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The Kingdom of Krishna | Janmashtami in Dwarka | Full Episode | हिंदी 🙏🦚✨
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00:06एक प्राचीन नगरी जो बसी है नदी और सागर के संगम पर
00:19यहां समुद्र में छुपे हैं रहस सदियों पुराने
00:28इस शहर में खड़ा है एक भव्य मंदिर
00:42जहां पूजे जाते हैं विश्रु के उतार
00:54यहां लहराता है आस्था का ध्वज
01:03क्योंकि यह है देवस्थान
01:11जहां रहते हैं श्रक्रिष्ट द्वारका के भगवान
01:19द्वारका धेश
01:33भारत विश्व की प्राचीमतम सभ्यताओं की भूमी
01:37इसके पश्चिमी तट पर लगभग 65,000 स्क्वेर किलोमेटर तक फैला
01:42गुजरात का सौराष्ट एक तरफ मरू भूमी दूसरी तरफ हर्याली और तीन तरफ अरब सागर
01:52यह वोक्षेत्र है जहां बसता है एक एतिहासिक शहर द्वारका
02:03गोमती नदी और अरब सागर के संगम पर बसी
02:08विश्वास और इतिहास को जोडती द्वारका
02:13आबादी पचास हजार से भी कम
02:17इस शहर ने अलग-अलग काल में अलग-अलग शासकों को देखा है
02:24गुप्त वंश से लेकर राजपूत, मराथा, मुगलों और अंग्रेजों तक
02:31द्वारका का सबसे पहला इतिहासिक उल्लेक
02:34गुजरात के भाव नगर में मिले छटी सदी के पालिताना कौपर प्लेट्स पर मिलता है
02:44पर शद्धालू के लिए ये हमेशा देवभूमी रहा है
02:49भारत के चार धामों में से एक, साथ सबसे पवित्र नगर, सब्थ पुरियों में से एक
02:54हिंदू धर्म गरंथों के अनुसार, इन सब्थ पुरियों का भगवान से कोई न कोई नाता रहा है
03:00और आज भी यहाँ उनका तेज महसूस होता है
03:04और द्वार का को तो इन गरंथों में मोक्ष का द्वार माना गया है
03:08इसे श्रिकृष्ट ने बसाया है
03:13भगवान विश्णु के आठमें अवतार, कृष्ण के कई नाम, कई रूप हैं
03:17और उनका हर रूप पूजा जाता है
03:22उनका जन्न तो हुआ मतुरा के कारागार में
03:24लेकिन उनके पिता वसुदेव ले गए उन्हें गोकुल, उनकी सुरक्षा के लिए
03:30जहां वो गाय चराते, माखन चुराते, राधा और गोपियों के साथ रास लीला रचाते बड़े हुए
03:36और फिर अपने मामा और मतुरा के कुरू राजा कंस का वत किया
03:43कंस के ससुर जरासंद के बार बार मतुरा पर आक्रमण करने के कारण
03:47वो सारी प्रजा को लेकर सौरास्ट रा गए और द्वारका बसाई
03:53महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सार्थि और मार्ग दर्खशक बन
03:56उन्होंने गीता का ग्यान कर्म का सिध्धान्त दुनिया को दिया
04:02कृष्ण की ये कहानी पूर्वी भारत को पश्च्मी भारत से जोड़ती है
04:06जो द्वारका के सिरी कृष्ण है ये महाभारत वाली कृष्ण है
04:10ये वो कृष्ण है जो मतुरा छोड़ चुके है
04:13जरासन ने मतुरा को द्वंश किया है
04:16अठ्रा बार उसे अटैक करके डिस्ट्रॉय कर दिया है
04:18और फिर स्थी कृष्ण घर छोड़ के पस्चिम के दिशा में
04:22मरूभूमी के उस तरफ एक द्वीप में घर बनाते हैं
04:25जिसे हम द्वारका कहते हैं
04:27कहते हैं द्वारका बसाने के लिए
04:29कृष्ण ने समुद्र देव से जमीन ली
04:31और देवताओं के आर्किटेक्ट विश्वकर्मा से रातो रात
04:35द्वारका का निर्माण करवाया
04:39विशाल दीवारों से घिरी ये सोने की नगरी
04:42वास्तु कला की बहतरी मिसाल थी
05:11कहानी के अनुसार गांधारी के इस श्राप के
05:1436 साल बाद विशाल लहरों ने द्वारका को नश्ट कर
05:18समुद्र में मिला दिया
05:20हर्यवश पुराण के अनुसार क्रिश्न द्वारका नगरी के विनाश से पहले ही
05:24द्वारका छोड़ गये थे
05:25इसके कुछ समय बाद वो मृत्यू लोग छोड़ कर
05:28अपने परमधाम बैकूंट चले गए
