00:00यह से ब्रेक अगेरा समझ में नहीं आता है जो प्रेम तूट सकता है वो कभी था ही नहीं
00:05अभी वहां गया था वहां किसी ने कहा पर मैंने तो सुना है भारती गुरू थे प्रेम एक फूल है
00:10जो कभी खिलता है और फिर कुछ दिनों तक उसका सौंदर और सुगंध रहते हैं और फिर फूल मुर्जा जाता
00:16है उसे मुर्जा जाने दो और अगर तुमने प्रेम के फू
00:31पर कभी उस फूल पर यह नहीं गुरू जो से इंस्पारेड मामला कि अभी इस फूल पर कुदे फिर उस
00:39फूल पर कुदे और भारे की तरह कि पिछला फूल मुर्जा गया बुढ़ा गया ता मतलब दो बच्चे पैदा करने
00:48के बाद फूल ऐसा हो जाता है कि अलावर तो अ
01:02जिला था अब फूल का तो अब हम महुरा बनके नए फूलों की तलाश में जा रहे हैं कलियों कहां
01:13हो तुम
01:15जो वास्तविक होता है वो मुर्जाएगा कैसे क्योंकि ऑ कभी खिलता ही नहीं वो है है और है
01:24ना दे उसका ना उसमें हुक अप, पैटेप, ब्रेक अप यह सम नहीं होते है
01:32आरही बात समझ गए
01:35और जो नकली है फिर उसमें ब्रेक अप हो भी नहीं सकता
01:39क्योंकि वो तो कभी ठाई नहीं तो उसमें फिर काई गोर होते हो ब्रेक अप हो गया
Comments