधानमंत्री पद का चेहरा भी रहा है जैसे भारतिय जनता पार्टी कहती
14:23है कि हर सीट पे नरें�
14:28चला भी है तो दो हजार उन्तीस में क्या फिर ऐसा कुछ देखने को मिलता है उसका इंतिजार करना चाहिए
14:34बिल्कुल हमने विजे पर बात कर ली थोड़ा बहुत अब राहूल गांधी पर भी बात कर लेते हैं विजे राडा
14:40सर के पास सलते हैं विजे जी राहूल गांधी के अंदर एक बदलाव तो साफ तोर पर दिख रहा है
14:47दोजार चौविस के बात से ही जब वो अपनी माता जी क
14:51सीट से लोगसभा पहुचते हैं अमेठी वाली सीट भी कॉंग्रेस जितती है समित्री रानी को किशोरी लाल सर्मा हरा देते
14:57हैं अब बाद में बहन भी लोगसभा पहुच जाती हैं जो कदम कदम पर उनका साथ दे रही हैं उनके
15:03लिए माहुल बना रही है और पिछले तीन च
15:21है कि अब राहूल गांधी का टाइम आ गया है जैसा कि वह अंदर खाने बैठकों में कहते रहते हैं
15:41कि अब हमारा समय आ रहा है
15:45लेकिन वो कहना चाहिए कि आतु इश्वास डारेक्टिट कि तरह है यह हमें दिगुसातु इश्वास का फल क्या हो रहा
15:50है जिस तरह से हर सभा में जाकर कि वो लोगों को एनॉय कर रहे हैं एक तरह से मनुस्मृति
15:57मुझे नहीं लगता कि सुतनत्र भारत के त्यास में किसी भ
16:03बॉद्धिक हिंदू बॉद्धिक ने आज तक यह कहा हो कि मनुस्मृति हमारा एक अब हमारी संस्कृति का अब भू अब
16:12कर जी आधार बूत गरंत है और इसके आधार प्रदेश का शासन चलने किसी ने नहीं कहा था और जिस
16:18तरह से यह एक क्रोध उनकी बात में दिखे हर
16:33अब अपना विजन वह आज तक नहीं रह सकते हैं शुरू से देखिए उनकी राजनी कभी राफल पर जाकी टक्राइब
16:38कभी चोगिदार चोरह पर हो जाती है कभी मनुस्मृति बरा जाती है कभी कभी किसी एक मुद्दे पर आज तक
16:482014 से हमले consistent theme क्या है उनकी यह आज तक द
17:03देगा क्यों जिस तरह से और जितनी कड़वाहट के साथ उन्होंने मनुस्मृति का विश्य उठाया है उससे वह मान बैठे
17:09है कि जो प्रो बीजेपी और प्रो हिंदू जन्मत है वह कॉंग्रेस पार्टी के पाले में अब नहीं आने वाला
17:16है तो उसे जितना चाहे उतना �
17:17करो बलकि मैं तो समझता हूँ कि इस सरे की जो राजनीती है चाहे तो उद्यनीदी मारण के उद्यनीदी की
17:23हो या राहुल गांदी की हो वो और हिंदुत को बल देती है बहुत सारे लोग ऐसे हैं जैसे जिनका
17:32मनुस्मृति से कोई दूर का लेना देना नहीं को रिष्टा �
17:35हैं लेकिन जब वो देखेंगी यह व्यक्ति हिंदु धर्म के एक ग्रंद को इतने अप्षब्द उसके प्रतिस्तेमाल कर रहा है
17:41तो मन में कहीं उनका रिजॉल्ट और उस धर्म के प्रति और उस ग्रंद के प्रति चला जाता है वास्ट
17:48रिकता है कि मैरे पास बहुत अच्
18:03सब्सक्राइए तो बहुत सारे लोग हैं जो इस ग्रंद के प्रति और उनका रिजॉल्ट जो इंटर्डल रिजॉल्ट और उतना मजबूत
18:12हो जाएगा यह विक्ति है जो हिंदु धर्म के पैर पर पैर रख करके अपनी राजनीति चलाना चाहता है तो
18:19और बहुत सारे लो�
18:33वीचारधाराओं के लोग रहे हैं राइट के भी थे लेकिन अभी वाली जो राहुल वाली कोंग्रेस है वो फार लेφ्त
18:39दुखती है वो लेफ्ट की गोद में बेथे हुए दिखते है उनी मुद्दो को उठाते हैं जो पूरी तरह से
18:46लेफ्ट के अंडरित मुद्दे रहे
18:47हैं और लेफ्ट के नेताओं से भी उनकी करीबी समय समय पर दिखती रही है फिर चाहे
18:53वो CPIM के पूर महा सची रहे हों या फिर अभी CPIML के दिपांकर बटा चा रहे हों तमाम