05:33विक्सित प्राचीन सभ्यताओं के समुद्र में विलीन होने की कहानियां
05:37बाइबल और ग्रीक कथाओं में भी मिलती है
05:421989 में हुई एक आर्खेलोजिकल खोज ने
05:45लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया
05:48कि इन कहानियों में कहीं कोई इतिहास तु नहीं चुपा
05:51क्या द्वारका के होने का वाकई कोई आतिहासिक सपूत था
05:59आर्खेलोजिस्ट डॉक्टर ऐसा राव और उनकी टीम इस तथे के प्रमाद ढूनने लग दो
06:19खोज की शुरुआत हुई द्वारका में मिले नौवी सदी के एक विश्रु मंदिर के औश्यशों से
06:35यह खोज बढ़ते बढ़ते अरब सागर के अंदर तक पहुँच गई
06:40इन खोजों में पुरानी इमारतों के अवशेश
06:44गहने और बरतनों के टुकडे
06:47पुराने लंगर और सील्स मिली
06:52आज माना जाता है कि मोहन जोदारों और लोथल जैसे प्राचीन शहरों की तरह ही
06:56द्वारका भी हडपा या सिंधु घाटी की विख्सित सभ्यता का हिस्सा थी
07:02दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक हडपा
07:05आज के पाकिस्तान के हिस्सों से लेकर
07:07गुजरात और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई थी
07:10एक बात तो स्पष्ट थी
07:13कि हजारों साल पहले भी
07:15हडपा सभ्यता विश्य के अन्य हिस्सों से ब्यापार कर रही थी
07:19कहा जाता है
07:20सौराष्ट का लोथल दुनिया के सबसे पुराने बंदरगाहों में से एक था
07:24सिंदु घाटि सभ्यता की सीप्यों के गहने और सील्स
07:27इराग के मेसोपटामिया के अलावा
07:29बाहरेन और ओमान में भी मिले
07:35पुराणों के अनुसार श्रकृष्ट ने भी अपने राज्य के सभी नागरिकों को पहचान के लिए सील्स दी थी
07:40इन सील्स के अलावा द्वारका से करीब 33 किलमेटर दूर एक ध्वीब
07:45बेट द्वारका के पास 560 मीटर लंबी एक दिवार मिली है
07:50जिसकी बनावट महाभारत के द्वारका विवरण से मिलती है
07:54महाभारत के हिसाब से दिवारों में 50 बुर्ज थे
07:58आर्खियोलोजिस्ट को करीब 30 बुर्ज मिल चुके थे
08:03द्वारका के अवशेश हडपा काल के अंतिन दिनों
08:07यानि 4000 से 3500 साल पुराने है
08:12इतिहासकारों के हिसाब से महाभारत का काल भी यही था
08:37कृष्ण की डूबी हुई द्वारका की एक और कहानी
08:402001 में सामने आई
08:42गुजरात के खंबाट की खाड़ी में हुई पुरातत्व की खोज के द्वारा
08:47हाला कि यहां मिले आउशेशों का
08:509000 से लेके 13000 साल पुराने होने का अनुमान लगाया गया है
08:54कुछ विशशग्यों का मानना है कि यह आउशेश
08:58अपने साइज और बनावट की वज़ा से द्वारका नगरी के हो सकते हैं
09:02सालों साल चली इन खोजों से अलग-अलग मिशकर्श निकाले गए
09:06पर द्वारका का असली रहस से शायद संबुत्र के अंदर ही रह गया है
09:17भगवान की बाते विश्वास से जुड़ी होती है
09:19वैग्यानिक तरीके से आप भगवान के बारे में कुछ नहीं बता सकते
09:22लेकिन लोगों का माननेता है कि विज्वान से भी हमें भगवान की खोज हो सकती है
09:26ये विश्वास की बात है
09:33द्वारका ओखा मुंडल का हिस्सा है
09:36यहां समुद्र के तटों का कटना, भुकम और तेज समुद्री हवाएं बड़ी आम बात है
09:42इसी वज़ा से द्वारका की इमारते काली और कमजोर पड़ जाती है
09:46पर यहां विश्वास और आस्था कभी कमजोर नहीं पड़ते
09:52द्वारका वासियों के लिए आज भी उनके रक्षक भगवान कृष्ण है
09:57और उनका मानना है कि द्वारका अधिश के रूप में वो आज भी यहां बसते हैं
10:15कृष्ण के चाहने वाले हर युग में हर उम्र के मिलते है
10:33ब्रामण परिवार में जन्मी जील ने सिविल इंजिनेरिंग की पढ़ाई की है
