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क्या ब्रिक्स अपने व्यापार को और बढ़ा पाएगा? देखें कहानी 2.0
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00:00मैसकार, स्वागेते आपका, आप देख रहे हैं कहानी 2.0 आपके साथ हुमें नेहा बात हम
00:04दुनिया के सबसे चर्चित अंतराश्र समू में से एक है ब्रिक्स
00:09भारत, चीन, रूस समेथ 11 देशों का ये समू आज वैश्विक राज़नीती और अर्थवस्था में अपनी अलग जगह बना चुका
00:17है
00:17लेकिन ब्रिक्स की शुरुआत 11 देशों से नहीं हुई थी, इसकी कहानी शुरू हुई थी सिर्फ 4 देशों से
00:23फिर एक देश जुड़ा और तीरे दीरे ब्रिक्स बन गया ब्रिक्स, आखिर कैसे पढ़ा ब्रिक्स का नाम, क्यूँ बढ़ता गया
00:32इस संगठन का दाइरा, दुनिया के अर्थवस्था में इसकी कितनी ताकत है और क्यूँ अमेरिका की नजर भी ब्रिक्स पर
00:39बनी हुई ह
00:40आज कहानी में जाने ब्रिक्स से बनने से लेकर उसके बढ़ते प्रभाव की पूरी कहानी
01:10साज आज कि लेओ मोर्वोज गिर्डियोष और दे लेओ की अव सांट्यू आज की बनुअ की पूरी को आज की
01:20बनुटनी जी फैप्यों से बनुटनी जूरी कूल अज वी खड़ते इनुप गूबूब इनुटनी में जार इने
01:52ब्रिक नाम की कहानी 2001 से शुरू होती है जब अर्थ शास्त्री जे मोनील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन
02:00को तेजी से उभरते अर्थवस्ताओं के रूप में चिनित किया
02:03इसी से ब्रिक शब्द सामने आया बी यानी ब्राजील, आर यानी रूस, आय यानी भारत और सी यानी चीन तब
02:11ये कोई अपचारिक संग्ठन नहीं था
02:132006 में UNGA के दौरान चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठा के साथ सहयोग का अपचारिक दोर शुरू हुआ
02:21मकसद था आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक बंच पर विकाश शील देशों की आवास मस्बूत करना और फिर ब्रिक बन
02:30गया ब्रिक्स
02:42दिल्ली में दुनिया की बड़ी ताक्तों का चमावड़ा वो भी एक मंच पर अठारवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने राजधानी को
02:49कूतनीती के बड़ी केंदर में बदल दिया है
02:52बारत की ब्रिक अर्भेष्टा के दोरान चीन से मिले समरफन और सही योग के लिए मैं आपका आपहर भ्रिक्त करता
03:04हूं
03:04दो दिनों की सम्मेलन में आर्थिक सही शे लेकर वाष्विक रिशासन व्यापार उन्यदीः ऊड़ार भी आजधानी है
03:21पुर्जा, तक्नीक और बदलती दुनिया के शक्ति संतुलन तक कई बड़े मुद्दे एजण्डे में थे, लेकिन ब्रिक्स की ये तस्वीर
03:28सिर्फ बैठकों और भाष्णों की नहीं है, इसके पीछे बदलती हुई वैश्विक राजनीती की एक बड़ी कहानी भी है।
04:07दिल्ली में ब्रिक्स का आयोजन भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रिय सम्मेलन नहीं, बलकि अपनी कूपनीती ताकत और ग्लोबल साहुत
04:15के साथ अपनी भूमी का दिखाने का बड़ा मंच भी है।
04:19प्रधान मंतरी नरेंदर मोदी ने सम्मेलन से जुड़े कारक्रमों के दौरान अलग-अलग नेताओं के साथ द्विपक्षिय मुलाकातें की।
04:27रूस के राश्पती व्लादमीर पोतिन से पीम मोदी की मुलाकात, एरान के राश्पती मसूद पजिश्किन से पीम मोदी की मुलाकात
04:37प्रधान मंतरी मरेंदर मोदी आपका हाथ पकड़के आपको गैलरी के थ्रू लेके जा रहे थे और करीब 45 मिनित तक
04:44आप दोनों की पीछ बात चीत वी
04:46तो फोकस क्या रहा इस मीटिंग में और फोकल पॉइंट क्या था
04:52पयादा अरस कुनम के अरतवात मा बा नुखस वजीर मुथराम हिंदूस्तान
04:58मैं यह कहना चाहता हूँ कि जब से मैंने पद संभाला है
05:01भारत के माननी प्रधान मंतरी के साथ हमारे संबंद हर दिन बहतर होते जा रहे हैं
05:06असल में एरान और भारत के बीच गहरे संस्कृतिक संबंद रहे हैं
05:10दोनों देशों का इतिहास हजारों साल पुराना है
05:22यह ऐसी चीज नहीं है जो समय के साथ बदल जाएगी
05:26हम स्वाभाविक रूप से इन संबंदों को हर दिन बहतर बनाने
05:30और उन्हें अपनी गहरी संस्कृति पर आधारित करने की कोशिश कर रहे हैं