19:03केशो जी जैसा कि विजे जी बता रहे हैं एक बड़े जनसमु खासकर हिंदू समुदायस से अगर आप अपको वोट
19:11करे तो कम से कम मनुर्शमिती जैसे जो बयान देकर राहूल गांधी कर रहे हैं उन्हें इससे बचना चाहिए क्या
19:18आपको भी लगता है राहूल गांधी य
19:29कोट के ऊपर जन्यू पहन के कभी अपना गोतर बता करके कभी मंदिरों की यातरा करके लेकिन इसमें उनको कामयाबी
19:37नहीं मिली और रहे बात कांग्रेस की तो एतिहासिक रूप से भी कांग्रेस लेफट टू दा सेंटर रही है सेंटर
19:44इसको केंद्रिये विचारधारा की �
19:46पार्टी समझा जाता है लेकिन उनका जो रुजहान रहा है हमेशा सेंटर के बाई तरफ रहा है तो मैं यह
19:54नहीं कहूंगा कि कांग्रेस का जो की जो आइडियोलोजी थी उसमें बहुत यूनों बड़ा शिफ्ट आया है ऐसा नहीं है
20:02कांग्रेस की विचारधारा वही थी जह
20:162019 में और 2024 में देखे तो राहूल गांधी का घराभी तीरे-देरे बढ़ा ही है और जब 99 सीठे
20:23आ गई 2024 के चिटाव में आप याद कीजिए 2004 में कितनी सीठे आई थी कांग्रेस की और कैसे वो
20:29यूपी ये बनाने में काम्याब रहे थे तो ऐसा नहीं है कि राहूल गांधी क
20:36अंग्रेस की मूल विचारधारा से बहुत ज़्यादा भटक गए हैं दूसरी बात मैं यह मानता हूँ विजय जी तो हमारे
20:43सीनियर हैं हम उनको पढ़ते और सुनते हुए बड़े हुए हैं लेकिन राहूल गांधी इस वक्त नरेंदर मोधी या फिर
20:54कहें कि NDA गटवंधन क
20:56सबसे बड़े विकल्प के रूप में हैं और पिछले दस सालों से बारह सालों से जो एक चीज बनी आ
21:02रही थी टीना फैक्टर देर इस नो अल्टरनेटिव उसको फिलहाल एक जटका सा थोड़ा सा सेट बैक लगता हुआ दिख
21:10रहा है और खासकर राहूल गांधी की जो आक
21:26से हो सकता है कि उनकी समझ में विस्तार मिला है दूसरी बात एक चीज और देखे राहूल गांधी में
21:30क्या बदला है आइडियोलोजी वगरा तो बात हो गई राहूल गांधी के जो सलाहकार होते थे एक समय में अब
21:38देखिए राहूल गांधी के सलाहकार बदल गये हैं राह
21:52कुमार है सबसे महतोपूर्ण नाम इसमें करने आप उनकी चर्चा कर भी रहे थे कि सी पी आई के महा
21:57सचीब तो वह ही उनके साथ हैं तो जब सलाहकार बदलता है तो सोच भी थोड़ी बदलती ही है और
22:04जो आक्रामक्ता आई है राहुल गांधी में वो देखे जाया नहीं हो �
22:08रही है अगर हम बात करें मौनसून सत्र की अभी अभी जो समाप्त हुआ है पार्लिया मेंट की तो राहुल
22:15गांधी ने सरकार को बैक फूट पे रखा प्रधान पहली वार ऐसा हुआ कि प्रधान मंत्री और ग्रिह मंत्री संसर
22:22में बोल तक नहीं पाए तो यह तो बहुत ब
22:38उनका पार्लिया मेंट मार्च था और जेपी नडड़ा एक और मंत्री पीमों में राजि मंत्री है जितेंद्र सिंग वो गया
22:47उनके परतिंदिदियों से बात करने के लिए तो यह उसी दिन क्यों हुआ
22:51सीजेपी का आंदोलन तो एक महिनेस चला रहा था बीस दिन से सोनम वांग्चुक का अंसन भी चला राहूल गांधी
22:59ने जब मोर्चा संभाला तो भरदे जनता पार्टी के नित्रित वाली सरकार को यह लगा कि यह बड़ा मुद्दा देश
23:07की सबसे बड़ी विपक्ष की प
23:21अगे घुटिने टेके हैं भारतिय जनता पार्टी उसमें मैं सीजेपी के प्रदर्शन को बीलिटिल नहीं कर रहा लेकिन केवल सीजेपी
23:29का ही प्रदर्शन उसका कारण नहीं था उसका एक बड़ा कारण राहूल गांधी का वह आक्रामक प्रतिरोध भी था जो
23:36वो प्रध
23:49सहयोगी की तलाश जारी रखनी चाहिए राहूल के साथ मुश्किल यह है कि एक सहयोगी आते हैं तो दूसरे चले
