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  • 16 minutes ago
पूरा वीडियो: उधार की खरीददारी: किश्तें ख़त्म नहीं होतीं, ज़िंदगी ख़त्म हो जाती है || आचार्य प्रशांत (2026)

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वीडियो जानकारी: 22.08.2026, गोवा

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Transcript
00:00मैं अपने campuses से निकला था, तो एक बार मैंने कहा लोग बड़े नाराज हो गए, मैंने का यार एक
00:05बात बताओ, तुम लोग वेश्या वृत्ति को, प्रोस्टिटूशन को इतना बुरा ज्यों बोलते हो, तो बोले क्यों कि उसमें शरीर
00:14बेचा जा रहा है, तो चर्चा मैंने �
00:17कि प्लेस्मेंट वर्सेस प्रोस्टिटूशन, मैंने का इतना ही बताना तुम कि वहाँ शरीर बेचा जा रहा है, मैंने शरीर का
00:26एक हिससा ही तो होता है, जो प्रोस्टिटूशन ने बेचा जाता है, आउन तोर पर जो यॉनांग होते हैं, उसको
00:31आप बेच देते हो, कहते ह
00:33इसका मालिक कोई और है, और वो भी आप समय निर्थारित कर देते हो, इतनी देर का स्लोट है, आपने
00:38अपना टिकेट कटाया, कूपन लिया, काउंटर चालू हो गया, और आप जाते हो, और बाकाइदा वहाँ टाइमर लगा होगा, अलारम
00:45बजेगा, फस्ट वर्निंग, सेके
01:01पाज तक मेरा ब्रेन आपका है, तो यह क्या हुआ, जेनिटल भी बॉडी पार्ट है, तो ब्रेन भी तो बॉडी
01:07पार्ट है, और उसको भी आप कहते हो, कि 9-5 तक मेरा ब्रेन जो है, मेरे इंप्लॉयर की सेवा
01:13में रहेगा, तो वो प्रोस्टिटुशन कैसे नहीं है, वो क
01:30बेजने को तैयार है, किसी के पास शरीर है, जिसको दुनिया खरीदने को तैयार है, उसने अपने जनिटल बेज दिये,
01:37तुम्हारे पास ब्रेन है, जिसके दुनिया पैसा देने को तैयार है, तो तुम जाकर अपना ब्रेन बेज देते हो, और
01:42उसके पैसे ले ले लेते हो,
01:44तो मतलब बहुत अंतर कैसे है ये बता दो
01:48मुझे भी मालूम है कि मैंने ये उदारन लंबा खेंच दिया था
01:53ठीक है मुझे चोट करनी थी मैंने करी
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