05:40हम इसके आधार पर एक नया धाचा बना सकेंगे
05:43और दुनिया में बढ़ रही ताना शाही का मुकाबला करने में एक दूसरे की मदद कर सकेंगे
05:49ब्रिक्स समीट में भारत ने साफ कर दिया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सब को साथ लेकर चलने
05:56का मंज है
05:58भारत की ब्रिक्स अध्यक्ता पीपल सेंट्रिक और हुमेनिटी फर्स्ट एप्रोच पर आधालित है
06:10रिजिलियंस, इनोवेशन, कोपरेशन और सस्टेनिबिलिटी हमारी प्राथ्फिक्ता है रही है
06:22इन प्राथ्फिक्ताओं के साथ हमने ब्रिक्स सहियों को सामान्य जन से जोडने का विशेश बल दिया है
06:37भारत मंडपम में तस्वीरें भी खास रही
06:40साथ साल बाद भारत पहुँचे चीन के राश्पती श्री जिनपिंग का प्रधानमंतरी मोदी ने गर्म चोशी से स्वागत किया
06:46मंच पर मोदी चीनपिंग और रूस के राश्पती व्लादमिर पुतिन एक साथ नजर आए
06:51मोदी ने चीनपिंग का हाथ ठाम कर उन्हें मंच की सजावड दिखाई
06:55जहां रामिश्वरम के प्रसिध रामनात स्वामी मंदिर की तस्वीर भी लगी थी
06:59भारत की ब्रिक्स अर्धिक्सता के दोरां चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ
07:12अब हमें दीपक्षिय सहयोग पर चर्चा करने का अउसर मिल रहा है एक बार फीद भारत में आपका हार्धिक स्वागत
07:25है
07:25ब्रिक्स के मंच पर 21 देशों के नेता मौजूद रहे संदेश साफ था
07:30मत भेद अपनी जगा लेकिन वैश्विक मंच पर साथ आने की कोशिश जारी है
07:36दीपक्षिय रिष्टों के साथ साथ ब्रिक्स के भीतर सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुए
07:41लेकिन दिल्ली से सामने आई एक तस्विर ने खास तोर पर एक बार फिर से ध्यान खीचा
07:46प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी और रूसी राष्पती व्लादमीर फुतिन की मुलाकात के बाद
07:51दोनों नेता एकी कार में सवार होकर इनो परोम इंडिया और जोगी परदर्ष्णी के लिए रवाना हुए
07:56ये कार थी रूस के राषपती की कार और अस्सिनक
07:59दोनों नेताओं की बीच वी बातचीत में उर्जा, रक्षा, व्यापार, तक्नीक और वेश्विक संघर्षों से जुड़े मुद्धे शामिल रहे
08:46यानि ब्रिक्स की बैटकों की बातचीत में बातचीत में अच्छा कासा बड़ा कदम
08:57यानि ब्रिक्स की बैटकों के बात भारत रूस रिष्टों की गर्माहट भी साफ दिखाई दी
09:02दिल्चस्प बात ये है कि ये दोनों नेताओं की करीब दो हफ़ते के भीतर दूसरी मुलाकात है
09:0731 अगस को किर्गिस्तान के बिश्केक में स्यो सम्मेलन के तोरान भी मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी
09:14और अब दिल्ली में ब्रिक्स के मंच के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात ने भारत रूस रिष्टों की एहमियत को
09:20फिर सामने ला दिया
09:21भारत और रूस ने 2030 तक विपक्षिय व्यापार को करीब 70 अरब डॉलर से बढ़ा कर 100 अरब डॉलर तक
09:29ले जाने का लक्ष भी रखा है
09:32पुतिन ने पश्यमी दवाव और मौजुदा वेश्वीक आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए
09:37ब्रिक्स के भीतर आर्थिक सहयोग और वेकलपिक रास्तों की जरुवत पर सोर दिया
09:42रूस पहले ही कह चुका है कि उसके ब्रिक्स साज़ेदारों के साथ करीब 90 फिसदी भुकतान राश्टी मुद्राओं के जरिये
09:49हो रहा है
09:50यानि रूस के लिए ब्रिक्स सिर्फ राजनितिक मंच नहीं व्यापार और भुकतान के वेकलपिक रास्ते का भी महतपूर माध्यम बन
09:58चुका है
10:00ब्रिक्स समिट के समापन सत्र में दिल्ली डेकलरेशन 2026 को सभी सदस्ते देशों ने सर्व सम्मत्ती से मनजूरी ले दी
10:07प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी ने घोश्मा पत्र का मसौदा सदस्तियों के सामने रखा और पूछा कि क्या किसी देश को
10:14इस पर कोई आपत्ती है किसी भी देश ने आपत्ती नहीं जटाई
10:17इसके बाद दिल्ली डिकलेरेशन को सर्व सम्मत्ती से स्वीकार कर लिया गया दिल्ली डिकलेरेशन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