10:49जील जैसे द्वारका वासियों के सामाजिक और अध्यात्पिक जीवन का केंद्र है
10:54ये भव्य द्वारका धीश मंदिर
11:00ये जगत मंदिर और त्रलोक सुंदर के नाम से भी जाना जाता है
11:04ये द्वारका की बाकी सभी इमारतों से उचा उठता है
11:09यू तो इस मंदिर की स्थापना की कोई एतिहासिक तिति नहीं मिली है
11:13पर प्रमाणों के अनुसार हजारों सालों में
11:16मंदिर ने कई आक्रमन और पुनर निर्माण देखी
11:22आठवी सदी के महान विद्वान आदिगुरु शंकराचारे ने इसका पुनर निर्माण करवाया
11:28उसके बार इसकी देख रेक राजपूतों ने की
11:31पंद्रहवी शताब्दी में महमूद बेगड़ा ने इसे तोड़ दिया
11:361877 में अंग्रेजी हुकूमत के तहर इसे बड़ी हानी पहुँची
11:40पर 1861 में अंग्रेजों ने गायकवाड़ों के साथ इसकी मरम्मत भी करवाई
11:471960 में इस मंदिर को द्वारकाधीश टेंपल एड्मिनिस्ट्रेटिफ कमीटी को सौप दिया गया
11:53पर कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कृष्ण के परपोते वज्रनाप ने करवाया था
12:01ग्रनाइट और सैंड स्टोन से बना ये प्राचीन मंदिर नागरा वास्थु कला शैली का बेजोड उधारण है
12:07इसमें पांच मंजिलें और साथ स्तंब हैं इसका शिखर करीब 38 मीटर उचा है
12:18और मंदिर की दिवारों पर बनी हैं देवी देवता और पशुपक्ष्यों की कलाकृतिया इस भव्य राज्सी मंदिर के अंदर विराचित
12:32द्वारकाधीश की प्रतिमा को द्वारकावासी किसी राजा की तरह ही पूछते हैं
12:44द्वारकाधीश मंदिर की अपनी दिन चर्या है सब कुछ समय अनुसार होता है
12:48जो मंदिर के देवता होते हैं उन्हें स्वरूप मना जाता है तो उन्हें मूर्ती नहीं मना जाता है
12:56जो मंदिर के देवता हैं उनको ऐसे ही ट्रीट किया जाएगा
12:58कुछ लोगों का मानना है कि मंदिरों के जो रिचुल्स है इसे लोगों को सीख मिलती थी
13:03कि देखो ऐसे उठना चाहिए, ऐसे खाना चाहिए
13:06हर रोज द्वारका धीश को 11 बार भोग लगाया जाता है और 4 बार उनकी आरती होती है
13:13सुबा मंगला आरती से द्वारका धीश को जगाया जाता है
13:16शरंगार आरती में सजाया जाता है
13:18दोपहर के विश्राम के बाद शाम को संध्या आरती होती है
13:22और रात में शैन आर्ती के बाद उन्हें सुलाय जाता है
13:32सुबह की मंगला आर्ती के बाद भगवान कृष्ण जाग गए हैं
13:36उन्हें दो भोग लग चुके हैं और उनके दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने लगी है
13:42द्वारका की गलियों में तुलसी माला बेचने वालों की भीड लगी है
13:45कृष्ण की पूजा में तुलसी का बड़ा महत्व है
13:49माना जाता है कि तुलसी कृष्ण की पत्नी होने के साथ साथ प्रेम का प्रतीक हैं
14:04साध्य नवबज रहें समय है द्वार का धीश के श्रिंगार का जिसमें उन्हें राजा की तर सजाए जाए गा भक्त
14:13बेसब्री से इंतिजार कर रहें इस क्षण का
14:19और आखिरकार खुल गए है पट द्वार का धीश अब उनके सामने है बद्रीनात में पिंडदान का महत्व है रामेश्वर
14:33में जल का महत्व है इसी तरह द्वार का में स्रिंगार का महत्व है राजा है राजा की तरह लाड़
14:43लडाना पड़ेगा
14:44द्वारका धीश का श्रिंगार बिभिन रंगों के रेशम के वस्त्रों, फूलों और रत्नों से किया जाता है
14:52आम तोर पर हर रो इस मंदिर में करीब दस हजार लोग आते हैं
14:57पर कृष्ण के जन मुच्सो, जन मास्त्मी पर ये संख्या बढ़कर डेड़ लाख हो जाती है
15:10द्वारका धीश की प्रतिमा की अनेकों कहानिया है
15:13एक कहानी ये सपश्ट करती है कि इस प्रतिमा की आँखें क्यूं अधूरी बनी है
15:23इस कथा के अनुसार ये प्रतिमा सावित्री बाव यानी कूए में मिली थी
