🙏 ॐ जय श्री विश्वकर्मा 🙏
भगवान विश्वकर्मा जी को समर्पित यह भक्तिमय आरती और भजन श्रद्धा एवं भक्ति के भाव से प्रस्तुत किया गया है।
इस भजन में भगवान श्री विश्वकर्मा जी के दिव्य स्वरूप, उनके शिल्प एवं निर्माण के ज्ञान तथा भक्तों पर उनकी कृपा का गुणगान किया गया है।
🎵 Traditional Devotional / Aarti
यह भजन विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा, विश्वकर्मा जयंती, पूजा-अर्चना, आरती और devotional listening के लिए बनाया गया है।
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🙏 भगवान श्री विश्वकर्मा जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे। 🙏
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ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता,
रक्षक श्रुति धर्मा॥
आदि सृष्टि में विधि को,
श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शास्त्र का जग में,
ज्ञान विकास किया॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ऋषि अंगिरा ने तप से,
शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःख कीना॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
जब रथकार दम्पति,
तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत्ति हरी सगरी॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज,
सकल रूप साजे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ध्यान धरे जब पद का,
सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे,
अटल शांति पावे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती,
जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी,
सुख सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा,
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता,
रक्षक श्रुति धर्मा॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
प्रभु जय श्री विश्वकर्मा...