00:13अगस्त 2026 में रिलीज फिल्म हनुमान अंस ने नीम करोली बाबा की कहानी को एक पर फिल्प चर्चा मिला दिया
00:20है
00:20फिल्म बाबा के जीवन और भगवान हनुमान के प्रती उनकी कहरी भक्ती पर वेस्ट है
00:26इस पर फिल्म की लोग रहता के साथ ही एक सवाल भी तेजी से पूछा जा रहा है
00:30कि आखिर बाबा के भगतों में कौन-कौन शामिल थे
00:34जिसमें दुनिया की बड़े कारुबारी, हॉलिगूड स्टार्स, प्रिकेटर्स और यहां तक की आध्यात्मी गुरु तक शामिल है
00:55निंकरोली बाबा के भगतोंने क्या से महराजी कहते थे
00:58बाबा का संदेश साथ था
01:01प्रेम करो, सेवा करो और जरूरत मंदों को भुजब करा
01:04बाबा की यह साथ भी देशी नहीं विदेशों तक लोगों को आगरसित करती रही
01:10आए जानते हैं बाबा के 15 चर्चित पंतों के नाम
01:15रामदास 1967
01:17अमेरिकी मनोवैज्यानिक रिचर्ड अलपर्ट जिने बाद में रामदास की नाम से जाना गया
01:221967 में भारत आये
01:24इसी दोरान उनकी मुलाकात नेम करोली बाबा से हुई
01:28यह मुलाकात उनकी जीवन का बड़ा मोड मानी जाती है
01:31बाद में उनकी किताब We Here Now ने पश्यमी दुनिया में बाबा और भारती आध्यात्निक परंपरा को काफी प्रसिद किया
01:39रामदास की अनुसार वे नवंबर 1967 से मार्च 1968 तक भारत में रहे
01:50भगवानदास 1965 अमेरिकी साधक भगवानदास ने 1965 में नीम करोली बाबा से मुलाकात की थी
01:58वे कई साल तक बाबा के साथ रहे
02:00बाद में उन्होंने अपनी आध्यात्मी क्यात्रा और बाबा के अनुभवों को दुनिया के सामने रखा
02:11कृष्णदास अगस्त 1970 मशरूर अमिर की कीर्टन गायत कृष्णदास अगस्त 1970 में भारत पहुँचे
02:19और कुमायों की पहाडियों में नीम करोली बाबा से मिले
02:22वे करीब तीन साल तक बाबा की संगती में रहे
02:26और भक्ती वकिर्टन को अपनी जिन्दगी का प्रमुख हिस्सा बनाया
02:36संगितकार जै उतल ने खुद लिखा
02:381971 में नीम करोली बाबा से उनकी मुलाकात होई
02:42इस मुलाकात ने उनकी जिन्दगी की दिशा बदल दी
02:49रामेश्वर दास 1970-72 जिम लिटन जिन्ने बाद में रामेश्वर दास के नाम से जाना गया
02:561970-1972 की बीच भारत में रहे और नीम करोली बाबा के संपर्क में आये
03:02बाद में उन्होंने राम दास के साथ मिलकर बाबा से जुड़ी कई किताबों पर काम किया
03:11लेरी ब्रिल्यंट 1970 के दसक की सुरुआत
03:15अमेरिकी डॉक्टर और सामाजिक कारेकरता डॉक्टर लेरी ब्रिल्यंट और उनकी पत्नी गिरिजा भी बाबा के प्रमुख भक्तों में गिने जाते
03:24हैं
03:24ब्रिलियंट कुछ समय भारत में बाबा के साथ रहे
03:27बाबा ने उन्हें चेचक उन्मुलन के काम की और जाने के लिए प्रेरित किया था
03:36दैनी गोल्डमेन करीब 1970
03:39इमोशनल इंटेलिजन्स से जोड़े मनोवाग्यानिक लेखक
03:42डैनी गोल्डमेन भी उन सुरुवाती पश्चमी लोगों में थे जो महराजी के संपर्क में आए
03:48कृष्णदास ने उन्हें उन लोगों में बताया है जो सुरुवाती दौर में बाबा से मिले थे
03:58लामा सुरेदास 1972
04:01जेफ्री मिलर जिने बाद में लामा सुर्यदास के नाम से जाना गया भारत में आध्यात्मिक खोज के दौरान बाबा के
04:08संपर्क में आए
04:091972 में नीम करोली बाबा ने उन्हें सुर्यदास नाम दिया था
04:17मा जया सती भगवती
04:19अमेरिकी आध्यात्मिक गुरू मा जया सती भगवती नीम करोली बाबा की भगत थी
04:24उन्होंने 1976 में अमेरिका में कासी आश्रम की स्थापना की और बाबा के संदेश को आगे बढ़ाया
04:35डैनियल गोल्मेन
04:36इमोस्नल इंटेलिजन्स के लेखक डैनियल गोल्मेन का नाम भी नीम करोली बाबा से जुड़े प्रमुख पश्चिमी भगतों में मिलता है
04:48हॉलिवूड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स नीम करोली बाबा से काफी प्रभावित हैं
04:53उन्होंने एक तस्वीर के जरिये बाबा के बारे में जाना और बाद में कैची धाम से उनका जुड़ा हुआ
04:58वे आस्रम में एक से ज़्यादा बार आ चुकी है
05:04स्टीव जॉब्स
05:051974 यह नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में रहता है लेकिन यहां एक बड़ा फैक्ट भी है
05:11स्टीव जॉब्स बाबा से कभी नहीं मिले
05:14वे 1974 में आध्यात्मी खोज में भारत आये और नीम करोली बाबा से मिलने की इच्छा लेकर कैची धाम पहुँचे
05:21वहां उन्हें पता चला की वावा 1973 में महासमाधी ले चुके हैं
05:29मार्क जुगरबर्ग
05:301915 फेस्बुक के संस्थापक मार्क जुगरबर्ग ने 2015 में कैची धाम का दोरा किया
05:37यह यात्रा उन्होंने उस दोर में की जब फेस्बुक मुस्किल दोर से गुजर रहा था
05:42रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें भारत और कैची धाम जाने की सला स्टीब जॉब्स ने दी थी
05:51विराट कोहली 4 जनवरी 2023
05:54क्रिकेटर विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का सर्मा और बेटी वामिका के साथ
06:12चार जनवरी 2023 को विराट कोहली के साथ अनुष्का सर्मा भी उसी दिन वरिनदावन इस्थित बाबा के आश्रम पहँची थी
06:20दोनों ने वहाँ प्रातना की और जरूरत मंदों को कमबल भी बाटे
06:28क्याची धाम क्यों इतना खास है नीम करोली बाबा ने उत्राखंड के कुमायू छेत्र में क्याची धाम को अपनी प्रमुख
06:35अध्यात्मिक स्थली बनाया
06:37बाबा का जोर किसी कठिन दर्शन या बड़े भाशन पर नहीं था उनके संदेश में प्रेम, सेवा, भक्ती और जरूरत
06:45मंदों की मदद सबसे उपर थी
06:47यही वज़ा है उनके जाने के दशकों बाद भी कैसी धाम में डेश विदेश से लोग उँचते हैं
06:54और शायद यही हनुमान अंश की चर्चा की सबसे बड़ी वज़ा भी है एक ऐसे संद की कहानी जिनका प्रभाव
07:02उनके जीवन काल से कहीं आगे तक पहुचा
07:31झाल
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