15:30पंद्रवी शताब्दी में मुस्लिम आकरमनकारियों के डर से पंडितों ने इस प्रतिमा को कूए में छुपा दिया
15:35कहते हैं कई साल बाद कृष्ण एक ब्रामध के सपने में आये
15:39और मुर्ति को कुए से एक निर्धारित समय के बाद निकालने का आदेश दिया
15:43ये सुनते ही वो ब्रामध बेताब हो गए और उन्होंने मुर्ति को समय से पहले ही कुए से निकाल लिया
15:49इसलिए इस प्रतिमा की आखें पूरी तरह से बन नहीं पाई
15:53और आज भी आधी बंद दिखती है
16:00तब से काले पत्थर से बनी सवा दो फीट उची
16:02चतरभुज रूप की ये मूर्ति यहां स्थापित है
16:10चतरभुज रूप कृष्ण का सबसे भव्य रूप माना जाता है
16:14इस रूप में उनके चार हाथों में पद्म, गदा, शंक और चक्र होता है
16:24यहां के दर्शन का महिमा बहुत ज़्यादा
16:26जो कोई यात्री जाता है अभी भूत हो जाता है
16:29वो एकड़म चकाचोंद हो जाता है
16:50और इसी तरह द्वारकाधीश से जुड़ा है
16:53जील का जीवन
16:55आज द्वारकाधीश का राजभोग बनाने की बारी
16:58जील के परिवार की है
16:59दिन के बारबजे लगने वाला राजभोग
17:02द्वारकाधीश का मुख्य भोग है
17:04इसमें उन्हें रोटी, पूरी, चावल, सबजियां, मिठाईयां
17:09और नमकीन चड़ाया जाता है
17:16और जन्मास्टमी के दिन तो पच्चास से भी अधिक व्यंजन बनते हैं
17:20जिसे महाभोग कहा जाता है
17:25दोपहर के एक बज रहे हैं
17:29अब पट बंध होंगे
17:31भोग के पश्चास समय होता है द्वारकाधीश के विश्राम का, अनुसार का
17:48जील की तरह द्वारका शहर अपने इश्ट देव से जुड़ा है
17:55द्वारकाधीश जाकते हैं तो द्वारका जाकता है
17:58वो सोते हैं तो ये भी सोजाता है
18:09नए दौर में नई पीड़ी अपनी आस्था का माध्यम भी नया चुनती है
18:14भावना वही पर आस्था की राह नई
18:19द्वारका का एक युवा कलाकार हितेन कर रहा है तैयारी
18:24कुशी दिनों बाद आने वाली है जन्मास्ट में
18:35द्वारका कृष्ण भक्तों की नगरी है
18:37इसके गलियों में जहां श्रत धालू परंपरागत तरीके से उनके दर्शन के लिए आते हैं
18:43वहीं 26 साल के हितेन ने खुद को अपनी कला के जरिये कृष्ण से जोड़ा है
18:48मैं आर्टिस्ट हूँ
18:49केमरा स्मेंडिंग सब बनाता हूँ
18:52और ज़्यादा तर कृष्ण की बनाता हूँ
18:55साथ में मैं टेटो आर्टिस्ट भी हूँ
19:03मैं पहले भगवान को छोड़के उसको मैं दोस्त मानता हूँ
19:08कि वो मेरा दोस्त है
19:11कृष्ण ही तेन के दोस्त भी हैं और प्रिनणा भी
19:14और ये बात उनकी हर कलाकृती में दिखती है
19:19हम दोस्त क्यों बनाते हैं
19:21क्योंकि हर जगा वो हमारे साथ रहे
19:24कहां पता है अभी में किष्ण के साथ ही बात कर रहा हूँ
19:27या मेरे बाजू में ये से खड़ हैं
19:29यहां पी है यहां पी है
19:32जो भी मेरा जीवन है
19:33सांस भी ले रहा हूँ
19:35तो उसी की बदुलत है
19:43शाम के पाँच बच्चुके हैं
19:45समय है द्वारेकाधीश मंदिर में उत्थापन का
19:48द्वारेकाधीश के जागने का
19:53द्वारेकाधीश का मंदिर है
19:55यहां के दर्सन जो है बहुत प्रचलीते
19:58और जब शंक की दूप की अगनी की आरती जब सुरू होती है
20:05कि यात्री उस आरती में मोही तो हो जाता है
20:21गोमती नदी के किनारे बने इस मंदिर में आने के लिए दो प्रमक्तवार हैं
20:26मोख्य दौार यानि जन्म और मरन से मुक्ती पाने का दर्वाजा और स्वर्ख दौर
20:32स्वर्ख दौर तक आने के लिए चपन सीड़ीया है
20:35और ये द्वारका राज्य के बावन प्रशास्निक विभागों और श्रिक्रष्न के परिवार के चार सदस्यों को समर्पित है
21:09द्वारका में बावन प्रशासनिक विभागों की एहमियत का एक और बड़ा ही विशाल और भव्य प्रतीक है