10:25की गई आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुक अपनाने को कहा गया आतंकवाद को धर्म से ना जोडने की अपील की
10:31गई आतंकियों और आ
10:47बड़ते वैश्वी तनाव पर चिंता जताई गई। ब्रिक्स देशों ने जंग और टकराव रोकने की कोशिशों को तेज करने की
10:54जरुत बताई। बातचीत और कूटनेती से विवात सुलजाने का संकल पलिया गया। सदस्ति देशों के बीच क्रोस पॉडर पेमिंट को
11:02आस
11:16सदस्ति देशों वाला ब्रिक्स दुनिया की करीब साड़े उन्चास फीजदी आबादी का प्रतिमिधित्त करता है। पीपी के आधार पर वैश्वीक
11:23जीटीपी में इसका हिस्सा करीब 40 फीजदी है और वैश्वीक व्यापार में करीब 26 फीजदी हिस्सेदारी बताई ज
11:35चाहूंगा, UN Security Council में रिफॉर्म अब और टाला नहीं जा सकता। इस विशेपर टैक्स बेज नेगोशेशन्स को निश्चित समय
11:49सिमा और स्पस्ट परणाम से जोड़ना होगा।
11:54उसी तरह Financial Institutions में, Voting Power, Leadership Positions और Policy Priorities आज की Economic Realities के अनुसार होनी चाहिए
12:10है।
12:12लेकिन ब्रिक्स के सामने सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है। डॉलर पर निर्भरता कितनी कम की जा जाती है।
12:19ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें Global Reform की दिशाय भी तै करनी होगी।
12:29Global Governance का वर्तमान स्ट्रक्चर एक पिरामिड जैसा दिखाई देता है।
12:36इसके उपरी भाग में पावर और डिसिजन बेकिंग केंदरी था है।
12:43और निचले भाग में वो देश हैं जो इन डिसिजन से प्रभावित होते हैं।
12:51लेकिन उने आकार नहीं दे पाते हैं।
12:56Global South आज वैस्वीक संकटों की फ्रंट रो में हैं।
13:03लेकिन डिसिजन बेकिंग की बैक रो में है।
13:08हमें इस पिरामिड अब प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म अब पार्टनर्शिप में बदलना है।
13:17जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य का स्टेक हो, हर प्रयास के केंदर में मानवता का विकास हो।
13:31ब्रिक्स देशों में स्थानिय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
13:35लेकिन यहां एक बात साथ है।
13:37ब्रिक्स की कोई साजा मुद्रा अभी अस्तित्व में नहीं है भारत भी ब्रिक्स को डॉलर के खिलाफ किसी साजा मुद्रा
13:44की लडाई के बजाए राश्रिय मुद्राओं में ब्यापार और डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के नजर्गे से देखता है यानि
13:51चुनौती �
13:52डॉलर को खत्म करने के नहीं विकल्पों को मजबूत करने की है अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए
14:01और एंबीशियस एजेंडा पर काम करना होगा इसके सुरुवात हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टिम से करनी होगी ब्रिक्स की
14:14अध्यक्सा हर वर्ष बदलती है
14:18किन्तु इसकी वज़े से हमारा इंस्टिटूशनल मोमेंटम नहीं रुकना चाहिए
14:26मैं ब्रिक्स कंटिनुटी एंड इंप्लिमेंटेशन मेकानिजम का प्रस्ताव रखता हूँ
14:34इसके तहर ट्रॉइका के माध्यम से सभी इनिशेटिव और आउटकम्स का फॉलो अप हो सकेगा
14:46हमें शिक्क्योर डिजिटल रिपोजिट्री बना सकते हैं
14:54इसमें हर नेड़े के साथ नोडल पॉइंट, समय सिमा और इंप्लिमेंटेशन स्टेटस
15:05दर्ज किया जा सकता है
15:09दिल्ली में ब्रिक्स का ये आयोजन भव्यता के साथ-साथ कूटनीति की कई परतें भी दिखा रहा है
15:14एक तरफ भारत रूस की पुरानी रणीतिक साजिदारी, दूसरी तरफ भारत-चीन के रिष्टों को संभालने की कोशिश
15:21तीसरी तरफ इरान जैसे देशों के साथ आर्थिक और रणीतिक संभाद और चौथी तरफ ग्लोबल साउथ को एक बड़ी आवाज
15:29देने की कोशिश
15:30यानि ब्रिक्स का मंच एक साथ कई दिशाओ में चल रही, कूटमीति का मंच बन गया है
15:36हैं सकता हैं, चुर्यों कि जह हम रती हैं कर फिर दोखंड़ने सांग माष्यूं.
15:42प्रहे हम लुर्च लल्च कर दो ले ढासे हुए धिए, जुर्यों कर दो हमादम।
15:52शियरों कर दो कि दो लगने साहिं हैं,令 मादम हैं लिएली इन्यूं थारे हम.
