00:00मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूँ?
00:02अपने हॉस्टल्स में आप अपने प्रॉफेसर्स को किस तरह बुलाते हैं?
00:06क्लासरूम में या उनके सामने नहीं?
00:09हॉस्टल में अपने सीनियर डॉक्टर और प्रॉफेसर्स को आपस में क्या कहकर बुलाते हो?
00:14चलिए मैं आपको अपने कॉलेज की बात बताता हूँ
00:18नब्बे के दशक के आखिर में IIT दिल्ली में कहां जा रहा है तू?
00:23कुछ नहीं यार गुपता की क्लास में जा रहा हूँ
00:27भाई आज तो टंडन भड़क ही गया इस पर
00:32और ये तो तब है जब मैं उनके सरनेम बिगाड नहीं रहा
00:35नाम तो और भी बिगड़ा करते थे
00:37टंडन को टुंडा भी कह दिया जाता था
00:41तो इस तरह ये नए नए बनने वाले डॉक्टर्स अपने प्रोफेसर्स की बात करते हैं
00:46और फिर आप चाहते हैं कि पेशेंट्स आपको डॉक्टर साहब कहें
00:50क्या ऐसा होगा? कभी नहीं होगा
00:52और इसका आपके हॉस्टेल या कैंपस से कोई लेना देना नहीं है
00:56इसका लेना देना पूरी सामाजिक स्थिती से है
00:58जो आजकल पूरे समाज का माहौल बन चुका है
01:01पहले डॉक्टर्स की कितनी इज़्जत हुआ करती थी
01:04डॉक्टर साहब अब वो बात खत्म हो चुकी है
01:08और ये सिर्फ मेडिकल प्रोफेशन की ही बात नहीं है
01:11ये इज़्जत हर जगह से हर क्षेत्र से गायब हो चुकी है
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