21:15द्वारका धीश मंदिर के शिखर पर लहराता है ये बावन गज का ध्वज
21:22कहते हैं किसी भी मंदिर की ध्वजा उसकी शक्ती उसके यश की निशानी होती है
21:27पर लोग मानते हैं कि द्वार का धीश की ध्वजा मनुकामनाय पूरी करती है
21:37ध्वजा चड़ाने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों से कृष्ण भक्त यहां आते हैं
21:42इस हुसर के लिए उन्हें दो से पांस साल तक का इंतिजार करना पड़ता है
21:47जब मननत मानी जाती है कि भगवान से कुछ मांगते हैं जब वो पूर्ती होती है तब लोग ध्वजा लगाते
21:52हैं
21:53जो आपने कमाया है वो आप भगवान को इन क्रियाओं के माध्यम से देते हैं
21:58अब इन एकनोमिकली अगर हम देखें तो यह पूजा पाठ के माध्यम से जो धन होता है
22:02वो मंदिर के तरफ जाता है और मंदिर के माध्यम से और लोगों में जाता है
22:07जो टेलर है वो ध्वजा बनाता है
22:09सबको आपके धन का लाब मिलता है ध्वजा के माध्यम से
22:22द्वारिका धीश की ध्वजा बनाने का काम
22:241962 से एक परिवार करता आ रहा है
22:31मेरा नाम बरत भाई है
22:33हम सालों से यहां रहते है
22:35द्वजा सिने काम हम 62 से करते है तब से लेकर 30 साल तक मुफ्त बनाया हमने तजा
22:42कोई भी चाज ने लेका
22:45मेरा पीता जी ने सोचा कि यह लोग बाहर से आते थोड़ी से वा में भी कर सकता हूं
22:50इसलिए उसने पैसा ने लेता था
23:09आज द्वार का धीश को अपनी भक्ती अपने भावनाओं से मोहित करने आई है
23:14गुजरात के भाव नगर जिले से 400 औरतों की ये कीरतन मंडली
23:18ये महिलाएं पिछले 10 साल से जन्माश्टमी के उसर पर द्वारिका में आती है
23:23और दोजा चढ़ाने से पहले बड़ी धूम धाम से निकलती है इसकी शोभायात्रा
23:57जिस पल के लिए पूरे साल इन्होंने संजोई है अपनी आस था वो लमहा अवाने को है
24:03इस धुजा को मंदिर के शिर्ष पर लहराने का काम पिछले 7 पिर्यों से एक अबोटी ब्राम्हन परिवार कर रहा
24:10है
24:10हम लोग रोजाना पांच जंडा चरता है पारी पारी सब लोग भाई लोग जाते हैं
24:14पंद्रा साल का था था न में चोटा तब हमार दादा जी के साथ जा रहा था तब ही से
24:18मैं जा रहा हूँ
24:19मिनिमम पचीस-तीस साल के उपर हो गया
24:39द्वार कदीश हमारे इस देव है
24:41हमारी जान है
24:50त्रवेदी जी की आस्था इतनी अटूट है कि बिना सुरक्षा साधनों के
24:54वो द्वार का धीश के करीब 38 मीटर उचे शिखर पर दिन में कई बार धोजा लहराते हैं
25:14करें से डार का र�रे देव में है
25:24करें सतना थेव में आसे प्रवार करें
25:31प्रवार करें से देवर करें से
25:53मंदिर के अंदर द्वारका के नाथ और उनकी आठ पठरानिया है
25:57और जो ध्वजा जी है वो राधा का रूप है
26:02ध्वजा का रंग भले ही बदले पर इस पर बने चांद और सूरज नहीं बदलते
26:07मानना है कि जब तक ये रहेंगे तब तक शिरकृष्ण रहेंगे
26:11और रहेगी उनके प्रति लोगों की श्रद्धा, अनंत और अटूट
26:20द्वारका में कोई भक्ती में डूबा, प्रेम लिये आता है
26:23तो कोई अपने घर की खौहिश
26:25यहां अरब सागर के किनारे, जिसे जैसा घर चाहिए
26:29वो वैसा घर बनाता है, पत्थर पर पत्थर सजा कर
26:35हर पत्थर एक मंजिल का प्रतीक है, जिसे जितने फ्लोर चाहिए, वो उतने पत्थर लगाता है
26:51द्वार का, वो एतिहासिक नगरी जो खीचती है पूरे भारत के लोगों को
26:56और रंग देती है उन्हें कृष्ण प्रेम में
27:06राजाओं ने भारत का निर्मान नहीं किया है, ब्रामनों ने भारत का निर्मान नहीं किया है
27:11यात्रियों ने, भक्तों ने भारत का निर्मान किया है
27:15तो तीर्थों को जोड जोड के भारत बनाया गया है