16:23दिल्ली में ब्रिक्स का ये सम्मेलन भले ही दो दिनों का हो लेकिन इसके सवाल कहीं लंबे है
16:29क्या ब्रिक्स अपने व्यापार को और बढ़ा पाएगा
16:32क्या स्थानिय मुद्राओं में कारोबार बढ़ेगा
16:34क्या ग्लोबल साउथ को ज्यादा मजबूत आवाज मिलेगी
16:37और सबसे बड़ा सवाल क्या इतने अलग-अलग हितों वाले देश एक साजह, आर्थिक और राजनितिक दिशा बना पाएंगे
16:45क्योंकि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ उसके 11 सदसी देशों की संख्या में नहीं है
16:50असली ताकत है उनके बाजार, उनकी उर्जा, उनकी आवादी, उनका व्यापार और बदलती दुनिया में अपनी जगत तै करने की
16:59उनकी कोश्ष
17:02दिल्ली में ब्रिक्स का मंच एक तस्वीर जरूर दिखा रहा है, दुनिया अब सिर्फ एक शक्ती केंद्र के इर्ध गिर्ध
17:09नहीं घूमना चाहती, लेकिन क्या ये कोशिश एक ग्लोबल ओर्डर में बदल पाएगी, इसका जवाब ब्रिक्स के भाशनों में नहीं,
17:16बल्क
17:29चारी करते हैं और फिर अगली बीटिंग का इंतजार करते हैं, लेकिन ब्रिक्स की कहानी थोड़ी सी अलग है, 2009
17:36में जब ब्रिक्स का पहला अपचारिक शिखर समेरन हुआ, तब ये चार देशों का समूथा, आज इसका दाइरा काफी बड़ा
17:43हो चुका है, नए देश जु
17:46हो चुके हैं, और अब सवाल ये है कि क्या ब्रिक्स दुनिया की अर्थ्यवस्था और कूर्टीती का नया पावर सेंटर
17:53बन रहा है।
18:39ब्रिक्स का ग्रोथ एंजिन होगा।
19:02एक तरफ अमेरिका की अगवाई वाली वेश्विक विवस्था थी, तो दूसरी तरफ दुनिया के बाग की हिस्सों में तेजी से
19:09कई देशों में उभरती अर्थ्यवस्थाई थी।
19:12इसी दोर में ब्राजील, रूस, भारत और चीन एक मंच पर आये और उस गुट का नाम रखा गया ब्रिक्ट।
19:20चार देशों का ये समू, आर्थिक सहयोग और वेश्विक मंचों पर विकाश्थील देशों की आवाज को मजबूत करने के मकसद
19:28से आगे बढ़ रहा था।
19:29और एक साल बाद ही, 2010 में दक्षिन अफ्रिका भी इस गुट में जुर गया।
19:38और ब्रिक बन गया ब्रिक्स, बी से प्राजील, आर से रश्या, आई से इंडिया, सी से चाइना और एस से
19:45साउथ अफ्रिका।
19:46लेकित सवाल ये है, आखिर इन देशों को एक साथ आने की जरुवत क्यों पड़ी है।
19:52क्योंकि ये सभी देश एक बात महसूस कर रहे थे, दुनिया के अर्थोयस्था बदल रही है, लेकिन वेश्विक संस्थाओं में
20:00ताकत का संतुलन अभी भी पुराना है।
20:02विश्व बैंक हो, IMF हो या वेश्विक आर्थिक फैसले, विकास श्रील देश ज्यादा बड़ी भूमिका चाहते थे।
20:09ब्रिक्स इसी अस्वंतुलन को चुनोती देने की कोशिश का एक हिस्सा बना है।
20:17हम एक दुश्रे की ताकतों को जोड़ को पूरे विश्व खास तोर पर ग्लोबल साउथ के कल्याण में महत्पण योगदान
20:26दे सकते।
20:27नील जो एक अमेरिकन इंवेस्टमेंट बैंकर थे उन्होंने ब्रिक का इस्तवाल किया था कि
20:34इमर्जिंग एकॉनमीज जो 21st century में होंगी उसमें ब्राजील, रश्या, इंडिया और चाइना चार देशों का उन्होंने नाम लिया था।
20:42और उसके बाद में लगभग 2006 में जैसे आप जानते हैं कि फॉर्र मिनिस्टर्स की मीटिंग हुई और उसके बाद
20:492010 में साउथ अफरिका को ने जोइन किया उसके बाद
20:58तो एक तरह का एकॉनमिक कोपरेशन जो बड़ी एकॉनमीज है दुनिया की उनके बीच में शुरू हुआ तो जियो एकॉनमिक्स
21:06जो है इसका एक फुर्डमेंटल अधार फूथ है मैं कहूँगा
21:09और फिर आया विस्तार का दौल ब्रिक्स में मिस्र, इखियोपिया, इरान, युएई और बाद में इंडोनेशिया जैसे देश जुड़े
