00:28गणपती बप्पा मूरिया
00:30ये सारी जानकारी आईए सुवडियो में आपको देते हैं
00:34शास्त्रों में गणेशी को प्रथम पूज्य माना गया है
00:37इसलिए किसी भी शुबकारी या पूजन में उन्हें जनेव धारन कराया जाता है
00:41जनेव में तीन धागे होते हैं
00:43जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक है
00:45गणेशी को जनेव चड़ाने से तृदेवो का आशरवाद मिलता है
00:49सनातन धर्म में यग्यो पवत को आत्म नियंत्रन, पवत्रता और विद्या का प्रतीक माना गया है
00:55गणेशी बुद्धी के देवता हैं
00:58इसलिए उन्हें जनेव अर्पित करने से बुद्धी ज्यान और एकागरता बढ़ती है
01:01जनेव चड़ाने से पहले उसे थोड़ा सा गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर ले
01:05सफेद जनेव पर हल्दी या कुमकुम का हलकाते लख लगाए
01:09गनेशी को हल्दी लगा जनेव बहुत प्रिये है
01:11जनेव अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करें
01:25अगर ये मंत्र आपको कठिन लग रहा है तो ये जपे
01:32गनेशी को जनेव हमेशा उनके बाय कंधे से होकर दाहिने तरफ की और पहनाय जाता है
01:37बाय से दाया क्यों? देवता पूजा में जनेव हमेशा सव्य यानि बाय कंधे पर ही धारन करते है
01:44अगर प्रतिमा बहुत छोटी है ये मूर्ती पर जनेव लपेटना संभव नहीं है
01:48तो जनेव को मोड कर गनेशी के बाय हाथ या कंधे को सपर्ष कराते हुए उनके चरणों में अरपत करने
01:53जनेव स्थापना के समय पंचामरत स्नान या सांकेतिक स्नान जरूर कराएं
01:59यदि आप नई मूर्ती स्थापित न करके अपने मंदर के गनेशी की ही सामाने पूजा कर रहे हैं
02:04तो भी गनेश चतुर्थी के दिन उन्हें नया जनेव जरूर अरपत करें
02:08अब सवाली उठता है कि गनेव कब उतारें
02:10अगर आपने नई मूर्ती की स्थापना की और विसर्जन भी करेंगे
02:13तो विसर्जन के साथ ही जनेव को भी विसर्जित कर दे
02:17लेकिन अगर आप अपने इस थाई मंदर में विराजमान गनेशी को जनेव पहना रहे हैं
02:22तो उसे कभी भी नहीं उतारना चाहिए
02:23उसे वैसे ही पहने रहने दे अगर कुछ दिनों बाद वो गंदा हो जाए आप गंपती पपा को नया जन्यों
02:30चड़ाना चाते हैं तो अगली चतुर्ती या दिवाली पर पुरा ना निकाल कर बहते जल में उसे प्रवाहित कर दे
02:36या पीपल के पेड़ के पास रख दे और नय
02:38जन्यों इसी विधी से दोबारा पहना दे फिल हाल असे वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
02:44साथ ही चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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