27:17और धामों को जोड के भारत बनाया गया है
27:20और यही विश्वास हमें जोडता है
27:23हजार साल पहले भी विश्वास ने भारत को जोड़ा था
27:25आज भी विश्वास से ही बात बनती है
27:29इसी विश्वास का दामन पकड़ कर
27:31दिल्ली के संजय और नीना सिंग निकल पड़े हैं
27:34चार धाम की यात्रा पर
27:37और द्वारका आने के लिए इन्होंने चुना है
27:40जन्माश्टमी यानि कृष्ण के जन्मोट्सों का समय
28:02द्वारका चार धामों में से एक है
28:04इन धामों के स्थापना का एक विशेश उद्धिश्य था
28:08मध्यकालीन भारत यानि मीडिवल इंडिया के शुरुवाती दौर में
28:11बट रहे हिंदु धर्म को जोड़ना
28:14आठवी सदी के महान विद्ध्वान
28:17आदिशंकराचारे ने भारत के इनी चार दिशाओं में मठों के स्थापना की
28:21उत्तर भारत में बदरीनात धाम है
28:23पूरब में जगनात जी है
28:25दक्षन में रामेश्वरम
28:26और पश्चिम में द्वारकाधीश है
28:29और लोग कहते हैं कि विश्णु भगवान जो हैं
28:31वो ध्यान लगाते हैं बदरीनात धाम में
28:33वो भोजन करते हैं जगनात पूरी में
28:36नहाते हैं रामेश्वरम में
28:37और द्वारकाधीश में राज करते हैं
28:40ये भारत के चार कॉर्नर्स को मैप करता है
28:43ये मठ आज भी हिंदु धर्म और वैदिक शिक्षा परंपराओं के केंद रहें
28:54ये चात्र गुरु कुल में रहते हैं
28:57और हर रोज द्वारकाधीश मंदिर्प के प्रांगण में बने
29:01शंक्राचारे मठ में धर्म गरंथों का पाठ करने आते हैं
29:07यहाँ पर मैं वेद पढ़ता हूँ और साहित्य पढ़ता हूँ
29:10गणित में वेदिक गणित है
29:11ये वेदों में जो है वो सिद्ध किया हुआ है
29:15और वो जो नॉर्मल मैट्स होता है
29:18उससे थोड़ा हटके और थोड़ा आसान बनाता है
29:24शंक्राचारे ने विश्रूं से जुड़े महत्रपून स्थानों को ही
29:27मठों के स्थापना के लिए चुना
29:29और द्वार का तो बहुत एहम है
29:31क्योंकि इसे श्रकृष्ण ने बसाया
29:35यहां वो सिर्फ अपनी प्रजा ही नहीं
29:37अपने परिवार के साथ भी आये थे
29:41द्वारे का धीश मंदिर से दो किलोमीटर दूर है
29:44उनकी प्रमुक पत्नी
29:45महरानी रुकमिडी देवी का मंदर
29:48लोग मानते हैं कि ये मंदर
29:50मूलता धाई हजार साल पहले बना था
29:52लेकिन उसके बाद इसका कई बार
29:55पुननिर्माण हुआ
29:59भक्तों के लिए क्रिश्ण के बाद
30:01रुकमिडी का दर्शन
30:02जैसे किसी तीर्थ चक्र को पूरा करता है
30:07लेकिन रुकमिडी और क्रिश्ण के मंदर
30:09अलग-अलग क्यों है
30:10इसके पीछे भी कहानिया है
30:12लोकल परमपरा में कहते हैं कि
30:14नहीं सास और बहु का जमता नहीं था
30:16देवकी और रुकमिडी के बीच में
30:18शायद तनाव था
30:19कुछ लोग कहते हैं कि
30:20रुकमिडी जी को दुरवासा से एक श्राप मिला था
30:23उनकी जो मूर्ती कभी
30:25श्री कृष्ण के साथ नहीं रहेगी
30:27आप कहसकते हैं एक करड़ फीमेल
30:30आटोनमी रखा जा था कि मेरा
30:31घर अलग रहेगा हम
30:33साथ साथ हैं लेकिन मेरा एक सेपरेशन भी होगा
30:38श्रकिष्ण की रुकमिडी के अलावा साथ और पत्रानिया थी
30:41इसलिए उन्हें अश्ट भार्या यानि आठ पत्नियों वाला भी कहते हैं
30:48इन आठ पत्रानियों के अलावा उनकी 16,100 पत्निया और थी
30:55और वे सभी द्वारका धीश मंदिर से करीब 33 किलोमेटर दूर बेट द्वारका में रहती थी
31:07लेकिन बेट द्वारका एक और वजह से मश्चूर है
31:14500 साल पहले जब मोगल सल्तनत थी और राजपुताना में एक राजगुमारी थी जिनका नाम था मीरा बाई
31:19और उन्होंने कहा कि मेरे जो सच में पती हैं वो स्री कृष्णा है
31:24और उन्होंने स्री कृष्णा के भक्ति कावे बहुत लिखे थे