23:55जाते हैं इसको कैसे बैलेंस करते हैं रास्ट्रिये
23:59स्विकारिता के लिए रास्ट्रिय फलक पर एक मजबूत नित्रित देने के लिए राहूल गांधी को अपने सहयोगियों को सम्हाल कर
24:07रखने पर काम करना होगा
24:08उसमें माईवे और हाईवे नहीं चलेगा
24:12बिल्कुल लेकिन केशो जी राणड़ जी के पास सलते हैं उसके बाद फिर आपके पास भी आएंगे
24:17राहूल गांधी जैसे मुद्दे उठाते हैं कई बार मैंने ये देखा है कि वो कंग्रेस पार्टी के सबसे बड़ी नेता
24:24है
24:24खड़गे जी अध्यक्ष भले हैं लेकिन चलती उनकी है सबको पता है
24:27राहूल गांधी जो मुद्दा उठाते हैं क्या वही मुद्दा राज अस्तर कर तक के जिलास्तर तक के कॉंग्रेस नेता एक
24:34सुर में उठाते हैं
24:35हमने देखा है अडानी मुध्दे पर राहूल गांधी जब भी हमलावार होते हैं उनके पार्टी के बहुत सार नेता शान्त
24:41हो जाते हैं
24:42जिसे अशोग गैलोथ को कभी मैंने अडानी खिला कुछ बोलते हूँ नहीं देखा है
24:44देके शुकुमार कुछ बोलते हुए नहीं देखा है
24:47कमलनात कुछ बोलते हुए नहीं देखा है
24:49जिनके व्यापारिक घरानों से बहुत अच्छे संबन्ध है
24:51जैसे राहूल गांधी मनुर्शमित्री के लिएकर जो बोल नहीं है
24:54कॉंग्रेस के बहुत सारे नेता उनकी बात दोहराएंगे नहीं
24:56वो चूप हो जाते हैं सचीन पाइलट जैसे
24:58नेता कई मामल में चूप रहे हैं
25:00सिंधिया पहले जब कॉंग्रेस में थे
25:02तो मैंने देखा था 370 करोंने समर्थन कर दिया
25:04था हाट आए जाने का तो
25:06राहुल गांधी को क्या इस मामले में
25:09विजे जी आप से सवाल होगा
25:10कि थोड़ा अपने नेताओं के भी
25:12रायशुमारी करनी चाहिए
25:14या उनके सभाव में जो जिद्धी पना है
25:17कि नहीं मैं इसी मुद्दे को उठाऊंगा
25:19और उनका ये भी मानना है कि
25:20कॉंग्रेस में बहुत सारे RSS की लोग भरे हुए है
25:22वो जाना चाहें तो चले जाएं मुझसे
25:24उनसे कोई लेना देना नहीं है
25:28देखे ये वड़ा रोचक सवाल
25:31आपने किया है और यदि
25:33हम राजनीतिक और राजनीतिक
25:37जो संभावना है
25:38उनको यदि एक तरफ रख करके
25:40हम व्यक्ति का विश्ट्रेशन करें
25:42तो राहुल गांदी की तरफ आप
25:44आप देखिए वो आज
25:47इस इस्तिति में है वो इसलिए नहीं कि
25:48वो उन्होंने खुद अरजित की है
25:51वो इसलिए है क्योंकि
25:52वो एक विशेश परिवार से आते हैं
25:54और सारी जो विपक्ष की राजनीति है
25:56उस सब में यहीं इस्ति है
25:57कि तीसरी चौती पीड़ी के नेता है
26:00चाहे फारुपम उमर अब्दुल्ला हो
26:02चाहे तेजस्वी हो या अखलेश यादव हो
26:04इन लोगों ने कुछ अरजित नहीं किया है
26:07लालू यादव ने संघर्ष किया था
26:09मुलायम तरी आदव ने संघर्ष किया था
26:11सड़कों पर उत्रे थे
26:13इन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है
26:14कई लोग विदेशों में पढ़े हैं
26:16कुछ लोग बिल्कुल ही बिना पड़े लिखे हैं तो इन में से कोई भी एक ऐसा निता मता है जो
26:21बौधिक स्थार पर ठोस हो जिसकी अपनी कोई सोच समझ आदर्श या कोई कोई दर्शन हो ऐसा कहीं कुछ नहीं
26:29है अब राजी इनका देखिएगा ये बड़ा बड़ा की रा
26:45अडानी बिजनस कर रहे हैं बहुत बड़े पैमाने पर और उस पार्टी के यानि उस पार्टी के राज्यों के मुख्यमंत्री
26:52अडानी के साथ मैस्जिव स्केल पर बिजनस कर रहे हैं और उस पार्टी का जो नेता है वो दिननात अडानी
26:58को कोशता है और फिर यह यह तो ब
