00:04सोचिए, एक तरफ सजधच कर तयार महिलाएं, हाथों में महंदी, माथे पर संदूर, पैरों में पायल और चहरे पर एक
00:11अलग ही आस्था
00:12और दूसरी तरफ एक ऐसा व्रत जिसमें पूरे दिन अन्तो दूर, पानी तक ग्रहन नहीं किया जाता
00:18रात भर जाकर भगवान शेव और माता पारवती की पूजा की जाती है, यही है हरताली का तीच
00:25हिंदू धर्ब में महिलाओं के सबसे महत्वपुन व्रतों में से एक
00:29लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस वरत के पीछे सिर्फ पती की लंबी उम्र की कामना नहीं बलकि माता
00:35पारवती के उस संकल्प की कहानी है
00:37जिसमें उन्होंने अपनी इक्षा के जीवन साथी को पाने के लिए एक अठोर तपस्या की थी
00:42नमस्कार मेरा नाम है रिचापर आशर और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:47सबसे पहले बात करते हैं इस साल हर्तालिका तीज कब है
00:512026 में हर्तालिका तीज सोमवार यानि की 14 सितंबर को मनाई जाएगी
00:55अलाकि तृत्या तित्थी जो है वो 13 सितंबर की सुभे करीब 7 बच कर 8 मिनट से शुरू हो जाएगी
01:01और 14 सितंबर की सुभे करीब 7 बच कर 7 मिनट के आसपास तक रहेगी
01:05इसलिए तारीख को लेकर लोगों में कन्क्यूजन देखनी को मिल रहा था
01:09लेकिन उद्या तित्थी के अनुसार उसके आधार पर 14 सितंबर को हर्ताली का तीज का वृत्त मनाया जा रहा है
01:15दिली के पंचांग के मुताबिक 14 सितंबर की सुभे 6 बच कर 5 मिनट से 7 बच कर 6 मिनट
01:21तक पूजा का प्रमुख मुहूर्थ है
01:22अब अलग-अलग शेहरों में सुर्योदों के समय के कारण मुहूर्थ में थोड़ा अंतर रह सकता है
01:28अब आते हैं उस कहानी पर जिसने इस वृत को इतना खास बनाया
01:32पौरानिक मानेता के अनुसार माता पार्वती भगवान शेव को पती के रूप में पारा जाती थी
01:38लेकिन उनके पिता हिमवान उनका विवा भगवान विश्नु से कराना चाहते थी
01:43पार्वती भगवान शेव को अपना जीवन साथी मान चुकी थी
01:47ऐसे में उन्होंने अपनी सखी के साथ वन का रास्ता चुना और वहां जाकर भगवान शिव की प्राप्ति के लिए
01:53कठो तपस्या शुरू करती
01:55कहा जाता है कि बाता पार्वती ने कठिन तप किया ध्यान लगाया और अपने इक्षा से पीछे नहीं हटी
02:02उनकी सखी उन्हें वन में ले गई थी ताकि पार्वती अपनी तपस्या पूरी कर सके है इस वजह से इस
02:07वरत को हरत तालिका कहा गया है
02:10हरत यानि की हरन या दूर ले जाना और आलिका यानि की सखी
02:15यानि की ये वरत जिसमें माता पारवती को उनकी सखी वन में ले गई थी
02:20मानेता है कि माता पारवती की तपस्या से प्रसन होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्विगार किया
02:26था
02:26इसी आस्था के साथ महिलाएं हर्ताल का तीज पर शेव पार्वती की पूजा करती हैं
02:31इस वरत की सबसे बड़ी खासियत है इसका कठिन स्वरूर
02:35कई महिलाएं इसे नर्जला वरत के रूप में रखती हैं
02:39यानि की पूरे दिन पानी ग्रहर नहीं करती
02:42दिन भर पूजा पाठ, शोपार्वती की अराधना और तीज की कथा सुनने की परंपरा है
02:48कई जगे रात में जाग्रेंट भी किया जाता है
02:51अलकि व्रत रखने की जो विधी है वो परिवार और छेतर की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है
02:57हर्तालिका तीज को सर्फ विवाहित महिलाएं ही नहीं करती बल्कि अविवाहित कन्याय भी रखती है
03:03विवाहित महिलाएं जहां वेवाहिक सुख पती की दिरगायू और परिवार की खुश हाली की कामना करती है
03:09वहीं अविवाहित लड़कियां, मंचाहें और योग्या जीवन साथी की कामना से ये व्रत करती हैं
03:16इसकी प्रेर्णा भी माता पारवती की कथा से ही जुड़ी मानी जाती है