31:27और उन्होंने अपने घर को छोड़कर वरंदावन गये मतुरा गये
31:32और उन कहते हैं कि लास्ट में वो द्वारका गई और वहाँ पे मूर्ति में विलीन हो गई
31:43द्वारका धीश मंदिर में शाम ढल गई है
31:47भजन, किरतन और जैजैकारों के साथ शैन आरती होती है
31:52ये दिन की आखरी आरती है
32:03द्वारका के राजा का आराम करने का समय हो गया है
32:07कल का दिन है बड़ा खास, कृष्ण जन्माष्टमी का
32:12और पूरी द्वारका का एक अलगी रूप नज़राएगा
32:24आज है सुबह क्रिष्ण के जन्मोत्सव यानि जन्माष्टमी की
32:28और द्वारका सज रही है
32:31आज रात बारह वजे बाल गोपाल का जन मनाय जाएगा
32:35हिंदू कैलेंडर के भादो महीने के
32:37कृष्ण पक्ष की अश्टमी को कृष्ण का जन दिन मनाय जाता है
32:41इसलिए इसे जन्माश्टमी कहते हैं
32:50पर्यटन पराधारिक द्वारका का जन्माश्टमी के दिन
32:53मन्दर ही अलग होता है
33:00तेश विदेश से करीब डेड़ लाक लोग इकठे होते हैं यहाँ
33:06द्वारका का सबसे बड़ा उत्सो है जन्माश्टमी
33:09इसलिए पुलिस और प्रशासन एक महीने पहले से ही इसकी तयारी शुरू कर देते हैं
33:16और इस बार यह जिम्मेदारी है एसपी प्रशान सुंबे की
33:22सुरक्षा के द्रश्टी से द्वारकाधीश मंदिर बहुत सम्वेदन शील है
33:26यह अंतराश्ट्री समुद्र सीमा के करीम है और यहाँ भारत की वाइटल इंस्टलेशन भी है
33:32इसलिए द्वारकाधीश मंदिर की सुरक्षा में पूरी सतरप्ता बढ़ती जाती है
33:45स्थाने पोलिस ने आज यहाँ 550 पोलिस कर्मी और 60 ओफिसर्स को तैनात किया है
34:15भक्तों के नैन तरस रहे हैं द्वारकाधीश के अभिशेक सनान के लिए
34:25जो वर्ष में सिर्फ दो ही बार दिखता है
34:29जन्माष्टमी और जेश्ठ पोनिमा पर
34:34द्वारकाधीश का अभिशेक सनान पंचामरित यानी पांच अमरित जैसे द्रव्यों सो होता है
34:38और ये पांच हैं दही, घी, दूद, मधु और चीनी
34:49ये पांचो द्रव्य अलग-अलग गुणों के पतीख है
34:52पंचामरित के अलावा श्रिक्रिश्न को केसर और भारत के अलग-अलग तीर्थ हस्तोलों से लाया गया जल भी चढ़ाया जाता
34:59है
35:04जन्माश्टमी के औसर पर इनका श्रिंगार और भी अद्भूत होता है
35:08उनकी पोशाक द्वारका से 400 किलोमेटर दूर, खास सूरत से बन कराती है
35:15कृष्न जन्म की कहानी प्रतीख है जिन्दगी के मुश्किलों के अंत और आनंद के शुरुवात की
35:23कृष्न का जन्म एक तूफानी रात को मथुरा के एक कारगार में हुआ
35:28कहते हैं उनके मामा कंस को एक भविश्वाणे से पता चला कि देविकी का आठवा पुत्र उसके मृत्त्यु का कारण
35:36होगा
35:36ये जानकर उसने देविकी और उनके पती वसुदेव को कारागार में डाल दिया
35:42जब कृष्ण का जन्व हुआ तो एक अद्भुत खटना हुए
35:46उनकी हतकडियां खुल गे
35:49सारे पहरेदार सो गए और कारागार के दर्वाजे अपने आप खुल गे
35:55वसुदेव ने फटाफट कृष्ण को उठाया और अपने भाई नंद के यहां गोकुल की उर्चल पड़े
36:02अंधेरी रात और मूसलाद हर बारिश पर वसुदेव के कदम नहीं डगमगाए
36:08कहते हैं उन्हें रास्ता देने के लिए यमना खुद ही दो भागों में बढ़ गई
36:13नंद के घर पहुँचकर वसुदेव ने कृष्ण को नंद और यशोदा की नवजात पुत्री से बदल दिया
36:19गोकुल में कृष्ण नंद और यशोदा के पुत्र के रूप में पले बढ़े और बन गए गोकुल के नटखट प्यारे
36:26दुलारे माखन चोर
36:33छोटे से कानहा को माखन और मिश्री से इतना प्रेम था कि वो दूसरों के घरों से माखन चुरा लेते
36:39इसलिए उन्हें माखन चुर भी कहा जाता है
37:04जन्माष्ट्वी का भोग बड़ा ही खास होता है
37:06जील और अन्ने औरतें बड़े ही प्रेम से बनाने में लगी हैं आज का भोग
