00:00पच्पन्दे सुनते आ रहे हैं कि शिव जी ने ही गनेज जी का सर काट दिया। ऐसा क्यों।
00:20बाल गडेश थे। उन्होंने शिव जी को दर्वाजे पर ही रोब दिया।
00:25वो जो बात है वो किसी बहुत पुरानी सच्चाई की और इशारा करती है।
00:29ठीक वैसे जैसे बच्चा पैदा होता है बहुत एक शरीर है और उसके भीतर हंकार इर्मित रहता है।
00:35और यह जो हंकार होता है यह सत्य को पहचानता नहीं है।
00:40तो फिर यह सत्य को ही द्वार पर रोकना शुरू कर देता है।
00:43अब हमारे सामने कौन आते हैं? शिव, महादेव. वो क्या कर रहे हैं? वो हंकार को नश्ट नहीं कर रहे
00:52है।
00:52उन्होंने गणेश जी का सर काट दिया और सर काट दिया और सर काट दिया।
00:59उन्होंने हंकार का सर काट करके दूसरा सर लगा दिया। ऐसा सर लगा दिया है।
01:16और वहां पर सर किसका लगा दिया बोध का सर लगा दिया।
01:20यह होता है जब सत्य अहंकार को सपर्ष करते हैं, उसका पुराना सर चला जाता है, उसको नया सर मिल
01:28जाता है, तो सर को काटना और नए सर को लगा देना, यह वास्तव में अहंकार के आरोहण की कहानी
01:36है, पर इसको ऐसे इतनी यहराई से आमतवर पर सम्झानी जाता है, लोग स
01:50और फिर जब माता ने कहा कि अरे मेरे बालक का आपने सर कैसे कट दिया तो हाथी जा रहा
01:56था तो जा करके हाथी का सर ले आए और बालक के वो सर लगा दिया लोग कहानी को इस
02:02तरह से सुनते हैं और कहानी ऐसी ही है लेकिन उस कहानी की भीतर गहरे अर्थों कि कई तल है
02:10उन अर
02:21जन्म एक अनुठे तरीके से हुआ था इसे तरीके में महादेव के प्रतिभागिता नहीं थी
02:27हई थी देवी पारफती के सीधे ही अपने ही शरीर से
02:30गड़े जी जन्म दे दिया था
02:32मने मतलब यह है कि अभी सथ्य का स्पर्ष नहीं मिला था
02:36तो फिर सत्यका प्रभेश होता है महादे हो के रूपितर और वो आकर के यह जो बालक है जसको अबितक
02:42सपरश नहीं मिला है सत्यका ..
02:43उसको सत्यका सरही प्रदान कर देते हैं. और उसके बाद फिर वो गणष हो जाते हैं, गणभपती हो जाते हैं.
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