00:02आस्था विश्वास और मोक्ष की कामना पावन एकादशी के अवसर पर तीर्थराज प्रयाग राज एक बार फिर हर हर गंगे
00:11के जैगोश से गूंज उठा और गंगा के पवित्र घाटों पर सुभा से ही श्रधालू का सैलाबू मड़ पड़ा
00:18देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रधालू ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और विधी विधान से पूजा
00:26अचनकल, सुख, शांती और सम्रध्धी की कामना की
00:30माने तहे कि सनातन धर्में एकादशीति थी भगवान विश्णू को समर्पित होती है
00:35इस दिन वरत, जप, तप और सनान का विशेश धर्मिक महत्व माना गया है
00:42श्रधालू का विश्वास है कि पवित्र नदियों में सनान और भगवान का सुनर्ण करने से मन को शांती मिलती है
00:49और जीवन में पूर्णे की प्राप्ती होती है
00:51बोर की पहली किरन के साथ ही संगमतर पर श्रधालू की कतारे दिखाई देने लगी
01:44भगवान से परवार की खुशाली आरोग्य और शांती की प्राप्तना की
01:49तीर्चराज प्रयागराज में हर एकादशी और प्रमुखपर पर उमरने वाली आस्था
01:53ये बताती है कि संगम सिर्फ तीन पवित्र नदियों का मिलन नहीं
01:57बल्कि करोडों शुधालूं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का भी संगम में
02:04आज दो तिर पर एक साथ लगे हुए हैं तैसे आज एकादशी है इसका नाम पदमा एकादशी मंगलवार हर्मान जी
02:13के लिए
02:13अप्रस एकादशी का होने कवज़ा से आज कुछ लोग यात्री जो गया जाने वारे हैं उनकी आतासर हो जाएगी
02:40हिंदो धर्म में एकादशी के स्नान का विशेश महत्व है
02:44एकादशी के स्पावन अमसर पर संगम की धर्थी पर गूंचता हरहर गंगे का जैगोश और शधालूं के अटूट आस्थाने महों
02:53को पूरी तरहां भक्ति मैं बना दिया
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