37:15अभी यह मंदीर में हमारी सेवा चल रही है
37:17हमारी फैमिली की सारी लेडिस सब मिलके भगवान की भोग स्वामगरी बनाते हैं
37:25अभी यह पूरी बन रही है
37:28हाँ भजन भी करते हो पाठ भी करते हैं
37:31हरोज करते हैं भगवान का नाम लेते हैं भगवान की सामगरी बनाते हैं
37:46आज के उत्सो पर द्वार का धीश की मन पसंद
37:49पचास से भी अधिक व्यंजन और मिठाईयां
37:52उन्हें बड़े ही प्रेम से
37:55महाभोग के रूप में अरपन की जाती है
38:11मंदिर से कुछ दूर ही तेन और उसकी टीम जुटे हैं
38:14डांस प्रेक्टिस में आज रात को होने वाले जन्मास्टमी के विशेश प्रोग्राम के लिए
38:23अभी की जो जनरेशन है वो इसे सोगते हैं कि हुजा करने से भगवन मिलते ऐसा जरूरी नहीं
38:29भगवन तो ऐसे भी मिल सकते हैं जरूरी नहीं कि माला लेके हम चले
38:39आज जन्मास्टमी है
38:41कुछी घंटे बाद द्वारका में धूम धाम से मनाये जाएगा श्रकष्ण का जन्म दे
39:13हितेन अपने परफॉर्मेंस के लिए तयार हो रहा है
39:16वो अपने मित्र कृष्ण के नाम अपना नर्त पेश करेगा ठीक रात बारा बजे
39:23मैं इतना ही ख्वाइस रखता हूँ कि मेरी भी आइडेंटिटीटी हो तो वो किष्ण के साथ हो
39:36श्रकष्ण का जन्म देशो सदियों से मनाये जा रहा है
39:42और वक्त के साथ ये उद्शो बड़ा ही हुआ है
39:47आज लगभग पच्चास हजार लोगों की इस शोभाय आत्रा ने द्वारका में एक नया जोश जगाया है
39:54ये आत्रा अगले पांच घंटे में द्वारका धीश मंद्र पहुँचेगी और फोड़ी जाएगी कृष्ण की मशहूर माखनान दी
40:1312 बजने वाले सुरक्षा व्यवस्था के अंतिम हुआयने के लिए डिस्टर्ट कलेक्टर मंदिर पहुच गये हैं
40:22एंपल केमपस में वे उपन पोलीश कंट्रोल रूम ज़स्टो हेल्थ डिवोटी ज़स्टो हेल्स कंट्रोल रूम है इंफॉरमेशन सेंटर है अल्सो
40:30बिन ओपन
40:31सब हमारे डिस्टिक ऑफिसियल वो बढ़वान क्रिष्ण का काम कर रहे है
40:37तो इस सब कुछ जो होता है ने सबसेश्फूल वो हम समझते के बढ़वान क्रिष्ण ही करते हैं हम तो
40:44कुछ करते हैं नहीं वो ही करवा रहे हैं हम से
40:51नटकट गोपाल की माखन हांडी फोड़ने के लीला के बिना जनमाश्ट्रवी का उत्सो कहां पूरा होता है
40:58इसलिए द्वार का धेश मंदिर से कुछ किलोमीटर दूर दोहराई जा रही है ये प्रथा
41:14शायद भारत ही दुनिया का वो अकेला देश है जहां अपने इश्ट देव की शरारतों को भी मनाया जाता है
41:19वो भी इतने धूम धाम से
41:46बारा बजने में श्रकिष्ण के जन्व में अब कुछी क्षण बागी है
41:51भक्तों की नजरें कर रही हैं इंतजार कब खुलेंगे द्वार
41:57कब होंगे दर्शन बाल गोपाल के
42:06रात के बारा बज़ गए हैं वक्त है श्रकिष्ण के जन्व का
42:24इस समय लोग जब सेलिब्रेशन करते हैं भगवान को बच्चे के रूप में देखते
42:28हैं और अपने आप में वात्सली रूप को जगाते हैं ताकि हम भगवान से जुड़ जाएं
42:40जए श्री कृष्ण जएद्वार कादिश सभी लोगों को स्री कृष्ण जन्म मोहत्सों की हमारी तरब से बहुत-बहुत बधाई अभी
42:48भागवान का जन्म हुआ है
42:5012 बजे सभी ने मिलके जो तैयारिया की महाबोग बनाया है इसका हमें बहुत-बहुत हर सुला से हैं
43:18हीतेन है मंच पर और उसके साथ जूम रही है पूरी द्वार का
43:31भारते परंपरा में लोग अपनी जिंदगी का आधार देवताओं से जोड़ देते हैं यह जो मॉडर्न यूग है टेकनॉलिजी की
43:38यूग है यहां से सुख थोड़ी ना पराप्त होता है लास्ट में आपको आधार आपको विश्वास से आता है और
43:43यह कह सकते हैं एक फॉ
44:00प्रोडों भक्तों के लिए श्रक्रिश्न जन्म लेते रहेंगे अधर्म के नाश के लिए हर साल अनंत काल तक