27:15बहारा नहरू हम तो उस पीडी के लोगें जहां हूं को यह बताया जाता था कि वो हमारे पूजिनी हैं
27:20लेकिन आज हम जब राजनीती का और अर्थशास का विशलेशनल करते हैं तो हम यह जानते हैं कि उन लोगों
27:27की अर्थशास पर बिलकुल पकड़ नहीं थी आज बैठ कर
27:44मुझे पढ़ाया गया है मैंने इंतहां दिया पर्चा लिखा है कि चर्खा चलाने से बरतन बनाने से या जाडू और
27:51टोकुरी बनाने से भारत की बेरोजगारी की समस्याहल हो जाएगी उस समय भी ऐसे अर्थशास की थे केन राज्जी थे
27:58जो बता रहे थे कि जिस आर्थि
28:11नीतियों को नच फोड़ रहे होते चोड़ते और योधि आज हम उन नीतियों पर चल रहे होते तो भारत हैभी
28:18वी दुनिया के सबसे घरीब देश होता भारत में बेरोजगारी की विकर समझ्चा होती भारत है भुकमारी होती बेरोजगारी हो
28:26� опыт कि आप तो कहले हैं जो जो
28:34तो ये वस्त्विक्ता है भारत का विकाल आर्थिक विकास कपसे होता है जब हम लोगों ने उन समाजवादी नीतियों को
28:40उनीस क्यानवे में छोड़ा जब
28:41दिवालियापन का गार वहां से भारत की आर्थिक इस्तिती उड़ती है समाजवाद और गरीब आदमी की बात करना नेतिक लूप
28:49से बहुत अच्छा लगता है कि भी गरीब आदमी को उत्वान होना चाहिए लेकिन जिस्दिस देश ने वियतनाम से लेकर
28:55वियरेजरला तक सो�
29:10पास्ता शुरू किया था उनीस सो एक्यानवे में लेकिन आज राहूल गांधी उस पार्टी को उनीस सो फचास के दिशक
29:16में ले जाना चाहते हैं जो जो समाजवादी समाज बनाने की बाजू करते हैं यह एंटी कैपिटल पॉलिटिक देश में
29:25कहां से आएगा रोजगार क
29:28पती मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है यह राहूल गांधी जनता को बता रहे हैं तो यह विरोधावास बहुत सारे लोग
29:34समझते हैं वह वह लोग हैं जो मुखर्ख होकर के जो सामने नहीं आते जो सर्गों पर जलूस नहीं निकालते
29:40वह शाम को जाकर के कहते हैं कि मेरे आर
29:57पतन के गलगार पड़े जाएंगे उसलिए उनकी नीतियों में विश्वास नहीं है देश की जनता कर यह समय मेरा विक्ति
30:04का तनुभा मैं मानता हूं ऐसा हो सकता है यह गलत भी हो सकता है इसके विरोध में भी बहुत
30:09प्रभाश्वाली तर्क दिया जा सकता है लेकिन जब �
30:12तक जो वेल्थ क्रियेटर्स हैं उनको कोस्ते रहेंगे राहूल गांधी तब तक इस देश का देश की आर्थिक उन्नती तो
30:19किसी भी हालत में नहीं हो सकती देश के लिए दा ओनली ओनली विजन जो भाविश में एक मात रास्ता
30:26है जल्दी से जल्दी और अधिक से अधिक �
30:29होना चाहिए यदि आप इस देश में विरोजगारी की समस्चा को समाफ्ट करता चाहते हैं और वो जो अध्योगी करण
30:35होगा वो कुट्वी द्योगों से नहीं हो सकता है वो स्मॉल इंडिस्ट्री से नहीं हो से वह बिग इंडिस्ट्री होते
30:41हैं आज गाओं का लगा भी �
30:43स्मेंता है जीन स्मेंता है जिसे आप पुट्युरी द्योग में नहीं बना सकते हैं चाहिए बड़े मिल में ही बनेगी
30:50हम और द्योगी करण के रास्ते पर अशी वर्ष आगे निकला हैं अब उस क्लॉप को पीछे पीछे जाना संभव
30:57नहीं है जो रावर्दंदि कोशिश
30:59कर रहे हैं तो और शायद उनकी जो विश्वस्नियता है यहीं कहीं जा करें खटक जाते हैं दिली में बैटे
31:06हुए कुछ बड़ा-बड़ा लेखाक बड़ा-बड़ा काने बुद्धी जीवी या पत्रकार इस बात को न माने लेकिन देश का
31:13जन्मानस इस समय खुली बाजार �
31:16और द्योगिक नीतियों की तरफ 1991 से बहुत आगे निकल चुका है उसे समाजवादी रास्ते पर ले जाने पर उद्योग
