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श्री कृष्ण का देह त्याग कैसे हुआ? भगवान के पृथ्वी लोक से प्रस्थान के बाद क्या हुआ और जगन्नाथ भगवान की उत्पत्ति से जुड़ी यह रहस्यमयी कथा क्या है? 🙏

इस भावपूर्ण और आध्यात्मिक कहानी में जानिए श्री कृष्ण की अंतिम लीला, उनके देह त्याग की कथा और भगवान जगन्नाथ की उत्पत्ति से जुड़ी अद्भुत मान्यता। यह कथा भक्ति, रहस्य और कृष्ण लीला से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को सामने लाती है।

अगर आपको श्री कृष्ण की कथाएं, भगवान जगन्नाथ, हिंदू पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक कहानियां पसंद हैं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखें।

🙏 जय श्री कृष्ण | जय जगन्नाथ 🙏

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Transcript
00:07ये कोई साधारन वस्तु नहीं है
00:09महराज, नील माधव अभी प्रिथ्वी पर मौजूद हैं आपकी आज्या हो तो
00:14अरे, ये कितनी अध्भूत लकडी है
00:20प्रभू, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है
00:23राजन, मैं अब नील माधव के रूप में तुम्हें दर्शन नहीं दे पाऊंगा
01:04अरे, ये तो किसी मनुश्ची की आवाज है
01:08ये बगवान, ये मैंने क्या कर दिया
01:30अरे, ये प्रभू, ये द्वार का धिश, मुझे ग्षमा करें
01:36ये महापाप मुझसे अंजाने में हुआ है
01:39मैंने आपको हिरन समझ कर बान ठोड़ दिया
01:42प्रभू, इस घोर अपराद के लिए
01:46मुझे अभी मृत्यू दंड दे
01:48मैं इस जीवन के योग्ये नहीं हूँ
01:51तुमने कोई अपराद नहीं किया है
01:54तुम त्रेता युग में वानर राजबाली थे
01:57जिन्हें मैंने पेड से छिप कर मारा था
01:59जो की युद्ध भूमी के नियम का उलंगन था
02:02इसलिए मेरी मृत्यू
02:04तुम्हारे हाथों पहले ही लिख दी गई थी
02:07तुम इस अपराद बोध से मुक्त हो जाओ
02:10अब मेरे वैकुंठ जाने का समय आ गया है
02:30थेहरिये
02:31रुकिये गांडीवधारी अरजुन
02:33अनर्थ हो गया
02:34द्वार का धीश अब इस संसार में नहीं रहे
02:37वे अपनी लीला समेट चुके हैं
02:40अरे
02:42ये तुम क्या अप्शकुन बोल रहे हो
02:44कृष्ण को भला क्या हो सकता है
02:46तुम होश में तो हो
02:48अरजुन
02:49मैं सत्य कह रहा हूँ
02:51मेरा विश्वास करें
02:53अब विलंब न करें
02:54शीगर चले
03:12जा रहे हो प्राण हमारे
03:18सुनी करा के ब्रीज सारे
03:23आशुरोए नभ तारे
03:27सुन लो हे दीन बंधू प्यारे
03:32रखना सर पे हाथ सदारे
03:40हे केशव
03:41हे मेरे सखा
03:44आप मुझे इस अंधेरी दुनिया में
03:46अकेला छोड़ कर कहा चले गए
03:48अब इस पार्थ अरजुन को रास्ता कौन दिखाएगा
03:51हे कुंति पुत्र
03:53स्वयम को संभालिये
03:55ये विधी का विधान है
03:57जिसने स्वयम भगवान ने लिखा थी
04:13कुंति पुत्र
04:15जरा वहाँ देखिए
04:16राख के भीतर कुछ चमक रहा है
04:19वो क्या है
04:26हे अरजुन
04:27इस दिव्य पिंड को
