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  • 7 weeks ago
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Animals
Transcript
00:05यह कहानिया केवल मनोरणजन के लिए बनाई गई है।
00:09इनका किसी भी धर्म, जाती या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।
00:14कृप्या इन्हे एक कालपनिक कहानी के रूप में देखे।
00:18Aad se kahi saal pehle
00:20Bharat oor Myanmar ki sima per fayalek
00:23Ghani or sunsayan janglou ke bie
00:26Koniyag janjati ke eek kraachin basti besi hoi thi
00:29Jou apne rahas se maayi riti rivazo
00:32Or gubta nusthano ke liye jane jati thi
00:35Kaha jata tha ki wè prakriti
00:38Or adreshya saktyon se sambad karne me vishwaas raki thi
00:41Logun ki bieca ye bhi mannyata thi
00:44There was no time to go, that they could go into the distance.
00:49It was a long way to go.
00:54It was a long time,
00:55which was the person who was going to be in a way.
00:57The person who was in the forest was constantly moving forward.
01:00It was a long time and was there.
01:07And there was no time to go.
01:12There was no time to go.
01:13It was a bad thing, but it was a bad thing.
01:18It was a bad thing.
01:20It was a bad thing,
01:21like in the middle of the night,
01:23and every other day,
01:27it was a bad thing.
01:31This is a bad thing.
01:36Oh
01:37Oh
01:37Oh
01:37Oh
02:03Oh
02:04Oh
02:04Oh
02:04Oh
02:04Oh
02:04.
02:06.
02:07.
02:07there is no answer
02:07I will come in one day
02:09when I was built
02:11I would come in a bus
02:13and if I could
02:16I was going to come in a bus
02:16since the last night
02:17and his face was
02:19he would come in
02:20I was able to drive
02:24and see you
02:24see you
02:25has a
02:25a
02:25a
02:26a
02:27a
02:28a
02:30a
02:31a
02:35Mira, Mira, save you
02:37Viraat, what happened?
02:40Mira, the doorbell was closed, but no one didn't come in the middle
02:46Viraat, the doorbell open, Viraat
02:49Viraat
02:49It was before that Mira, the doorbell was closed, but the doorbell was closed
02:55Mira, the eyes opened the door, so in the middle of Viraat, the way he was closed
03:04Mira, the doorbell was closed, but the doorbell was closed, so in the middle of Viraat
03:58Viraat
04:27Mr. Viraat
04:57Viraat
05:25Viraat
05:55Viraat
06:24Viraat
06:53Viraat
06:54Viraat
06:59Viraat
07:22Viraat
07:41Viraat
07:53Viraat
08:07Viraat
08:36Viraat
08:37Viraat
08:40Viraat
09:06Viraat
09:36Viraat
09:41Viraat
09:42Viraat
10:03Viraat
10:21Viraat
10:33Viraat
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10:35Viraat
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11:02Viraat
11:12Viraat
11:13Viraat
11:32Viraat
11:48Viraat
12:01Viraat
12:16Viraat
12:17Viraat
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12:20Viraat
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12:23Viraat
12:24Viraat
12:25Viraat
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12:27Viraat
12:28Viraat
12:29Viraat
12:31Viraat
12:32Viraat
12:32Viraat
12:32Viraat
12:32Viraat
12:32जिसने ये तंत्र करवाया है
12:34फिर चाहे कोई तेरा अपना ही क्यों ना हो
