00:00लेकिन आज सबसे पहले हम आपको मुंबई की उस घटना के बारे में बताएंगे जो नकली सरकारी अफसरों को लेकर
00:05कई सवाल खड़े करती है
00:07और ये एक ऐसी कहानी है जिसमें पहली नजर में सब कुछ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक जैसा दिखाई देता
00:13है
00:14लेकिन जहां चागे बढ़ी जैसे जैसे कहानी में एक के बाद एक नए ट्विस्ट आए
00:19कि सवाल सिर्फ सुरक्षा का नहीं रहा बलकि फर्जी सरकारी अफसरों के उस खतरनाक जाल तक पहुँच गया
00:26जिसमें कोई व्यक्ति अपरादी हो सकता है खुठगी का शिकार भी
00:30अब क्या है ये पूरी घटना
00:32साथ सितंबर की है ये घटना जब मुंबई के जियो वर्ल्ड किन्वेंशन सेंटर में एक बड़ी कारक्रम की तयारी चल
00:40रही थी
00:41और कारण ये था कि अगले दिन यानि आज इस कारक्रम में प्रधान मंतरी नरेंद्र मोधी को शामिल होना था
00:47और वो शाम में शामिल भी हुए
00:50अब जाहिर है प्रधान मंतरी के कारक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था बेहत कड़ी थी
00:54आसपास के पूरे इलाके में आने जाने वाले लोगों की जाच की जा रही थी
00:59इसी जाच के दोरा पुलिस कर्मियों को दो लोगों पर शक हुआ
01:04और जब उनसे पूछता चुई तो उनमें से एक लड़के ने दावा किया कि वो प्रधान मंतरी कार्याले
01:09सीधा बोला कि मैं पीएमो से जुड़ा हुआ
01:12और उसने सुरक्षा कर्मियों से कहा कि उसे अंदर जाने से रोका ना जाए
01:17अब मुंबई पुलिस के मताबिक इस लड़के का नाम रोहन पारिक है
01:21और उसके साथ आए बोडिगार्ड का नाम दिलिप कुंडे
01:24और जानते हैं ये दो दो पकड़े कैसे गए
01:27जब मेटल डिटेक्टर से इस लड़के का बोडिगार्ड दिलिप कुंडे अंदर जा रहा था
01:32बोडिगार्ड तब उसमें सुरक्षा कर्मियों को उसके पास पिस्टल होने का अंदेशा हुआ
01:37पुलिस ने तलाशी ली तो उसके पास से एक पिस्टल मिली
01:42और इसके बाद इस बोडिगार्ड ने रोहन पारिक को फोन किया
01:45और ये लड़का वापस एंट्री गेट पर पहुँचा
01:48बहां उससे सुरक्षा कर्मियों को अपना एक पहचान पत्र दिखाया
01:52दावा किया गया कि ये पहचान पत्र प्रधान मंत्री कार्याले यानि PMO का है
01:57अब इस ID कार्ड में रोहन पारिक को PMO का grade C official बताया गया था
02:02लेकिन यहीं से सुरक्षा कर्मियों का शक और गहरा हो गया
02:07शक का कारण यही था कि इस पहचान पत्र पर उसके जारी होने की तारीख तो लिखी थी
02:14कि भई ये ID कार्ड कब जारी हुआ
02:17लेकिन यहीं नहीं लिखा था कि कार्ड वैलिड कब तक है
02:20इसके अलावा कार्ड पर जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर तो थे लेकिन उस अधिकारी का नाम नहीं लिखा था
02:27जबकि PMO के ID कार्ड पर उसे जारी करने वाले अधिकारी का नाम जरूर होता है
02:31उसी से पहचान हो जाती है
02:35अब बस यहीं से सुरक्षा कर्मियों को लगा कि कुछ बहुत बड़ी गड़बड है
02:39पुलिस ने दोनों लोगों को हिरास्त में लिया, बाद में गिरफतार किया
02:43और यहां तक यह कहानी बहुत सीधी दिखाई देती
02:46सबको लगा कि प्रधान्वंत्री मोधी के कारिक्रम से पहले
02:49दो लोग खुद को पीमो से जुड़ा हुआ बताकर एक हाई सेक्यूरिटी इलाके में गुसने की कोशिश कर रहे थे
02:54और यह मामरा प्रधान्वंत्री मोधी की सुरक्षा में चूप का सीधा दिखता है