03:20पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतीमा या मिट्टी से बनाई गई आखरितों की पूजा होती है
03:26कही छेत्रों में गनेश जी की भी पूजा की जाती है
03:29मैलाय सोलह श्रिंगार करती है
03:31नई साड़ी या पारंपरिक वस्तर पहनती है
03:33महन्दी लगाती है शिव पार्वती को फूल, फल, बेलपत्र और अन्या पूजन सामगरी अरपत करती है
03:39श्रिंगार का समान अरपन किया जाता है
03:42लेकिन हर्टाली का तीज का असली संदेश सिर्फ वरत की कठिनाई में नहीं है
03:46ये पर्व संकल्प, प्रेम, धैर और अपनी एक्षा के लिए संघर्ष की उस कहानी को याद करता है
03:53जिसमें माता पार्वती ने अपने निरनाय से समझहोता नहीं किया
03:57आज के समाए में जब त्योहारों का स्वरूप बदल रहा है
04:00हर्तालिका तीज की परंपरा भी अब करूड महिलाओं को जोड़ती है
04:03कहीं जूले सच्टे हैं, कहीं लोगीद काय जाते हैं, कहीं महिलाएं एक दूसरे को सुहा का सामान देती हैं
04:10और कहीं रात भर्षयों पार्वती की कथा और भजन चलते हैं
04:13तो इस हर्तालिका तीज पर जब आप किसी महिला को निर्जला वरत करते, पूजा करते या सोला श्रिंगार करते देखें
04:19तो याद रखिएगा
04:20यह सिर्फ एक त्वहार नहीं है बलकि माता पार्वती के उस संकल्प की याद है
04:25जिसने तपस्या को प्रेम और विश्वास के शक्ती में बदल दिया और शायद यही हर्तालिका तीज का सबसे खोबसूरत संदेश
04:33है
04:33लेकिन इस कहानी में जो मैंने आपको शुरूँ में बता था इस पूरे खबर में कि फूजा पाट के दौरान
04:39इस दिन महिलाएं निर्जलब रखती है
04:42यादि पूरे दिन एक पानी का बूद भी नहीं लेती हैं लेकिन इस में समय के साथ बदलाव आया है
04:48अब समय के साथ क्योंकि ऐसा environment है महिलाएं जॉब करती हैं तो हिंदु धर्म में सनातन धर्म की खुबसूर्टी
04:56ही यही रही है कि जो rituals होते हैं वो समय के हिसाब से बदले जाते हैं
04:59और अब यह काफी बदलाओ इसमें आ चुका है अब महिलाएं अपनी आस्था से जहल ग्रहन करती हैं जूस पी
05:06लेती हैं हलका फलहार कर लेती हैं यानि कि स्वास्त को ध्यार में रखते हुए ही त्योहार की और भगवान
05:13की अराधना होती है यह भी एक जो जरूरी lesson है आज के
05:18जमाने में महिलाएं दे रही हैं और actually अगर देखा जाए तो स्वास्त को सरवोपरी रखना ही चाहिए अगर आप
05:25स्वस्ती नहीं रहेंगी तो आप अपने पती के साथ या फिर अपने उस जीवन संगनी के साथ कैसे अपनी जो
05:32जीवन है उसको आगे बढ़ाएंगी इसलि�
05:45स्वस्त रहें यानि कि पुझा भी हो जाये आराधना भी हो जाया और स्वास्थ बता रहें आप कैसे बनाती हैं
05:50टीज के पर्व को हमें comment मैं जरूर बताइए क्या आप पानी भी thi
06:10की तृतिय थी जो इस बार दो तारीकों को पड़ रही है लेकिन अगर आप भी हर तालिका तीज का
06:16अवरत रखने की तयारी कर रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि शास्त्र और पंचांग के हिसाब से सही तारीक
06:22क्या है पूजा का सबसे शुब समय कौन सा है और किस समय राहु
06:27काल रहेगा नमस्कार मेरा नाम है रिचापर आशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी दरसल भादरपद शुकल पक्ष
06:34की तृतिया तिथी यानि कि 13 सितंबर 2026 को सुभे 7 बच कर 8 मिनट से शुरू होगी और 14
06:41सितंबर की सुभे 7 बच कर 6 मिनट तक रहेगी यानि क
06:45कि तृतिया तिथी दोनों दिन मौझूद रहेगी इसी वचे से तारीख को लेकर ब्रह्म पैदा हो रहा है लेकिन उद्या
06:51तिथी के नियम के अनुसार हर्तालिका तीज का वरत 14 सितंबर को यानि कि सोमवार को रखा जाएगा दिली के
06:58पंचांग में भी 14 सितंबर को ही हर्त
