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  • 18 minutes ago
कोलकाता की दुर्गा पूजा में 15 साल बाद लौटीं बड़ी आंखों वाली पारंपरिक प्रतिमाएं

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00:00कोलकता की दुर्गा पूजा जहां हर साल थीम वाले पंडाल दुनिया भर में सुर्खियां बटोरते थे इस बार बदली बदली
00:09नजर आएगी
00:0915 साल बाद इस बार पश्चिम बंगाल की तस्वीर पूरी तरहें बदल रही है
00:16बड़ी बड़ी आखों वाली पारंपरिक मा दुर्गा फिर लोट रही है
00:21मगर जिस कुमार टोले में ये मूर्थियां बनाई जाती हैं
00:25वहां के कलाकार कह रहे हैं कि पारंपरा तो लोट आई लेकिन कमाई पीछे छूट गई
00:30उत्तर कुलकता की कुमार टोली 260 से ज्यादा स्टूडियो और पीडियों से मिट्टी में जान फूखते पाल परिवार
00:38यही वो जगे हैं जहां से हजारों दुर्गा की मूर्थियां पूरे बंगाल और देश विदेश तक जाती रही है
00:46इस बार बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी ने थीम पर बने पंडाल को पीछे छोड़ते वे पारंपरिक दुर्गा पूजा करने
00:55का आवाहन किया
00:56उन्होंने इस मामले में परंपरा का भी हवाला दिया है
00:59मुर्तिकार बता रहे हैं कि इस बार करीब 90 फीजदी ओर्डर फिर से पारंपरिक दुर्गा के है
01:06वही चोड़ी आखें वही पारंपरिक मुकोट वही क्लासिक ग्रूप जिसने कभी बंगाल की पैचान बनाई थी
01:13थीम पूजा पूरी तरह खत नहीं हुई है
01:16इसके बारे में मैं आगे एक वीडियो और बनाऊंगे वह जरूर देखिएगा
01:20AI वीडियो जैसी कुछ खास मूर्तियां भी बन रही है
01:23लेकिन इस बार सबने ज्यादा मांग पारंपर एक मूर्तिकी की है
01:28लेकिन इसी वापसी के साथ सबसे बड़ी चोट कुमार टोली के जिब पर भी पड़ी है
01:33क्योंकि महंगाई चरम पर है
01:35जिस मिट्टी का बॉक्स एक बॉक्स छोटा 400 से 1200 रुपे तक कमिल जाया करता था
01:42अब उसके शुरुआत ही 1500 रुपे से हो रही है
01:45दुर्गा के बाल बनाने वाले जूट भी महंगे हो गए है
01:49पहले जो बाल 400 से 600 रुपे में तयार हो जाते थे
01:53अब उनकी कीमत 800 से 1000 रुपे तक पहुँच गई है
01:57जानकार बताते हैं कि पहले बांगलादेश से आता था कपास जिससे की बाल बनाया जाता था
02:03लेकिन भारतिय का पास हमेशा से महंगा रहा जिसकी मार अब दुर्गा पूजा पे नजर आ रही है और दुर्गा
02:10के बाल पर नजर आ रही है
02:11जरी गहने और बाकी सजावती सामान भी महंगे हो गए है
02:15नतीजा जो छोटी दुर्गा की मूर्टी 10,000 रुपे में बन जाती थी अब उसकी शुरुवाती कीमत 15,000 रुपे
02:23से और उससे थोड़ी अधिक हो गई है
02:25आज तक बांगला की रिपोर्टर रूपसा घोशाल ने कुमार टोली के मूर्तिकारों से बात की
02:31वह बताती हैं कि बड़े पूजा क्लबों के पास स्पॉंसर होते हैं लेकिन छोटे क्लबों की चिंता अलग है
02:38मूर्तिकार ये भी बता रहे हैं कि कई क्लब सरकारी मदद का इंतजार करते रहे
02:42और देर से आये कुछ बड़ी मूर्तियों पर काम शुरू हो गया
02:47लेकिन बाद में सरकार ने मूर्तियों के उचाई पर भी लगाम लगा दी
02:52इसलिए उचाई को लेकर जो नई सीमा की गाइडलाइन आई
02:57कई मूर्तियों में दुबारा बदलाव करना पड़ा
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