31:23गुरुदी नीती पर ले जाने पर उद्योग पुत्य को देश का दुश्मन घुशित करने से मामला आगे बढ़ने वाला नहीं
31:29है यह बात देश की �
31:30जनता समझती है बले ही दिल्ली में बाटे हुए कुछ बड़ बड़े राजमितिक्तिका कार ना समझे या राहुल गांदी ना
31:37समझे चले केशो जी आपसे भी सवाल होगा राहुल गांदी एक नेता के तौर पर जो मुद्दे उठाते हैं या
31:45अपनी पार्टी के अंदर न
32:00बीच में कॉंग्रेस पार्टी पिछले 25-30 सालों में कई राज्यों में पूरी तरह कमजोर हो गई है आज से
32:06अगर हम 10-15 साल पहले जाएं तो आंधर परदेश में कॉंग्रेस पार्टी बहुत मजबूत हुआ करती थी
32:10मनमुह सिंग सरकार बनाने में आंधर परदेश के कॉंग्रेस के सांसदों का बड़ा युगदान हुआ करता था लेकिन YSI रेड़ी
32:16के मौत के बाद जब उनकी राजनितिक विरासत उनके बेटे जगन रेड़ी ने मांगी तब कॉंग्रेस ने देने से इंकार
32:22किया और अभ
32:37के साथ से अगर उनको प्रदान मंतरी बनना है तो यह सब भी सुधारना पड़ेगा बिल्कुल यह बात में पहले
32:42कह चुका है वैभव कि राहूल गांधी को अपने सहयोगियों को संभाल कर रखना पड़ेगा यह राहूल गांधी के नेतरुत
32:48की कमजोरी रही है शुरुव
33:07भूमिका निवाई थी तब आंधर प्रदेश यह युग्ध था अब उस आंधर प्रदेश के आधे से तलंगा नमे कांग्रेस की
33:16सरकार इस वक्त है तो कांग्रेस को आउट राइटली रिजेक्ट कर देना भी ठीक नहीं है और देखिए कांग्रेस के
33:23प्रधान मंतरी मुख
33:24मंतरी कहां का है असम का मुख्य मंतरी कहां के हैं कांग्रेस में भारतिय जंता पार्टी के आधे से जादा
33:32मुख्य मंतरियों कि अगर आप फेहरिस्ट निकालेंगे तो उनका कांग्रेस कनेक्शन अभी आपको उजागर हो जाएगा भारतिय जंता पार्टी यह
33:39फिर दूसर
33:51करे इस बात की आवश्यक्ता है और दोगी की करण की बात कर रहे थे विजय जी जब नर्शिमाराओंके प्रदान
34:02मंत्रि तो
34:02काल में उदारी करण हो रहा था तो उदारी करण के विपक्ष में कौन थे कौन विरोद कर रहे थे
34:10कॉंग्रेस तो नहीं कर रहे
34:14मैं देखें कि सस्तर पे अब इस रोग जो उसका एक्स प्रटाइज था उस क्षेत्र में भी अब स्फार्टीज वीरूद
34:34करने वाले लोग
34:38इस समय उधारी करन के सबसे बड़े समर्थक बने हुए उद्ध्यों की मैं बात करता हूँ एक बार
34:45नहरू जी की तमाम विफलताओं के साथ-साथ उनकी उपलब्धियों को भी हमें याद रखना पड़ेगा
35:04तो जब रूस से स्टील लेने की बात हुई तो रूस ने कहा कि भाई ले लो तुम्हें जितना स्टील
35:10चाहिए उस समय में नहरू जी का ये
35:14स्टेट्मेंट ऑन रेकॉर्ड मौजूद है कि भारत जैसे आकार वाला देश अपनी जरूरतों के लिए किसी और पर निर्वर नहीं
35:22रह सकता तो इसलिए आप हमें टेक्नोलोजी दीजिए आप हमें टेक्नोलोजी ट्रांसफर कीजिए हमारे पास लौह एस्क है में स्टील
35:44पतियों से गट जूर की चर्चा करेंगे बीजेपी जब सत्ता में नहीं थी तब यह बात उठाए जा रहा था
35:49जब भी आमबानी की चर्चा होती है तो धीरू भाई आमबानी का उदे किस शासन का लेकर बाते हुई हैं
35:57बहुत सारे जो पूर्व कांग्रेस शरद पवार है
36:00उनके सभी उद्योगपतियों से अच्छे रिष्टे हैं तो यह एक अलग बात है और जब बीजेपी की सरकारे आएंगी तब
36:07कांग्रेस या फिर जो वामपंथी पार्टिया हैं उन पर आरोप लगाएंगी उद्योगपतियों से मिलकर देश की संशाधन के लूट का
36:15भारत