12:37वो जिन्दा नहीं बचवाएगा
12:39तुम्हें कोई आपत्ती तो नहीं है
12:42जो इनसान मेरा या किसी और का बुरा सोच सकता है
12:45वो अपने अंजाम का खुद जिम्मेदार है
12:48इसे देवी मा के चड़नों में चड़ा दीजिए
12:50अब देवी मा ही उनका हिसाब पूरा करेंगी
12:53विराट के इतना कहते ही
12:55कबिले के सरदार ने कड़े को दोनों हाथों में उठाया
12:59आँखे बंद की
13:01और धीमे धीमे मंत्र पढ़ने लगा
13:04फिर उसने एक आटे का गुड़ा उठाकर
13:07उसके माथे पर काले रंग का टीका लगाया
13:10और उसमें सुईयां चुभो दी
13:13इसके बाद उसने गुड़े के हाथ पैर बेरहमी से मरोड दिये
13:17और गुड़े को चीटियों की बीच रख दिया
13:21इसके बाद जैसे ही उसकड़े को देवी मा के चर्णों में रखा गया
13:26अचानक एक तेज ज्छोंका उठा
13:29आग की लौग काँबी
13:33मारन लिध्या पलट कर अपने असली मालिक की और लाट गया
13:38देवी मा की कृपा तुम पर हो चुकी है
13:40अब तुम उस मौत के साय से मुक्त हो
13:44बताओ
13:44क्या अब भी तुम्हें कोई साया नसर आ रहा है
13:47नहीं नहीं
13:49वो चला गया
13:50पहली बार मुझे अपने आसपास सिर्फ सन्नाटा महसूस हो रहा है
13:55जैसे कोई भारी अंधेरा मुझसे दूर हो गया हो
13:58अगले दिन लोटने से पहले
14:00विराट कबिले के सरदार के पास आया
14:02उसके मन में कहीं सवाल अभी भी बाकी थे
14:06अपका बहुत बहुत शुक्रिया बाबा
14:09मगर मुझे अब भी समझ में नहीं आया
14:12ये सब मेरे साथ किस ने किया था
14:14मुझे कैसे पता चलेगा
14:16फिक्र मत करो, घर पहुचते ही तुम्हें सब समझ में आ जाएगा
14:21जाओ, अगोरा मा तुम्हारे साथ है
14:24इसके बाद विराड सभी से विदा लेकर वहां से निकल गया
14:30सफर के दौर उसके दिमाग में बार बार कविले के सरदार की कही बात गुंज रही थी
14:36आखिर कौन हो सकता है, जो मेरा बुरा चाहता है, और क्यों, मैंने तो आज तक किसी के साथ कोई
14:44बुरा काम नहीं किया है
14:46विराड जैसे ही अपने घर पहुँचा
14:48सामने का नजारा देख कर वो सन्न रह गया
14:52मीरा और बलराज जमिन पर अद्मरी हालत में पड़े थे
14:56उनका शरीर सड़कर गलने लगा था
14:59और दोनों दर्द से करा रहे थे
15:03यह मंजर देख
15:05विराड के पैरो तले जमीन खिसक गई
15:09मीरा बलराज तुम दोनों यही और यह तुम्हारे शरीर को क्या हुआ है
15:16बलराज ने कराते हुए कुछ कहना चाहा
15:19मगर उसकी सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया
15:23लेकिन मीरा जो कि अभी भी जिन्दा थी
15:26उसने रोते हुए विराड से कहा
15:29विराड विराड यह उसी मारन क्रिया का नतीज है
15:34जो मैंने वह बलराज ने मिलकर तुम्हारे उपर की थी
15:38उस दिन पाठी में जो कड़ा बलराज ने तुम्हें दिया था
15:43उसी पर बलराज ने तंत्र करवाया था
15:47था कि उसका असर सीधे तुम्हारे बाद
15:52मैं और बलराज मिलकर इस प्रॉपर्टी को हड़ब सके
15:57मगर ना जाने कैसे
16:00हम पर करनी का असर उल्टा पड़ गया
16:03तुम्हारे जाने के बाद हम दोनों एक तांत्रिक के पास भी गए थे
16:07पर तक तक बहुत देर हो चुकी थी
16:09और हो सके तो
16:11आँ मैं माप कर दे ना फिराट
16:14इतना बोलते हुए मेरा ने भे तड़ब तड़ब कर दम तोड़ दिया
16:20अकसर लोग सोचते हैं कि बुराई का अंजाम सिरफ दूसरों को भुगतना पड़ेगा
16:24लेकिन नियती का अपना हिसाब होता है
16:27जो इनसान किसी निर्दोष के लिए गढ़धा खोदता है
16:31वो ये भूल जाता है
16:33कि एक दिन वही गढ़धा उसके लिए भी तयार हो सकता है
16:38लालच में अंधे बलराज और मीरा के साथ भी यही हुआ
16:42और वे खुद ही अपने बनाए हुए जाल में फस गए
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