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Transcript
00:00करनाटक में अब शिक्षक अपने नाम के आगे लगा सकेंगे
00:02टी आर
00:03डॉक्टर के डी आर और प्रोफेसर के पी आर ओ एफ की तरह
00:07करीब साढ़े चार लाख शिक्षक टी आर लिख सकेंगे
00:10ये शिक्षकों के योगदान और सम्मान को पहचान देने की पहल है
00:13पोचिए हमारे यहां शिक्षक को सम्मान के लिए कभी उपाधी की जरूरत नहीं पड़ी
00:18जो सिखाता था समाज उसे सर आँखों पर रखता था
00:20कोई सरकारी आदेश नहीं चाहिए था
00:22लेकिन आज एक बच्चे से पूछिए बड़े होकर क्या बनोगे
00:25जवाब आता है डॉक्टर इंजीनियर आई एएस विदेश में नौकरी
00:30शिक्षक कोई नहीं कहता
00:31कहीं न कहीं हमने शिक्षक को सिर्फ वेतन में नहीं
00:34बलकि अपनी नजर और बच्चों की आकांगशाओं में भी पीछे कर दिया है
00:37आज कई शिक्षक खुद अपना परिचय कैसे देता है
00:40बस एक टीचर हूँ, स्कूल में ही पढ़ाता हूँ
00:42देखिए परिचय में बस और ही लगा हुआ है
00:45जैसे अपने ही काम की एहमियत कम बता रहे हूँ
00:48टी आर उस बस को हटा सकता है
00:49पर तभी जब शिक्षक खुद इसे अपनी पहचान माने
00:53सरकारी मोहर नहीं
00:54क्योंकि डी आर और पी आर ओ एफ सिर्फ नाम के आगे लगे अक्षर नहीं है
00:58वे इस बात की पहचान है कि सामने वाला कुछ ऐसा जानता है
01:01जो हर कोई नहीं जानता
01:03ठीक वैसे ही शिक्षक भी केवल किताब या सिलेबस पूरा करने वाला करमचारी नहीं है
01:08वो आने वाली पीड़ी की सोच और समझ गढ़ने का काम करता है
01:12और ये नई बात भी नहीं
01:13गुरू, आचार्य, पंडित
01:14ये शब्द डिग्री से हजारों साल पुराने है
01:17हम कुछ नया नहीं जोड रहे, बस भूला हुआ लोटा रहे है
01:20और बात सिर्फ शिक्षकों की नहीं है
01:22एक बच्चा जब किसी शिक्षक के नाम के आगे टी आर लिखा देखेगा
01:27तो शायद उसके मन में शिक्षक की एक नई छवी बने
01:30एक ऐसी पहचान जिसे पाना सम्मान की बात हो
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