36:16जैसे विशाल जनसंख्या वाला देश विशाल और डाइवर्सिफाइट जोगरफी वाला देश केवल एक विचार धारा से या केवल एक ओरियेंटेशन
36:27से नहीं चल सकता है यहां पर पुन्जी वाद भी चाहिए अगर देश में निजी उद्योग नहीं रहेंगे तो बेर
36:46लेकिन अगर हम फिर उसी रास्ते पर रहें हम अगर इंडस्री अलाइजेसन के विरोध में ही रहें चाहिए किसी की
36:51वी सरकार हो तो मुश्किलें और बढ़ेंगी ही तो यहां पर एक संतुलित द्रिश्रीकॉन चाहिए जिसमें एक जो इंक्लूसिव ग्रोथ
37:01कहते हैं उसक
37:16के फास्ट क्वाटर में उसमें भी गीग एकॉनोमी का ही योगदान लग रहा है वरना जो जाइंट्स हैं वो तो
37:23फिसल रहे हैं तो गीग एकॉनोमी का अपना रोल होता है अब यह बात डिवेटेवल हो सकती है कि बीए
37:29के सिल्वस में वो होना चाहिए नहीं होना चाहिए �
37:32विट अल्डू रिस्पेक्ट सर बिल्कुल आखरी सवाल को लेकर आगे बढ़ते हैं फिर से हम अपने मूल विशे की ओर
37:40लोड़ते हैं विजे जी के पास सलते हैं विजे सर दक्षुर भारत पर हम बात कर रहते शुरुआत में बहुत
37:47सारे जिगस नेता हुए हैं दक्षु
38:03दक्षुर भारत में परदहान मंत्री बनने वाले नेताओं की भी काफी चर्चा रही है जिनके अंदर चाहत रही है जैसे
38:09हमने देखा था लगातार दो बार तिलंगाना जीतने के बाद केसी यार ने अपनी पार्टी का नाम बदल लिया तिलंगाना
38:15राष्ट समीती से भार
38:2910-15-20 साल में दक्षुर भारत के किसी राज से भी परदहान मंत्री बनने की संभावना आपको लग रही
38:36है कोई छेत्रिय दल हो या राष्टिय दल या किसी नेता को लेकर
38:41देखिए अभी जो जो राजनीती मैं सुनसता हूं कि हम अगले चुनाओ या उसके बाद क्या हो सकता हूं वही
38:50देख सकते हैं उसके बाद यानि यूंट्विंटिनेंग के बाद जो अगला इलेक्शन होगा 34 में उसमें कौन नेता होंगा यह
38:59कहना आज के जमाने में बहुत
39:00मुश्किल है लेकिन सिद्धांतिक रूप से चाहे यदि वो व्यक्ति भारत की लिजिटमेट राजनीती का हिस्सा है भारती समविधान में
39:11आसा रखता है भारत के आदर्शों के प्रती समर्पित है और देश को आगे बढ़ाने के लिए कृत्वसंकल्प है तो
39:17उस हर व्यक
39:30एक शित्रीय नेता थे एक मुख्राज के छोटे से राज के मुख्यमंत्री थे जो बहुत बड़ा राज्य भी नहीं था
39:35वहां से किस तरह से उन्होंने अपने आपको मोल्ड किया और कितनी तेजी से मोल्ड किया जब देखा यह तो
39:45करी को युद्ध हो चुका था कि मन महु
39:59मुख्यल और आपको याद होगा कि अडवानी जी ने तो विरोध किया था इनका बीजेबी के अंदर ही इनका विरोध
40:04था और युद्ध है अडवानी जी के नेतुत में 2014 का इलेक्शन लड़ा गया होता तो मुझे इस बात का
40:11आज भी शायद मैं नहीं कर सकता था कि वो जि
40:28को नेत्रत प्रदान करने की वो इस संभवत तो उनमें नहीं थी क्योंकि वो पुरानी पीड़ी के नेता थे और
40:34नरेंद्र मोदी ने उस बात को समझा और बहुत तेजी के साथ अपने आपको ड्रमेटिकली ट्रांसफर्म किया और भारत की
40:42आकांक्शाओं के अनूप उन्ह
40:58का फाइदा उठा करके उसके विरुद्ध उसके खिलाफ एक आल्टरनेटिव विजन दे सके एक एक वैकल्पिक विचारधारा दे सके देश
41:09की एक वैकल्पिक परिकल्पना प्रस्तुत कर सके ऐसा नेता कौन हो सकता है तो कम से कम यह जो पीड़ी
41:16है इसमें चाहे उदैनि�
41:28कि इस पीड़ी के पास वो पुलिटिकल एडेप्टिबिलिटी और राजनितिक समझ और बौधिक दूदर्श्ता कम से कम इन नेत्रतों से
41:38तो मुझे नहीं लगता है इसके बाद अगला नेत्रतों क्या होगा कॉंग्रेस पार्टी में तो हम बिल्कुल गोग एक तरसे