07:14पुन माना जाता है और यह सिर्फ इस वरत की कहानी नहीं है आप किसी भी वरत तिवहार को देख
07:19लीजे जो हिंदु धर्म का होता है उसमें उद्या तिथी की ही मान्यता होती है तो जो भी दो तिथी
07:24आती है उनमें जो उद्या तिथी आने कि जिसन सुर्य उद्य के दिन का
07:28जो आज्ट रहता है। उसको ये वैलिड क्या जाता है।
07:30अब 13 सितंबर को सुर्य घर के सम्यत रुदीया त bundle ये ऊधियू नहीं हुई होगी।
07:34बलकि तृटिया सुभए साथ बज़ कर आट मिनिट के बाद के बाद शुरू होगी।
07:38वहीं 14 सितंबर को सुर्योदय के समय तृतिया तिथी चल रही होगी और सुबह 7 बच कर 6 मिनट तक
07:44रहेगी
07:44इसलिए वरत के लिए 14 सितंबर की तारीक को अधिक उप्योगत माना गया है
07:48हर्तालिका तीप्ष का वरत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है
07:51मानेता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पती के रूप में पाने के लिए कठोर्ट पस्या की थी
07:56इसी शुरधा और संकल्प से विवाहित महिलाएं पती की लंबी आयू, सुखी दाम पत्य जीवन और अखंड सौ भाग्य की
08:04कामना से ये वरत रखती है
08:06वही अविवाहित करन्याय मंचाहेवर की प्राप्ति के लिए हरताली का तीज का व्रत करती है
08:11अब बात करते हैं पूजा के शुब महूर्थ की
08:1414 सितंबर को सुबह ब्रह्म महूर्थ में 4 बचकर 32 मिनट से 5 बचकर 19 मिनट तक रहेगा
08:20इस समय स्टान आधी करके व्रत का संकल प्रिया जा सकता है
08:24इसके बाद सुबह हरताली का तीज की पूजा के लिए 6 बचकर 5 मिनट से 7 बचकर 6 मिनट तक
08:29समय शुब माना गया है
08:31पंचांग के अनुसार इसी दिन इसी दौरान तृतिया तिथी भी विद्यमान रहेगी
08:35अगर आपके घर में हरताली का तीज की पूजा प्रिदोशकाल में करने की परंपरा है
08:39तो शाम को सुर्यास्त के बाद पूजा की जा सकती है
08:43दिली के हिसाब से सुर्यास्त करीब 6 बचकर 27 मिनट के आसपास होगा
08:47इसलिए स्थानिय पंचांग के अनुसार पिदोशकाल में पूजा का समय तए करें
08:51अलग-अलग शेहरों में सुर्योदय और सुर्यास्त के समय में थोड़ा अंतर होनी के कारण
08:56पूजा के महुर्त में भी कुछ मिनट का फर्क हो सकता है
09:0014 सितंबर को सुभे राहुकाल करीब 7 बचकर 38 मिनट से 9 बचकर 11 मिनट तक बताया जा रहा है
09:07ऐसे में इस सब्धी में शुबकार्य या फर विशेश पूजा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है
09:13इसलिए अगर सुभे पूजा करनी है तो राहुकाल से पहले उपलब दिशोब मोर्त में पूजा करना बहतर रहेगा
09:19हर्तारिका तीज पर भगवान शिव और माता पारवती की पूजा की जाती है
09:24महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, सोलश फ्रंगार करती हैं
09:28और शिव पारवती को फल, पूल, बेलबतर, सिंदूर अन्य पूजान सामागरी अर्पित करती हैं
09:33हलाकि निर्जला व्रत स्वास्त की स्तिति और व्यक्तिक अतक्षमता की अनुसार ही रखना चाहिए
09:38कोल में राकर साल हर्तालिका तीज की सही तारी को लेकर केंफ्यूशन खत्म हो गया है
09:44हर्तालिका तीज का व्रत 14 सतंबर 2026 दिन सोंवार को रखा जाएगा
09:48त्रत्यातिती 13 सतंबर सुभे 7 बच कर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सतंबर सुभे 7 कर 6 मिनट तक
09:55रहने वाली है
09:56और 14 सतंबर की सुभे पूजा के लिए करीब 6 बच कर 5 मिनट से 7 बच कर 6 मिनट
10:02तक सबसे प्रमुख समय रहेगा
10:04हलाकि पूजा का सटीक समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे पीछे हो सकता है
10:09इसलिए पने स्थानिय पंच्वां के समय को प्राथमिक्ता देना उचत रहेगा
