00:00राची के बोडिया इस्तित एतिहासिक मदन मोहन मंदिर में जन्मास्टमी को लेकर उच्षब जैसा माहुल है।
00:06करित 361 साल पुराने इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सब पर विशेश पूजा अर्चना भविश्रिंगार अविशेग जूलन और विशेश
00:14आर्ति का आयोजन शुरू हो चुगा है।
00:56मंदिर का इतहास मुगल काल से जुड़ा है।
01:00सिलालेक क्यनुसार बर्स 1965 में नागबंग्सी दाजार अगुनात्सा की उपस्थिती में इस्थानिय जमिंदार लक्ष्मी नरायन तिवारी ने मंदिर की नीव
01:09रखी थी।
01:10बर्स 1612 में मंदिर का निर्मान पुरा हुआ।
01:14करीब 14,001 रुपे की लागत से बने इस मंदिर की वस्तुकला आज भी लोगों को आकरशित करती है।
01:2112 नकासिदार गिरनाइट स्तंबोर मजबूत चारदिवारी पर खड़ी है संगरचना मद्धिकालीन इस्थापित की मिसाल है।
01:29मंदिर की एक खाशित इसकी प्राचीन वाटर हार्वेस्टिंग विवस्था भी है।
01:34चट पर जमा बारिश के पानी को पनसोखा तकनिक के जरिये जमिन के भीतर पहुचाने की विवस्था सदियों पहले से
01:41की गई थी।
01:42मंदिर परिसर के तालाव और कुए भी इसकी प्राचीन जलसंगरक्चन सोच की मिसाल माने जाते हैं।
01:59पूरा मंदिल का पानी यहां अभी जाता है और आज तक न भरा है और यह कुआ जो है न
02:05आज तक सुखा हुआ है।
02:08जन्मास्ट में कोई भी यहां जिस साल भर में चारगत वहबार मना जाता है।
02:12जन्मास्ट में और कार्टिक पुर्णना होली और भगवान जी का अस्थापना दिवस मंदिल का जो अस्थापना दिवस अच्छे सिर्टियागा।
02:19चिके चले आते हैं।
02:22यहां यहां बहुत पर आच्छे हैं।
02:25और हमको यहां आकर बहुत अच्छा लगता है।
02:28और हम देखते हैं कभी भी आते हैं।
02:30जो भी आता है ना बहुत अच्छा से पुजा करके भजन करके तब शब जाता है।
02:36I think this is a good place for us.
02:39It is a very good place for us.
02:44The most important thing is that one family,
02:49that generation by generation,
02:51is coming to one place in one place.
02:55One family.
02:58This is a very important thing.
03:02We would prefer these generations.
03:07There are many most popularities.
03:10The temple has served in the city.
03:12There are no things like that.
03:14In the temple,
03:15the temple, the temple,
03:16temples, temples and temples etc.
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