41:45घो�
41:55सब्सक्राइब करके राजनिति और बड़ी मजदार सीजी है ये बात सतर के दर्शक में अमरीकी राइटर लिख रहा है अपने
42:05किताब में इंद्रे गांदी डिटर्मिंट नॉट भी हर्ट करके उनका एक आर्टिकल है उन्होंने लिखाता कि यदी नहरू अब दिकिस
42:13तरह
42:13से राजनिति नहीं बदली है वो लिखता है कि यदि नहरू जी आज किसी वजह से राजनितिक पटल से हट
42:22जाएं तो भय से घवराय हुए कॉंग्रेसी उनकी पुत्री के चाहसपास सिकत्ते हो जाएंगे यह बात उन्होंने सिक्स्टीज में लिखी
42:30ती इसी तरह से एक और
42:31मुरी की लेकर लिखा यदि इंदिरा गांधी कहीं हट जाएं राजनितिक पटल से तब तब तब तो आसम में से
42:38लेकर के बहुत जगए मेरिटेंसी चल रही थी तो फिर वही लेकर के लिखता है करीब 15-20 वर्ष बाद
42:44कि भैसे घपरा हुए कॉंग्रेसी उनके बेटे के आ
43:011927 में 26 में कि मैं जब कॉंग्रेस पद से हटू मेरे बाद जमारा नेहरू को यह दिया जाए बाकरदा
43:08पब्लिश कोर्स्वंडेंस है और नेहरू जी के मन में भी थी बाकरदा कॉंग्रेस का ध्यक्शन उनने इंद्रा गांधी को बनाया
43:15तो इस परिवार में तो बिलकुल �
43:18भोशत रूप से यह कहना चाहिए परिपाटी है यह परमपरा है कि मेरे बाद मेरे देखे ना इंद्रा गांधी टूटे
43:26होई थी संजय गांधी की मृत्यू के बाद इंद्रा गांधी इतनी शोका कुल थी उससे में कोई सोच नहीं सकता
43:31था और मेरे इंटर्विव में में �
43:35इंटर्विव मैंने जवाला नहरू पर एक डॉक्यमेंटरी की थी 1990s में उसमें विजय रक्षी पंडित का इंटर्विव मैंने उनके घर
43:42जाकर कि देखादून में किया था उन्होंने कहा कि आगर कि सोनिया जी रोती थी कि इंद्रा मेरे राजीव को
43:49पॉलिटिक्स में ला
44:05लेकिन जब मुश्किल और चुनोती की घड़ी आए तो राजीव गांदी एक के बाद एक गलतिया करते के मुझे नहीं
44:11लगता कि उन्होंने खुद रिश्वत लीती बॉफर से मामले में लेकिन वह अपने मित्रों को बचाने की शक्कर में अपनी
44:16कुर्सी गामा बैठे और
44:36राजनीत की रूप से कुशन विक्ती जब तक नहीं आएगा तब तक विपक्ष की राजलीती शाली इसी धुन मुल ढटने
44:42पर चलती रहेगी और नरिंद्र वोदी को एक के बाद एक कोवर देती रहेगी कम से का अभी यह जो
44:48अगले चुनाव का परितरश है में उससे आग
45:05पार्तियों ने जनसंख्या पर उतना नियंत्र नहीं रखा जितना हमने रखा हमके सीटे बढ़ जाएंगी हमारा और घट जाएगा ऐसे
45:12में दक्षिर भारत की राजनीती अभी आपको ऐसा दिखता है कि वहां से में भविश में परधान मंतरी मिल जाए
45:18या नहीं और जैसा
45:34चार में राहुल गांधी चुना जीत चुके थे अमेठी से और प्रधान मंतरी बनाना चाहती सोनिया गांधी तो यह तो
45:41खुद बन सकती थी राहुल गांधी को बना सकती थी लेकिन उहां पर उन्हें नहींने मन महुल सिंग को चुना
46:04कांग्रेस पार्टी ऐसा नहीं है कि इससे पहले उन्होंने लोच नहीं दिखाया है अब सवाल यह है कि कांग्रेस में
46:15अभी जो राहूल गांधी का कद है
46:17कोट अनकोट वो खडगे साहब भले ही प्रेसिडेंट हैं लेकिन नेता राहूल गांधी है उनसे बड़ा नेता राहूल गांधी में
46:27इस वक्त नहीं है माफ करें कांग्रेस में नहीं है राहूल गांधी से बड़ा नेता और जो भी विकल्प हो
46:34सकते थे प्राया वो कांग्रे
47:16और कांग्रेस पार्टि में कोई भी इस लाइन को मिटाने की कोशिश करता हूए
47:23सुईकार कर लेना चाहिए और देखिए क्षत्रप की बात नहीं है उसी शत्रप को भी सुईकार किया जाएगा जिसे गान्दी