10:1414 सितंबर को दो बड़े पर्व
10:16हर्तालिका तीज, गनेश चतुर्थी, साथ-साथ
10:2314 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक लिहाद से बेहत खास होने वाना है
10:28क्योंकि इस बार हर्तालिका तीज और गनेश चतुर्थी, दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे
10:34ऐसे में वरत अखने वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है
10:37कि दोनों पर्व की पूजा कैसे होगी, किस की पूजा पहले करनी है और वरत का पारण कब किया जाएगा
10:44पंचांग की गनुना के मुताबिक 14 सितंबर की शुरुआत तिथी से होगी
10:49और सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट पर चतुर्थी तिथी शुरू हो जाएगी
10:53इसी वजह से हर्तालिका तीज और गणीश चतुर्थी दोनों का पर्व 14 सितंबर को ही मनाय जाएगा
10:59सबसे पहले बात हर्तालिका तीज की
11:01भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतिय तिथी 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर शुरू हुई
11:07और 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी
11:11उदया तिथी के नियम के चलते हर्तालिका तीज का वरत 14 सितंबर को रखा जाएगा
11:16इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पारवती की पूजा करती है
11:20माननेता के मुताबिक सुहागिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और पती की लंबी उम्र की कामना से ये व्रत रखती है
11:27जबकि अविवाहित कन्याएं मन चाहे वर की कामना से वरत रख सकती हैं
11:32अब सबसे जरूरी है पूजा का समय
11:34हर्तालिका तीज की पूजा के लिए सुभह 6 बच कर 5 मिनट से 7 बच कर 6 मिनट तक का
11:40समय बताया गया है
11:40हलाकि अलग-अलग शहरों में पंचांग के हिसाब से समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है
11:45इसलिए स्थानिये पंचांग को जरूर देखना चाहिए
11:48इसके बाद दोपहर में गनेश चतुर्थी की पूजा होगी
11:51गनेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथी 14 सितंबर की सुबह करीब 7 बच कर 6 मिनट से शुरू होगी
11:58और अगले दिन सुभह तक रहेगी
11:59चुँकि 14 सितंबर को मध्यान काल में चतुर्थी तिथी मौजूद रहेगी
12:04इसलिए गणेश चतुर्थी इसी दिन मनाई जाएगी
12:06दिल्ली के हिसाब से गणपती स्थापना और पूजा का शुब समय
12:10सुभग 11 बजकर 2 मिनट से दुपहर 1 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है
12:15दूसरे शहरों में मुहूर्थ थोड़ा अलग हो सकता है
12:18अब सवाल अगर कोई दोनों वरत रखना चाहता है तो क्रम क्या होगा
12:22इसके लिए सुभा हर्तालिका तीज की पूजा की जा सकती है
12:26इसके बाद मध्यान काल में गणपती की स्थापना और पूजा की जाएगी
12:30हाला कि पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग हो सकती है
12:34इसलिए स्थानिय पंडित या परिवार की परंपरा के अनुसार क्रम तै करना बहतर रहेगा
12:39और हर्तालिका तीज के पारण की बात करें तो कई जगह ये वरत निर्जला रखा जाता है
12:45और इसका पारण अगले दिन किया जाता है
12:47इसलिए सिर्फ गणीश पूजा पूरी होने के बाद ही तीज का वरत खोलना जरूरी नहीं है
12:52यानि 14 सितंबर को एक ही दिन शिव पारवती की आराधना भी होगी और गणपती की स्थापना भी
12:58लेकिन दोनों वरत रखना हर किसी के लिए जरूरी नहीं है
13:01वरत का फैसला अपनी श्रद्धा, स्वास्थ और पारिवारिक परंपरा के मुताबिक किया जा सकता है
13:07फिलहाल के लिए बस इतना ही बाकी अपडेट के लिए बने रहिए One India हिंदी के साथ
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