21:19यानि ब्रिक्स का भुगोल सिर्फ दक्षिन अमेरिका, एशिया और अफरिका तक सीमित नहीं रहा
21:24उर्जा, ब्यापार, बाजार, जनसंख्या और रननीतिक महत हर मोर्चे पर इसका वजन बढ़ता जया
21:33आज ब्रिक्स में दुनिया की बड़ी आबादी रहती है, बड़े उर्जा उत्पादक, बड़े उभ्भोकता बाजार है, बड़ा मैनुफेक्ष्णिंग बाजार है,
21:41बड़ा प्राकृतिक संसाधन और तेजी से बढ़ती अर्थिरस्थाएं
21:45इस वर्ष हम ब्रिक्स के 20 यर्स मना रहे हैं, 2006 में जब इस समू की शुरुवात हुई थी, तो
22:03इसमें केवल चार देश थे,
22:06आज ब्रिक्स और ब्रिक्स पांटर्स मिलाकर, 21 कंट्रीज का हमारा परिवार है,
22:21आज ब्रिक्स के देश विश्वकी 50 परसंट पॉपिलेशन, 40 परसंट जीडिपी और 25 परसंट से दीख ट्रेड को रिप्रेजेंट करते
22:40हैं,
22:43इतना ही नहीं, इन वर्षों में, जहाँ ग्लोबल जीडिपी करीब धाई गुना हुई है,
22:53वहीं ब्रिक्स देशों की कम्बाइन जीडिपी करीब साड़े चार गुना हुई है,
23:04लेकिन ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ ये नहीं कि इसमें कितने देश है, असली ताकत है इन देशों के बीच
23:11होने वाला व्यापार,
23:13भारत को तेल चाहिए, रूस के पास ऊर्जा है, चीन के पास विशाल मैनुफेक्ट्रिंग ख्रमता है, ब्राजील क्रशी और कमोडिटी
23:21का बड़ा खिलाडी है, दक्षिन अफरिका अफरिकी महाद्वीप में रणीतिक महत्तु रखता है,
23:27यानि ब्रिक्स के भीतर ही एक विशाल आर्थिक एकोसिस्टम मौजूद है, और यहीं से कहानी पहुचती है G7 बनाम ब्रिक्स
23:35तर, एक तरफ दुनिया के पुराने और योगिक और विक्सित देश हैं, दूसरी तरफ तेजी से उभरती अर्थोयस्थाएं.
24:05ब्रिक्स की और नजर डालते हैं, ग्रिक्स से एधि हम इसको प्रेयास करते हैं, तो इसका GDP जो है कुल
24:11ब्रिक्स के देशों का या प्रिक्स के मंच का हम कहने हैं, तो 36 से 40 प्रतीशत का का काउन्ट
24:16होता है, यह G7 के कुल जमाज यह जो सदसे देश हैं, इनके GDP से यधि हम त
24:25दिख्टि से देखें, अर्थवेवस्था की दिख्टि से देखें, तो भी आज BRICS PLUS का जो मंच है, वो हमको ज्यादा
24:31शक्तिवान दिखाई पड़ता है, उसके बाद आप चाहें मार्केट की शक्ति को देखें, तो चीन और भारत जैसी शक्ति को
24:38देखें, तो ब्रजील जै
24:55देखें सामरिक द्रिष्टी से देखें या अर्थव्यवस्था की द्रिष्टी से देखें दिश्चित तोर पर ब्रिक्स का जो मंच फैला है
25:02वो जी 7 के देशों से आज कहीं ज्यादा हमको शक्तिवान और विस्तार लेता हुआ नजर आता है
25:08लेकिन यहाँ भी एक सवाल है क्या ब्रिक्स सचमुच एकजूट है क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद है
25:14रूस और पश्चिम के बीच टकराव है इरान और युयक के रिष्टे तनापून है और हर देश के अपने राश्ट्रिय
25:21हित है इसलिए ब्रिक्स को नाटो
25:24या European Union की तरह एक क्रित संगठन समझना फिलहाल सही नहीं होगा
25:31दुनिया में ताकत सिर्फ मिसाइलों से तेर नहीं होती
25:34कई बार असली ताकत होती है पैसा
25:37और दुनिया के पैसे की सबसे बड़ी ताकत है अमेरिकी डॉलर
25:41लेकिन आप ब्रिक्स इसी विवस्था को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है
25:45सवाल है क्या ब्रिक्स डॉलर का विकल तयार कर सकता है
26:09तेल खरीदना है
26:10अंतराश्टिय व्यापार करना है
26:12विदेशी मुद्रा रखना है
26:13बड़ी बैंकिंग वियस्था से जुड़ना है
26:15आज भी सबसे आगे डॉलर है