03:00लेकिन इसके बाद कहानी ने ऐसा मोड लिया जिसने इस पूरे मामले को और ज़्यादा दिल्चस्प बना दिया
03:06जिस लड़के ने खुद को पीमो का अधिकारी बताया था उसके वकील ने अदालत में कोट में जब उसे पेश
03:13किया जा रहा था
03:14उसको पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है कोट की तरफ से लेकिन जब अदालत में इसका वकील पहुँचा तो
03:19उसने दावा किया कि रोहन खुद एक ठकी का शिकार है
03:23अब ये दावा देखिए
03:26यानि जिस वक्ति को पुलिस नकली पीमो अधिकारी समझ कर गिरफतार कर रही है उसके वकील का कहना है कि
03:31वो खुद भी ये मानता रहा हो
03:32कि वो सचमुच प्रधानमंत्री कारयाले में नौकरी करता है
03:37रोहन पारिक के वकील के मताबिक उसे पिछले कुछ समय में ऐसे कई दस्तावेज और इमेल्स मिले थे
03:42जिनसे उसे विश्वास हो गया कि उसे हकीकत में पीमो में नौकरी मिल गई है
03:50दावा है कि उसे इमेल के जरिए पीमो में नौकरी का ओफर लेटर भेजा गया
03:55उसे इमेल पर ही एक ID कार्ड की कॉपी भेजी गई
03:59और ये भी दावा किया गया है कि उसे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी भेजा
04:05गया
04:05जिसमें उसे PMO से जुड़ा अधिकारी बताया गया था
04:09यही नहीं कोर्ट में सबूत के तौर पर कुछ इमेल्स भी पेश किये गया है
04:14अब इन इमेल्स में तरुन कपूर नाम के एक व्यक्ति का जिक्र था
04:19और कहा गया कि इसी व्यक्ति ने रोहन को PMO में काम करने का प्रस्ताव दिया था
04:25इसके बाद तरुन गुप्ता नाम के व्यक्ति की तरफ से उसे डिफेंस अक्विजिशन पॉलिसी से जुड़े इमेल भेजे गये और
04:34मेहक गुप्ता नाम की एक महिला की ओर से
04:37रोहन को अडवाइजरी रोल में नौकरी का प्रस्ताव बेजे जाने का दावा किया गया
04:43अब रोहन के वकील का कहना है कि इमेल के जरिये उसे यहां तक निर्देश दिये गये थे कि उसे
04:48अपनी सुरक्षा के लिए एक बॉडिगार्ड रखना चाहिए
04:54यानि दावा तो यह है कि रोहन पारिक ने खुद को कोई सरकारी अधिकारी दिखाने के लिए बॉडिगार्ड नहीं रखा
04:59था
04:59बलकि उसे इस इमेल के जरिये बताया गया था कि अब वो एक बड़े पदपर है और उसे सुरक्षा की
05:04जरूरत है
05:06अब आखिर ये पूरी कॉंस्पिरेसी है क्या उसके बाद देखिए उसने एक बॉडिगार्ड रख लिया खुद को पीएमो का अधिकारी
05:14समझ लिया और फिर वो बॉडिगार्ड रख कर घूमने लगा
05:18रोहन का ये भी कहना है कि वो प्रधानमंती मोदी के कारक्रम में शामिल होने या किसी हाई सेक्यूरिटी इलाके
05:23में घुसने के लिए जियो वर्ल्ड प्लाजा नहीं आया था बलकि वो अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने वहाँ पर
05:29पहुँचा था
05:31अब देखिए वो पहुच भी कबरा है जब प्रधानमंती का अगले दिन वहाँ पर कारक्रम है वो खुदी दावा कर
05:40रहा है अपने वकील के जरीए कि उसको प्यमो का एक अधिकारी वो अपने आपको समझ रहा था उसे ओफर
05:45लेटर आई थी और वो उसी जियो कन्वेंशन
05:48सेंटर में एक दिन पहले परफ्यूम खरीदने पहुचता है जैसा उसके वकील का दावा है अब इस कहानी के आधार
05:55पर ये लड़का खुद को निर्दोश बता रहा है लेकिन इस कहानी में कोई छोल भी कई सारे नजर आते
06:00हैं जैसे 2024 में इसे PMO में नौकरी का उफर लेट