04:29समुद्र में प्रवाहित कर दो
04:31समय के अनंत चक्र में
04:34यह पुनह अपने नए दिव्य स्वरूप में प्रकट होगा
04:37में प्रवाहित कर दिव्य स्वरूप में
05:11अरे
05:13यह अद्भुत प्रकाश कैसा
05:16यह कोई साधारण वस्तु नहीं
05:18इसमें तो साक्षात शक्ती का वास लग रहा है
05:27प्रभू
05:28आप कोई और नहीं
05:30स्वयम नील माधव है
05:32आपने इस तुछ सेवक को दर्शन दिये
05:41प्रभू
05:42आप यहां विराजिये
05:44जब तक मेरी सांसें चलेंगी
05:46मैं आपकी नित्य सेवा करूँगा
05:49यह स्थान और आपकी पूजा
05:52संसार से गुप्त रहेगी
06:17आपकी वर्षों की प्रतीक्षा और कठोर तपस्या पूर्ण हुई
06:21प्रामण देव
06:23आपके मुख पर ये चमक
06:25क्या आप वो कहना चाहते हैं
06:27जो मेरे कान तरस गए हैं सुनने को
06:29जी महराज
06:30आप जिन प्रभू को ढून रहे हैं
06:33वे नीलांचल की कंदराओं में
06:35सब्र समुदाय के बीच
06:37नील माधव के रूप में विराजमान है
06:40तो फिर विलंब कैसा
06:42सेना को तयार करो
06:44हम अभी प्रस्थान करेंगे
06:46क्षमा करें राजन
06:48पर अभी वहाँ जाना उचित नहीं होगा
06:51नील माधव का स्थान
06:53अत्यंत गुप्त है
06:54केवल वहाँ के सरदार
06:56विश्ववसू ही उसका मार्क जानते हैं
06:59बल से नहीं
07:01हमें युक्ती से काम लेना होगा
07:02आप सही कह रहे हैं
07:04मंत्री जी आगे आएं
07:06आग्यादे महराज
07:08महानदी के तट पर
07:10आदिवासियों की एक बस्ती है
07:12वहाँ जाओ
07:13भेस बदल कर रहो
07:14और किसी भी तरह
07:16उस गुप्त गुफा का पटा लगाओ
07:18जहां नील माधो पूजे जाते है
07:22ठीक है महराज
07:24मैं अभी वहाँ जाता हूँ
08:06रुको भाई
08:08कहां से आये हो
08:09और इस घने जंगल में क्या खोज रहे हो
08:11मैं एक साधारण मुसाफिर हूँ
08:13दूर देश से आया हूँ
08:15मैंने आपके सरदार
08:17विश्ववसू की महिमा सुनी है
08:19बस उनसे भेंट करने की इच्छा है
08:21लगता है कोई भले घर का है
08:23सरदार से मिलवाना ठीक रहेगा
08:26कोई दिक्कत नहीं है
08:34मुझसे भेंट?
08:36कहो मुसाफिर
08:46मैं उनके दिव्य दर्शनों की आस लेकर आया हूँ
08:51कृपया मुझे उस गुप्त स्थान तक ले चले
08:54मुसाफिर
08:55वो स्थान केवल हमारे समुदाय के लिए है
08:59बाहरी व्यक्ति का वहाँ जाना वर्जित है
09:01मुझे ख्षमा करो
09:02मैं अपनी परंपरा और वचन नहीं तोड़ सकता
09:13अगर मैं खाली हाथ लोटा
09:16तो महराज को क्या मूँ दिखाऊंगा
09:19सरदार तो बहुत जिद्दी हैं
09:20मुझे इस दिवार को तोड़ने के लिए
09:22कोई दूसरा रास्ता ढूंडना होगा
09:39रंग भिरंगी फूलों में तुम कौन हो
09:45जैसे आस्मा से उठरी कोई परी हो
09:51तुम्हारी उसका में एकल्सी रॉश्मी है
09:57भाई ये सरदार विश्ववसू की पुत्री ललिता हैं
10:03हमारे कबीले की सबसे प्रिय बेटी
10:05अगर मैं ललिता का विश्वास जीत सकूँ
10:09तो शायद नील माधव तक पहुँचने का मार्व मिल जड़े
10:23क्षमा कीजिएगा
10:29क्या मैं आपसे कुछ बात कर सकता हूँ