47:32परिवार सुईकार करेंगे मनमोहनprogram को कांग्रेस में सुईकार था गान्दी परदानमंत्री के तोर पे जब उनका चैन हुआ है सब
47:41नके साथ ख�
47:52अगर आप विद्वता में देखते हैं वाकपटुता में देखते हैं तो शशी थरूर और खरगे जी की कोई मुझे नहीं
48:01लगता है कि तुलना हो सकती है जिस पैरमिटर्स की बात मैंने कि उस पे लेकिन गांधी पडिवार अगर खरगे
48:10जी के पीशे खळाता तो जीत भी उन
48:21और यही विद्रोह कारण बनते हैं अगर शरत पवार अलग हुए थे तो मुद्दा उन्होंने विदेशी मूल का उठाया था
48:29लेकिन विदेशी मूल का कौन था गांधी परिवार के सोन्य गांधी थी तो यह चलता आ रहा है चलता रहेगा
48:36दो हजार उन्तिस में भी यह बदल
48:38लने वाला नहीं है आप चाहे राहूल गांधी को वन्सवाद की उपजमाने या जो भी कहें लेकिन इस वक्त कांग्रेस
48:46में सबसे बड़े नेता वो हैं यह क्वाइट एक्सेप्टेवल है कांग्रेस में आप इसको कैसे लेते हैं यह आप पर
48:53निर्फत करता है और इससे का
48:56भाबना मुझे नहीं लगता है कि बहुत ज्यादा खराब होगी जो कांग्रेस के मत दाता है या कांग्रेस की विचारधारा
49:01को समझते हैं उनके लिए इस इस और वन्सवाद की अगर नई व्याख्या की जै तो सारी पार्टियों में यह
49:10है अब राजनात सिंग जब लखनो
49:12का चुनाव छोडएंगे तो हां से पंकत सिंग लडएंगे अइसा ही होता रहा है है चुकि कांग्रेस सबसे पूरानी पार्टी
49:20है तो उसमेंं वन्सवाद की पर्फापी सबसे पूरानी है भालते जनता पार्टी में उनिस
49:39देखिए यही बात है 2007 में जनेश्वर मिश्रा समाजबादी पार्टी के बड़े नेता थे छोटे लोहिया के रूप में जाने
49:47जाते तो उनसे एक सवाल किया गया था कि अखलेश जब मुलायम सिंग के साथ आते हैं तो वो परिवारबाद
49:53नहीं होता है लेकिन जब राहूल �
49:55गांधी कांग्रेस में आगे आते हैं तो परिवारबाद कैसे हो जाता है तो उन्होंने बड़ी अच्छी व्याख्या दी कांग्रेस का
50:01परिवारबाद जो है वो सकता का परिवारबाद है और समाजबादी पार्टी का परिवारबाद संगर्ष का परिवारबाद है तो पर
50:21राजीव गांधी राहूल गांधी प्रियंका गांधी पर सवाल उठते रहेंगे और प्रजातंत्र की यही खोगशूरती है सिक्का जिधर भी उठले
50:30वो साइड हमेशा पॉलिटिक्स में हमारा होता है दक्षिन भारती राजनीटी के वहविश्ट आप कैसे देख रहे हैं द
50:50से हटकर पॉलिटिकल सॉल्यूशन देने वालों की तरफ देख रही है मैं अगर दिल्ली में आमादी पार्टी की जीत को
50:58देखता हूं तमिलाड में विजय की जीत को देखता हूं पंजाब में आमादी पार्टी की जीत को देखता हूं या
51:07फिर बंगाल में भी भरते जंता
51:09पाटी की जीत को दिखता हूँ तो मतदाताओं को जहां पर जितने नए विकल्प मिल रहे हैं उस तरफ उनका
51:17रुजान बढ़ता हुआ
51:18दिख रहा है और खासकर विजय की जीत के बाद जिस तरह की
51:22politics उन्होंने उहां पर की है जिस तरह से politics का
51:27मतलब है जो शाषन पद्धती उन्होंने अपनाई है इसकी
51:31काफी प्रसंसा देश भर में हो रही है लोग विजय की बाते
51:34करने लगे है अनराजियों में भी तो मुझे लगता है
51:37दक्षिन से एक role model निकला है और यह तमाम जगों पर
51:42replicate किया जाएगा वैसे भी जन्जी आंदोलन का समय है
51:47दुनिया भर में भारत की राजनीत भी जन्जी की राह देख रहा है
51:52मुझे इसा लगता है
52:04झाल
52:04झाल
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