26:17इसलिए अमेरिका का आर्थिक प्रभाव सिर्फ उसकी जीडिपी या सेना से नहीं आता है
26:22बलकि डॉलर की वैश्पिक भुमिका भी उसकी टाकत का बड़ा हिस्सा है
26:29आज ग्लोबल ट्रेड के लिए डॉलर ज़रूरी है
26:32आज बैंकिंग सिस्टम के लिए डॉलर ज़रूरी
26:34आज फाइनेंसिल सिस्टम के लिए डॉलर ज़रूरी
26:38लेकिन ब्रिक्स देश अब सवाल पूछ रेगा
26:40अगर हम आपस में व्यापार करते हैं
26:42तो हर बार डॉलर की ज़रूरत क्यों हो
26:44भारत और रूस के बीच स्थानिय मुद्राव में व्यापार बढ़ाने की पोशिशन हुई है
26:49चीन भी स्थानिय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है
26:53और ब्रिक्स के भीतर भी डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर चर्चा होती रहे हुए
27:25ब्रिक्स की अपनी कोई मुद्रा अभी लॉंच नहीं हुए
27:28हलांकि रूसी राश्पती पुतिन ने पिछली बार जब ब्रिक्स के सम्मेलन में एक नोट दिखाया था
27:33जिसमें ब्रिक्स के पांचों देशों के राश्ट्रिय जंडे की जलक नजार आ रहे थी
27:37कुल मिलाकर ब्रिक्स करन्सी अभी भविश्य की चर्चा है
27:41दुनिया के विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा सबसे बड़ा है
27:45बिसके आंकलों के मुताबिक रोजाना होने वाले वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में
27:5089.2 फीजदी लेंदेन डॉलर से होता है
27:52इसके बाद यूरो की हिस्सेदारी 28.9 फीजदी जापान गेन की 16.7 फीजदी और बिटिक्स पाउंड की 12.9
28:01फीजदी है
28:01चीनी करन्सी के हिस्सेदारी करिब 7 फीजदी है
28:04जबकि भारती करन्सी के हिस्सेदारी सिर्फ 1.6 फीजदी है
28:08यानि तस्वीर साफ है डॉलर सबसे आगे है
28:13ब्रिक्स के सामने सबसे बड़ी चुनाती अपनी मुद्राओं में अंतराश्टी कारुबार बढ़ाने की है
28:19यही वज़ा है कि ब्रिक्स की चर्चा अब बैंकिंग तक पहुँच गई है
28:232015 में चीन के शंगाई में New Development Bank की स्थापना हुई
28:27जिसका उदेश है किनफरा स्ट्रक्चर और विकास पर योजनाओं के लिए पैसा उपलब्द कराना
28:32संदेश साफ यागर मौजूदा वैश्विक वित्य समस्थाओं का विकल्प नहीं है
28:49है कि युऊदगे लोकल करेंशीज में आपस में ट्रेड़िंग पर यहीं एक होल।
28:56कि अधिए गलोबल एकनोमिक ग्रोध को गती देते हैं इस उन्हें में उच्षीद भूमी का मिलनी चाहिए हैं
29:16दूसरा रिस्पॉंसिवनेश बैस्विक संस्थानों में मानोता का विश्वा तभी बनेगा जब ये समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में सक्षम होंगे
29:32हमें कलेक्टिव रिस्पॉंस के स्पीड, स्केल और लास्ट माइल इंपेक्ट पर ध्यान देना होगा
29:42जानकार कहते हैं कि अमेरिका को हराने के लिए सिर्फ ब्रिक्स करेंसी काफी नहीं होगा
29:47इसके लिए चाहिए विश्वस्निय मुद्रा, गहरी वित्य बाजार विवस्था, स्थिर बैंकिंग सिस्टम, तकनीक और सबसे ज़्यादा जरूरी दुनिया का भरोसा
29:57इसलिए असली सवाल ये नहीं कि डॉलर कब खत्म होगा
30:00सवाल ये है कि क्या दुनिया धीरे-धीरे डॉलर के अलावा दूसरे विकल्प के लिए भी तयार हो रही है
30:10ब्रिक्स की कहानी में सबसे दिल्चस्प किरदार है भारत
30:14क्योंकि भारत एक साथ तीन अलग-अलग दुनिया में खड़ा है
30:17ब्रिक्स में चीन और रूस के साथ, कोड में अमेरिका, जपान और अस्ट्रेलिया के साथ
30:23और दुनिया के साथ अपने रिष्टों में भारत की पहली प्राक्मिक्ता है अपना राश्ट्रे हित।
30:29तो ब्रिक्स में भारत का असली गेम दरसन क्या है?