10:31अरे आप आप वही मुसाफिर है ना जो कल पिता जी से मिले थे
10:36यहां बगीचे में कैसे आए
10:39हाँ मैं वही हूँ
10:41सच कहूँ तो मैं आपकी सादगी और सुन्दरता देखकर अपना दिल हार बैठा हूँ
10:46क्या आप मुझसे विवा करेंगी
10:49कैसी बाते करते हैं आप
10:52मैं कभीले की बेटी हूँ
10:54अगर आपको ऐसी कोई बात करनी है तो जाकर पिता जी से कहिए मुझसे क्या पूछ रहे हैं
11:02अगर आप चाहेंगी तो पिता जी भी मानी जाएंगे बस आपकी हाँ चाहिए
11:08मैं कुछ नहीं जानती
11:13अरे सुनिये तो जवाब तो देती जाईए
11:19अरे यार जवाब भी नहीं दिया और भाग भी गई
11:23अब राजा को क्या मुझ दिखाऊंगा
11:26और मेरा काम कैसे बनेगा क्या ललिता मानेंगी
11:37अरे वो नौजवान आज दिख नहीं रहा तो रोज तो यहीं रहता था
11:42आज कहीं चला गया क्या
11:44मुझे पता है आपकी आखें मुझे ही ढून रही है
11:48ज्यादा मत बोलिए
11:50मैंने कल ही कहा था कि पिताजी से बात करो
11:53पर आप तो आये ही नहीं
11:56मैं डर गया था
11:57मुझे लगा कहीं आप मना न कर दें
12:00बिना आपके उत्तर के
12:03मैं सरदार के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था
12:08ठीक है अब डरिये मत
12:10कल हमारे घर आ जाईएगा
12:20अच्छा
12:22तो तुम ही वो मुसाफिर हो
12:24जिसने मेरी पुत्री ललिता का मन मोह लिया है
12:28मैंने तुम्हारी परिक्षा ली है
12:30तुमें एक धैर्यवान व्यक्ति प्रतीत होते हो
12:32सरदार
12:34मैं आपके परिवार का हिस्सा बन कर धन्य हो गया हूँ
12:38आज राजा के घर में शादी है
12:41देखो खुशियों की बहार आई है
12:45दोल बजे रिशे हैनाई बजे जोर से
12:48जोड दिया है दिल को दिल की डोर से
12:52जै जै बोलो जै जै कार हो मंत्री ललिता का विवह सपाल हो
12:59जै जै बोलो जै जै कार हो मंगल्या का ये उपहार हो
13:12क्या बात है स्वामी विवाह के बात से ही आपको चिंतित लग रहे हैं
13:18क्या मुझसे कोई भूल हुई है
13:20नहीं ललिता ऐसी बात नहीं है बस एक ही चुभन मन में है पिता जी हर रोज उस दिव्य स्थान
13:28पर नील माधव की पूजा करने जाते हूं पर मैं इस घर का सदस्य होकर भी उन दर्शनों से वन्चित
13:35हूं क्या मुझ पर विश्वास नहीं किया जा सकता
13:48पिता जी मेरे पती की बहुत इच्छा है कि वे एक बार प्रभु नील माधव के दर्शन करें वे बहुत
13:57व्याकुल हैं क्या आप अपने जमाता की ये अंतिम इच्छा पूरी नहीं करेंगे
14:03बेटी वो इस्थान अत्यंत पवित्र और गुप्त है बाहरी दुनिया का कोई व्यक्ती वहां नहीं जा सकता
14:11लेकिन तुम्हारे सुख के लिए मैं तयार हूँ पर मेरी एक कठोर शर्ट है
14:19आखिर सर्दार विश्ववसू ने कौन सी शर्ट रखी और क्या मंत्री उस गुप्त मार्ट को पता कर पाएंगे
14:26क्या राजा की मनोकामना पूरी होगी इन सभी को अगले भाग में देखेंगे
14:31लडी से चैनल को सब्सक्राइब कर लेना अगले भाग में बहुत मज़ा आएगा
14:39सन्यवाद

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