06:17शची गई थी कि अगर वो कहीं पकड़ा जाता है तो इन मेल्स को वो आगे कर दे कोट में
06:24बता दे दूसरा अगर ये खुद को PMO का अधिकारी बता रहा है तो इसने अपनी निजी बॉडिगाड कैसे रख
06:30लिया और सोचिए ये लड़का इतना पढ़ा लिखा है इसने ग�
07:03अधिकारी खुद ही निजी बॉडिगाड रखते चले
07:07हम यहाँ इस लड़के के दावों को सीधे तोर पर गलत नहीं बता रहे हैं लेकिन उसकी कहानी पर जो
07:13सवाल उठ रहे है वो गंभीर है
07:17और यहाँ सोचने वाली बात तो यह है कि जहाँ प्रधानमंत्री मोधी का कारेक्रम होना था वहाँ इत्तिफाक से ये
07:21लड़का प्रधानमंत्री के कारेयालय का ही अफसर बन कर कैसे पहुँच गया देखे
07:25पर रहाँ करने के ये लड़ का बताता हो गाया रहाँ आख गयार प्रधानम ये में अब ग्रहाँ वाल इस
07:50था रहाँ खेलू में नूट रहाँ गाटन सफेंगर रहाँ पमदम्द्टाग सटतिफेंगर भीडऱ्श्टरी केमें जोच मेंद्टा बस्तिफेंगर्षां आ�
07:56जी आप रोहन के फैमिली से हैं बात जी आप से जानना चाहेंगे ये रोहन पारे को रेपेजेंट करें उन्होंने
08:20कहा कि रोहन पारे को या तो फसाया गया
08:24पीएमो के नाम पर और उसे ये आईकार्ड भी उन्होंने ही दिया इमेल भी उन्होंने भेजे और वही उनसे संपर्क
08:31में थे वही उसके कॉंटाक्ट में थे और उन्होंने ही उसे बॉडिगार्ड रखने के लिए भी कहा था अब इस
08:36पर सवाल उठता है कि ये क्या सच में र
08:57अब इस घट्ला के बाद सबसे बड़ा सवाल तू ये है कि इस देश में कितने लोग नकली सरकारी अफसर
09:01बन कर घूम रहे हैं।
09:03आपको याद होगा पिश्रे मही ने मनीश कुमार गुपता की गिरफतारी हुई थी खुद को भारत के राश्ट्रे सुरक्षा सलाकार
09:09अजीद जोबाल का अंडर कावर एजेंट बताता था।
09:12बिहार के खगडिया में इसने एक पांच मंजला मकान बना है जिसमें सौ सीसी टीवी कैमरे लगाए गए और इलाके
09:19में ये बात भी फैली कि इस घर में एक स्वेमिंग पूल भी हो सकता है।
09:22खगडिया के लोगों के लिए ऐसा घर सामाने नहीं था ये बिहार का वो जिला है जो बाड के लिए
09:27जाना जाता है और जहां हर साल घर जरूर डूपते हैं।
09:30लेकिन उस खगडिया में जब ये खबर फैली कि मनीश कुमार गुपता एक आईयस अधिकारी है जीत डोबाल उस पर
09:35काफी भरोसा करते हैं लोग उसे प्रभावित होने लगे।
09:40यही नहीं इस व्यक्ति ने अपनी गाड़ियों पर गर्वर्मन्ट अफ इंडिया लिखवाया हुआ था लेकिन पुलिस ने इस व्यक्ति को
09:45संदेक्द मानते हुए कारवाई की जब पुलिस को भी इस व्यक्ति ने अपना परिचा एक आईयस अधिकारी का दिया तो
10:04ये प�
10:05खुद को फर्जी आईयस याईपियस अधिकारी बताने की पहली घटना थी। पिछने कुछ सालों में ऐसे कई लोग पकड़े गए
10:10हैं जो खुद को एने से अजीत डुवाल, कभी ग्रे मंत्री अमित शाह, कई बार सीधा प्रधान मंत्री कारयाले का
10:17अधिकारी बताते हैं
10:35गरानी के लिए भेजा गया है। ये सुनने के बाद जमू कश्मीर का प्रशासन इस वक्ती के आओ भगत में
10:40लग गया। अब इसे प्रोटोकॉल के तहर सरकारी गाड़ियां दी गए इस रक्षा कर्मी दीए गए ये वक्ती सबको वहाँ
10:45चूना लगाता रहा है। और अब
11:01कई तो ऐसे हैं जो शायद अब तक पकड़े ही नहीं है। और हमें लगता है कि इस घटना के
11:05बाद सरकार को कोई ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिससे असली और नकली सरकारी अफसरों की पहचान हो सके।