30:34भारत का GDP दो गुना हुआ है, भारत का एक्सपोर्ट 35 गुना यानि 35 टाइम बढ़ गया है।
30:46दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मेनुफेक्टरर है।
30:532014 के बाद भारत ने अब तक 50,000 आधुनिक रेल कोच बनाए हैं।
31:09भारत ब्रिक्स का संगस्थापक सदस्य है, लेकिन भारत ब्रिक्स को अमेरिका विरोधी मंच के रूप में नहीं देखता है।
31:15भारत की रणिती है स्ट्रेट्जिक अटोनॉमिक यानि दोस्ती सबसे लेकिन फैसला अपने हिप में।
31:24सूरज हमारा हो, समंदर भी हमारा हो, नाव हमारी हो, नाविक भी हमारा हो, लहरों पर विजय लिखे, वो होसला
31:44हमारा हो,
31:45उडान हमारी हो, आस्मान हमारा हो, तेज हवाओं से टक्राएं, वो जजबा हमारा हो,
31:59सपना हमारा हो, संकल्प हमारा हो, आत्मनिर भर भारत का पर्चम हमारा हो।
32:09रूस के साथ भारत का पुराना रणितिक रिष्टा है, रक्षा, उर्जा, पर्मानु सहयोग और तेज, रूस पर पश्चमी प्रतिवंधों के
32:17बावजूद, भारत अपने राष्टी हित के मुताबिक रूस से उर्जा खरीद कर रहा है।
32:40दूसरी तरफ चीन है, भारत और चीन के बीद सीमा विवाद है, लेकिन चीन भारत का बड़ा व्यापारिक साजेदार भी,
32:47यानि प्रतिस परधा भी कारुबार भी।
32:50अब बावज पर चीन के बीद साथ पर चीन के बीद साथ जादा है, वहां रहा है अब हैं जैसे
33:09फटलाइजर की शॉटेज थी तो चाइना को एप्रोच किया, गवर्मेंट ओंडिया ने, हम सब ने लॉबी किया, ऐसे नाज़क वक्त
33:16पे चाइना ने हमें बहुत आदी कीम
33:19पर फर्टलाइजर दिया, तो यह ब्रिक्स की वज़ा से ना काफी समीकरन चेंज हो रहा है, देश क्लोज आ रहे
33:28हैं, हमारी डिपेंडेंस ओन वान सप्लाइज सोस टू, मैंने जैसे का फर्टलाइजर में कोई भी चीज जो एक सौर पे
33:36की आती चाइना से अभी इंपोर्�
33:42और फिर अमेरिका, अमेरिका भारत का रणीतिक साज़ेदार है, रक्षा सहयोग, तकनीत, इंडो-पैसिफिक, क्वाड और चीन को लेकर दोनों
33:50की चिनताएं, यानि भारत के लिए अमेरिका को छोड़ना संभब नहीं और चीन से पूरी तरह दूरी बनाना भी आसान
33:57नहीं
34:09यही कारण है कि ब्रिक्स में भारत की भूमी का बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, भारत चाहता है कि ब्रिक्स
34:16सिर्फ पश्चिम विरोधी मंचिना बने, बलकि गलोबल साउथ की आवाज बने, विकाष्ट सील देशों के लिए वित्त, तकनीक, व्यापार, खार्दी
34:24सु
34:27संगस्थाओं में सुधार, यह भारत की प्राच मिक्ताओं में शामी भीडिए।
35:07भारत में ब्रिक्स को सिर्फ पुराने आर्थिक मुद्दों तक सेमित नहीं रखा।
35:27सबसे बड़ी चुनाती है क्योंकि ब्रिक्स में चीन का आर्थिक वजन बहुत बड़ा है।
35:32अगर भारत ब्रिक्स को मद्बूत करता है तो चीन भी मद्बूत होता है।
35:55भारत की मीती साथ है अमेरिका का विरोध नहीं चीन के सामने जुकना नहीं रूस से रिष्टा तोड़ना नहीं और
36:02साथ ही इन तीनों के पीछ अपने हीद के लिए जगा बनाना ब्रिक्स में भारत सिर्फ सदस से नहीं बैलन्स
36:08ओफ पावर का खिलाडी है
36:10ब्रिक्स के मौझुदा 11 सदस से दुनिया की करीब सारे 49 फीज़दी आबादी का प्रतिनिधितु करते हैं और दुनिया के
36:18करीब 38.3 फीज़दी भुभाग में फैले हैं
36:21यानि ब्रिक्स का विस्तार सिर्फ नक्षे पर देशों की संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है ये दुनिया के बड़े बाजारों
36:28और संसाधनों के एक मंच पर आनी की कहानी भी है
36:31दुनिया के बाजार में उर्जया का आखड़ा देखिए
36:35दुनिया की कुल उर्जा उत्पादन में करीब 44 फीजदी है
36:38दुनिया के तेल भंडार में करीब 44 फीजदी हिस्सा
36:41वैश्वीक प्राकृतिक गैस उत्पादन में करीब 38 फीजदी
36:45और प्राकृतिक गैस के भंडार में करीब 55 फीज़दी हिस्सा ब्रिक्स देशों के पास है
36:50यानि उर्जा के मोर्शे पर ब्रिक्स की सामुई क्षमता को नजरंदास करना आसान नहीं है
36:59कि इस वकत के कंट्री हैं मेंबर्स दस कंट्री तास पारटनर कंट्री तो आदे से जाद है दुनिया का
37:09पॉपुलेशन कंजुमर पेस छिउबनट डिवेडन कहां पर है यहीं पर है दूसरे चीज़ अगर आप देखें कि लगभग
37:15चालिज से 42 प्रतिशत जो GDP है, Global GDP, वो कहां से आ रही है, यहीं से आ रही है,
37:21इस वाकत 21st century में जो economic pivot है, वो इस country, इन countries की तरफ धुकरा है, तो यह
37:30natural है कि बड़ी-बड़ी economies, सबसे बड़ी economies है, different intercontinental cooperation है सबका, तो चाहे वो Latin America
37:37हो, चाहे अफरीका हो, चाहे एशिया हो, एशि
37:42या आपके South Asia, सब तरह के देश इसके अंदर शामिल है, तो जाते से जाते देशों को, एक तरह
37:48का मैं समझता हूं, interest लग रहा है, तो पच्छीस-30 countries अभी वेट भी कर रहे हैं, कि इस
37:54तरह से इसमें जोइन किया जाए, तो अभी क्या है कि हम जोइन बढ़ाएंगे, इसका expansion
38:27धीरे-धीरे होगा, लेकिन पहले consolidation होगा।
38:29वजन बढ़ा है, इतना है नहीं कारुबारी रिष्टे ने भी BRICS को मजबूत किया है।
38:59और पढ़ा सकते हैं।
39:05और इसके बाद आता है पेमेंट सिस्टम।
39:07BRICS में डॉलर को हटा कर कोई साजा मुद्रा अभी अस्तित्तुमें नहीं है, लेकिन स्थानिय मुद्राओं में व्यापार और सीमा
39:14पार भुक्तान को आसान बनाने पर चर्चा लगातार होती रही है।
39:18यानि मौजूदा अजेंडा सिर्फ BRICS करंसी लॉंच करना नहीं था, बलकि ट्रेड सेटल्मेंट और पेमेंट मेकनिज्म को भी मजबूत करना
39:27था।
39:27यानि BRICS के भविश्य को समझने के लिए सिर्फ किसी संभावित BRICS करंसी को देखना जरूरी नहीं है।
39:34Innovation at population scale भारत की Unified Payments Interface UPI इसने population scale पर financial inclusion और digital transaction को
39:51नई गती दी है।
39:53आज विश्व के 50% real-time payments इसी टेकनलोजी पर होते हैं।
40:04इसके बाद आता है तकनीक। BRICS के सामने आने वाले सालों में सबसे बड़ी चुनाती सिर्फ पैसा नहीं टेकनलोजी तक
40:11पहुँच भी होगी।
40:13AI, Semiconductor, Digital Infrastructure, Cyber Security, Space और नई उर्चा तकनीक है।
40:25भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है।
40:33सबसे बड़े टैक टैलेंट पूल का केंद्र है।
40:41सबसे बड़े टैक एनेबल इकोसिस्टिम का उदारन है।
40:48भारत नई टकनलोजी बनाता भी है और उसे अभूत पुर्वत तेजी से अपनाता भी है।
41:04ब्रिक्स के अलगले देशों की अपनी तकनी की ताकत है।
41:07लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या ये ताकतें एक साजह तकनी की सहयोग में बदल सकती हैं।
41:15भारत इस वकत कर रहा है अठार्मी समिट को चेर कर रहा है।
41:19इस समिट में आप देखेंगे कि जादेतर चीजों पर कॉंक्रीट आउटकम्स आएंगे।
41:23चाहें वो डिजिटल पॉब्लिक एफ़रे स्ट्रक्चर के बारे में हो।
41:26इस स्किलिंग के बारे में हो ड्य involves के बारे में हो, ट्रेइड के बारे में हो, आई investment technologies
41:31के बारे में हो, या human resources के बारे में हो, आपके skill development, या जितनी भी together चीज़े थे
41:37मैं समस्ता हूं कम सब Traps, सब इस वरेंट क्रीज हैं।
41:46तो चैलेंजेज ब्रिक्स के सामने भी हैं, तो दुनिया के सामने चैलेंज आप दुनिया में रहते हों, तो जो एक
41:51इंटरनाशनल इस वकद ग्लोबल चर्ण चल रहा है, वार्स चल रहा है, वो सब एक बड़ा चैलेंज हैं ब्रिक्स के
41:56लिए भी, तो ब्रिक्स एक monolithic organization नहीं
41:59हैं, लेकिन यह है कि cooperative organization है, जिसमें economy और technological और humanitarian approach है, वो ज़्यादर माइने रखती
42:10हैं.
42:13ब्रिक्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, आपसी मतभेद, ब्रिक्स अब सिर्फ एक सालाना शिखर सम्मेलन का नाम नहीं है,
42:20इसके पास बड़ा बाजार है, बड़ी आबादी है, उर्जा है, क्रिशिक शमता है, व्यापार है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है
42:28कि क्या �
42:28ये आर्थिक ताकत एक साजहा रणितिक ताकत में बदल पाएगी, अगर जवाब हाँ हुआ, तो ब्रिक्स स्तिर्फ दुनिया के नक्षे
42:35पर मौजूद देशों का समू नहीं रहेगा, दुनिया के बदलते पावर बैलेंस का एक बड़ा हिस्ता बन सकता है
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